अनेकता में एकता के उपाय

शांतिपूर्ण एवं सामूहिक रहने के लिए जातीय, प्रांतीय, धार्मिक एवं सामाजिक, सांस्कृतिक विभिन्नता में एकता स्थापित करने के लिए शैक्षिक संस्थाओं द्वारा निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं –

  1. लोगों को भारत के प्रत्येक दृष्टिकोण से भारत की परिस्थितियों का ज्ञान कराया जाए और उन जानकारियों में स्वतंत्रता संघर्ष का समन्वय किया जाए
  2. सभी जातियों तथा राज्यों के बीच संपर्क और सहयोग उत्पन्न करने के लिए शिक्षा व्यवस्था और कार्यों को इस प्रकार प्रोत्साहित किया जाए जिससे लोगों में अपने राष्ट्र के प्रति एकता का भाव विकसित हो सके।
  3. विभिन्न उद्देश्यों के लोकप्रिय नेताओं के जीवन से संबंधित साहित्य ने तैयार कराया जाए जिसके ज्ञान से प्रदेशिक एकता को स्थापित किया जा सकता है।
  4. राज्यों की संस्कृत अकादमी ओं राष्ट्रीय एकता आंदोलन को शक्तिशाली बनाने में सहयोग दिया जाए।
  5. विद्यालयों और विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए प्रचलित उपयोगी पाठ्य पुस्तकों का परीक्षण किया जाए।
  6. जिसमें विभिन्नता में एकता स्थापित करने से संबंधित सामग्री उपलब्ध सुनिश्चित हो सके लोगों में राष्ट्रीय एकता के दृष्टिकोण को विकास करने के लिए फिल्म समाचार पत्र तथा अन्य साधनों का यथोचित लाभ उठाया जाए।
  7. संस्थानों में सभी जातियों के छात्र-छात्राएं मिलकर राष्ट्रीय पर्व तथा सार्वजनिक मेले के आयोजन में भाग ले।
  8. शैक्षिक संस्थानों में ऐसी फिल्में दृश्य सामग्री को तैयार किया जाए जो राष्ट्रीय एकता को विघटित करने वाली प्रवृत्तियों को रोक सके।
  9. शैक्षिक संस्थान जनसंपर्क आंदोलन लाकर संप्रदायिकता और सौदा को विकसित करें।
  10. इन संस्थानों में विविध गोष्ठियों एवं नाटकों की सहायता से सांप्रदायिकता की समस्या का समाधान किया जाए और समस्या का अध्ययन किया जाए।
  11. शैक्षिक संस्थान सांप्रदायिकता फैलाने वाले व्यक्तियों समूह दलों आदि से छात्रों को अवगत कराएं तथा इनसे बचने के लिए शिक्षित करें।
  12. राजकीय सेवाएं तथा व्रत्तियां, धार्मिकता, प्रादेशिकता जाति व समुदाय के आधार पर न दी जाए अपितु प्रतियोगिता के आधार पर प्रदान की जाए।
  13. शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के संबंध में जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र अमीर गरीब का भेदभाव किए बिना योग्यता के आधार पर प्रवेश दिया जाए।
  14. शैक्षिक संस्थान व सरकारी विभाग छात्रों में बिना वर्ग भेद के योग्यता के आधार पर ही छात्रवृत्ति व अन्य अध्ययन सुविधाओं को प्रदान करें। इससे शिक्षा में गुणवत्ता लाई जा सकती है
  15. पुस्तकों का लेखन क्षेत्रीय दष्टि से ना होकर राष्ट्रीय स्तर का हो क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यमिक स्तर पर माध्यम बनाया जाए।
  16. शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश एक राज्य दूसरे राज्य के छात्रों को बिना किसी भेदभाव व रोक टोक के देने की व्यवस्था लागू करें।
  17. अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को अपनी भाषा सभ्यता की शिक्षा देने की छूट दी जाए।
  18. विभिन्न धर्मों के महापुरुषों की जयंती मनाई जाए तथा विभिन्न धर्मों के सार तत्व पर चर्चा की जाए।
  19. विद्यालयों में शैक्षणिक भ्रमण स्काउटिंग वाद-विवाद नाटक राष्ट्रीय उत्सव आदि पर विशेष ध्यान दिया जाए इससे छात्रों में राष्ट्रीय एकता का भाव उत्पन्न करने में सहायता मिलेगी।
  20. शैक्षिक संस्थाओं का संपूर्ण वातावरण ऐसा हो जिसमें सभी छात्रों को समानता तथा स्वतंत्रता का आभास हो।

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