अभिवृत्ति

अभिवृत्ति व्यक्ति के मनोभावों तथा विश्वासों को इंगित करती है। यह बताती है कि व्यक्ति क्या महसूस करता है? तथा उसके पूर्व विश्वास किया है। अभिवृत्ति से अभिप्राय व्यक्ति के उस दृष्टिकोण से होता है जिसके कारण वह किन्ही वस्तुओं, व्यक्तियों, संस्थाओं, परिस्थितियों, योजनाओं आदि के प्रति किसी विशेष प्रकार का व्यवहार करता है।

दूसरे शब्दों में अभिवृत्ति व्यक्ति के व्यक्तित्व की वे प्रवृत्तियां है, जो उसे किसी वस्तु व्यक्ति आदि के संबंध में किसी विशिष्ट प्रकार के व्यवहार को प्रदर्शित करने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती हैं। अभ्यर्थियों का निर्णय व्यक्ति के द्वारा विगत में विभिन्न परिस्थितियों में अर्जित अनुभवों को सामान्य करने के फल स्वरुप होता है। अभिवृत्ति के निर्माण में व्यक्ति के व्यवहार के प्रत्यक्षात्मक, संवेगात्मक, प्रेरणात्मक तथा क्रियात्मक जैसे कई पक्ष निहीत रहते हैं।

अभिवृत्ति

अभिवृत्ति, प्रत्युत्तर देने की वह मानसिक तथा स्नायुविक तत्परताओं से सम्बन्धित अवस्था है जो अनुभव द्वारा संगठित होती है तथा जिसके व्यवहार पर निर्देशात्मक तथा गत्यात्मक पभाव पड़ता है।

आलपोर्ट

अभिवृत्तियाँ मत, रुचि या उद्देश्य की थोड़ी-बहुत स्थायी प्रवृत्तियाँ हैं जिनमें किसी प्रकार के पूर्वज्ञान की प्रत्याशा और उचित प्रक्रिया की तत्परता निहित है।

वुडवर्थ

सामान्यत: अभि वृत्ति की परिभाषा किसी वस्तु या समूह के सम्बंध में प्रत्याक्षात्मक बाह्य उत्तेजनाओं में व्यक्ति की स्थिति और प्रत्युत्तर तत्परता के रूप में भी की जाती है।

आईजनेक

अभि वृत्ति किन्हीं परिस्थितियों व्यक्तियों या वस्तुओं के प्रति संगत ढंग से प्रतिक्रिया करने की स्वाभाविक तत्परता है, जिसे सीख लिया गया है तथा जो व्यक्ति विशेष के द्वारा प्रतिक्रिया करने का विशिष्ट ढंग बन गया है।

फ्रीमेन
अभिवृत्ति

अभिवृत्ति की विशेषताएं

अभिवृत्ति की निम्न विशेषताएं हैं-

  1. इसका संबंध किसी वस्तु, परिस्थिति, योजना आदि के प्रति व्यक्ति के व्यवहार से होता है।
  2. अभि वृत्ति धनात्मक/सकारात्मक भी हो सकती है तथा ऋणात्मक/नकारात्मक भी हो सकती है।
  3. अभिवृत्ति अनुभवों के द्वारा विकसित होती है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अभि वृत्ति की प्रकृति वातावरणजन्य होती है।
  4. अभि वृत्ति के विकास में प्रत्यक्षीकरण तथा संवेगात्मक कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  5. विभिन्न वस्तुओं या व्यक्तियों के प्रति किसी एक ही व्यक्ति की अभिवृत्ति में भी पर्याप्त अंतर हो सकता है।
  6. यह व्यक्ति के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों से घनिष्ठ संबंध रखती है।
  7. यह व्यक्ति की भावनाओं की गहराई का स्वरूप हैं।
  8. अभिवृत्तियों का विकास सामाजिक सम्बंधों के कारण होता है।
  9. अभि वृत्ति के सामाजिक तथा मानसिक दोनों ही पक्ष होते हैं।
  10. यह किसी व्यक्ति, घटना, विचार या वस्तु के प्रति अनुकूल अथवा प्रतिकूल भावना का प्रदर्शन करती है।
  11. अभिवृत्ति का स्वरूप लगभग स्थायी होता है किन्तु ये अपना रूप बदल भी देती है। अभिवृत्ति को अधिक समय में बदला जा सकता हैं
  12. यह अनुभवों के आधार पर अर्जित होती है तथा वस्तुओं, मूल्यों एवं व्यक्तियों के सम्बंध में सीखी जाती है।
  13. अभि वृत्ति का सम्बंध व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों बुद्धि, मानसिक प्रतिभा एवं विचारों से होता है।
  14. यह व्यवहार को प्रभावित करती है अतएव एक व्यक्ति की अभिवृत्तियों का प्रभाव दूसरे व्यक्ति की अभिवृत्ति पर पड़ता है।
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अभिवृत्ति का मापन

सन् 1927 में थर्सटन ने तुलनात्मक नियम का प्रतिपादन किया। अभिवृत्ति मापन की विधियों को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है

  1. व्यवहारिक प्रविधियाँ
  2. मनोवैज्ञानिक प्रविधियाँ

व्यवहारिक विधियों में व्यक्ति से सीधे-सीधे प्रश्न पूछ कर अथवा उसके व्यवहार का प्रत्यक्ष अवलोकन करके उसकी अभिवृत्तियों को जाना जाता है। जब प्रचलित विधियों में कुछ कमी रह जाती है तो नवीन विधियों का जन्म होता है। इसी प्रकार अभि वृत्ति मापन की व्यवहारिक प्रविधियों की कमियों के कारण मनोवैज्ञानिक विधियों ने जन्म लिया। अभिवृत्ति मापन के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जा रहा है।

अभिवृत्ति का मापन तीन वर्गों में किया जा सकता है :-

  1. ऐसे व्यक्ति जिनकी अनुकूल अभिवृत्ति है।
  2. ऐसे व्यक्ति जिनकी प्रतिकूल अभि वृत्ति है।
  3. ऐसे व्यक्ति जो यह कहते हैं कि वे अभिवृत्ति के संबंध में कोई स्पष्ट मत नहीं बना पा रहे हैं।

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