आगमनात्मक विधि

आगमन आत्मक विधि भौतिक विज्ञान ओके शिक्षण में प्रयोग होने वाली प्रमुख विधि है। इस विधि का प्रयोग भौतिकी एवं रसायन विज्ञान में विशेष रूप से होता है।

आगमन आत्मक विधि एक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाले निश्चित नियम एवं तथ्य पर पहुंचने में उसे समर्थ बनाने हेतु विशेष उदाहरणों की पर्याप्त मात्रा में छात्र हेतु प्रस्तुतीकरण पर आधारित शिक्षण की एक विधि है।

शिक्षा शब्दकोश के अनुसार

जब कभी हम बालकों के समक्ष बहुत से तथ्य उदाहरण तथा वस्तुएं प्रस्तुत करते हैं और फिर उनसे अपने स्वयं के निष्कर्ष निकलवाने का प्रयत्न करते हैं तब हम शिक्षण की आगमन विधि का प्रयोग करते हैं।

आगमनात्मक विधि के गुण

आगमनात्मक विधि के गुण निम्न है-

  1. यह विधि भौगोलिक समस्याओं की जटिलता पर ध्यान देती है।
  2. यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है।
  3. आगमन विधि स्थूल से सूक्ष्म की ओर बढ़ने के कारण सरल एवं रोचक है।
  4. यह विधि प्रत्यक्ष तथ्यों पर आधारित होने के कारण वैज्ञानिक विधि भी है।
  5. यह पद्धति छात्रों को गतिशील दृष्टिकोण प्रदान करती है।

आगमनात्मक विधि के दोष

आगमनात्मक विधि के दोष निम्न है-

  1. इस विधि में विद्यार्थी बहुत ही मिकाची से सीखते हैं जिससे समय का ज्यादा खर्च होता है।
  2. इसमें विद्यार्थियों द्वारा प्रतिपादित नियम, सिद्धांत या परिभाषा में त्रुटि की संभावना बनी रहती है।
  3. भौतिक विज्ञान के शिक्षण में इस विधि का प्रयोग केवल अनुभवी शिक्षकों द्वारा ही किया जा सकता है।
  4. या सदस्य विभिन्न प्रकरणों को प्रस्तुत करने में शिक्षकों को भी कठिनाई अनुभव होती है।

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