आधुनिक हिंदी काव्य

आधुनिक हिंदी काव्य, कई विश्वविद्यालय के बी॰ ए॰ पाठ्यक्रम के हिंदी साहित्य विषय का एक प्रश्न पत्र है। हिंदी काव्य का आधुनिक काल 1850 से आरम्भ होता है। इसी युग मे हिंदी पद्य के साथ साथ गद्य का भी विकास हुआ। जन संचार के विभिन्न साधनों जैसे रेडिओ व समाचार पत्र का विकास इसी समय हुआ था। जिसका प्रभाव आधुनिक हिंदी काव्य पर भी पड़ा।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर समकालीन कविता तक की विकास यात्रा विभिन्न चरणों से गुज़री है। नवजागरण, छायावदी, छायावादोत्तर, प्रगतिशील, नयी कविता के दौर से गुज़रते हुए हिन्दी कविता ने परिपक्वता की कई मंज़िलें तय की है। हर युग, हिंदी कविता के बदलते मिजाज़, सम्प्रेषण की नयी-नयी विधियां, भाव-भाषा-संरचना के नये-नये प्रयोग के साथ, अपनी विशिष्ट पहचान और लक्षणों को लिए थे।

नवजागरण काव्य आधुनिक हिंदी काव्य का शुरुआती दौर था, जिसके प्रमुख कवि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और मैथिलीशरण गुप्त थे। प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी वर्मा का काल छायावादी काव्य का काल रहा जबकि राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा के प्रमुख कवि रामधारी सिंह दिनकर छायावादोत्तर काव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। नागार्जुन, गजानन माधव मुक्तिबोध और सुदामा प्रसाद पाण्डेय ‘धुमिल’ को हिंदी काव्य के प्रगतिशील काव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। शमशेर बहादुर सिंह, रघुवीर सहाय तथा श्रीकांत वर्मा का दौर नयी कविता का दौर रहा।

आधुनिक हिंदी काव्य

आधुनिक हिंदी काव्य

आधुनिक हिंदी काव्य का आरंभ 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में हुआ था। यह वह समय था जब भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सक्रिय थे। इस समय बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में सामाजिक-सांस्कृतिक सुधार आन्दोलन की गूंज चारों दिशाओं में फैल रही थी। इस धर्म-समाज सुधारक आन्दोलन की गतिविधियों से हिंदी साहित्य भी काफ़ी प्रभावित हुआ।

कविताओं के माध्यम से नवजागरण यानी फिर से सजग होने की अवस्था या भाव, की अभिव्यक्ति हुई। भारतेन्दु युग और द्विवेदी युग की रचनाएं नवजागरण का स्रोत और माध्यम रही हैं। यह युग हिंदी के मध्य से सर्वथा भिन्न था और आधुनिक युग के रूप में अपनी नयी पहचान बना सका। हिंदी की आधुनिक कविता की प्रक्रिया इसी युग से शुरु होती है।

आधुनिक हिंदी काव्य Unit 1

यूनिट 1 के अंतर्गत कुल 6 कवियों की कविताओं के बारे में अध्ययन करना है। परीक्षा में कविताओं से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। कभी-कभी कवियों से भी संबंधित प्रश्न पूछ लिए जाते हैं। यूनिट 1 में निर्धारित कवियों की कुछ रचनायें जो आधुनिक हिंदी काव्य पाठ्यक्रम में निर्धारित है नीचे दी जा रही है।

1. साकेत अष्टम सर्ग

साकेत - आधुनिक हिंदी काव्य

साकेत महाकाव्य मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। जिसका आधुनिक हिंदी काव्य में एक विशेष स्थान है। साकेत महाकाव्य में कुल 12 सर्ग हैं। जिनमे अष्टम एवं नवम सर्ग का विशेष महत्व है। अष्टम सर्ग में चित्रकूट में घटी घटनाओं का वर्णन किया है। अष्टम सर्ग में वर्णित घटना केवल इतिवृत्त नहीं है, अपितु घटनाओं का संयोजन युग की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति करने के उद्देश्य से इस प्रकार किया है कि वह अपनी आधुनिक चेतना के कारण प्रासंगिक हो उठा है। कवि अष्टम सर्ग का आरंभ बड़े ही आकर्षक ढंग से करता है।

भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों ही दृष्टि से साकेत की कथावस्तु गरिमा संपन्न है। साकेत अष्टम सर्ग की कथावस्तु का निर्माण मानवता की श्रेष्ठता का प्रतिस्थापन करने के लिए किया गया है। गुप्तजी ने इसमें संपूर्ण कथा को ना पकड़कर कुछ मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी प्रसंगों को ही पकड़ा है।

2. कामायनी श्रद्धा सर्ग

कामायनी - आधुनिक हिंदी काव्य

कामायनी का अर्थ है- “काम गोत्रजा”। कामायनी में कुल 15 सर्ग है। कामायनी श्रद्धा सर्ग में मनु व श्रद्धा को चित्रित किया गया है। काम की पुत्री होने के कारण श्रद्धा का दूसरा नाम कामायनी है। कामायनी महाकाव्य में शांत, श्रृंगार और वीर रस का प्रयोग हुआ है। कामायनी आधुनिक हिंदी काव्य युग का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। जयशंकर प्रसाद को कामायनी रचना पर मंगला प्रसाद पारितोषिक दिया गया।

कामायनी जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता कोश भारतीय काव्य का विशालतम और अव्यवसायिक संकलन है जिसमें हिन्दी उर्दू, भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी आदि पचास से अधिक भाषाओं का काव्य है। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिंदी महाकाव्य है। ‘प्रसाद’ जी की यह अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई।

3. सरोज स्मृति

सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की पुत्री सरोज की मृत्यु 18 वर्ष की उम्र में हो गयी। सरोज स्मृति नामक इस रचना में कवि ने अपनी पुत्री की स्मृतियों को संजोया है। सरोज स्मृति‘ आधुनिक हिंदी काव्य में अपने ढंग का एकमात्र शोक काव्य है। कवि निराला द्वारा अपनी पुत्री की मृत्यु पर लिखी इस कविता में करुणा भाव की प्रधानता है।

सरोज स्मृति सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एक शोक गीत है। जिसमें कवि ने अपनी युवा कन्या सरोज की अकाल मृत्युपर अपने शोक संतप्त हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं। इस प्रसिद्ध लोकगीत में जीवन की पीड़ा और संघर्षों के हलाहल का पान करने वाले कविवर निराला के निजी जीवन के कुछ अंशों का उद्घाटन भी है। छायावादी कवि होने के कारण निराला ने अपनी बात को प्रतीकात्मक शैली में अभिव्यक्त किया है।

4. सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या

पाठ्यक्रम में निर्धारित कुछ कविताए सुमित्रानंदन पंत जी की है। जिसमें से आलोचनात्मक प्रश्न परीक्षा में पूछे जाते है। आधुनिक हिंदी काव्य की इस कविता में कवि ने जीवन जगत में नई चेतना एवं नवोद साह के संचार की कामना को बादल के माध्यम से व्यक्त किया है। दर्शन अनुभूति के बाद की उस गंभीर ज्ञानात्मक अवस्था को कहा जाता है। जिसमें व्यक्ति भावना के क्षेत्र में उधर्वोमुख होकर जीवन और जगत के प्रति विश्लेषण की प्रवृत्ति अपनाता है।

5. महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या

महादेवी वर्मा द्वारा रचित रचनाओं में पाठ्यक्रम में निर्धारित रचनायें निम्न है –

  1. नीर भरी दुख की बदली
  2. मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
  3. शलभ मैं शापमय वर हूँ
  4. कौन तुम मेरे हृदय में
  5. तुम यह क्षितिज

महादेवी वर्मा का आधुनिक हिंदी काव्य में एक अनोखा स्थान है। उनके काव्य में वेदना और करुणा का स्वर प्रधान है। इसी से इन्हें आधुनिक काल की मीरा कहा जाता है।

6. कुरुक्षेत्र का छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित विचारात्मक काव्य है। आधुनिक हिंदी काव्य यद्यपि इसकी प्रबन्धात्मकता पर प्रश्न उठाये जा सकते हैं, लेकिन यह मानवतावाद के विस्तृत पटल पर लिखा गया आधुनिक काव्य अवश्य है। युद्ध की समस्या मनुष्य की सारी समस्याओं की जड़ है। युद्ध निन्दित और क्रूर कर्म है, किन्तु उसका दायित्व किस पर होना चाहिए? जो अनीतियों का जाल बिछाकर प्रतिकार को आमंत्रण देता है। उस पर? या उस पर, जो जाल को छिन्न-भिन्न कर देने के लिए आतुर रहता है? दिनकर जी के ‘कुरुक्षेत्र’ में ऐसी ही कुछ बातें हैं, जिन पर सोचते-सोचते यह काव्य पूरा हो गया है।

आधुनिक हिन्दी काव्य Unit 2

द्रुत पाठ की दृष्टि से कहानी, उपन्यास, यात्रा, विवरण, जीवनी, लेख, समीक्षा, आलोचना और व्याख्या को उपयुक्त समझा जाता है। यूनिट 2 में 4 द्रुत पाठ है। द्रुत पाठ आधुनिक हिंदी काव्य का महत्वपूर्ण यूनिट है। जिसमें कुल 4 कवियों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त करनी है।

  1. श्रीधर पाठक
  2. माखनलाल चतुर्वेदी
  3. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’
  4. सुभद्रा कुमारी चौहान

वैसे तो आधुनिक काल में हिंदी के कई कवि हुए है। यहाँ बी ए पाठ्यक्रम में निम्न कवि निर्धारित है।

मैथिलीशरण गुप्तजीवन परिचय
जयशंकर प्रसादजीवन परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”जीवन परिचय
सुमित्रानंदन पंतजीवन परिचय
महादेवी वर्माजीवन परिचय
रामधारी सिंह दिनकरजीवन परिचय

1 thought on “आधुनिक हिंदी काव्य”

  1. पंकज

    धन्यवाद सर
    सर इससे संबंधित प्रश्न पत्र कैसा आएगा

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