कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग – कुरुक्षेत्र’एक प्रबंध काव्य है। इसका प्रणयन अहिंसा और हिंसा के बीच अंतर्द्वंद के फल स्वरुप हुआ। कुरुक्षेत्र की ‘कथावस्तु’ का आधार महाभारत के युद्ध की घटना है, जिसमें वर्तमान युग की ज्वलंत युद्ध समस्या का उल्लंघन है।’दिनकर ‘के कुरुक्षेत्र प्रबंध काव्य की कथावस्तु सात सर्गो में विभक्त है। कुरुक्षेत्र के छठे सर्ग के अंतर्गत आधुनिक युग की समस्याओं, मानवीय रचनात्मक प्रवृत्तियों तथा कोरे मानसिक उत्थान की निंदा की गई है। कवि भगवान से धर्म, दया, शांति आदि की स्थापना से संबंधित प्रश्न करता है। आधुनिक वैज्ञानिक विकास की काफी चर्चा की गई है।

रामधारी सिंह दिनकर की जीवनी

रामधारी सिंह दिनकर
रामधारी सिंह दिनकर
कवि, लेखक

रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।

'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद 'राष्ट्रकवि' के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है।

जन्म
23 सितम्बर 1908
जन्म स्थान
मद्रास, तमिलनाडु, भारत
मृत्यू
24 अप्रैल 1974

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

मानव वंशज की वायु, अग्नि ,आकाश, पृथ्वी सब कुछ है ।कवि खेद करता है कि मनुष्य के मानसिक विकास का उसके हृदय के साथ नहीं दिया है, उनकी उन्नति एकांकी है, अधूरी है अतएव परिपूर्ण महत्व नहीं है । उसके मिले-जुले विकास के लिए ज्ञान ही नहीं प्रेम और बलिदान भी आवश्यक है। मानव जीवन श्रेय का सर्वोच्च स्थान है , उसके लिए उसे असीमित मानव से प्रेम विषमता के अंतर को कम करने तथा हृदय एवं बुद्धि पक्ष में संतुलन बनाए रखने की महती आवश्यक है।

रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएँ

शिक्षा - दीक्षा

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास राजनीति विज्ञान में बीए किया। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। बी. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक विद्यालय में अध्यापक हो गये। 1934 से 1947 तक बिहार सरकार की सेवा में सब-रजिस्टार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक पदों पर कार्य किया। 1950 से 1952 तक मुजफ्फरपुर कालेज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे, भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति के पद पर कार्य किया और उसके बाद भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार बने।

प्रमुख रचनाएँ
काव्य
  1. बारदोली-विजय संदेश
  2. प्रणभंग
  3. रेणुका
  4. हुंकार
  5. रसवन्ती
  6. द्वंद्वगीत
  7. कुरूक्षेत्र
  8. धूप-छाँह
  9. सामधेनी
  10. बापू
  11. इतिहास के आँसू
  12. धूप और धुआँ
  13. मिर्च का मज़ा
  14. रश्मिरथी
  15. दिल्ली
  16. नीम के पत्ते
  17. नील कुसुम
  18. सूरज का ब्याह
  19. चक्रवाल
  20. कवि-श्री

Sarkari Focus offers free online courses for various exams. We provide knowledge through articles, biographies, tests, news on results and events.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.