“गणित एक नीरस एवं शुष्क विषय है।” इस कथन से आप कहां तक सहमत हैं?

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गणित की सहायता से बालकों में अमूर्त तथा तार्किक चिंतन का विकास होता है। साथ ही उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता आज घोड़ों के विकसित होने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं। गणित ही एक ऐसा विषय है जिसके ज्ञान की आवश्यकता अजीवन रहती है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गणित के ज्ञान की आवश्यकता होती है। रोजी रोटी कमाने की दृष्टि से भी गणित का स्थान पाठ्यक्रम में सर्वोपरि है।

गणित को हम पूर्ण रूप से एक नीरस एवं शुष्क विषय नहीं मान सकते हैं। क्योंकि
1. गणित का हमारे दैनिक जीवन से घनिष्ठ संबंध है।
2. यह तार्किक दृष्टिकोण पैदा करता है।
3. यह एक यथार्थ विज्ञान है।
4. यह चरित्र निर्माण एवं नैतिक उत्थान में सहायक है।
5. इसका ज्ञान अन्य विषयों के अध्ययन में सहायक है।
6. गणित के अध्ययन से बच्चों में अनुशासन में रहने की आदत का विकास होता है।

इसके बिना वह जीवन में तनिक भी उन्नति के पथ की ओर नहीं चल सकता है। कुछ विद्वान शिक्षक विद्यार्थी ऐसा सोचते हैं की गणित एक नीरस एवं शुष्क विषय है, परंतु कुछ रुचिकर उपाय अपनाकर इसे रूचि पूर्ण बनाया जा सकता है।

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