गणित की भाषा और व्याकरण

गणित की भाषा और व्याकरण 1

गणित की भाषा

प्रत्येक विषय की अपनी भाषा होती है जो कि विषय को एक विशिष्ट अस्तित्व देती है विषय की जिस प्रकार की भाषा होगी उसी तरह से विषय स्थाई या अस्थाई होगा गणित की भाषा अन्य सभी भाषाओं से अधिक बलशाली है जिसके कारण गणित अन्य विषयों के अपेक्षा अधिक स्थाई हैं इसके बाद बहुत ही विज्ञान रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों का स्थान आता है विषय की भाषा के आधार पर उसकी सत्यता तथा भविष्यवाणी अन्य विषयों की अपेक्षा अधिक स्थाई है अगर विषय की भाषा कमजोर है तो विषय की सत्यता तथा भविष्यवाणी कम हो जाती है अतः गणित विषय की भाषा पर ही इसकी प्रकृति निर्भर करती है।

गणित की भाषा गणितज्ञों के द्वारा आपस में गणितीय विचारों के संवाद करने की प्रणाली है गणित की भाषा गणितीय सूत्रों के लिए अत्यंत विशिष्ट इक्रित प्रतीकात्मक संकेतन गणितीय वार्तालाप हेतु उचित तकनीकी पदों व व्याकरण परंपराओं का उपयोग करने वाली किसी प्राकृतिक भाषा के सार को समाहित करती है सामान्य रूप में प्राकृतिक भाषाओं की तरह गणित भाषा रजिस्टरों की एक इस कला में वार्तालाप तक कार्य करती है।

गणित की भाषा और व्याकरण 2

गणित का व्याकरण

प्रत्येक भाषा की अपनी व्याकरण होती है। उसी प्रकार गणित की भी अपनी व्याकरण है जिसका संक्षिप्त विवरण निम्न है। बढ़ती वार्तालाप हेतु प्रयुक्त व्याकरण गणित की विशेषताओं के साथ सार के रूप में अपनाया गया। आवश्यक रूप से प्राकृतिक भाषा का व्याकरण होता है। मुख्यता विशेष रूप से गति संकेतन अपनी व्याकरण के लिए सूत्र के रूप में प्रयोग करते हैं ना कि यह विशेष प्राकृतिक भाषा के रूप में लेकिन अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त गणिती से अंतर्राष्ट्रीय रूप में साझा करते हैं।

किसी भाषा में दाएं से बाएं का चलन तो किसी में बाएं से दाएं का चलन होता है। जिसके कारण गणित के सूत्र लिखने का ढंग उसी भाषा पर निर्भर करता है। चीनी और सीरिया के गणितज्ञों के द्वारा एक समान तरीकों के द्वारा ही समझा जाता है इस प्रकार के गणितीय सूत्र गणित भाषा में अलंकार की तरह कार्य करते हैं उदाहरण के लिए प्राकृतिक भाषा में से बढ़ाया बराबर के रूप में इस चिन्ह को प्रयोग करते हैं इसी प्रकार आदि को भी गणितीय भाषा में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

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