कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में यथार्थवादिता पाई जाती है। उनकी कफन कहानी भी यथार्थवाद पर आधारित है। इस कहानी में घीसू एक प्रमुख पात्र है जो कि पारिवारिक मुखिया है। उसके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं। उनका पुत्र माधव तथा बहु बुधिया घीसू के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं।

घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण निम्न मुख्य बिन्दुओं में कर सकते हैं-

1. अत्यंत दरिद्र-

घीसू का चरित्र चित्रण

दरिद्रता से ग्रस्त पात्र है या दरिद्रता पीढ़ी पर घीसू जैसे पात्रों को कछु पति आ रही है। परिस्थितियों और स्वयं यीशु के एक नेता ने उसको घोर दरिद्रता में रहने के लिए विवश कर दिया था। अब गरीबी सेवा दस्तक नहीं था। बल्कि उसकी सोच समझ इसी गरीबी के ईद गिर्द चक्कर काटती प्रतीत होती है। एक अजीब किस्म का जीवन जीने के लिए वह मजबूर था। लेखक स्वयं टिप्पणी करते हैं।

विचित्र जीवन था। उसका घर में मिट्टी में दो चार बर्तनों के सिवा कोई संपत्ति नहीं फटे चित्रों से अपनी नन्ना को ढके गालियों भी खाते हैं। मार भी खाते हैं। मगर कोई गम नहीं दिन इतने की वसूली की बिल्कुल आशा ना रहने पर भी लोग इन्हें कुछ ना कुछ कर देते थे। इस प्रकार दरिद्रता घीसू को संवेदनशील एवं विचार सुने बना दिया था। वह पशु तुल्य जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं।

2. कमजोर तथा अकर्मण्य-

प्रेमचंद ने घीसू के पीछे वह स्वयं जिम्मेदार होने के कारण परिस्थितियों में भी कार्य करती है। उसकी भूख गरीबी तथा निगम ने पद के पीछे एक व्यवस्था कार्य करती है। यह को व्यवस्था है शोषण की व्यवस्था उसके आलसी पद के बारे में लेखक कहते हैं। चमारों का कुनबा यहां और सारे गांव में बदनाम था जो एक दिन काम करता तो 3 दिन आराम। इसलिए उन्हें कहीं मजदूरी नहीं मिलती थी। घर में मुट्ठी भर अनाज मौजूद ना हो। तो घीसू पेड़ पर चढ़कर लकड़ियां तोड़ लाता और माधव बाजार में बेचा था।

जब तक पैसे रहते दोनों इधर-उधर मारे मारे थे गांव में काम की कमी ना थी।किसानों का गांव था मेहनती आदमी के लिए 50 काम थे। मगर इन दोनों लोगों को उसी वक्त बुलाते, जब दो आदमियों से एक का काम पाकर भी संतोष कर लेते कि सिवा कोई चारा ना होता।

3. स्वार्थी-

घीसू बहुत ही स्वार्थी मनु व्यक्ति से ग्रस्त व्यक्ति है। अपनी स्वार्थ की पूर्ति के लिए वह कुछ भी कर सकता है। वह बुधिया संवेदना के पछाड़े खा रही थी तो वह माधव को बुधिया की सहायता के लिए भेजना चाहता है। उसके पीछे उसका एक स्वार्थ है।कि जब माधव अंदर चला जाएगा तो वह अधिक से अधिक आलू खा लेगा उसके बारे में जमीदार यह मानता है। कि यीशु पर दया करना काले कंबल पर रंग चलना है उसके चरित्र में स्वार्थी होने का सबसे बड़ा प्रमाण या तो हो सकता है। कि वह बुधिया केपीने की इच्छा पूरी करने में खर्च कर देता है। आप कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण पढ़ रहे हैं।

4. अत्यंत निर्दयी –

घीसू के मन में किसी के प्रति जरा भी दया और सहानुभूति नहीं है। अतः वह एक निर्णय और संवेदनशील व्यक्ति है। जिस बुधिया ने रात दिन दूसरों के घरों में मेहनत करके उसका पेट भरा उसके प्रति भी उसके मन में कोई दया भाव नहीं है। लेखक के अनुसार जब से या औरत आई थी। उसने इस खानदान में व्यवस्था की नींव डाली थी। पिसाई करके अथवा घास छीलकर वहां से भर आटे का इंतजाम कर लेती थी।

इन दोनों बेगैरतो का दोजक भरी रहती थी, जब सेवा आई यह दोनों और अलसी और आराम तलब हो गए थे। बल्कि कुछ अकड़ने भी लगे थे। कोई कार्य को बुलाता तो नित्य भाव से दोगुनी मजदूरी मांगते। वही औरत आज प्रसव वेदना से भर रही थी और यह दोनों शायद इंतजार में थे। कि वह मर जाए तो आराम से सोए और यह सब बातें घीसू के निर्देश होने की परिचायक है। घीसू का चरित्र चित्रण का विशेष भाग है।

5. नशाखोर –

घीसूको नशे की बुरी आदत है जिस बुधिया के मेहनत के कारण उसका पेट भरता है जब वह प्रसव पीड़ा के कारण स्वर्ग सिधार जाती है तो उसके कफन के पैसों को मधुशाला में जाकर नशे में उड़ा देता है।वह मर्यादा हीन हो जाता है नशा करके वह यह भी भूल जाता है। कि बुधिया के लिए कफन भी लेने जाना है। जब वह मधुशाला के सामने बैठकर शराब और कचोरी खा रहा था। तो उसके सामने एक भिखारी काफी देर से देख रहा था बच्ची हुई कचोरी आ उसको देते हुए नशे मे

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