दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता

दूरस्थ शिक्षा नि:संदेह बीसवीं सदी की देन है, परंतु इसकी आवश्यकता 21वीं सदी में ज्यादा महसूस की जा रही है। आधुनिक युग में दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता बढ़ने के महत्वपूर्ण कारण निम्न है-

1. जनसंख्या विस्फोट

1947 में जब भारत आजाद हुआ उस समय भारत की जनसंख्या लगभग 42 करोड़ थी। परंतु वर्तमान में यह लगभग 110 करोड़ पार कर चुकी है। यह कहा जा सकता है कि भारत में जनसंख्या विस्फोट हो चुका है। इस जनसंख्या विस्फोट की यह स्थिति है कि सन 2050 तक हम जनसंख्या की दृष्टि से चीन से आगे निकल चुके होंगे। जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है उसी अनुपात में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। यही कारण है कि देश में हर साल अनेकों नए विद्यालय एवं महाविद्यालय खोले जा रहे हैं, परंतु पढ़ने वाले बच्चे के अनुपात में इन विद्यालयों तथा महाविद्यालयों की संख्या पर्याप्त नहीं है।

Caste system and Social Reform, दलित समस्या समाधान, घरेलू हिंसा, दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता
दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता

2. ज्ञान का विस्फोट

आधुनिक युग विज्ञान तथा तकनीकी का युग है। प्रतिदिन यहां ज्ञान का विस्फोट होता है अर्थात किसी ना किसी दिशा या क्षेत्र में नए नए अविष्कार होते हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति तक आधुनिक ज्ञान केवल शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से पहुंचाना असंभव है। इसलिए नई बातों तथा नए ज्ञान को जन जन तक पहुंचाने हेतु दूरस्थ शिक्षा की अनिवार्यता हो गई।

3. आधुनिक जीवन की समस्याएं तथा जटिलताएं

आधुनिक जीवन जहां सुविधाओं से संपन्न हो गया है वहीं यह अपेक्षाकृत ज्यादा जटिल तथा समस्याओं से परिपूर्ण भी हो गया है। अच्छे व्यवसाय तथा अच्छी कमाई के लिए व्यक्ति इधर-उधर आता जाता रहता है।भारत जैसे विशाल देश के व्यापारिक तथा औद्योगिक व्यवसाय कई गुना बढ़ जाने से उसका ढांचा ज्यादा जटिल हो गया है। इस गतिशीलता का दुष्परिणाम यह निकला कि लोगों के लिए किसी नियंत्रित संस्था में प्रवेश प्राप्त करना अत्यंत मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में दूरस्थ शिक्षा शिक्षा प्राप्त में एक सशक्त साधन है।

4. अत्यधिक महत्वकांक्षी दृष्टिकोण

इस भौतिक युग में जहां हर चीज तेजी से बढ़ रही है, वहीं मनुष्यों का दृष्टिकोण भी अत्यधिक महत्व पंछी होता जा रहा है। अब शिक्षा पर खर्च होने वाले पैसे को पूंजी निवेश के रूप में लिया जाता है। उसका परिणाम यह निकला कि शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इन इच्छाओं की पूर्ति मात्र नियमित विद्यालय या महाविद्यालय नहीं कर सकते हैं, इसलिए दूरस्थ शिक्षा की उपयोगिता और आवश्यकता और बढ़ जाती है।

5. शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार

प्राचीन समय में भारत को शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर माना जाता था। परंतु इसके बावजूद भी शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के लिए नहीं थी। परंतु अब आधुनिक भारत में शिक्षा कुछ विशेष व्यक्तियों के अधिकार से निकालकर जनसाधारण तक पहुंच चुकी है। अब शिक्षा प्राप्त करना लोकतांत्रिक अधिकार में आता है। परंतु इतना होने के बावजूद भी बहुत से विकासशील देशों में आवश्यक साधनों की कमी के कारण सभी व्यक्तियों के लिए शिक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है।

भारत में कंपनी राज, दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता
दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता

इस समस्या के विषय में भारत की लोकसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष डॉक्टर गुरदयाल सिंह ढिल्लों का कहना है “यदि हम हर कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या इसलिए नहीं बढ़ा सकते क्योंकि उसके चारों और दीवारें हैं, यदि हम उच्च शिक्षा की संस्थाओं की संख्या इसलिए नहीं बना सकते क्योंकि उसमें ज्यादा में होगा और उसका एक ही रास्ता है कि कक्षाओं की चार दीवारों को तोड़ दिया जाए और प्रत्येक गांव तथा छोटे कस्बों में महाविद्यालय खोलने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया जाए। पत्राचार अध्ययन का कार्यक्रम, विश्वविद्यालय की धारणा में निहित सार्वजनिक शिक्षण को विस्तृत एवं सशक्त बनाएगा।

6. सार्वजनिक साक्षरता

आधुनिक समाज में सार्वजनिक साक्षरता भारत ही नहीं अपितु सभी विकासशील देशों का प्रथम लक्ष्य है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह देश के उन कम खर्चीली साधनों की खोज में लगे हुए हैं, जिनका परिणाम उत्साहजनक रहे इस दृष्टिकोण से देखा जाए। तो हम पाएंगे कि दूरस्थ शिक्षा नियमित शिक्षा की अपेक्षा कम खर्चीली है।

7. कमाते हुए सीखना

आधुनिक युग में जहां भौतिक तथा इलेक्ट्रानिक वस्तुएं सस्ती हो रही है। वही जीवन की बुनियादी आवश्यकताएं दिन प्रतिदिन आकाश को छूती जा रहे हैं। आर्थिक संपन्नता के लिए या अनिवार्य हो गया है कि विद्यार्थी को पढ़ते पढ़ते ही कमाई का साधन जुटाना पड़ता है। यदि वे नियमित प्रातः कालीन विद्यालयों में दाखिला लेते हैं, तो वह अजीब का के क्षेत्र में पिछड़ जाएंगे। अतः सीखने के लिए उन्हें सायं कालीन कक्षाओं या पत्राचार कोर्सों पर निर्भर होना पड़ता है।

8. शैक्षिक योग्यता बढ़ाने की इच्छा

आधुनिक समय में जीवन से जुड़ा प्रत्येक पहलू दिन प्रतिदिन जटिल से जटिल होता जा रहा है। ऐसे में आजीविका कमाने के लिए उसे अत्याधुनिक शिक्षा लेनी ही पड़ेगी। जो उस की शैक्षणिक योग्यता को और बढ़ावा देगी साथ ही साथ आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न भी बना देगी।

9. स्वतंत्र शिक्षा की इच्छा

स्वतंत्र तथा निर्बाध रूप से अपनी गति तथा अपने समय के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा ने भी लोगों को पत्राचार के प्रति रुचि बढ़ाई।

10. लचीलापन

शिक्षा में विस्फोट होने से उसे ग्रहण करने वालों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। परंतु परंपरागत रूप से दी जाने वाली शिक्षा इतनी कठोर तथा सख्त है कि प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर नहीं बनाया जा सकता है। दूरस्थ शिक्षा में लचीलापन लाने में समर्थ है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.