धर्मनिरपेक्षता अर्थ विशेषताएं

धर्मनिरपेक्षता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जॉर्ज जैकब हॉलीडेक द्वारा 19वीं शताब्दी में किया गया। उसने लैटिन भाषा के शब्द Seculum शब्द से इस शब्द को ग्रहण किया जिसका अर्थ है यह वर्तमान स्थिति वास्तव में हॉलीडेके मैं इस शब्द का प्रयोग सामाजिक तथा नैतिक मूल्यों की प्रणाली के संदर्भ में किया था। उसकी इस मूल्य प्रणाली के आधार निम्नलिखित सिद्धांत थे।

धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक लक्ष्य

  1. मनुष्य की भौतिक तथा सांस्कृतिक उन्नति को विशेष महत्त्व
  2. उसके द्वारा सत्य की खोज पर बल
  3. वर्तमान युग या विश्व की उन्नति से संबंध
  4. तार्किक नैतिकता पर बल

हम जानते हैं कि भारत एक बहु धर्मावलंबी बहु भाषा एवं संस्कृत वाला देश है। लोकतंत्र यहां की शासन प्रणाली का आधार है। इस आसन में आवश्यक है कि सभी नागरिकों के प्रति समान व्यवहार हो, चाहे किसी भी धर्म की आस्था को ना रखते हो? अर्थात् सर्वधर्म संभाव लोकतंत्र का आदर्श होना चाहिए।

धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा

धर्मनिरपेक्षता वह विश्वास है जो राज्य नैतिकता शिक्षा आदि को धर्म से स्वतंत्र रखता है।

हम सभी धर्मों एवं विश्वासों को सामान आदान प्रदान करना चाहते हैं अर्थात हम सर्वधर्म समभाव में आस्था रखते हैं।

धर्मनिरपेक्षता हुआ विश्वास है जो धर्म कथा पर अलौकिक बातों को राज्य के कार्य क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने देता।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि धर्मनिरपेक्षता में मानव व्यवहार की व्याख्या धर्म के आधार पर नहीं वरन तार्किक आधार पर की जाती है तथा घटनाओं को कार्य कारण संबंध के आधार पर समझा जाता है इसके साथ ही भावात्मक तथा आत्मकथा का स्थान वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठता ले लेती है।

वास्तव में धर्मनिरपेक्ष राज्य में सभी नागरिकों को अन्य धर्मों का आधार पर किए बिना अपने धर्म का पालन करने और उसके प्रचार-प्रसार करने को सदस्यता दी जाती है ऐसे राज्य में प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़ने एवं नागरिक विकास करने के सवार अवसर और अधिकार प्राप्त होते हैं तथा धर्म किसी के विकास में बाधा नहीं मन करता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य के लक्षण निम्न है-

  1. राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होगा
  2. धर्म के आधार पर राज्य किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगा
  3. कविता भी बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सरकारी सेवा में प्रवेश कर सकेंगे।
  4. राज्य किसी विशेष हैं उनके अनुयायियों को प्राथमिकता नहीं देगा।
  5. धार्मिक शिक्षा देना परिवार और धार्मिक समस्याओं का काम होगा।
  6. नैतिक शिक्षा फैंसी कपड़ों का अस्तित्व अंग होगी।

धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएं

धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएं निम्न है।

धर्म का प्रभाव न्यूनतम

धर्मनिरपेक्षता के कारण धर्म का प्रभाव कम होता है तथा मानवीय व्यवहार एवं सामाजिक घटनाओं की व्याख्या करने में धर्म के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाता है। व्यक्ति की सामाजिक निष्ठा का निर्धारण धर्म के अनुसार पर नहीं होता।

बुद्धिवाद का महत्व

धर्मनिरपेक्षता के अंतर्गत प्रत्येक मानवीय व्यवहार एवं समानता पर तर्क के आधार पर विचार किया जाता है धार्मिक आधार पर नहीं। 15 साल सारी घटना की व्याख्या तर्क तथा कार्य कारण संबंधों के आधार पर की जाती है अर्थात वर्तमान वैज्ञानिक ज्ञान के आधार पर समस्याओं का समाधान किया जाता है जिससे पीछे धार्मिक एवं कारणों को स्वीकृत किया जाता है।

विभेदीकरण की प्रक्रिया

धर्मनिरपेक्षता में विरोधी करण की प्रक्रिया पर बल दिया जाता है अर्थात धार्मिक आर्थिक सामाजिक राजनीतिक व नैतिक पक्ष एक दूसरे से पृथक पृथक होते हैं जीवन से संबंधित विभिन्न पदों की जानकारी इसी से मिलती है।

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