धर्मनिरपेक्षता को प्रभावित करने वाले कारक

धर्मनिरपेक्षता की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने वाले महत्वपूर्ण कारक निम्न है।

1. पश्चिमीकरण

भारत में धर्मनिरपेक्षता के विचारों को प्रोत्साहित करने में पश्चिमीकरण का महत्वपूर्ण योगदान है। अंग्रेजों के भारत में लंबे शासनकाल में भारत में नवीन प्रौद्योगिकी संचार, यातायात, डाक, तार, रेल, शिक्षा, व्यवस्था नवीन ज्ञान व मूल्यों का सूत्रपात हुआ है जिसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति भादवा भौतिकवाद को बढ़ावा मिला तथा धर्म का भाव धीरे-धीरे कम होता गया।

2. नगरीकरण एवं औद्योगीकरण

धर्मनिरपेक्षता की सोच विशेष रूप से नागरिकों में अधिक प्रभावी रही है क्योंकि शिक्षा संचार यातायात आदि की सुविधा नगरों में ही अधिक पाई जाती है विभिन्न प्रकार के उद्योग धंधे एवं व्यवसाय भी नगरों में पाए जाते हैं इन मैचों की विभिन्न जातियों धर्मों संप्रदायों का भाषा से संबंधित व्यक्ति साथ साथ काम करते हैं अच्छा धार्मिक कट्टरता समाप्त हो जाती है तथा उनमें धार्मिक सहिष्णुता एवं सह अस्तित्व के भाव उत्पन्न होते हैं इससे उनमें तार्किक वैज्ञानिकता हुआ मानवतावाद के भावों का भी संचार होता है।

3. यातायात एवं संचार के साधन

प्राचीन समय में चौकी यातायात एवं संचार के साधनों का अभाव था इसलिए व्यक्तियों में गतिशीलता का अभाव था तथा व अन्य धर्मों के संपर्क में नहीं आ पाए और अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ समझने के कारण उन्हें धार्मिक कट्टरता पनपती गई किंतु वर्तमान समय में यातायात एवं संचार के गतिशील परिणामों के विकास होने के कारण लोगों में गतिशीलता बड़ी है। परस्पर एक दूसरे के संपर्क में आने के कारण उनमें समानता के विचार आए हैं धार्मिक संकीर्णता समाप्त हुई है तथा छुआछूत भेदभाव कम हुए हैं।

4. आधुनिक शिक्षा पद्धति

प्राचीन काल में शिक्षा धार्मिक थी और वह भी केवल दूध जातियों तक सीमित थी किंतु वर्तमान समय में शिक्षा में वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करने से लोगों में तार्किक एवं बौद्धिक गुणों का विकास हुआ है वर्तमान काल में शिक्षा मात्र कुछ जातियों व वर्गों तक सीमित ना होकर लोगों को प्रदान की जाती है। इससे उनके दृष्टिकोण में परिवर्तन हुआ है उनमें स्वतंत्रता समानता तथा तार्किकता का विकास हुआ है।

5. धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आंदोलन

भारतीय समाज एवं धर्म की कुरीतियों को दूर करने के लिए देश के अनेक नेताओं और महापुरुषों ने अनेक सुधार कार्यक्रमों व आंदोलनों का सूत्रपात किया। ब्रह्म समाज प्रार्थना समाज रामकृष्ण मिशन आर्य समाज थियोसोफिकल सोसायटी आज संगठनों की भी स्थापना हुई। इन सभी के प्रयत्नों के कारण धार्मिक अंधविश्वास नष्ट हुए तथा भारतीयों ने प्रजातांत्रिक मूल्यों की ओर झुकाव बड़ा इससे भी धर्मनिरपेक्षता की प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिला।

6. सरकारी प्रयत्न

देश में नवीन संस्थान द्वारा देश के सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। भारतीय संविधान के 15 अनुच्छेद में उल्लेख है कि राज्य लिंग जन्मजात प्रजाति धर्म वंश एवं जन्म आदि के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा। इसके साथ ही भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है इसके अतिरिक्त सरकार ने अनेक विद्वानों व समाज कल्याण के परिजनों द्वारा भी निम्न व पिछड़ी जातियों को ऊंचा उठाने के लिए अनेक प्रयत्न व योजनाएं बनाई हैं इन सबसे भारत में धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा मिला है।

7. राजनीतिक दल

देश में विभिन्न राजनीतिक दलों में भी धर्मनिरपेक्षता के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता को दल की नीति के रूप में स्वीकार किया। कांग्रेस के सभी प्रमुख नेता महात्मा गांधी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने श्रीमती इंदिरा गांधी आदि धर्मनिरपेक्षता के विचारों के समर्थक रहे हैं। कांग्रेस के अतिरिक्त समाजवादी तथा साम्यवादी दलों को नेताओं ने भी धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया है

8. स्वतंत्रता आंदोलन

भारत में स्वतंत्रता आंदोलन में सभी धर्मों के लोगों ने भरपूर सहयोग दिया उन्होंने इस संघर्ष के लिए प्राय अपने सभी धार्मिक एवं जाति भेदभाव भुला दिए स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारतीय संविधान में भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया और जिसका उद्देश्य विभिन्न धर्मा अनुयायी यों को देश की प्रगति में समान रूप से भागीदार बनाना एवं सहयोग प्राप्त करना था। इस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन ने धर्म निरपेक्ष करण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया।

9. धार्मिक भिन्नता

धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा के प्रोत्साहन में भारत में विभिन्न धर्मों का पाया जाना भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। भारत में चूंकि विभिन्न धर्मों के अनुयाई साथ साथ रहते हैं, आता है राज्य के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह सभी धर्मों के प्रति समानता का व्यवहार करें और सब को विकास के समान अवसर प्रदान करें।

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