धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की विशेषताएं

धर्मनिरपेक्ष वादी शिक्षा की विशेषताएं निम्न है-

  1. नैतिकता का विकास-धर्मनिरपेक्षता वादी शिक्षा से बालकों में नैतिक दृष्टिकोण का विकास होता है। नैतिक शिक्षा सभी अर्थों में उनके चारित्रिक और नैतिक विकास की आधारशिला होती है। इस शिक्षा के माध्यम से उनमें सत्य साईं सरिता इमानदारी नम्रता सहानुभूति मानवता सेवा व त्याग आदि गुणों का विकास होता है और इन गुणों के परिणाम स्वरूप उनके चरित्र एवं व्यक्तित्व में निखार आता है।
  2. विशाल दृष्टिकोण का विकास- धर्मनिरपेक्षता वादी व्यक्ति को गतिशील एवं समस्या उन्मुक्त बनाती हैं यह शिक्षा उनमें जीवन के प्रति ऐसे दृष्टिकोण का विकास करती हैं जिसमें वह अपने स्वार्थों को त्याग कर समाज सेवा में रुचि लेने लगता है यह शिक्षा उसे जीवन की समस्याओं का दृढ़ता पूर्वक सामना करने में न केवल प्रेरित करती है वरन उनका उचित समाधान ढूंढने में भी मदद करती है।
  3. स्वस्थ बहुलवादी उधर चकोर का विकास होता है या दृष्टिकोण कला विज्ञान दर्शन तथा धर्म के विकास में भी सहायक है और यह बहुलवादी दृष्टिकोण प्रजातंत्र का आधार ही है।
  4. धर्मनिरपेक्षवादी शिक्षा बालकों में स्वतंत्रता समानता भाईचारा तथा सहयोगी जीवन जैसे प्रजातांत्रिक मूल्यों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शिक्षा प्रजातंत्रीय प्रक्रिया के आधार पर व्यक्तित्व के विकास पर पर्याप्त बल देती है।
  5. धर्मनिरपेक्षवादी शिक्षा बालको में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करती हैं, जिससे वे अपने को अंधविश्वास और कुरीतियों एवं रूढ़ियों से पृथक रखते हैं। या शिक्षा उनमें तारीख शीलता विवेक तथा वस्तुनिष्ठता के गुण विकसित करती है वह इसके परिणाम स्वरूप सभी तथ्यों पर तार्किक ढंग से विचार करने में सक्षम होते हैं तथा उन्हें मानवतावादी भावनाओं का उदय होने लगता है।
  6. धर्मनिरपेक्षवादी शिक्षा व्यक्ति को न केवल अपने भौतिक मांगो एवं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील करती हैं वाराणसी उदार आध्यात्मिक मूल्यों को ग्रहण करने और उन्हें व्यवहार में अपनाने पर भी बल देती हैं। इस शिक्षा के अंतर्गत विज्ञान को केवल भौतिक उन्नति का साधन ही नहीं माना जाता या सत्य एवं प्रकृति से सामंजस्य का प्रतीक है।
  7. या शिक्षा बालकों में सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण एवं मानव मातृभूमि के प्रति सम्मान के भाव जागृत करती है। या शिक्षा बालकों में प्रेम आत्मज्ञान आत्मबल दाने एवं हिंसा आदि गुणों को जन्म देती है जिससे भविष्य में उनका दृष्टिकोण सब कुछ अल्लाह होकर विस्तृत हो जाता है और वह अपने जीवन में सदैव मानवता के प्रति समर्पित रहते हैं।

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