नारी सशक्तिकरण

नारी सशक्तिकरण

परिवार में अगर किसी का सबसे ऊंचा स्थान होता है मां होती है, अपने जीवन से जुड़े सारे निर्णय जिसे स्वयं लेना होता है। उसकी क्षमता का अंदाजा लगाना हमारी बस में नहीं होता महिलाएं परिवार और समाज से बंधन मुक्त होती हैं। नारी के बिना एक अच्छे समाज का निर्माण करना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन जिस तरह से समाज में भेदभाव दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, भ्रूण हत्या महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा बलात्कार, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषयों पर भेदभाव होता रहेगा, तब तक समाज का विकास होना बा मुश्किल है। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में शुरू से ही बना रहा है। महिलाओं और पुरुषों में शैक्षणिक और आर्थिक अंतर लगातार देश को पीछे की ओर ले जा रहा है। जबकि भारत के बुजुर्गों के साथ ही पुराणों और महापुरुषों के साथ संविधान में भी बताया गया है। स्त्री और पुरुष दोनों समान होते हैं। अतः भारत सरकार के साथ ही समाज को नारी सशक्तिकरण ही इसका एक प्रभावशाली उपाय है। जिससे समाज की बुराइयों को मिटाया जा सकता है।

नारी सशक्तिकरण

अगर महिलाओं को सशक्त बनाना है, तो लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देना होगा। आदेश की महिलाएं लक्ष्य को तभी प्राप्त कर पाएंगे उन्हें बचपन से ही प्रसारित किया जाएगा और शुरू से ही उनकी शारीरिक मानसिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत किया जाएगा। जब तक महिलाओं की शिक्षा बेहतर नहीं होगी उनका बचपन अच्छा नहीं होगा तब तक महिलाओं का उत्थान नहीं हो पाएगा एक स्वस्थ परिवार के लिए स्वस्थ महिला का होना आवश्यक है। आज भी बहुत सारे क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जा रहा है। उनकी सुरक्षा नहीं हो पा रही है और समाज का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। अगर किसी महिला को सशक्त बनाना है तो उसके माता-पिता को उसकी इस कमी को दूर करना होगा।

जो मुख्य रूप से अशिक्षा असुरक्षा और गरीबी की वजह से ही किसी बड़े उम्र के व्यक्ति से शादी और कम उम्र में बच्चे पैदा करने से बचाना होगा। महिलाओं को समाज में अच्छी स्थिति में लाने के लिए उनके साथ हो रहे लैंगिक भेदभाव सामाजिक अलगाव और घरेलू हिंसा को रोकने के लिए कठोर से कठोर कदम उठाने पड़ेंगे। महिलाओं की समस्या को सुनने के लिए विशेष तरीके अपनाने होंगे जिससे उनकी कमियों को दूर किया जा सके और समाज में उनका समाधान हो सके उनकी हिस्सेदारी समाज में 33% से बढ़कर 50% हो सके भले ही सरकार लगातार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हो कितने ही नियम कानून लागू करती है। लेकिन जब तक समाज के लोग उसे अपनाएंगे नहीं तब तक महिलाओं का आगे होना बड़ा मुश्किल है। भारत को पुरुष प्रधान देश माना जाता है, लेकिन समाज की मुखिया और समाज के विकास का पूरा भाग परिवार की महिला के ऊपर होता है।

महिलाओं की बराबरी को लाने के लिए नारी सशक्तिकरण पर सभी को ध्यान देना होगा सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उत्थान होने के लिए प्राथमिकता देना होगा महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करना होगा ना केवल घरेलू महिलाएं बल्कि पारिवारिक और व्यवसायिक महिलाओं को भी समाज में प्राथमिकता दिलाना होगा ताकि महिलाओं को हर क्षेत्र में सक्रिय और सकारात्मक विकास मिल सके और समाज में लगातार हो रही घटनाओं को कम किया जा सके महिलाओं के अंदर वह ताकत होती है, कि वह समाज को बदल सकती हैं। और देश को कुछ नया स्वरूप दे सकती हैं।

वह समाज में किसी भी पुरुष से परेशानियों को बिना परेशान हुए निपटने में सक्षम होती हैं। वह देश और परिवार के लिए जनसंख्या से हो रही हानी को समझती हैं और उसे आसानी से निपट सकती हैं। अच्छे पारिवारिक योजना के लिए परिवार की आर्थिक स्थिति को सुनियोजित करने के लिए पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक प्रभावशाली होती हैं। वह परिवार को सुनियोजित करती हैं और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए पुरुषों के समान सक्षम भी होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में नारी सशक्तिकरण में भले ही कुछ फायदा मिला हो लेकिन अभी भी महिलाएं स्वास्थ शिक्षा नौकरी परिवार देश और जिम्मेदारी के लिए कम सचेत हुई। उन्हें और अधिक सचेत करना होगा और उन्हें इस तरह से सचेत करना जरूरी है। ताकि उनकी रुचि प्रदर्शित हो तभी वह प्रमुखता से इन क्षेत्रों में भाग लेंगे और नारी सशक्तिकरण तेजी से होगा।

समाज का पुरुष पारिवारिक सदस्यों द्वारा सामाजिक राजनीतिक अधिकार को पूरी तरह से महिलाओं के लिए प्रतिबंधित कर देता है। महिलाओं के खिलाफ कुछ बुरे चैनल और बोले विचारों की वजह से महिलाओं को वह समाज से अलग करके रखता है। जिसे महिलाओं के लिए बिल्कुल भेदभाव पूर्ण कहा जाना चाहिए जब तक इन भेदभाव को कम नहीं किया जाएगा तब तक महिलाएं उत्थान नहीं कर पाएंगे अंग्रेजों के समय में विदेशी लोगों से बचाने के लिए महिलाओं को घरों में भले ही बंद कर दिया जाता था लेकिन अब हमारा देश पूर्णता स्वतंत्र है और सभी को आजादी है तो यह प्रक्रिया खत्म हो जानी चाहिए। अगर यह समाज में पूर्ण रूप से लागू हो गया और महिलाएं इसके लिए जागरूक हो गई तो महिलाएं खुले दिमाग से सभी आयामों को सोचकर अपना कार्य करना शुरू कर देंगे और सामाजिक बंधन टूट जाएंगे समाज में लगातार महिलाओं को को दृष्टि से देखा जाता है। जिसके लिए कठोर नियम भी प्रचलन में लाने होंगे ताकि उन लोगों को भी सीख मिल सके ।

ब्रिटिश राज के अधीन भारत
भारतीय कृषि एवं सिंचाई
खेल और खेलों का महत्व
बल व घर्षण
Daily News Analysis

Sarkari Focus offers free online courses for various exams. We provide knowledge through articles, biographies, tests, news on results and events.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.