निर्देशन अर्थ उद्देश्य विशेषताएं

239

निर्देशन का अर्थ है- पथ प्रदर्शन करना, निर्देशन करना या संकेत करना। यह एक व्यक्तिगत कार्य है जो किसी व्यक्ति को उसकी समस्याओं के समाधान के लिए दिया जाता है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अनुभवी व्यक्ति अनुभवहीन प्राणी को निर्देशित करता है अर्थात किसी व्यक्ति की सूची योग्यता व क्षमता को ध्यान में रखते हुए उसके आधार पर पथ प्रदर्शन करना ही निर्देशन कहलाता है।

विभिन्न शिक्षा शास्त्रियों ने निर्देशन को तीन अर्थों में लिया है-

  1. व्यापक अर्थ में किसी भी व्यक्ति को सेवा के रूप में दी गई सहायता।
  2. विशिष्ट अर्थ में निर्देशन सेवा के रूप में।
  3. शिक्षा के उपक्रिया के रूप में।

निर्देशन का लक्ष्य व्यक्ति और समाज में सामंजस्य स्थापित करना है। व्यक्ति का संपूर्ण विकास ही निर्देशन का कार्य है।

निर्देशन

निर्देशन की परिभाषाएं

निर्देशन के विषय में विभिन्न शिक्षा शास्त्रियों ने निम्न परिभाषाएं दी हैं-

निर्देशन एक ऐसी सेवा है जो व्यक्ति को स्कूल या उसके बाहर के वातावरण में समायोजन करने के लिए दी जाती है।

प्रौक्टर के अनुसार

निर्देशन व्यक्ति को भावी जीवन के लिए तैयार करता है तथा समाज के साथ समायोजन करने में सहायता करता है।

हस्बैंड के अनुसार

निर्देशन एक ऐसी निरंतर क्रिया है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक दृष्टि से अधिकतम विकास करने में सहायता प्रदान करती है।

निर्देशन की विशेषताएं

निर्देशन की प्रमुख विशेषताएं निम्न है-

  1. निर्देशन व्यक्ति को अपने वातावरण के साथ समायोजित करने में सहायता प्रदान करता है – यह व्यक्ति को अपने आप को दूसरे से और परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित करने में सहायता प्रदान करता है।
  2. निर्देशन वह प्रक्रिया है जो व्यक्तियों को उचित अवसर के लिए उचित स्थान और उचित समय पर उचित ढंग से सहायता करती है – यह एक सार्वभौमिक तथा सर्वकालिक क्रिया है जो कि केवल स्कूल या परिवार तक सीमित नहीं है। यह जीवन के सभी पक्षों से संबंधित है।
  3. निर्देशन व्यक्ति और समाज की भलाई के लिए विशिष्ट और सामान्य सेवा प्रदान करता है- इसका संबंध जीवन से होता है जीवन में निर्देशन औपचारिक और अनौपचारिक रूप से योगदान देता है। यह व्यक्ति और समाज दोनों को लाभदायक सेवाएं प्रदान करके उनका अधिकतम विकास करता है।
  4. निर्देशन के द्वारा व्यक्ति का संतुलित विकास होता है- इसका उद्देश्य लोगों को जीवन के लक्ष्य और उद्देश्य को भलीभांति समझना है और उनकी पूर्ति के योग्य बनाना है।
  5. निर्देशन हमारा ध्यान व्यक्ति पर केंद्रित करता है- निर्देशन व्यक्ति के दृष्टिकोणों एवं उनके बाद के व्यवहार को प्रभावित करने के उद्देश्य से स्थापित आपसी संबंधों की एक प्रक्रिया है। इसके द्वारा व्यक्ति में अपनी समस्याओं में स्वयं निर्देशन की क्षमता का विकास किया जाता है। यह प्रक्रिया व्यक्ति केंद्रित होती है।
  6. निर्देशन मनुष्य को भावी जीवन के लिए तैयार करता है- निर्देशन व्यक्ति को भावी जीवन के लिए तैयार करके भविष्य में उत्तरदायित्व निभाने की योग्यता विकसित करता है।
  7. निर्देशन व्यक्ति की रुचि क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखकर किया जाता है- निर्देशन व्यक्तिगत विभिन्नताओं पर आधारित होता है। यह व्यक्ति की रुचि, क्षमता तथा योग्यता पर आधारित होता है।
  8. निर्देशन मनुष्य को आत्म विकास की ओर अग्रसर करता है- निर्देशन के अंतर्गत वे सभी क्रियाएं आ जाती हैं जो व्यक्ति की आत्मसिद्धि में सहायक होती हैं। इसके द्वारा व्यक्ति अपनी निहित शक्तियों का विकास करके अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित हो जाता है।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि निर्देशन जीवन के लक्ष्य निश्चित करने में सामंजस्य स्थापित करने में तथा सभी तरह की समस्याओं को सुलझाने में सहायता करता है। यह एक प्रकार की निजी सहायता है, जो एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति को दी जाती है।

निर्देशन

निर्देशन के उद्देश्य

निर्देशन का सामान्य उद्देश्य है कि व्यक्ति में अपने आप को सही तौर पर जानना और समझना। इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता, रूचि और अवसर के अनुकूल चुनाव करने में सहायता देना है। इसके साथ-साथ निर्देशन से संबंधित विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान करने में भी सहायता करना है। निर्देशन से संबंधित महत्वपूर्ण उद्देश्य निम्न है-

  1. निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, भावात्मक एवं सामाजिक उन्नति में सहायता करना है जिससे वह अपने को वातावरण के साथ समायोजित कर सके।
  2. व्यक्ति के सामने उपस्थित समस्याओं के समाधान में सहायक होना जिससे वह तथ्यों को सही ढंग से समझ सके एवं विवेकपूर्ण चुनाव तथा अनुकूलन कर सके।
  3. निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति को अपनी योग्यता के अनुकूल शैक्षिक एवं व्यावसायिक ज्ञान देना है अर्थात् उपयुक्त व्यक्ति द्वारा व्यवसाय का चुनाव करने में सहायता करना है।
  4. निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति का आत्म निर्देशन करना है। निर्देशन के द्वारा व्यक्ति को अपनी क्षमता, रुचि व आवश्यकता का आतम ज्ञान मिलता है। किसी के माध्यम से व्यक्ति अपनी छिपी हुई क्षमता, गुणों व प्रतिभा को पहचानकर आत्मविकास एवं वृद्धि के मार्ग पर बढ़ता है।
  5. निर्देशन का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आवश्यकता एवं क्षमता के अनुकूल अध्ययन विषय एवं पाठ्यक्रम चुनने में सहायता करता है। आज दसवीं कक्षा के पश्चात विषयों में भिन्नता पाई जाती है, निर्देशन छात्रों को उपयुक्त वैकल्पिक विषयों का चुनाव करने में सहायता करता है, क्योंकि हर छात्र की रूचि आवश्यकता एवं क्षमता भिन्न-भिन्न होती है।
  6. आज समाज काफी जटिल बनता जा रहा है। निर्देशन का उद्देश्य सामाजिक जागरूकता द्वारा समाज कल्याण की भावना जागृत करके सामाजिक तनाव में कमी लाने के लिए मार्गदर्शन करना है।
  7. व्यक्ति के जीवन का हर पक्ष व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षिक एवं व्यावसायिक रूप से जटिल होता जा रहा है, इन सभी के साथ समायोजन की समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं, चाहे विद्यालय हो या कारखाना घर हो या कार्यालय चारों तरफ समस्याओं की विविधता बढ़ती जा रही है।

अतः ऐसे में निर्देशन का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की समस्याओं के साथ समायोजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना होता है।

निर्देशन की आवश्यकता

आधुनिक समय में मानव जीवन में बड़ी तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। आज के बदलते हुए युग के परिणाम स्वरूप जीवन के मूल्यों, मापदंडों और आवश्यकता आदि में तीव्रता से परिवर्तन होते रहते हैं। आज के वैज्ञानिकता के इस युग में हमें सभी पुरानी विचारधाराएं पिछड़ती हुई दिखाई दे रही हैं। आज के इस युग में व्यक्ति सामाजिक शैक्षिक और व्यवसायिक सभी क्षेत्रों में समस्याएं ही समस्याएं दिखाई दे रही हैं।

इन तेजी से होते परिवर्तनों के फल स्वरुप हम अपने शैक्षिक व्यवहार एवं जीवन के उद्देश्यों को निश्चित करने में कठिनाई का अनुभव कर रहे हैं और इसी कारण से निर्देशन की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। निर्देशन की आवश्यकता के महत्व के संबंध में कुप्पूस्वामी महोदय ने भी लिखा है कि

निर्देशन की आवश्यकता सभी युगों में रही है परंतु आज भारत में जो दशाएं उत्पन्न हो रही हैं उन्होंने इस आवश्यकता को और भी अधिक बलवती बना दिया है।

शैक्षिक दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता

  1. पाठ्य विषयों का चयन करने के लिए
  2. अनुशासनहीनता की समस्या को दूर करने के लिए
  3. विद्यार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि
  4. अपव्यय तथा अवरोधन की समस्या को हल करने के लिए
  5. शिक्षा के क्षेत्र में विविधता
  6. पिछड़े हुए बालकों व प्रतिभाशाली बालकों के निर्देशन के लिए
  7. व्यवसाय के ज्ञान के लिए
  8. प्रतिभाशाली बालकों के लिए निर्देशन की आवश्यकता

सामाजिक दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता

  1. स्त्रियों के नौकरियों में समायोजन करने के लिए
  2. अवकाश का सदुपयोग करने के लिए
  3. नगरीकरण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए
  4. सामाजिक, नैतिक और धार्मिक मूल्यों में परिवर्तन के लिए
  5. घर एवं परिवार की बदलती हुई परिस्थितियों के कारण
  6. पारिवारिक और सामाजिक तनाव दूर करने के लिए
  7. उचित नियोजन की आवश्यकता के लिए
शैक्षिक निर्देशन के उद्देश्य

राजनैतिक दृष्टि से निर्देशन की आवश्यकता

  1. देश में धर्मनिरपेक्षता के लिए
  2. भावात्मक और राष्ट्रीय एकता के विकास के लिए
  3. देश की रक्षा के लिए

निर्देशन के कार्य

निर्देशन की आवश्यकता प्रत्येक मानव को पड़ती है। बिना निर्देशन के कोई भी समाज चल नहीं सकता। मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी ना किसी से निर्देशन प्राप्त करता ही रहता है। निर्देशन मानव जीवन से संबंधित निम्न कार्य करता है-

  1. निर्देशन व्यक्ति में निहित सजीव तथा क्रियात्मक शक्तियों के विकास का कार्य करता है।
  2. निर्देशन व्यक्तिगत क्षमताओं के विकास हेतु कार्य करता है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता है। किंतु पूर्ण होने के प्रयास में वह अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं को निरंतर विकसित करता रहता है। निर्देशन इन व्यक्तिगत क्षमताओं को उत्तम दिशा प्रदान करने का कार्य करता है।
  3. निर्देशन व्यक्ति के उपयुक्त व्यवसाय के चयन हेतु सहायता करता है।
  4. जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए निर्देशन व्यक्ति को संगठित करने का कार्य करता है।
  5. तकनीकी विकास के इस युग में प्रत्येक व्यवसाय विशिष्ट से विशिष्टतर होता जा रहा है। व्यवसाय आरंभ करते ही कोई भी व्यक्ति अपने व्यवसाय का विशेषज्ञ नहीं हो सकता। कभी-कभी व्यवसाय में असफलता का भय बना रहता है। व्यवसाय चयन के बाद व्यवसाय विशेष की बारीकियों को समझने तथा अपने प्रिय व्यवसाय में अपनी क्षमताओं को बढ़ाते रहने के लिए निर्देशन सहायता का कार्य करता है।
  6. शिक्षा के क्षेत्र में आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि विद्यार्थी को यह समझ नहीं आता कि वह किन विषयों का चयन करें जिसके द्वारा वह भविष्य में सफल हो सके। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में विषयों की भरमार है लेकिन सबसे बड़ी समस्या उसके उपयुक्त चयन की है। अतः निर्देशन बालक के उपयुक्त विषयों के चयन में सहायता देने का कार्य करता है।
  7. विद्यालय में अलग-अलग मानसिक स्तर के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। कभी-कभी विद्यार्थी की शैक्षिक उपलब्धि उसके मानसिक स्तर से मेल नहीं खाती है। इसके अनेक कारण हो सकते हैं। किंतु इसका प्रमुख कारण उचित निर्देशन का अभाव है।प्रायः निर्देशन के अभाव में विद्यार्थी प्राप्त ज्ञान को अभिव्यक्त करने में असफल रहता है, जिससे उसकी शैक्षिक उपलब्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उचित प्रकार से दिया गया निर्देशन बालक की शैक्षिक उपलब्धि को बढ़ाने में सहायक होता है।
  8. निर्देशन बालकों में भावनात्मक और राष्ट्रीय एकता के विकास का कार्य करता है। यह बालकों में सांप्रदायिकता, प्रान्तवाद, जाति पात, वर्ग विभेद और भाषावाद के विकास के मार्ग को अवरुद्ध करता है। देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में सहयोग देता है।
  9. निर्देशन के माध्यम से राष्ट्रीय आतंकवाद, जातवाद क्षेत्रवाद एवं भाषावाद को समाप्त कर एक नवीन सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निर्देशन अर्थ उद्देश्य विशेषताएंव्यावसायिक निर्देशन
भारत में निर्देशन की समस्याएंशैक्षिक निर्देशन
शैक्षिक व व्यावसायिक निर्देशन में अंतरएक अच्छे परामर्शदाता के गुण व कार्य
परामर्श अर्थ विशेषताएं उद्देश्यसमूह निर्देशन
व्यक्तित्वसमूह गतिशीलता
समूह परामर्शसूचना सेवा
बुद्धिरुचि

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.