परामर्श अर्थ विशेषताएं उद्देश्य

निर्देशन तथा परामर्श एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक दूसरे के अभाव में दोनों निष्प्राण रहते हैं। परामर्श शब्द दो व्यक्तियों के संपर्क को व्यक्त करता है। परामर्श प्रक्रिया में एक परामर्श देने वाला और दूसरा परामर्श चाहने वाला या परामर्श प्रार्थी होता है। परामर्श की प्रक्रिया के अंतर्गत उन सभी प्रकार की स्थितियों का समावेश होता है, जिनमें परामर्शदाता परामर्श चाहने वाले की समस्या को समझाने का प्रयास करता है।

उसके बारे में परामर्शदाता तथा परामर्श चाहने वाले दोनों के बीच विचारों का आदान-प्रदान अर्थात् पारस्परिक बातचीत होती है और अंत में परामर्श चाहने वाले अर्थात् परामर्श प्रार्थी की समस्या का समाधान करने में परामर्शदाता सहायता करता है।

परामर्श

परामर्श

विभिन्न निर्देशन शास्त्रियों ने निर्देशन सेवाओं को ध्यान में रखकर अपने अपने दृष्टिकोण के अनुसार परामर्श के संबंध में अनेक परिभाषाएं दी हैं। इनमें से परामर्श की कुछ परिभाषाएं निम्न है-

साक्षात्कार के समान परामर्श में आमने-सामने का, व्यक्ति से व्यक्ति का संपर्क होता है।

पूछताछ, पारस्परिक तर्क वितर्क या विचारों का पारस्परिक विनिमय है।

परामर्श साक्षात्कार विधि के द्वारा किसी व्यक्ति को अपनी समस्याओं का समाधान करने में सहायता देने की प्रक्रिया है।

परामर्श विद्यालय और अन्य संस्थाओं के कर्मचारियों की सेवाओं का व्यक्तियों की समस्याओं के लिए किए जाने वाला उपयोग है।

परामर्श का अभिप्राय है दो व्यक्तियों का संपर्क जिसमें एक व्यक्ति को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है।

अतः हम कह सकते हैं की परामर्श मुख्य रूप से दो व्यक्तियों के बीच संपर्क है जिसके अंतर्गत एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को समझने में सहायता देता है। परामर्श की प्रक्रिया में परामर्शदाता तथा परामर्श चाहने वाला दोनों आमने-सामने होते हैं तथा परामर्शदाता परामर्श प्रार्थी को उसकी समस्याओं का समाधान ढूंढने में सहायता देता है।

ऊपर दी गई विभिन्न परिभाषाओं के आधार पर परामर्श के संबंध में निम्नलिखित 3 तथ्य निकलते हैं-

  1. परामर्श प्रक्रिया में दो व्यक्तियों का संपर्क होता है।
  2. परामर्शदाता और परामर्श प्रार्थी के बीच विचार-विमर्श के अनेक साधन हो सकते हैं।
  3. परामर्श के कार्य के लिए प्रशिक्षित एवं अनुभवी व्यक्ति का होना आवश्यक है।
परामर्श की विशेषताएं

परामर्श की विशेषताएं

विभिन्न विद्वानों ने परामर्श की विभिन्न विशेषताएं बताई हैं। जिनमें से कुछ निम्न है-

  1. परामर्श में किसी व्यक्ति की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, अपितु उसे अपनी समस्या का समाधान करने में सहायता दी जाती है।
  2. परामर्श में केवल दो व्यक्तियों का संपर्क होता है। यदि दो से अधिक व्यक्ति उसमें शामिल हो तो उसे हम परामर्श नहीं कर सकते।
  3. परामर्श सलाह देना नहीं है और ना ही परामर्शदाता द्वारा परामर्श प्रार्थी के लिए किसी प्रकार का निर्णय करना है। निर्णय को तो वह स्वयं व्यक्ति या परामर्श प्रार्थी पर छोड़ देता है।
  4. परामर्श में व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता प्रत्यक्ष सलाह या उपयोगी सूचना प्रदान करते नहीं बल्कि प्रशिक्षित परामर्शदाता के द्वारा व्यक्तिगत मुलाकातों के द्वारा दी जाती है।
  5. परामर्श की प्रक्रिया की समाप्ति उसी समय हो जाती है जब परामर्शदाता व्यक्ति को किसी निर्णय पर पहुंचने में सहायता देता है।

परामर्श के उद्देश्य

परामर्श के उद्देश्य बहुत व्यापक हैं। अतः उन सबका वर्णन करना कठिन है। कुछ महत्वपूर्ण विद्वानों द्वारा बताए गए परामर्श के उद्देश्य से निम्न है-

परामर्श के उद्देश्य

राबर्ट्स के अनुसार परामर्श के उद्देश्य

राबर्ट्स ने परामर्श के निम्नलिखित उद्देश्य बताएं हैं-

  1. व्यक्ति को अपनी समस्याओं के स्वयं समाधान की योजनाएं बनाने में सहायता देना।
  2. व्यक्ति को खुद से संबंधित तथ्यों की व्याख्या करने में सहायता प्रदान करना।
  3. व्यक्ति को अपनी योजनाओं को पूरा करने की दिशा में कार्य प्रारंभ करने में सहायता करना।
  4. व्यक्ति की शैक्षिक, व्यवसायिक, व्यक्तिक समस्याओं को समझाने में सहायता देना।
  5. व्यक्ति को अपनी योजनाओं में आवश्यक फेर-बदल करने में सहायता देना।

हार्डी के अनुसार परामर्श के उद्देश्य

हार्डी ने परामर्श के निम्नलिखित तीन उद्देश्य बताएं हैं-

  1. व्यक्ति को खुद के विकास से संबंधित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता देना।
  2. व्यक्ति को अपने समाज में उचित समझे जाने वाले ज्ञान दृष्टिकोण तथा कुशलता ओं को प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना।
  3. पारिवारिक जीवन, व्यवसाय एवं नागरिकता से संबंधित क्षेत्रों में व्यक्ति को अपने उद्देश्यों को निर्धारित करने में सहायता करना।

थट तथा गेरविरच ने परामर्श के उद्देश्यों को अत्यंत संक्षेप में इस प्रकार कहा है

परामर्श का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याओं का समाधान करने में इस प्रकार सहायता देने के अवसर प्रदान करना है, जिससे कि किसी प्रकार की सहायता के बिना समस्याओं का समाधान करने की उनकी योग्यता का विकास हो जाए।

अमेरिकन मनोवैज्ञानिक संघ ने परामर्श के उद्देश्यों को निम्न शब्दों में परिभाषित किया है

  1. परामर्श प्रार्थी द्वारा अपनी क्षमताओं अभी प्रेरकों तथा आत्म दृष्टिकोणों की यथार्थ स्वीकृति।
  2. परामर्श प्रार्थी के द्वारा सामाजिक, आर्थिक तथा व्यावसायिक परिवेश के साथ तर्कसंगत सामंजस्य की प्राप्ति।
  3. व्यक्तिक भिन्नताओं की समाज द्वारा स्वीकृति तथा समुदाय, रोजगार एवं वैवाहिक संबंधी के क्षेत्र में उनका निहितार्थ।

उपर्युक्त उद्देश्यों के विश्लेषण के आधार पर निम्न बिंदु ध्यान में आते हैं-

  1. परामर्श का लक्ष्य व्यक्ति को अपने संबंधों में सही मूल्यांकन प्राप्त करना है।
  2. व्यक्ति को अपने परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करना।
  3. समाज में उपलब्ध आर्थिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों एवं संभावनाओं को उसे अपनी योग्यताओं एवं सीमाओं के संदर्भ में देखना।
  4. व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उसका सामंजस्य वास्तविक धरातल पर करना।
परामर्श के सिद्धांत

परामर्श के सिद्धांत

परामर्श के सिद्धांत निम्न है-

  1. स्वीकृति – परामर्श से संबंधित सभी विचारधाराएं यह मानती हैं कि परामर्श प्रार्थी को एक पूर्ण मनुष्य या मानव समझना चाहिए।
  2. व्यक्ति के लिए आदर भाव – निर्देशन तथा परामर्श की सभी विचारधाराएं इस बात से सहमत हैं कि व्यक्ति का आदर किया जाना चाहिए।
  3. आशा – सभी विचारधाराएं परामर्श के आशा के तत्व अर्थात सापेक्ष संबंधों को स्वीकार करती हैं।
  4. सीखना – परामर्श की सभी विचारधाराएं सीखने के महत्व को स्वीकार करती हैं।
  5. परामर्श-प्रार्थी के साथ सोचना – परामर्श में प्रार्थी के लिए सोचने की अपेक्षा प्रार्थी के साथ उसके विचारों के अनुकूल सोचकर परामर्श देना सर्वमान्य सिद्धांत है।

परामर्श की आवश्यकता

परामर्श निर्देशन कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अंग है। परामर्श के बिना विद्यालय से संबंधित निर्देशन कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न नहीं किया जा सकता है। परामर्श व्यक्ति की व्यक्तिक, शैक्षिक व्यवसायिक तथा मनोवैज्ञानिक क्षेत्र से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

छात्रों के लिए परामर्श की आवश्यकता

परामर्श निर्देशन कार्यक्रम का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण अंग है। परामर्श के बिना निर्देशन कार्य को सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सकता है। स्कूलों में छात्रों की वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए तथा भावी समस्याओं की रक्षा हेतु परामर्श अत्यंत आवश्यक है। छात्रों के द्वारा अपनी शिक्षा से अधिक से अधिक लाभ उठाने की योग्यता प्रदान करने के लिए भी परामर्श आवश्यक है।

परामर्श छात्रों के व्यक्तिक समायोजन के लिए भी बहुत जरूरी है। परामर्श छात्र का शैक्षिक विकास करने में समय समय पर छात्र का अर्थ मूल्यांकन करने में तथा छात्र के व्यक्तित्व का एकीकारण करने में सहायता प्रदान करता है। अत: यह कहा जा सकता है कि छात्र के व्यक्तिक और व्यावसायिक समायोजन के लिए उसके शैक्षिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए परामर्श अत्यंत आवश्यक है।

परामर्श की आवश्यकता

परामर्श का निर्देशन में महत्व

निर्देशन की प्रक्रिया में परामर्श का अत्यधिक महत्व है। इस महत्व को निम्न प्रकार से प्रकट किया जा सकता है-

  1. जब शिक्षक एवं छात्र में संबंध स्थापित हो जाता है वहीं कुछ समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। उनका उचित समाधान परामर्श के द्वारा किया जा सकता है।
  2. जो प्रश्न छात्र के भावी व्यवसाय चयन से संबंध रखते हैं उनका निराकरण परामर्श सेवा द्वारा किया जा सकता है।
  3. विशेषकर किशोरावस्था में भावी जीवन को व्यवस्थित करने संबंधी सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस काल को जीवन का सबसे कठिन काल माना गया है। किस काल में स्व समंजन, परिवार समंजन के प्रश्नों का हल परामर्श से ही किया जा सकता है।
  4. वर्तमान समाज आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक एवं नैतिक रूप से अत्यंत जटिल हो गया है। इस कारण अध्यापक उचित रूप से परामर्श नहीं दे पाता। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि जटिल समाज में परामर्श का क्षेत्र, रूप, आकार एवं अर्थ बदल गया है। इसी कारण परामर्श की आवश्यकता है।
  5. परामर्श साक्षात्कार के माध्यम से छात्रों की योग्यताओं, अभिरुचियों, प्रतिभाओं का पता लगाकर परामर्शदाता योग्य मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
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