प्रजातंत्र के गुण व दोष

प्रजातंत्र के गुण व दोष – प्रजातंत्र की सफलता का मूल आधार शिक्षा होती है, इसलिए लोकतंत्र जन शिक्षा पर सबसे अधिक बल देता है। इसके लिए वह सर्वथा में निश्चित आयु तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करता है। वह पुरुष और महिलाओं में भेद नहीं करता इसलिए दोनों के समान शिक्षा की व्यवस्था करता है।

परंतु दिखाया गया है कि लाख प्रयत्न करने पर भी कुछ बच्चे इस शनिवार एवं निशुल्क शिक्षा को प्राप्त नहीं करते और बड़े होकर वे निरीक्षण प्रौण कहलाते हैं। ।

प्रजातंत्र के गुण व दोष

Human Rights in India, प्रजातंत्र के गुण व दोष
प्रजातंत्र के गुण व दोष

प्रजातंत्र के गुण व दोष निम्न हैं –

प्रजातंत्र के गुण

  1. सभी के हितों की रक्षा– प्रजातंत्र सरकार जनता की जनता द्वारा तथा जनता के लिए होती है। इनमें सभी की उन्नति का ध्यान रखा जाता है, किसी वर्ग विशेष का नहीं। संसद में सभी वर्गों के व्यक्ति पहुंचते हैं इसलिए सभी के हितों का ध्यान रखकर कानून बनाए जाते हैं जो जनहित का ध्यान नहीं रखते उन्हें जनता अगले निर्वाचन पद से हटा देती है।
  2. सभी को विकास का समान अवसर– प्रजातंत्र सभी को अपनी योग्यता को प्रदर्शित करने तथा विकास करने का अवसर प्रदान करता है। सभी को मतदान निर्वाचित होने तथा पद ग्रहण का अधिकार होता है। कोई भी व्यक्ति चुनाव जीतकर तथा मंत्री पद ग्रहण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दे सकता है। (प्रजातंत्र के गुण व दोष)
  3. स्वतंत्रता की रक्षा– प्रजातंत्र नागरिकों की प्रजातंत्र नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करता है अन्य सरकारों जैसे राजतंत्र तानाशाही याद में जनता की स्वतंत्रता खतरे में रहती है प्रजातंत्र सरकार जनमत के अनुसार चलती है और चुनावों से बनती है इसलिए वह निरंकुश नहीं बन सकती।
  4. उन्नति के समान अवसर– प्रजातंत्र सबको उन्नति के समान अवसर प्रदान करता है सबको समान रूप से राजनीतिक सामाजिक व आर्थिक अधिकार प्रदान किए जाते हैं सभी कानून की दृष्टि से समान समझे जाते हैं।
  5. नैतिक गुणों का विकास-प्रजातंत्र नागरिकों में नैतिक गुणों का विकास करता है व्यापक दृष्टिकोण सहयोग संस्था आज गुणों का विकास होता है तथा जनता की उदासीनता समाप्त होती है नागरिकों में आत्मसम्मान की भावना पैदा होती है भर्तियों में स्वयं शासन संचालन का भाव पैदा होता है।
  6. जनकल्याण में वृद्धि– प्रजातंत्र सबसे कल्याण की कामना करता है जो कि यह जनता का शासन है शासन करता जनता के प्रतिनिधि होते हैं इसलिए वे जनहित में सबको ध्यान में रखकर शासन करते हैं शासन जनता की इच्छाओं के प्रति सजग रहता है।
  7. जनमत पर आधारित– प्रजातंत्र जन्म पर आधारित शासन है व्यवस्थापिका जनमत का दर्पण होता है और सदैव जनता की इच्छा तथा भावना का ध्यान रखती है शासन जनता के प्रति उत्तरदाई नागरिकों को जनमत व्यक्त करने की पूरी सुविधा होती है।
  8. आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन– प्रजातंत्र में नागरिकों में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का भाव आता है सभी को अपने विकास के पूर्व अवसर मिलते हैं और सभी राजनीतिक अधिकार रखते हैं। (प्रजातंत्र के गुण व दोष)
  9. उत्तरदाई शासन– प्रजातंत्र में सरकार जनता के प्रतिनिधियों के प्रति और अंतिम रूप से जनता के प्रति उत्तरदाई होती है।
  10. राजनीतिक जागृति– प्रजातंत्र से राजनीति जागृत आती है क्योंकि इस अवस्था में स्थानीय तथा केंद्रीय संस्थाओं के चुनाव होते हैं जिनमें जनता भाग लेती है राजनीतिक दल राजनीतिक जागृति में सहायता देते हैं यह प्रचार सभा भाषण और समाचार पत्र निकाल कर जनता को जागरूक बनाते हैं।
  11. क्रांति का भय नहीं रहता-प्रजातंत्र क्रांति को समाप्त कर देती हैं। जनता को शासन में भागीदार होने का अवसर देता है तथा जो चुनाव द्वारा सरकार को बदला जा सकता है।
  12. राजनीति शिक्षा– प्रजातंत्र राजनीति शिक्षा का अच्छा माध्यम है इससे जनता जागृत होती है नए विचार आते हैं और जनता प्रशासन का संचालन सीख जाती है।
  13. राष्ट्रीय चरित्र का उत्थान– प्रजातंत्र से एक श्रेष्ठ राष्ट्रीय चरित्र उत्पन्न होता है। इसमें स्वाभिमान आत्मसम्मान और देश प्रेम की भावना जागृत होती है। इससे राष्ट्रीय चरित्र विकसित होता है। जब जनता समझ आती है कि सरकार उसी की है तब देश प्रेम का भाव जागृत होता है।
प्रजातंत्र के गुण व दोष
प्रजातंत्र के गुण व दोष

प्रजातंत्र के दोष

  1. मूर्खों कि सरकार – प्रजातंत्र मूर्खों आयोग के तथा अज्ञानियों का शासन सासनी योग्यता पर ध्यान न देकर संख्या पर ध्यान देता है संख्या में मूर्ख विद्वानों से कहीं अधिक है।
  2. प्रतिनिधित्व को कठिनाई– प्रजातंत्र में ऐसी कोई विधि नहीं है जिससे संपूर्ण जनता का प्रतिनिधित्व हो सके। प्रतिनिधित्व प्रणाली में बड़ा भाग प्रतिनिधित्व से रह जाता है। इस तरह जनता की सरकार बन ही नहीं पाती क्या अभी आवश्यक नहीं है कि योग्य व्यक्ति प्रशासन के लिए छाते जा सके।
  3. साधारण व्यक्तियों की सरकार – प्रजातंत्र साधारण व्यक्तियों की सरकार होती है जबकि राज्य सूत्र योग्य व्यक्तियों के हाथों में होना चाहिए राज्य को कार्य कुशल बुद्धिमान और चतुर व्यक्ति ही चला सकते हैं।
  4. धनिको की सरकार– प्रभाव होता है धन के आधार पर चुनाव जीते जाते हैं तथा वोट खरीदे जाते हैं धनी राजनीतिक पदों पर अधिकार जमा देते हैं वास्तविक सैनिकों के हाथों में चली जाती है और प्रजातंत्र धनिक तंत्र बन जाता है।
  5. राजनीतिक दलों का अनैतिक प्रभाव– प्रजातंत्र राजनीतिक दलों के माध्यम से चलता है इसलिए इसमें दल प्रणाली के सारे दोष आ जाते हैं। राष्ट्रभक्ति के स्थान पर दल भक्ति का जन्म होता है विरोधी दल के योग्य व्यक्तियों की सेवाएं राष्ट्र को उपलब्ध नहीं होती झूठा और गंदा प्रचार होता है तथा सरकार अस्थाई बन जाती है जनतंत्र का जन्म होता है तथा राजनीति भ्रष्टाचार में वृद्धि होती है। (प्रजातंत्र के गुण व दोष)
  6. धन का अपव्यय– प्रजातंत्र खर्चीली शासन पद्धति है इसीलिए इसे धनी राष्ट्रों का विलासिता कहा जाता है। चुनाव में अपार धन व्यय होता है तथा प्रतिनिधियों को वेतन भत्ते आदि दिए जाते हैं व्यर्थ के वाद विवाद होते हैं और एक कानून के बनाने में लाखों रुपया वह होता है अनेक खर्चे और कार्य केवल दिखाने के लिए कागजों पर ही होते हैं।
  7. एकता का अभाव– प्रजातंत्र सरकार में एकता की कमी रहती है राजनीतिक दलों का संघर्ष आपसी निंदा और आलोचना तथा सरकार गिराने और सत्ता हथियाने के हथकंडे चलते रहते हैं इससे राष्ट्रपति और बंता कथाएं एकता को चोट पहुंचती है चुनाव जीतने के लिए मतभेदों को बढ़ाया जाता है जिससे देश होने का डर बना रहता है तथा कभी-कभी गृह युद्ध की स्थिति आ जाती है।
  8. निर्णय में विलंब– सरकार में किसी निर्णय की करने में बड़ा विलंब होता है निर्णय पर वाद विवाद होता है तथा संसद में प्रस्ताव रखे जाते हैं निरर्थक वाद विवाद में समय निकल जाता है और संकट के समय तुरंत निर्णय नहीं हो पाता।
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