प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

…चौदहवीं लोकसभा के चुनाव में काँग्रेस की जीत के साथ भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति का नाम उभरा जिसने कभी लोकसभा का चुनाव ही नहीं जीता था । वही व्यक्ति राजनीति के शिखर पर पहुँच गया जिसने काँग्रेसी सरकार ( 1991-1996 ) के वित्तमंत्री के रूप में आमूल – चूल परिवर्तन करके देश की आर्थिक उन्नति के मार्ग पर विकसित कर दिया था । प्रधानमंत्री डॉ . मनमोहन सिंह ने चौदहवीं लोकसभा में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया । डॉ . मनमोहन सिंह सभी राजनेताओं से अलग अपनी पहचान रखते हैं ।

शांतप्रिय तथा सदैव अपने कार्यों में लीन रहने वाले डॉ . मनमोहन सिंह जी को अर्थशास्त्रियों ने ‘ एडमस्मिथ पुरस्कार ‘ से सम्मानित किया है । इस अर्थशास्त्री का जन्म 26 सितम्बर 1932 को पश्चिमी पंजाब के गाहइलाके में श्री गुरुमुखसिंह और श्रीमती किशन कौर के घर हुआ ( यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है ) । विभाजन से पूर्व पेशावर में रहने वाले डॉ . सिंह का परिवार विभाजन की त्रासदी के बाद अमृतसर में आकर बस गया । अमृतसर आने के बाद डॉ . सिंह के पिता ने आजीविका के लिए ‘ ड्राई – फ्रूट ‘ के व्यापार को चुना । डॉ . सिंह अपने भाई – बहनों के जीवनयापन व शिक्षा – दीक्षा के लिए कठिन परिश्रम करने लग गए । सादा जीवन व्यतीत करना और पिता श्री गुरुमुखसिंह तथा माता किशन कौर के आदेश का पालन करना ही उनके जीवन का आदर्श रहा ।

प्राथमिक शिक्षा ज्ञान आश्रम स्कूल तथा हिंदू स्कूल से प्राप्त की । वर्ष 1948 में पंजाब शिक्षा बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । वर्ष 1950 में इंटरमीडिएट की परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । गली में लैंम्पपोस्ट के नीचे बैठकर मनमोहन सिंह जी घंटो पढ़ते रहते थे । वर्ष 1952 में पंजाब विश्वविद्यालय से बी.ए. इकोनोमिक्स ( ऑनर्स ) प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । वर्ष 1954 में पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए. इकोनोमिक्स प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । वर्ष 1957 में लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इकोनोमिक्स ट्रिपॉश विषय पर परीक्षा दी । यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से डी.फिल की उपधि ली । सन् 1954 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की एम.ए. इकोनोमिक्स की परीक्षा में प्रथम आने पर डा . सिंह को उत्तमचंद कपूर मैडल प्राप्त हुआ । वर्ष 1956 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से सेंट जान कॉलेज में शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करने पर राइट्स पुरस्कार प्राप्त किया । वर्ष 1957 में इसी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से स्कॉलर का सम्मान मिला ।

 डॉ . मनमोहन सिंह को जीवन भर अनेक पुरस्कार मिलते रहे हैं । वर्ष 1976 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में आनरेरी प्रोफेसर नियुक्त हुए । वर्ष 1982 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स के आनरेरी फैलो पद पर नियुक्त हुए । वर्ष 1985 में इंडियन इकोनोमिक्स एसोसिएशन के प्रधान नियुक्त हुए । वर्ष 1986 में एन.सी.ई.आर.टी के निदेशक पद पर नियुक्त हुए । वर्ष 1987 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया । वह अप्रैल 1980 से सितम्बर 1982 तक योजना आयोग के सदस्य सचिव रहे । वह 16 सितम्बर 1982 से जनवरी 1985 तक रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के गवर्नर नियुक्त हुए । 15 जनवरी 1985 से 31 जुलाई 1987 तक प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन नियुक्त हुए । एक अगस्त 1987 से नवम्बर 1990 तक सेक्रेटरी जनरल एंड कमिश्नर साउथ कमीशन के सदस्य रहे । पंद्रह मार्च 1991 से 20 जनू 1991 तक यू . जी . सी . ( विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ) के चेयरमैन रहे । सितम्बर 1991 से अब तक राज्य सभा के सदस्य के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं ।

डॉ . मनमोहन सिंह के जीवन में परिवर्तन का प्रारंभ जून 1991 में हुआ था । चंद्रशेखर सरकार जिसमें डॉ . सिंह बतौर प्रधानमंत्री के वित्त सलाहकार नियुक्त हुए थे , गिर चुकी थी । उससे पूर्व मनमोहन सिंह जी यू . जी . सी . के चेयरमैन , योजना आयोग के उपाध्यक्ष तथा रिजर्व बैंक के गवर्नर आदि रह चुके थे । यह ऐसा समय था जब डॉ . मनमोहन सिंह को अपनी प्रतिभा और मौलिक चिंतन का परिचय देना था । श्री नरसिंह राव काँग्रेस अध्यक्ष बन चुके थे तथा प्रधानमंत्री पद पर उनके नाम को चर्चा चल रही थी । तब श्री नरसिंह राव ने डा . सिंह को टेलीफोन किया था । राव को तलाश थी उस अर्थशास्त्री की जो डूबी हुई भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधार सके । अनेक आर्थिक दायित्वों के पालन के बाद भी मनमोहन सिंह का राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से दूर – दूर तक कोई नाता नहीं था । इसके बाद भी डॉ . सिंह का राजनीतिक कद और प्रभाव निरंतर बढ़ता जा रहा था । इसी समय तत्कालीन कॉरोसी प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने डा .

मनमोहन सिंह को भारत का वित्त मंत्री नियुक्त किया । उस समय विदेशी मुद्रा भंडार में निर्यात के लिए दो सप्ताह तक के लिए केवल एक अरब डॉलर ही शेष बचे थे । विदेशी ऋणदाताओं ने भी अपने हाथ खींच लिए थे । 

डॉ . मनमोहन सिंह ने वित्तमंत्री बनते ही कर व्यवस्था के सरलीकरण , उद्योगों से अनेक नियंत्रण हटाकर , परमिट राज समाप्त करके वैश्वीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी । यह एक ऐतिहासिक कदम था । 

डॉ . मनमोहन सिंह 21 जून 1991 से 15 मई 1996 तक देश के वित्तमंत्री रहे । वर्ष 1993 में उन्हें एशिया मनी पुरस्कार मिला । वर्ष 1994 में उन्हें आल इंडिया मैनेजमेंट ऐसोसिएशन के आनरेरी फैलो का पद दिया गया । वर्ष 1994 में ही उनको यूरोमनी पुरस्कार दिया गया । इसी वर्ष 1994 में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के आनरेरी फैलो पद पर नियुक्त हुए । वर्ष 1994 में ही लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स सेंटर फॉर एशियो इकोनोमिक के विशेष फैलो नियुक्त हुए । 

डॉ . मनमोहन सिंह के पिता का नाम गुरमुख सिंह और माता का नाम अमृत कौर था। उनके पिता ने अपने पुत्र से एक बार कहा था कि में रहूँ अथवा न रहूँ पर तू एक दिन देश का प्रधानमंत्री जर बनेगा । पिता का यह आशीर्वाद पूर्ण होने में 30 वर्ष लग गए ।

उनकी पत्नी का नाम गुरशरण कौर । वह ग्रहिनी की रहने वाली थी । उनके तीन बच्चे है । स्वभाव से विनम्र , विचारों से दृढ़ , समझ से परिपक्व प्रतिभा से विलक्षण डॉ . सिंह इस बात के समर्थक हैं कि उचित समय प्रकट होने वाले विचार को दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती । नौ वर्ष केंद्र की सत्ता से दूर रहकर काँग्रेस ने मई 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के रूप में देश का नेतृत्व संभाला । प्रधानमंत्री के रूप में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ . मनमोहन सिंह ने 22 मई 2004 को अपने 67 सदस्यीय मत्रिमंडल के साथ शपथ ग्रहण की । अपनी रचनात्मक सोच के धनी इस महान व्यक्ति की ओर देश का हर नागरिक यह सोच रहा है कि हे प्रभु सभी की आशाएँ पूर्ण हों । भारत प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ता रहे । डॉ . मनमोहन सिंह के नेतृत्व में प्रत्येक भारतवासी सुखी हो , देश की प्रगति हो तथा विश्व में भारत का नाम चमकता रहे । मई 2009 में डॉ . मनमोहन सिंह पुनः भारत के प्रधानमंत्री बने ।

भारत के चौदहवें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह विचारक और विद्वान के रूप में प्रसिद्ध है। वह अपनी नम्रता, कर्मठता और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। 

पूर्व इतिहास

1966

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए काम किया

राजनीतिक घटनाक्रम

2013

मनमोहन सिंह को पांचवीं बार राज्यसभा के लिए चुना गया।

2007

उन्हें चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए फिर से चुना गया।

2004

2004 में यूपीए ने लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया, जिसके बाद कांग्रेस संसदीय दल ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना। 2004 से 2014 तक उन्‍होंने बतौर पीएम दो कार्यकाल पूरे किये।

2001

उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए फिर से चुना गया।

1999

वे 13 वां लोकसभा चुनाव दक्षिण दिल्ली से भाजपा के विजय कुमार मल्होत्रा से हार गए।

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