प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम को समझने से पहले यह आवश्यक है कि हम इस पाठ्यक्रम की कमियों को देखें। विदेशी शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम से इसकी तुलना करने पर हम पाते हैं कि हमारा प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित व पुराना है।

इसका प्रमुख कारण यह है कि यह पाठ्यक्रम लाभदायक कुशलताओं का विकास तथा उचित प्रकार की रूचियों, अभिव्रतियों तथा मान्यताओं पर पर्याप्त बल नहीं देता है। इस कारण से यह आधुनिक ज्ञान तथा वर्तमान जीवन से अलग अलग है।

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम
प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम के दोष

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम के दोषों को हम निम्न रूप में समझ सकते हैं-

  1. पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित है।
  2. पुस्तक की ज्ञानवर्धक तंत्र विद्या पर बल देता है।
  3. उच्च शिक्षा के प्रतिकूल है।
  4. इसका आधार व्यवहारिक न होकर केवल साहित्यिक व सैद्धांतिक है।
  5. जीवन के साथ इसका संबंध नहीं है।

इस संबंध में 1960 में प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम के ऊपर एक सम्मेलन हुआ था जिसमें एशिया के प्रतिनिधि शामिल थे। इस सम्मेलन में सुधार करने के उद्देश्य से निम्न विचार व्यक्त किए गए थे-

प्राथमिक स्तर पर आधारभूत उपकरणों पर नियंत्रण किया जाए। पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो जिससे बालक का सर्वांगीण विकास पाठ्यक्रम के अध्ययन से उत्तम नागरिकता का विकास हो । देश की परंपरा तथा संस्कृति का पालन हो विश्व बंधुत्व अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का विकास हो। वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो। श्रम के प्रति लोगों की रूचि बड़े जीवन के सकारात्मक पक्ष का विस्तार हो।

हमारे जीवन से शिक्षा तभी संबंध स्थापित करेगी, जब पाठ्यक्रम लचीला हो तथा जीवन से समीपता लिए हुए हो। पाठ्यक्रम को स्थानीय वातावरण के अनुकूल होना चाहिए तथा एनसीईआरटी कोर्स के स्तर पर निर्धारण करने का प्रयास करना चाहिए।

अच्छे पाठ्यक्रम के गुण

एक अच्छे पाठ्यक्रम में निम्न गुणों का समावेश होना चाहिए

  1. पाठ्यक्रम रचनात्मक से पूर्ण होना चाहिए तथा उसका संबंध वास्तविकता से होना चाहिए
  2. पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो जो व्यक्ति के आगामी जीवन का विकास करें तथा उसे सकारात्मक रूप से प्रभावित करें
  3. पाठ्यक्रम में खेलकूद तथा कार्य में अन्योन्याश्रित संबंध होना चाहिए
  4. पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो कि उससे बच्चों का आचरण और चरित्र का निर्माण हो तथा स्वास्थ्य ज्ञान बुद्धि विवेक कौशल आदि गुणों का विकास हो।
  5. पाठ्यक्रम में सामुदायिक विकास हो
  6. खेलकूद व सामाजिक कार्यों में भागीदारी होनी चाहिए।

कोठारी कमीशन ने प्राथमिक शिक्षा के लिए निम्न प्रकार के पाठ्यक्रम को अपनाने का सुझाव दिया है।

वैदिककालीन शिक्षाबौद्धकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षातक्षशिला विश्वविद्यालय
मैकाले का विवरण पत्र 1835लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
एडम रिपोर्टवुड का घोषणा पत्र
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीतिहण्टर आयोग
सैडलर आयोग 1917बुनियादी शिक्षा – वर्धा शिक्षा योजना
वर्धा योजना की असफलता के कारणसार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
विश्वविद्यालय शिक्षा आयोगमुदालियर आयोग 1952
त्रिभाषा सूत्रकोठारी आयोग 1964
शिक्षा का राष्ट्रीयकरणप्रौढ़ शिक्षा अर्थ आवश्यकता उद्देश्य क्षेत्र
राष्ट्रीय साक्षरता मिशनविश्वविद्यालय के कार्य
उच्च शिक्षा के उद्देश्यउच्च शिक्षा समस्याएं
शैक्षिक स्तर गिरने के कारणदूरस्थ शिक्षा अर्थ परिभाषा
मुक्त विश्वविद्यालयसंतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता
परीक्षा सुधार आवश्यकताप्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

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