प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता – अशिक्षित मानव पशु के समान ही है, वर्तमान समय के सामाजिक आर्थिक राजनैतिक व्यवसाय तथा तकनीकी वातावरण में अपने को समायोजित करने के लिए तथा प्राकृतिक संपदा व वैज्ञानिक उपलब्धियों का अधिकतम सदुपयोग करने के लिए मानव का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न परिस्थितियों के कारण शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह गए अनपढ़ प्राणों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था करना अत्यंत समसामयिक प्रतीत होता है।

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प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

निम्नलिखित दृष्टिकोण से प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता है-

  1. प्रौढ़ शिक्षा एक मानवीय आवश्यकता
  2. प्रौढ़ शिक्षा एक पारिवारिक आवश्यकता
  3. प्रौढ़ शिक्षा एक राजनीतिक आवश्यकता
  4. प्रौढ़ शिक्षा एक सामाजिक आवश्यकता
  5. प्रौढ़ शिक्षा एक राष्ट्रीय आवश्यकता
  6. प्रौढ़ शिक्षा एक बौद्धिक आवश्यकता
  7. प्रौढ़ शिक्षा एक व्यावसायिक आवश्यकता
  8. प्रौढ़ शिक्षा एक सांस्कृतिक आवश्यकता
  9. मनोरंजन के लिए प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

1. प्रौढ़ शिक्षा एक मानवीय आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा वास्तव में एक मानवीय आवश्यकता है, अनपढ़ व्यक्ति पशु के समान है। जो अपनी जेब की आवश्यकताओं की पूर्ति में ही अपने संपूर्ण जीवन की आहुति दे देते हैं। शिक्षा व्यक्ति को अपना जीवन स्तर ऊंचा उठाने के योग्य बनाती है। प्रौढ़ शिक्षा भी प्रौढ़ों को अपने रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठाने के योग्य बना सकेगी। साक्षर प्रौढ़ अपने भौतिक वातावरण तथा सामाजिक परिवेश को अधिक ढंग से समझ सकेंगे तथा तदनुसार प्रभावशाली ढंग से अपनी जीवन शैली विकसित कर सकेंगे। (प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता)

2. प्रौढ़ शिक्षा एक पारिवारिक आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा एक पारिवारिक आवश्यकता भी प्रतीत होती है, शिक्षित और अपने परिवार का पालन पोषण अधिक अच्छे ढंग से कर सकते हैं। पढ़े-लिखे माता-पिता ओं के बच्चे पढ़ाई में अच्छे रहते हैं तथा उनकी पढ़ाई को बीच में छोड़ देने की संभावना भी कम रहती है। शिक्षित माता-पिता परिवार के वातावरण को अच्छा बनाए रखते हैं, जिससे उनके बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित होते हैं।

प्रौढ़ शिक्षा
प्रौढ़ शिक्षा

3. प्रौढ़ शिक्षा एक राजनीतिक आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा प्राणों को अपने अधिकार तथा कर्तव्य का ज्ञान कराने में समर्थ होगी। जिससे प्रौढ़ अपने कर्तव्य तथा उत्तरदायित्व का पालन करने के योग्य बन सकेगा एवं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर प्रजातंत्र के विकास में अपना योगदान कर सकेगा। शिक्षा प्राप्त प्रौढ़ नागरिक विभिन्न राजनीतिक दलों की वास्तविक नीतियों तथा कार्यक्रमों को भली-भांति समझ सकेंगे तथा वोट देते समय अपने प्रजातांत्रिक अधिकारों का जनहित में सदुपयोग कर सकेंगे।

4. प्रौढ़ शिक्षा एक सामाजिक आवश्यकता

हमारे देश में अनेक सामाजिक समस्याओं ने विकराल रूप धारण कर रखा है। दहेजप्रथा, संप्रदायिकता, आतंकवाद, जनसंख्या वृद्धि, निर्धनता, छुआछूत जैसी समस्याओं ने हमारा सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से इन सामाजिक समस्याओं का निराकरण करने के लिए जन आंदोलन सफलतापूर्वक चलाए जा सकते हैं। (प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता)

5. प्रौढ़ शिक्षा एक राष्ट्रीय आवश्यकता

शिक्षित व्यक्ति सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता, संवेगात्मक एकता तथा अंतरराष्ट्रीय भावना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर सकता है। पारस्परिक समझ, सहिष्णुता तथा भावात्मक एकता जैसे राष्ट्रीय आदर्शों के अनुरूप कार्य करने से भारत के सभी नागरिक एक सूत्र में बध सकते हैं।

प्रौढ़ शिक्षा
प्रौढ़ शिक्षा

6. प्रौढ़ शिक्षा एक बौद्धिक आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा निरक्षर व अनपढ़ प्राणों का बौद्धिक विकास करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शिक्षा के अभाव के कारण अनपढ़ व्यक्ति अपनी योग्यताओं तथा क्षमताओं को ठीक ढंग से विकसित नहीं कर पाता है। प्रौढ़ शिक्षा उसे अपनी सभी योग्यताओं का विकास करने के अवसर पुनः प्रदान करती है।

7. प्रौढ़ शिक्षा एक व्यावसायिक आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा अनपढ़ व्यक्ति की व्यावसायिक उन्नति में भी योगदान देगी। प्रौढ़ शिक्षा के द्वारा प्रौढ़ विभिन्न व्यवसायों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे तथा अपने व्यवसाय के संबंध में नवीन जानकारी प्राप्त करने के अवसरों का लाभ उठा सकेंगे। जिससे उनके व्यवसाय कौशल में वृद्धि होगी तथा वह नए नए रोजगार अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकेंगे।

8. प्रौढ़ शिक्षा एक सांस्कृतिक आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा राष्ट्र के सांस्कृतिक पक्ष को भी सफल करेगी। प्रत्येक राष्ट्रीय विरासत में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अपनी एक संस्कृति प्राप्त करता है। राष्ट्र के सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि वे ना केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखें बल्कि उनको अत्याधिक पुष्ट करें।

9. मनोरंजन के लिए प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

मनोरंजन तथा विकास के समय का सदुपयोग व्यक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक तथा महत्वपूर्ण होता है, जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उचित भोजन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोरंजन की आवश्यकता होती है, प्रौढ़ शिक्षा प्राणों के लिए मनोरंजन के नए नए आयाम प्रस्तुत कर सकेगी। जिससे प्रौढ़ अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए अपना मनोरंजन कर सकेंगे। (प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता)

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