बल व घर्षण

बल व घर्षण 1

यदि आप किसी वस्तु को खींचते या ज्यादा धकेलते हैं तो आप उस पर बल आरोपित करते हैं। यदि वह वस्तु दृढ़ता पूर्वक नहीं बंधी है तो वह गति करेगी। सभी बल वस्तु की गति में परिवर्तन करते हैं। परंतु किसी वस्तु को गति में रखने के लिए बल आवश्यक नहीं होता है।जब तीर को किसी धनुष से छोड़ा जाता है तो वह बिना अतिरिक्त बल लगे भी गतिमान रहता है। किसी गाड़ी अथवा वायुयान को नियत चाल से गतिमान रखने के लिए बल की आवश्यकता होती है। क्योंकि गतिमान भागों तथा वाहन के चारों ओर की वायु द्वारा आरोपित घर्षण उसे धीमा कर देता है।

बल

प्रत्येक कार्य को अभिकर्षण या आकर्षण अथवा दोनों के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। किसी वस्तु को गति में लाने के लिए उसे धक्का देना या खींचना पड़ता है। विज्ञान में किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के या खिंचाव को ही बल कहते हैं।

बल का एस॰ आई॰ मात्रक न्यूटन(N) होता है।

बल

बलों का मापन

माना कि आप किसी दरवाजे को धकेल रहे हैं तथा दरवाजे के दूसरी ओर खड़ा आपका मित्र भी उसे धकेल रहा है। दरवाजा किस और गति करेगा इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए आपको बलों की माप ज्ञात होनी चाहिए दरवाजा अधिक बल की दिशा में गति करेगा। परंतु यदि बल समान हो तो दरवाजा बिल्कुल भी गति नहीं करेगा।

वैज्ञानिक बलों के ऐसे वर्णन; जैसे- बड़ा छोटा आदि को विश्वसनीय नहीं मानते बल्कि वे बलों का मापन अंकों तथा मात्रकों में करते हैं। बल का मिट्रिक मात्रक न्यूटन है। ध्यान रखिए कि बल किसी वस्तु की गति को प्रभावित करता है।इसलिए न्यूनतम बल का मापन खिंचाव अथवा धकेल द्वारा एक दिए गए द्रव्यमान की वस्तु में गति में परिवर्तन के पदों में करता है।

एक न्यूनतम बल वह बल है, जो 1 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु की चाल में 1 मीटर प्रति सेकंड का परिवर्तन करता है। इसलिए बल वस्तु के द्रव्यमान तथा उसकी चाल में परिवर्तन के गुणनफल के बराबर होता है।

अतः बल = वस्तु का द्रव्यमान × वस्तु की चाल में परिवर्तन

अन्वेषण बल की दिशा

कल्पना कीजिए कि आप की कार कार्य करना बंद कर देती है। आप उसे मुख्य सड़क से एक और लगाना चाहते हैं। इस समय आप बल लगाकर इसे चलाते हैं। यदि आपके द्वारा लगाया जाने वाला बल कार को गति करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है, आप अपने पास से गुजरने वाले किसी व्यक्ति से अपने साथ धक्का लगाने के लिए कहते हैं। इस प्रकार दो बल एक ही दिशा में लगते हैं। अन्य शब्दों में दो बल एक साथ संयोजित हो जाते हैं। इसलिए कार्य पर लगा फुल बल व्यक्तिगत बोलो का योग होता है। यदि पास से गुजरने वाला व्यक्ति कार को उल्टी दिशा में रखा लगाता है, तो दोनों बल्ब इन प्रकार से संयोजित हो जाते हैं। इस स्थिति में कार नहीं मिलती है। यदि लगने वाला एक बिल अधिक होता है तो कार ज्यादा बल लगने वाली दिशा में थोड़ा गति करती है। याद रहे इस प्रकरण में कार पर लगा कुल बल व्यक्तिगत बलों के बीच का अंतर होता है।

बलों के प्रकार

संपर्क बल

बल अनेक प्रकार के होते हैं। उनमें से कुछ निम्न प्रकार के हैं-

  1. पेशीय बल- जब हम अपने हाथों के द्वारा कोई वजन भार उठाते हैं तब हम अपनी भुजाओं की मांसपेशियों के द्वारा बल आरोपित करते हैं। मांसपेशियों द्वारा आरोपित बल को ही पेशीय बल कहते हैं।
  2. घर्षण- साइकिल चलाते समय हम पैदल चलाना बंद कर देते हैं, तो वह धीरे-धीरे धीमी होकर रुक जाती है। किसी कार्य स्कूटर के इंजन को बंद कर देने पर वह भी कुछ समय बाद रुक जाता है।क्योंकि घर्षण बल दो सत्रों के बीच संपर्क के कारण उत्पन्न होता है किसी वस्तु पर लगने वाला बल सदैव संपर्क बल ही है।

असंपर्क बल

  • चुंबकीय बल- वे पदार्थ जिनमें लोहे तथा ऐसी अन्य वस्तुओं को आकर्षित करने की शक्ति होती है, चुंबक कहलाते हैं। चुंबकत्व वह प्राकृतिक बल है जिससे बिना संपर्क के चुंबक लोहे को अपनी ओर आकर्षित करता है। लोहा, कोबाल्ट तथा निकील चुंबकीय पदार्थ है क्योंकि यह दांत में चुंबक की ओर आकर्षित होती हैं।
  • चुंबक के ध्रुव- लोहे की खेलन अधिकतर चुंबक के मध्य में न चिपककर सिरो पर ही चिपकती है। चुंबक के सिरों के पास का क्षेत्र सबसे अधिक चुंबक शक्ति संपन्न होता है या क्षेत्र चुंबक का ध्रुव कहलाता है। चुंबक में दो ध्रुव होते हैं उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव।

गुरुत्वाकर्षण बल

आप अपने जीवन में कई प्रकार की घटनाएं देते हैं; जैसे- आप मेज कुर्सी लगाकर पढ़ने और लिखने का कार्य करते हैं, अचानक कलम नीचे क्यों गिरता है। इस बात से स्पष्ट है कि पृथ्वी में आकर्षण बल है।

वस्तुएं पृथ्वी की ओर इसलिए गिरती हैं, क्योंकि पृथ्वी उन्हें अपनी और आकर्षित करते हैं। इस बल को गुरुत्व बल या केवल गुरुत्व कहते हैं। यह एक आकर्षण बल है। गुरुत्व बल प्रत्येक वस्तु पर लगता है। गुरुत्व बल हम सभी पर हर समय बिना हमारी जानकारी के लगता रहता है। गुरुत्व बल के कारण ही नल का पानी नीचे की ओर बहता है।

सफलता
असफलता के कारण

घर्षण

घर्षण के प्रकार

स्थैतिक घर्षण

दो वस्तुओं के तले के बीच लगने वाला वह घर्षण बल जो वस्तु के गति प्रारंभ करने से ठीक पहले लगता है, स्थैतिक घर्षण बल कहलाता है। स्थैतिक घर्षण के इस अधिकतम मान (f) को सीमांत घर्षण कहते हैं।

सर्पी घर्षण अथवा गतिक घर्षण

यदि हम मेज पर रखे लकड़ी के गोटके पर आरोपित बल को इस प्रकार मापे की गुटका धीरे-धीरे किसके तब लगने वाला घर्षण बल को गतिक घर्षण कहते हैं।

रोलिंग घर्षण

गेंद तथा पहिए जैसी वस्तुएं सतहों पर फिसलने के स्थान पर लुढ़कती हैं। इस स्थिति में उत्पन्न घर्षण रोलिंग घर्षण कहलाता है। रोलिंग घर्षण सर्पी घर्षण से कम होता है। इसलिए जिन वस्तुओं को चलाना होता है, उनके नीचे पहिए लगा दिया जाते हैं।

तरल घर्षण

जल, तेल तथा वायु तरलो के उदाहरण है। सभी द्रव्य तथा गैस तरल होती हैं।जब कोई वस्तु किसी तरल पर या तरल में गति करती है तो तरल उस पर एक बार लगाता है जिसे तरल घर्षण कहते हैं। वायु का प्रतिरोध तरल घर्षण का एक उदाहरण है। ऊंचाई से छोड़ा गया कागज का टुकड़ा वायु के घर्षण के कारण ही धीरे-धीरे नीचे आता है। तरल घर्षण का मान सामान्यता सर्पी घर्षण से कम होता है।

घर्षण कम करने के उपाय

  1. सतहो को चिकना तथा उन पर पालिश करके।
  2. तेल ग्रीस अथवा ग्रेफाइट जैसे लिवब्रीकेट्स का प्रयोग करके।
  3. पहिए-वेयरिंग के प्रयोग से सर्पी घर्षण को रोलिंग घर्षण में बदल दीया जाता है।
  4. वायु तथा जल के प्रतिरोध को धारा रेखीय आकार द्वारा कम किया जाता है। वायुयान तथा नौकाओं को धारा रेखीय आकार प्रदान करने के लिए ही उन्हें आगे से सकरा बनाया जाता है।

घर्षण के लाभ

  1. घर्षण हमारे हाथों से वस्तुओं को पकड़ने मैं, कुर्सी पर बैठने में, चढ़ाई करने में सहायता करता है।
  2. बिलियर्ड खेल का खिलाड़ी एक अच्छे साथ के लिए गेंद तथा अपने क्यू के बीच घर्षण बल पर निर्भर करता है।
  3. वाहन के ब्रेक घर्षण पर निर्भर करते हैं, जब ब्रेक लगाते हैं तब ब्रेक लाइनिंग तथा पहिया या ड्रम के बीच घर्षण बल लगने पर वाहन रुक जाता है।
  4. घर्षण लकड़ी में पेच या कील को जकड़े रखता है घर्षण के कारण ही नट वा बोल्ट परस्पर जुड़े रहते हैं।
  5. रस्सी व धागे से गांठ नहीं बांधी जा सकती हैं और ना ही दूसरी वस्तुओं को इनसे बांधा जा सकता है जतिन में घर्षण ना हो।
  6. माचिस की तीली घर्षण बल के कारण ही जलती ह घर्षण बल से तिल्ली के सिरे का ताप इतना बढ़ जाता है कि, इस में उपस्थित रसायन आग पकड़ लेते हैं।

घर्षण से हानियां

घर्षण बल से निम्नलिखित हानियां होती हैं-

  1. मशीन के रगड़ खाने वाले भागों में घर्षण बल के कारण टूट-फूट होती है।
  2. मशीनों के पूर्जों के बीच घर्षण से ऊर्जा की क्षति होती है जिससे मशीनों की क्षमता कम हो जाती है।
  3. घर्षण के कारण हमारे जूतों की तली घिस जाती है।
  4. वाहनों के टायरों तथा सड़क के मध्य उपस्थित घर्षण के कारण वाहनों के टायर घिसते हैं।

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