भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप – भारतीय समाज दुनिया के सबसे जटिल समाजों में एक है। इसमें कई धर्म, जाति, भाषा, नस्ल के लोग बिलकुल अलग-अलग तरह के भौगोलिक भू-भाग में रहते हैं। उनकी संस्कृतियां अलग हैं, लोक-व्यवहार अलग है।

शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य, भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

समाज की प्रकृति गतिशील होने के कारण उसमें निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। ऐसा ही इस भारतीय समाज में हुआ तथा इन परिवर्तनों के कई आधार हैं, भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप निम्नवत रूप से पढ़ा जा सकता है –

  1. भारतीय समाज का सामाजिक स्वरूप
  2. भारतीय समाज का सांस्कृतिक स्वरूप
  3. भारतीय समाज का धार्मिक स्वरूप
  4. भारतीय समाज का आर्थिक स्वरूप
  5. भारतीय समाज का राजनीतिक स्वरूप
  6. भारतीय समाज का वैज्ञानिक स्वरूप

भारतीय समाज का सामाजिक स्वरूप

भारत में बहुत से जाति,धर्म और वर्ग के लोग रहते हैं तथा जातियों के बंधन बहुत कठोर थे। परंतु स्वतंत्रता के उपरांत हमारी स्वतंत्रता, समानता, समाजवाद और सामाजिक न्याय की नीतियों से यह बंधन कमजोर पड़ गए। सभी जातियों एवं धर्मों के बच्चों को विद्यालय में एक साथ अध्ययन करने के अवसर प्राप्त हुए। प्रत्येक व्यक्ति को बस, रेलवे आदि में यात्रा करने के एक समान अवसर प्रदान किए गए।

भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप
भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

परंतु राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीति को चमकाने के लिए अनेक संगठनों को जन्म दिया। जैसे पिछड़ा वर्ग, दलित वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग आदि। भारतीय समाज में कुछ अन्य बदलाव भी आए। संयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवारों ने ले लिया, जिससे बुजुर्गों के नहीं रहने से नई पीढ़ी में तंबाकू, शराब, गुटखा, पान मसाला आदि का प्रयोग बढ़ गया तथा अपने इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ गई। व्यक्ति अपने ही समुदाय में असुरक्षित हो गए। आज बेरोजगारी की समस्या भी निरंतर बढ़ रही है जिससे अपराधों और अधिक मात्रा में बढ़ रही है। (भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप)

भारतीय समाज का सांस्कृतिक स्वरूप

भारत में अनेक संस्कृतियों के लोग निवास करते हैं जिसमें से कुछ भारतीय संस्कृतिया हैं तथा कुछ विदेशी हैं। भारतीय संस्कृति का अवलोक होता ही जा रहा है। तथा पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। ऐसा केवल सोचना ही है क्योंकि भारतीय संस्कृति अपनी जगह सुरक्षित है। जो परिवर्तन आया है वह रहन-सहन व खानपान के स्तर पर आया है। जो स्वभाविक है, क्योंकि जब भिन्न भिन्न संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं तो ऐसा परिवर्तन होते रहते हैं। संस्कृति की संकीर्णता के स्थान पर संस्कृति में सहिष्णुता का गुण विकसित हो गया। (भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप)

बेसिक शिक्षा
भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

धार्मिक स्वरूप

भारत में अनेक धर्म प्रचलित हैं। इनमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई प्रमुख हैं। इनके भी अपने कई उप संप्रदाय हैं जो आपसी टकराव के कारण भी होते हैं और इस्लाम कट्टरवादी धर्म है। इसलिए इसमें शिया, सुन्नी आपस में लड़ते रहते हैं तब हिंदू और मुस्लिमों के मध्य दंगे होना स्वभाविक हैं। आधुनिक वैज्ञानिक आविष्कारों व शिक्षा के प्रचार से धार्मिक अंधविश्वास के कम आवश्यक हुआ है, जबकि हमारा राष्ट्र धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित है। परंतु राजनीतिक दल अपनी स्वार्थपरता तथा धार्मिक उन्माद फैलाकर अपनी हित साधना चाहते हैं। आप भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप के बारे में पढ़ रहे हैं।

धर्मनिरपेक्षता

भारतीय समाज का आर्थिक स्वरूप

हमारा देश कृषि प्रधान देश है। किसी का तकनीकी एवं वैज्ञानिक की कारण हुआ है, जिससे कृषि उत्पादों में वृद्धि हुई है,खाद्यान्नों के लिए हम आत्मनिर्भर हो गए हैं तथा दर्शकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। हमारे देश में मिश्रित अर्थव्यवस्था है। हमारी उदारीकरण की नीति से देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है तथा कई क्षेत्रों में हमारा औद्योगिक विकास बहुत तीव्र गति से हुआ है, जिससे भारत में नौकरी के अवसर बड़े हैं एवं पिछड़े दलित वर्गों को आरक्षण से उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

आर्थिक स्थिति सुधारने के जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। विलासिता के साधन भी हमारे जीवन का भाग बन चुके हैं। भौतिक सुखों की इच्छा के अनेक बुराइयों जैसे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और समलैंगिकता आदि को जन्म दिया है। भारत में आर्थिक विकास तो हुआ परंतु गरीबों तथा अमीरों के मध्य की खाई निरंतर बढ़ती रही है। गरीबों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।

भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप
भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

भारतीय समाज का राजनैतिक स्वरूप

भारत एक प्रजातंत्र राज्य है। यहां पर जनता द्वारा चुने प्रतिनिधियों द्वारा शासन व्यवस्था चलाई जाती है। परंतु आज राजनीतिक वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि घोटाले खरीद-फरोख्त द्वारा सरकारे बनाना आदि। राजनीति में धर्म, जाति, क्षेत्रीयता का बोलबाला है विधानसभा में गाली-गलौज, मारपीट आदि आम बात हो चुकी है। समाजवाद तो केवल नाम पत्र के लिए है।

सरकार तो पूंजीपतियों के लिए कार्य करती है। लोकतंत्र में जनता तो प्रतिनिधि चुन देती है परंतु वह प्रतिनिधि केवल अपना स्वार्थ ही साधते हैं, उन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं रहता है। यहां मात्र खुशी प्रेम का घोटाला तंत्र है जो सत्ता सुख के लिए कुछ भी कर सकता है।आप Sarkari Focus पर भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप पढ़ रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका
भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप

वैज्ञानिक स्वरूप

भारतीय समाज का आधुनिक स्वरूप विज्ञान व तकनीकी के क्षेत्र में भारत ने तेजी से विकास किया है। जिससे देश का उत्पादन बढ़ा है तथा आर्थिक विकास में प्रगति आई है। परंतु देश में कम अवसर के कारण हमारा ज्ञान विदेशों में जा रहा है, जिसका लाभ व उठा रहे हैं। देश में ब्रेन ड्रेन की समस्या प्रमुख है। परंतु भौतिकतावादी विचारधारा से उपभोक्तावादी संस्कृति बड़ी है और आध्यात्मिकता एवं नैतिकता में गिरावट आई है। भारतीय समाज का यह आधुनिक स्वरूप भारत की उदार व उन्मुक्त संस्कृति का नमूना है, परंतु जो समस्याएं व रूणिया है, इन से मुक्त होना इतना आसान नहीं है। इन्हें सहयोग से ही दूर किया जा सकता है।

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