मध्यकालीन भारत के वंश और उनके शासक

हर्यक वंश (544 से 412 ई पूर्व)

  • बिंबिसार हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था इनकी राजधानी गिरिव्रज थी।
  • बिंबिसार के पुत्र अजातशत्रु ने उसकी हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया।
  • अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था एवं उसकी राजधानी राजगीर में प्रथम बौद्ध संगीति हुई।
  • पाटलिपुत्र की स्थापना का श्रेय उदायिन को जाता है।

नंद वंश (344 से 322 ई पूर्व)

  • इस वंश का संस्थापक महापद्मनंद को माना जाता है।
  • नंद वंश का अंतिम शासक धनानंद था इसी के शासनकाल में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया।

सिकंदर मकदूनिया के शासक फिलिप का पुत्र था जिसने 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया। पंजाब के राजा पोरस ने सिकंदर के साथ झेलम नदी के किनारे हाइडेस्पीज का युद्ध लड़ा परंतु हार गया। बाद में सिकंदर भारत भूमि छोड़कर बेगोली चला गया। जहां 323 ईसा पूर्व में उसकी मृत्यु हो गई।

मौर्य वंश (322 से 184 ई पूर्व)

322 ईसा पूर्व से 184 ईसा पूर्व के काल मौर्य वंश का शासन काल कहा जाता है।

चंद्रगुप्त मौर्य

  • चंद्रगुप्त मौर्य चाणक्य की सहायता से अंतिम नंदवंशी शासक धनानंद को पराजित कर 25 वर्ष की आयु में मगध के सिंहासन पर बैठकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।
  • सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपने राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।

अशोक

  • अपने राज्य अभिषेक के आठवें वर्ष में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया।
  • कलिंग युद्ध में हुए व्यापक नरसंहार ने अशोक को विचलित कर दिया जिसके परिणाम स्वरूप उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया।
  • अशोक ने पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया।
  • अशोक ने सांची के स्तूप का निर्माण भी कराया।

यवन

  • सबसे पहले आक्रमणकारी बैक्ट्रिया के करीब थे जिन्हें यवन के नाम से जाना जाता था।
  • इन्होंने भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाए।

कुषाण

  • कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक था। कनिष्क ने 78 ईसवी में शक संवत प्रचलित किया था।
  • कनिष्क ने बौद्ध धर्म को संरक्षण प्रदान किया था इसके समय में कश्मीर के कुंडल वन में वसुमित्र की अध्यक्षता में चतुर्थ बौद्ध संगीति आयोजित की गई थी।
  • कनिष्क के शासन काल में बौद्ध प्रतिमा की पूजा आरंभ हुई।

गुप्त वंश (275 से 570 ई)

चंद्रगुप्त प्रथम

चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-20 ई• गुप्त संवत प्रारंभ किया। इसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।

समुद्रगुप्त

  • समुद्रगुप्त पर प्रकाश डालने वाली अत्यंत प्रामाणिक सामग्री प्रयाग प्रशस्ति के रूप में उपलब्ध है।
  • समुद्र गुप्त गुप्त वंश का एक महान योद्धा तथा कुशल सेनापति था इसी कारण से भारत का नेपोलियन कहा जाता है।

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