मानवतावाद

मानवतावाद को अंग्रेजी में Humanism शब्द से संबोधित किया जाता है जिसका अर्थ है मानव। मानवतावाद के चिंतन का केंद्र बिंदु मानव है। यह दर्शन मानव के सम्मान मानव की गरिमा और मानव की मात्रा में आस्था रखता है। मानव कल्याण मैं इसका विश्वास है। मानव कल्याण के लिए जो भी तत्व उपयोगी हैं उन सब का संबंध मानवतावाद से है। मानवतावाद के अनुसार मानव से परे कुछ भी नहीं है। इसीलिए परलोक या स्वर्ग जैसी बातों में इसका कोई विश्वास नहीं है।

यदि कोई पढ़ लो क्या फर्क है तो उसे बस इसी पृथ्वी पर स्थापित करना चाहता है। मानवतावाद के अनुसार मानव कल्याण का अर्थ मानव कल्याण से है। इसीलिए परलोक या स्वर्ग जैसी बातों में इसका कोई विश्वास नहीं है यदि कोई पर लोग या स्वर्ग है तो उसे वह इसी पृथ्वी पर स्थापित करना चाहता है।

मानवतावाद
मानवतावाद

मानवतावाद के अनुसार मानव कल्याण का अर्थ सामान्य मानव कल्याण से है। इसीलिए यह अति मानवतावाद का विरोध करता है अर्थात यह किसी भी महापुरुष को मूल रूप से अन्य मांगों से उत्तम और श्रेष्ठ नहीं मानता। सुखी मानवतावाद के लिए प्रत्येक मानव महत्वपूर्ण है प्रत्येक मानव गरिमा पूर्ण है।

अतः यह दर्शन राष्ट्र, जाती प्रजाति, वर्ग, वर्ण, लिंग, धर्म, शिक्षा, आर्थिक और सामाजिक स्थिति आदि के आधार पर मानव मानव में भेदभाव नहीं करता कोई भी मानव किसी दूसरे मानव से श्रेष्ठ नहीं है। इस प्रकार मानवतावाद विश्व नागरिकता के विचार का समर्थक है।

मानवतावाद परिभाषाएं

मानवतावाद की परिभाषा अनेक विद्वानों ने दी है कुछ परिभाषाएं निम्न प्रकार हैं-

मानवतावाद मस्तिष्क की अभिव्यक्ति है जो मानव और उसकी शक्तियों मामलों अलौकिक आकांक्षाओं तथा उसकी भलाई को प्राथमिक महत्व प्रदान करता है।

समग्र मानवता के कल्याण के लिए मानववाद सेवा का दर्शन है इसका विश्वास है कि मानव कल्याण तर्क बुद्धि तथा लोकतंत्र द्वारा संभव है।

लेमन के अनुसार
मानवतावाद

मानवतावाद की विशेषताएं

  1. मानवतावाद इस विश्व को किसी के द्वारा निर्मित नहीं मानता। इसके अनुसार इन को किसी ने नहीं बनाया अपितु इसका अस्तित्व तो स्वता ही है।
  2. मानवतावाद के अनुसार या विश्व धर्म नहीं है अभी तो सत्य है या परिवर्तनशील है और निरंतर विकासशील है।
  3. मानवतावाद जीवन का जैविक दृष्टिकोण स्वीकार करता है और शरीर तथा आत्मा के दो अर्थ वाले परंपरागत विचार को नहीं मानता।
  4. मानवतावाद के अनुसार मानव इस सृष्टि का एक अंग है और स्वस्थ के विकास की प्रक्रिया का परिणाम है। मानो इस विश्व की सर्जनात्मक शक्तियों का उच्चतम फल है जिसके ऊपर और कुछ नहीं है केवल उसकी आकांक्षाएं हैं।
  5. मानवतावाद में मानव के महत्व पर अत्यधिक बल दिया गया है मानव को इस सृष्टि का सबसे सुंदर जीव बताया है। मानव में रचनात्मक तथा गुण विद्यमान है।
  6. मानवतावाद के अनुसार, जीवन के मूल्यों का निर्माण मानवीय संबंधों के फल स्वरुप होता है।
मानवतावाद
  1. विज्ञान में मानव कल्याण में सहयोग दिया है इसलिए मानववाद विज्ञान के महत्व को स्वीकार करता है। यह विचारधारा आधुनिक विज्ञान की उपलब्धियों और वैज्ञानिक विधि को मानव हित के लिए उपयोगी मांगता है।
  2. विज्ञान द्वारा प्राप्त साधनों व उपकरणों के द्वारा मानव वादी इस पृथ्वी पर सुखमय जीवन का निर्माण करना चाहते हैं।
  3. मानवतावाद के अनुसार धर्म मानवीय जीवन पद्धति है जिसके नैतिक मूल्य मानवीय संबंधों पर आधारित है। धर्म की मानव से कोई अलग बाय परिकल्पना नहीं हो सकती। प्रो का आध्यात्मिक तत्व मानव और उसकी श्रेष्ठता ही है।
  4. मानवता बाद में मानव को ना तो केवल एक यंत्र या मशीन माना गया है और ना ही केवल एक जीव माना गया है अपितु उसे असीम संभावनाओं से युक्त माना गया है।
  5. मानवतावाद संस्कृति का पुनर्जागरण करने में विश्वास रखता है।
  6. मानवतावाद के अनुसार सत्यम शिवम सुंदरम के आदर्श को प्राप्त करना मानव का लक्ष्य होना चाहिए।
  7. मानवतावाद विश्व नागरिकता का समर्थक है या विचारधारा विश्व बंधुत्व और विश्व कल्याण के लिए तत्पर है तथा वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रसार करना चाहती है।
  8. मानवतावादी दर्शन भविष्य की विकासोन्मुख प्रक्रिया से संबंधित है।
  9. मानवतावाद दर्शन, विज्ञान, कला और साहित्य के माध्यम से जीवन के नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की खोज करने का प्रयत्न करता है।

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