राग दरबारी उपन्यास के मूल कथा भाव की समीक्षा कीजिए।

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श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास राग दरबारी में वैद्य जी और प्रिंसिपल द्वारा कहने से खन्ना मास्टर से निष्कासन की कथा कही गई है। यह कथा खन्ना के वाइस प्रिंसिपल बनने के प्रार्थना पत्र से शुरू होती है। वैद्य जी इस कॉलेज के प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं तथा उन्हीं के पक्ष के व्यक्ति हैं।

आतिफ अन्ना द्वारा वाइस प्रिंसिपल बनने की इच्छा से उन्हें अपने निरंकुश अधिकारियों पर रोक लगती दिखाई देती है। वे सभी स्वार्थ के वशीभूत होकर खन्ना के विरुद्ध षड्यंत्र करते हैं।

उनका मानसिक शोषण करते हैं। सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देते हैं। परंतु खन्ना का कुछ बिगाड़ नहीं पाते। अतः अंत में बेसुध भारतीय तरीके से खन्ना को स्पष्ट रूप से इस्तीफा देने को कह देते हैं। उसी से उसके विचार नहीं पूछे जाते एवं न ही उसे सोचने का समय दिया जाता है। उसे तत्काल ई त्यागपत्र देने के लिए कहा जाता है ताकि कालेज में भी निरंकुश कार्य कर सकें तथा अपने रिश्तेदारों को भर सके।

वैद्य जी और खन्ना मास्टर की कथा उपन्यास की प्रमुख कथा है, परंतु यह नहीं समझना चाहिए कि इसके कारण उपन्यास के अन्य प्रसंग महत्वहीन है। वस्तुतः अन्य कथा प्रसंगों से इस कथा प्रसंग को प्रेरणा ही मिलती है। इस वातावरण के बिना यह कथा निसहाय ही दिखाई पड़ती है। यह अवश्य है कि या उपन्यास की केंद्रीय कथा है।

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