राग दरबारी के सड़क के किनारे ढाबो का वर्णन कीजिए।

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राग दरबारी उपन्यास में सड़क के किनारे बने ढाबों का चित्रण इस प्रकार है-

चप्पलों लकड़ी और टीम के सड़े टुकड़ों और स्थानीय क्षमता के अनुसार निकलने वाले कबाड़ की मदद से बने हुए ढाबे थे। ढाबों की गिनती नहीं हो सकती थी। सभी ढाबों में जनता का एक पसंदीदा भोजन मिलता था।

जैसे वहां गर्ग टिकट चाय को कई बार इस्तेमाल की हुई पत्ती और खोलते पानी आदि के सहारे बनाया जाता था। उनमें मिठाईयां भी थी। जो दिन रात आंधी पानी और मक्खी मच्छरों के हम लोग का बहादुरी से मुकाबला करती थी।

वह हमारे देसी कारीगरों के हस्त कौशल और उनकी वैज्ञानिक दक्षता का सबूत देती थी। वह बताती थी कि हमें एक अच्छा रेजर ब्लेड बनाने का नुस्खा, भले ना मालूम हो पर कूड़े को स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों में बदल देने की तरकीब सारी दुनिया में अकेले हमही को आती है।

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