रुचि

प्रत्येक व्यक्ति वातावरण की किसी न किसी वस्तु में रुचि रखता है। रुचि से तात्पर्य व्यक्ति के किसी वस्तु या विशेष के प्रति चाहत या लगाव से हैं। जैसे किसी व्यक्ति की क्रिकेट खेलने में, किसी की कविता लिखने में, तो किसी की चित्रकारी में रुचि होती है। रुचि किसी व्यवसाय या पाठ्यक्रम या पाठ्य विषयों की पसंद का नाम है।

रुचि

रुचि किसी भी कार्य के लिए चालक शक्ति तथा प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण कारक का काम देती है। रुचि के कारण व्यक्ति में पूर्ण एकाग्रता और ध्यान केंद्रिता पैदा होती है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में खुशियों का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि एक व्यक्ति क्या और कैसा करेगा, यह बहुत कुछ उसकी रुचियों के द्वारा ही निर्धारित होता है।

इसके अतिरिक्त इस का हमारे जीवन में महत्व इसलिए भी है कि यह सीखने के अभिप्रेरण स्रोत भी है। साधारण शब्दों में हम कह सकते हैं कि रुचि का अर्थ संबंध की भावना से है। जिस वस्तु से हम संबंधित हो जाते हैं या जो वस्तु हमसे संबंधित है उसे हम रूचि की संज्ञा दे देते हैं।

रुचि

रुचि की परिभाषा

भिन्न-भिन्न मनोवैज्ञानिकों ने रुचि के संबंध में भिन्न-भिन्न विचार प्रकट किए हैं। विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने रुचि की निम्न परिभाषाएं दी हैं-

रुचि स्वभाव का गतिशील पक्ष होता है।

ड्रैवर

रुचि वह प्रवृत्ति है जिससे हम किसी व्यक्ति, वस्तु या क्रिया की ओर ध्यान देते हैं, उससे आकर्षित होते हैं या संतुष्टि प्राप्त करते हैं।

गिलफोर्ड

रुचि किसी अनुभव में खो जाने या लिप्त हो जाने तथा उसे जारी रखने की प्रवृत्ति है।

बिंघम

रुचि सफलता की मध्य सूचक है।

स्टैंग

रुचि की विशेषताएं

उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर रूचि की निम्न विशेषताएं हैं-

  1. रुचियां व्यक्ति के व्यक्तित्व का एक अंग होती हैं।
  2. रुचियां सीखी जाती हैं।यह विशेष चीजों या पदार्थों के बारे में व्यक्त की प्रतिक्रियाओं को दर्शाती हैं।
  3. दोषियों को वंशानुक्रम और वातावरण से संबंधित दोनों प्रकार के कारक प्रभावित करते हैं।
  4. आयु वृद्धि के साथ-साथ व्यक्ति की रुचियों में भिन्नता कम होती जाती है।
  5. रुचि कार्य के लिए एक चालक शक्ति है तथा यह व्यक्ति के व्यवहार का एक पक्ष है।
  6. रुचियां स्थाई होती हैं इनमें आयु तथा समय के अनुसार बदलाव आता है।
  7. रुचियां भूतकाल तथा वर्तमान काल से संबंधित होती हैं
  8. रुचिया का वस्तु परम मापन नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका संबंध अधिकतर भावनाओं से होता है।
  9. व्यावसायिक तथा अव्यवसायिक दोनों प्रकार की रुचियां साथ साथ चलती हैं।
रुचि

रूचियों के प्रकार

रुचियों के प्रकार के संबंध में अनेक अध्ययन किए गए हैं। रुचियों के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं।

  1. अभिव्यक्ति रुचियां – इस प्रकार की रुचियां वे होती हैं जोकि व्यक्ति द्वारा पूछने पर स्वयं बताई जाती है, अर्थात इस प्रकार की रुचियां व्यक्ति के द्वारा शब्दों या भाषा के द्वारा व्यक्त की जाती हैं। इस प्रकार की रुचियां अविश्वसनीय होती हैं।
  2. प्रदर्शित रुचियां – इस प्रकार की रुचियां व्यक्तियों के व्यवहार द्वारा प्रदर्शित होती हैं। जैसे यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार द्वारा यह प्रदर्शित हो कि उसकी रूचि सिनेमा, क्रिकेट या घूमने में है तो यह व्यक्त या प्रदर्शित रूचि कहलाती है।
  3. ज्ञात रुचियां – ये वे रुचियां हैं जो कि विभिन्न रुचि प्रपत्रों या मानकीकृत रुचि परीक्षणों द्वारा ज्ञात होती है।
  4. परीक्षित रुचियां – जिन रूचियों का मापन निष्पत्ति परीक्षणों या वस्तुनिष्ठ परीक्षणों द्वारा किया जाता है, उन्हे परीक्षित रुचियां कहते हैं।
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