लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य – लोकतंत्र की सफलता उसके नागरिकों पर निर्भर करती है। लोकतंत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं सामाजिक दोनों प्रकार के विकास पर समान बल देता है। इस अपेक्षा के साथ ही उसे व्यक्ति समाज और राष्ट्र सभी का हित हो। उसके अनुसार शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य होनी चाहिए –

  1. स्वास्थ्य रक्षा एवं स्वास्थ्यवर्धन
  2. मानसिक विकास
  3. वस्तु के सामाजिक विकास और नेतृत्व की शिक्षा
  4. सांस्कृतिक विकास
  5. नैतिक एवं चारित्रिक विकास
  6. लोकतंत्र और लोकतंत्र की नागरिकता की शिक्षा
  7. राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति
लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

1. स्वास्थ्य रक्षा एवं स्वास्थ्यवर्धन

लोकतंत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व का आदर करता है और व्यक्ति के लिए स्वस्थ्य शरीर पहली आवश्यकता है। अतः लोकतंत्र मनुष्य को अपने स्वास्थ्य की रक्षा एवं पुस्तक संवर्धन करने में प्रशिक्षित करने पर बल देता है और इसे शिक्षा का एक उद्देश्य मानता है। हम जानते हैं कि उत्तम शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए उचित आहार-विहार और उचित आचार विचार की आवश्यकता होती है। लोकतंत्र इनकी शिक्षा पर बल देता है।

2. मानसिक विकास

लोकतंत्र की सफलता उसके नागरिकों पर निर्भर करती है, उनके ज्ञान एवं कौशल पर निर्भर करती है। उनकी सूझ बूझ और चातुर्य पर निर्भर करती है। लोकतंत्र व्यक्तियों में इनके विकास पर बल देता है। लोकतंत्र के विज्ञान एवं कौशल की प्राप्ति में विश्वास नहीं करता वह ज्ञान एवं कौशल में व्यक्ति समाज और राष्ट्र के हित में प्रयोग करने का विश्वास करता है और इसे आधुनिक शिक्षा का मानसिक विकास का उद्देश्य कहा जाता है।

गृहकार्य, सतत शिक्षा
लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

3. वस्तु के सामाजिक विकास और नेतृत्व की शिक्षा

लोकतंत्र व्यक्ति और समाज दोनों का समान आदर की दृष्टि से देखता है और दोनों के सनकी विकास पर बल देता है लोकतंत्र का विश्वास है कि जब तक कोई समाज व्यक्ति के व्यक्तित्व योग्यताओं का उत्तम निकालकर उन का अधिकतम उपयोग नहीं करता तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और जब तक समाज का विकास नहीं होता व्यक्ति के अपने विकास के अवसर सुलभ नहीं हो सकते और यह बात अपने में सही है।

4. सांस्कृतिक विकास

लोकतंत्र का प्राचीन के प्रति मोह अथवा अर्वाचीन के प्रति आग्रह नही करता लेकिन वह मनुष्य और उसकी सभ्यता एवं संस्कृति का आदर करता है और इसलिए प्रत्येक मनुष्य को उसकी अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण एवं उसमें विकास करने की स्वतंत्रता देता है।

5. नैतिक एवं चारित्रिक विकास

लोकतंत्र शासन की एक प्रणाली ही नहीं है या जीवन की एक शैली है इसके अपने कुछ सिद्धांत है नियम हैं और लोकतांत्रिक समाज के सभी व्यक्तियों को इनका पालन करना होता है और नियमों के प्रति आस्था और उनके पालन को नैतिकता कहते हैं और इन नियमों के पालन की आंतरिक शक्ति को चरित्र कहते हैं।

6. लोकतंत्र और लोकतंत्र की नागरिकता की शिक्षा

आज संसार के प्रायः सभी देशों में शिक्षा की व्यवस्था करना राज्य का उत्तरदायित्व है तब राज्य का व्यक्तितयो को शिक्षा द्वारा शासन तंत्र की शिक्षा देना स्वाभाविक है लोकतंत्र राज्य लोकतंत्र की शिक्षा और तदनकुल नागरिकता की शिक्षा देने पर बल देते हैं। लोकतंत्र के तीन मूल सिद्धांत है स्वतंत्रता समानता और भ्रतत्व। सर्वप्रथम तो लोकतंत्र अपने नागरिकों को इनकी शिक्षा देने पर बल देता है।

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लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

7. राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति

लोकतंत्र एक प्रगतिशील राजनीति विचारधारा है। यह जानते हैं कि समाज अथवा रास निरंतर विकास करते हैं और उनकी आवश्यकताएं और आकांक्षाएं सदैव बदलती रहती हैं इस की दृष्टि से शिक्षा का एक उद्देश्य अथवा कार्य समाज की बदलती हुई आवश्यकता एवं आकांक्षाओं की पूर्ति करना होना चाहिए इसके लिए उसे अपनी भाभी नागरिकों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करना चाहिए।

सहानुभूति और सहयोग पूर्ण जीवन के आधार पर विकसित की गई एक अधिकता प्रेरणा होती है जिसके कारण मनुष्य सामाजिक व्यवहार करता है विद्यालयों में इसका प्रशिक्षण देने के लिए यह आवश्यक है कि बच्चों का पर्यावरण भयभीत हो बच्चों को अपने विकास की स्वतंत्रता हो ऐसा पर्यावरण हो जिससे बच्चे अपने समस्त कार्य से एक दूसरे के सहयोग से संपादित करें अध्यापक भी सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करें बच्चों से प्रेम करें और उनकी प्रत्येक पग पर सहायता करें।

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