लोकसभा रचना संगठन कार्य

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लोकसभा रचना संगठन कार्य – लोकसभा संसद का प्रथम और लोकप्रिय तथा जनता प्रतिनिधित्व करने वाला सदन है। इसे निम्न सदन भी कहा जाता है। यह सदन संसद के दूसरे सदन राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है।

लोकसभा रचना

लोकसभा रचना संगठन में निम्न अंग है-

  • लोकसभा सदस्य संख्या
  • लोकसभा सदस्यों का निर्वाचन
  • लोकसभा सदस्यों की योग्यताएं
  • लोकसभा सदस्यों का कार्यकाल
  • लोकसभा पदाधिकारी
लोकसभा रचना
लोकसभा रचना

लोकसभा रचना में सदस्य संख्या

मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 500 निश्चित की गई थी। परंतु समय-समय पर संविधान संशोधनों द्वारा इस संख्या में वृद्धि की जाती रही है। 31 वें संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा की सदस्य संख्या 552 कर दी गई है। इसमें 530 सदस्य भारतीय संघ के राज्य तथा 20 सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं तथा 2 सदस्य आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। वर्तमान में इनकी संख्या 545 है।

लोकसभा रचना – सदस्यों का निर्वाचन

लोकसभा के सदस्यों के निर्वाचन के लिए पागल,दिवालिया और फौजदारी के अपराध में किसी न्यायालय द्वारा अपराधी घोषित किए गए व्यक्तियों को छोड़कर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले वे सबस्त्री पुरुष मतदान करते हैं, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और उनके नाम मतदाता सूची में अंकित हैं।

इस प्रकार लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष एवं गुप्त मतदान पद्धति से जनता द्वारा किया जाता है। एक निर्वाचन क्षेत्र में एक ही सदस्य निर्वाचित होता है। निर्वाचित सदस्यों के अतिरिक्त आंग्ल भारतीय समुदाय के दो सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जा सकते हैं। लोकसभा के सदस्यों को सांसद या संसद सदस्य कहा जाता है।

लोकसभा रचना
लोकसभा रचना

लोकसभा रचना में सदस्यों की योग्यताएं

लोकसभा की सदस्यता के उम्मीदवार के लिए संविधान के अनुच्छेद 102 के अनुसार निर्धारित योग्यता इस प्रकार है-

  1. भारत का नागरिक हो।
  2. कम से कम 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  3. किसी सक्षम न्यायालय द्वारा पागल घोषित ना कर दिया गया हो तथा दिवालिया ना हो एवं फौजदारी के अपराध में दंडित ना किया गया हो।
  4. संसद के किसी कानून द्वारा अयोग्य ठहरा दिया गया हो।
  5. भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के अंतर्गत कोई लाभ का पद धारण ना किए हुए हो।
  6. इन योग्यताओं के अतिरिक्त बाबत संसद द्वारा पारित जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की सभी शर्तों को पूरी करता हो।

लोकसभा रचना सदस्यों का कार्यकाल

संविधान के अनुच्छेद 83 ख के अनुसार लोकसभा का कार्यकाल प्रथम बैठक की तिथि से 5 वर्ष निर्धारित है। 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होते ही लोकसभा भंग हो जाती है परंतु इस अवध के पूर्व भी प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग किया जा सकता है। आपातकालीन घोषणा होने पर लोकसभा का कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ाया जा सकता है।

लोक सभा का अधिवेशन राष्ट्रपति बुलाता है। लोक सभा की बैठकों में 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपना त्यागपत्र देना पड़ता है।

लोकसभा पदाधिकारी – लोकसभा रचना

संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा के सदस्यों में से ही एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष निर्वाचित किए जाने की व्यवस्था है। इन दोनों पदाधिकारियों का कार्यकाल 5 वर्ष होता है इससे पूर्व भी वे स्वेच्छा से अपना पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। अध्यक्ष द्वारा उपाध्यक्ष को और उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्ष को त्याग पत्र प्रस्तुत किए जाने की व्यवस्था है।

इसके अतिरिक्त उन्हें 14 दिन के पूर्व सूचना पर लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाया जा सकता है। अध्यक्ष को ₹1,40,000 मासिक वेतन तथा अन्य सुविधाओं में निशुल्क आवास और कैबिनेट मंत्रियों को प्राप्त होने वाले समस्त सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

लोकसभा कार्य
लोकसभा रचना

लोकसभा कार्य व शक्तियां

जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित भारतीय संसद का निम्न सदन लोकसभा जनता का वास्तविक प्रतिनिधित्व करने वाला लोकप्रिय सदन है। लोकसभा कार्य और शक्तियों का वर्णन निम्नवत है-

  1. व्यवस्था पालिका (कानून-निर्माण) संबंधित कार्य व शक्तियां
  2. कार्यपालिका संबंधी कार्य व शक्तियां
  3. वित्त संबंधी कार्य व शक्तियां
  4. संविधान संशोधन संबंधी कार्य शक्तियां
  5. निर्वाचन संबंधी कार्य और शक्तियां
  6. पदच्युत संबंधी कार्य और शक्तियां
  7. लोकसभा अन्य कार्य और शक्तियां

1. व्यवस्था पालिका (कानून-निर्माण) संबंधित लोकसभा कार्य व शक्तियां

भारतीय संसद संघीय सूची, समवर्ती सूची, अवशिष्ट विषयों तथा कुछ विषयों में राज्य सूची के विषयों पर कानून का निर्माण कर सकती है। साधारण विधेयक और संविधान संशोधन विधेयकों के संबंध में संविधान द्वारा लोकसभा और राज्यसभा दोनों को समान शक्ति प्रदान की गई है।

परंतु साधारण विधायकों के संबंध में संसद के इन दोनों सदनों में गतिरोध होने की स्थिति में इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाए जाने की व्यवस्था है। जिसमें साधारण बहुमत द्वारा विधेयक को पारित किया जाता है। क्योंकि लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या राज्य सभा के सदस्यों की कुल संख्या से लगभग दोगुनी से भी अधिक होती है। अतः निर्णय लोकसभा के पक्ष में ही होता है।

2. कार्यपालिका संबंधी लोकसभा कार्य व शक्तियां

संविधान के अनुसार संघीय कार्यपालिका तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद संसद के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदाई है। अतः उसे लोकसभा के नियंत्रण में रहते हुए ही कार्य करना पड़ता है। लोकसभा के सदस्य मंत्रिपरिषद के सदस्यों से सरकारी नीति व कार्यों के संबंध में प्रश्न तथा पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं और उनकी आलोचना कर सकते हैं। वह काम रोको प्रस्ताव व निंदा का प्रस्ताव पारित करके सरकारी नीतियों की गलतियों को प्रकाश में ला सकते हैं और सरकार की निंदा कर सकते हैं।

3. वित्त संबंधी लोकसभा कार्य व शक्तियां

संविधान द्वारा लोकसभा को निर्विवाद रूप से वित्तीय शक्ति प्रदान की गई है। वित्त क्षेत्र में वित्त विधेयक को बजट और अनुदान वाद की स्वीकृति के संबंध में अंतिम निर्णय की शक्ति लोकसभा को ही प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार वित्त विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तावित किए जा सकते हैं, राज्यसभा में नहीं। लोकसभा में पारित हो जाने के पश्चात वित्त विधेयक को लोकसभा में भेजा जाता है।

लोकसभा कार्य
लोकसभा रचना

4. संविधान संशोधन संबंधी लोकसभा कार्य व शक्तियां

लोकसभा को राज्यसभा के साथ मिलकर संविधान में संशोधन की शक्ति प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 386 की व्यवस्था के अनुसार संशोधन का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किया जा सकता है। जिसे राज्य सभा के बाद लोकसभा भी अपने कुल बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों को दो-तिहाई बहुमत से पारित करती है। संविधान संशोधन के प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में मतभेद होने की स्थिति में प्रस्ताव आस्वीकार समझा जाता है।

5. निर्वाचन संबंधी लोकसभा कार्य और शक्तियां

संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार लोकसभा के निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा व राज्य-विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रपति का निर्वाचन करते हैं। इसके अतिरिक्त लोकसभा के सदन राज्यसभा के सदस्यों के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति का निर्वाचन करते हैं।

6. पदच्युत संबंधी लोकसभा कार्य और शक्तियां-

लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाकर उसे उसके पद से हटा सकती है।महाभियोग दोनों सदनों में से किसी एक सदन में लगाया जाता है और जब वह सदन अपने दो तिहाई बहुमत से उसे स्वीकार कर लेता है तो दूसरा सदन उसकी जांच करके अपने दो तिहाई बहुमत से उस पर अपना अंतिम निर्णय देता है।

उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए यदि राज्यसभा अपने सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे तो लोकसभा भी अपने सदस्यों द्वारा उसी प्रकार पारित प्रस्ताव द्वारा राजसभा के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति को भी उसके पद से हटा सकती है।

7. अन्य लोकसभा कार्य व शक्तियां

लोकसभा की अन्य शक्तियों में, राष्ट्रपति द्वारा जारी की गई आपातकालीन घोषणा की एक माह के भीतर स्वीकृति प्राप्त होना आवश्यक है अन्यथा इस प्रकार की घोषणा 1 माह के पश्चात स्वयं ही समाप्त हो जाती है।इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति द्वारा दी जाने वाली सर्वक्षमा के लिए भी संसद से स्वीकृत लेना आवश्यक होता है।

लोकसभा रचना कार्य

लोकसभा कार्य

लोकसभा की website क्या है ?

लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी होती है?

सभा के सदस्‍यों की अधिकतम संख्‍या 552 है।

लोकसभा रचना में सदयों का कार्यकाल कितना होता है?

5 वर्ष

आपातकालीन घोषणा में लोकसभा का कार्यकाल कितना होता है?

आपातकालीन घोषणा होने पर लोकसभा का कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ाया जा सकता है।

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