वर्धा योजना की असफलता के कारण

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सैद्धांतिक दृष्टि से वर्धा योजना आदर्श योजना मानी जा सकती है किंतु व्यवहारिक रूप से यह योजना पूर्णतः असफल रही है। इसकी असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे।

1. योजना की व्यापकता का अभाव

वर्धा शिक्षा योजना को राष्ट्रीय योजना कहा जाता है किंतु यह केवल ग्रामीण तथा प्राथमिक स्तर के बालकों के लिए ही थी, शहरी तथा अन्य स्तर के बालकों के लिए नहीं।

2. उच्च शिक्षा के संबंध न होना

वर्धा शिक्षा पूर्णतः प्राथमिक स्तर के बालकों के लिए बनाई गई थी। इसके 7-14 वर्ष के ग्रामीण बालकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई थी माध्यमिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा से संबंधित ना होने के कारण इसकी उपयोगिता डांसिंग अप्रासंगिक लगने लगी और इसे लागू न किया जा सका।

3. हस्त कौशलों पर अधिक बल

वर्धा शिक्षा योजना में हस्त कौशलों पर अधिक बल दिया गया इसे पाठ्यचार्य का केंद्रीय विषय बनाया गया और इसी के माध्यम से अन्य विषयों की शिक्षा देने पर बल दिया गया। स्कूलों समय 5 घंटे 30 मिनट में 3 घंटे 20 मिनट हस्त कौशलों के लिए निर्धारित किया गया। केवल हस्त कौशल के विकास के बालक का सर्वांगीण विकास नहीं किया जा सकता।

वैदिककालीन शिक्षाबौद्धकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षातक्षशिला विश्वविद्यालय
मैकाले का विवरण पत्र 1835लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
एडम रिपोर्टवुड का घोषणा पत्र
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीतिहण्टर आयोग
सैडलर आयोग 1917बुनियादी शिक्षा – वर्धा शिक्षा योजना
वर्धा योजना की असफलता के कारणसार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
विश्वविद्यालय शिक्षा आयोगमुदालियर आयोग 1952
त्रिभाषा सूत्रकोठारी आयोग 1964
शिक्षा का राष्ट्रीयकरणप्रौढ़ शिक्षा अर्थ आवश्यकता उद्देश्य क्षेत्र
राष्ट्रीय साक्षरता मिशनविश्वविद्यालय के कार्य
उच्च शिक्षा के उद्देश्यउच्च शिक्षा समस्याएं
शैक्षिक स्तर गिरने के कारणदूरस्थ शिक्षा अर्थ परिभाषा
मुक्त विश्वविद्यालयसंतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता
परीक्षा सुधार आवश्यकताप्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

4. कच्चे माल का अपव्यय

बेसिक शिक्षा योजना में बालक को किसी कुटीर उद्योग की शिक्षा देने पर बल दिया गया था किंतु जिसकी शिक्षा विद्यालय में देने की व्यवस्था थी। किंतु छोटे-छोटे बच्चों से उत्पादन की आशा करना कोरी कल्पना का विषय है क्योंकि जो कुछ बच्चे विद्यालय में बनाना सीखेंगे वह उपयोग के लायक नहीं होता न उसे बाजार में बेचा जा सकता है। इस योजना में कच्चे माल की बर्बादी के अतिरिक्त कुछ भी हासिल ना होगा, अतः इसे सफलतापूर्वक लागू नहीं किया जा सका।

5. समय व श्रम का अपव्यय

प्राथमिक स्तर के बालकों को हस्त कौशलों में दक्षता प्रदान करना संभव नहीं है। इस योजना के द्वारा ना तो किसी बच्चे को किसी हस्त कौशल में दक्ष किया जा सका और न इसके द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बाजार में विक्रय कर स्कूल का व्यय निकाला जा सका। इसमें कच्चे माल, समय तथा श्रम का अपव्यय ही हो रहा था।

6. शिक्षण विधि तथा अध्यापकों की अनुपलब्धता

बेसिक शिक्षा योजना की असफलता का सबसे प्रमुख कारण इसकी कोई विशेष शिक्षण विधि पाठ्यक्रम तथा शिक्षकों का ना होना था जिसके अभाव में या पूर्णत: असफल रही।

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