वुड का घोषणा पत्र

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वुड का घोषणा पत्र – 19 जुलाई 1854 को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से एक नया शिक्षा संबंधी घोषणा पत्र आया। इस घोषणा पत्र को वुड का घोषणा पत्र कहा गया। इस घोषणा पत्र का मुख्य कारण भारतियों की शिक्षा सम्बंधी मांग थी। 1853 में कंपनी को ब्रिटिश सरकार की ओर से एक आज्ञा पत्र प्राप्त हुआ जिसके कारण कंपनी के प्रशासन व विधान में कुछ महत्वपूर्ण व आवश्यक परिवर्तन किए गए। इस प्रकार कंपनी को कुछ भारतीय मांग के कारण व कुछ ब्रिटिश सरकार के दबाव के कारण शिक्षा संबंधी कुछ सुधार करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

वुड का घोषणा पत्र
वुड का घोषणा पत्र

इस घोषणा पत्र में वुड ने भारतीय जनता की शिक्षा का संपूर्ण बार कंपनी के ऊपर रखा तथा कंपनी को यह बताया गया कि भारतीयों को शिक्षित करना कंपनी के प्राथमिक उद्देश्य में से एक है। इन विद्वानों ने भारतीय साहित्य, शिक्षा तथा समाज का गहन अध्ययन किया था तथा अपनी रिपोर्ट में उसका सही मूल्यांकन प्रस्तुत किया था। उन्होंने संस्कृत, अरबी, फारसी, साहित्य को भारतीय शिक्षा के लिए आवश्यक बताया।

मैकाले का विवरण पत्र 1835

वुड का घोषणा पत्र

वुड के घोषणा पत्र के प्रमुख सुझाव निम्न है-

  1. शिक्षा का लक्ष्य – इस घोषणापत्र में कहा गया है कि भारतीयों को जीवन उपयोगी शिक्षा प्रदान की जाए ताकि उनका बौद्धिक नैतिक सामाजिक तथा आर्थिक स्तर ऊंचा उठ सके तथा ज्ञान से उनकी प्रशासनिक क्षमता का भी विकास हो। इससे कुशल व योग्य कर्मचारी शासन को मिलेंगे जिससे प्रशासन सुव्यवस्थित व दृढ़ बनें।
  2. शिक्षा का माध्यम – इस घोषणापत्र के सुझावों के अनुसार अंग्रेजी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं को भी शिक्षा का माध्यम बनाया गया। अंग्रेजी उच्च शिक्षा विज्ञान व पाश्चात्य साहित्य को जानने के लिए आवश्यक थी।
  3. पाठ्यक्रम – भारतीय शिक्षा के पाठ्यक्रम में अंग्रेजी भाषा पाश्चात्य साहित्य व विज्ञान संबंधी विषयों के साथ साथ संस्कृत व अरबी भाषा के पाठ्यक्रम को भी शामिल किया गया। पाठ्यक्रम में कानून से संबंधित शिक्षा भी शामिल की गई।
  4. शिक्षा विभाग – इस घोषणा पत्र में दिए गए सुझाव के अनुसार प्रत्येक प्रांत में जन शिक्षा विभाग की स्थापना की जाए। इसका अध्यक्ष जन शिक्षा संचालक हो। इसके अधीन उपसंचालक व निरीक्षक हूं।
  5. विश्वविद्यालय शिक्षा – इस घोषणापत्र का एक प्रमुख सुझाव यह था की उच्च शिक्षा के लिए मुंबई तथा कोलकाता में लंदन के समान विश्वविद्यालयों की स्थापना की जाए। इन विश्वविद्यालयों में कानून व इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो। इन विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं की व्यवस्था हो तथा छात्रों को उपाधियां वितरित की जाए।
वुड का घोषणा पत्र
वुड का घोषणा पत्र

वुड का घोषणा पत्र का प्रभाव

वुड का घोषणा पत्र में निहीत शिक्षा नीति का भारतीय शिक्षा पर कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़े।

घोषणापत्र का तत्कालीन प्रभाव

  1. सन् 1856 तक सभी प्रांतों में शिक्षा विभागों की स्थापना हो गई।
  2. सभी प्रांतों में सहायता अनुदान प्रणाली का शुभारंभ हो गया।
  3. सभी स्तर के स्कूलों तथा कालेजों की स्थापना हो गई।
  4. सन् 1857 ईसवी में कोलकाता तथा मुंबई विश्वविद्यालयों की स्थापना हो गई।

घोषणापत्र का दीर्घकालीन प्रभाव

  1. शिक्षा राज्य का दायित्व माना जाने लगा तथा राज्य के नियंत्रण में हो गई।
  2. सहायता अनुदान प्रणाली को अनवरत किया गया।
  3. शिक्षा संगठन को विभिन्न स्तरों में विभाजित किया गया।
  4. भारतीय शिक्षा के उद्देश्य आधुनिक भारतीय परिप्रेक्ष्य में निश्चित हुए।
  5. शिक्षा की पाठ्यचर्या में पाश्चात्य ज्ञान विज्ञान का विस्तार।
  6. उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी।
  7. क्रमबद्ध विद्यालयों की निरंतरता
  8. जन शिक्षा, स्त्री शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा और अध्यापक शिक्षा में प्रगति।
वैदिककालीन शिक्षाबौद्धकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षातक्षशिला विश्वविद्यालय
मैकाले का विवरण पत्र 1835लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
एडम रिपोर्टवुड का घोषणा पत्र
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीतिहण्टर आयोग
सैडलर आयोग 1917बुनियादी शिक्षा – वर्धा शिक्षा योजना
वर्धा योजना की असफलता के कारणसार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
विश्वविद्यालय शिक्षा आयोगमुदालियर आयोग 1952
त्रिभाषा सूत्रकोठारी आयोग 1964
शिक्षा का राष्ट्रीयकरणप्रौढ़ शिक्षा अर्थ आवश्यकता उद्देश्य क्षेत्र
राष्ट्रीय साक्षरता मिशनविश्वविद्यालय के कार्य
उच्च शिक्षा के उद्देश्यउच्च शिक्षा समस्याएं
शैक्षिक स्तर गिरने के कारणदूरस्थ शिक्षा अर्थ परिभाषा
मुक्त विश्वविद्यालयसंतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता
परीक्षा सुधार आवश्यकताप्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

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