वैज्ञानिक पूछताछ प्रतिमान

यह प्रतिमान वैज्ञानिक विधि पर आधारित है जो विद्यार्थियों को उसके विद्वता पूर्ण पूछताछ के लिए प्रशिक्षित करता है। इसमें विद्यार्थियों को पूछताछ की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जाती है, जिससे वे अनुशासित ढंग से प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित होते हैं। इस प्रकार की पूछताछ से विद्यार्थी विषय संबंधी नए आयामों की खोज करते हैं जिससे विद्यार्थियों को संतुष्टि होती है और इससे इनकी जिज्ञासा में आनंद का अनुभव करते हैं।

प्रतिमान के प्रमुख तत्व

इस प्रतिमान के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं –

  • लक्ष्य
  • संरचना
  • सामाजिक प्रणाली
  • सहायक प्रणाली
  • उपयोग

लक्ष्य

इस प्रतिमान का लक्ष्य छात्रों में खोज एवं आंकड़े के विश्लेषण में दक्षता एवं कौशल विकसित होता है। जिससे वे स्वयं घटनाओं की व्याख्या कर सके तथा उनमें विभिन्न तत्वों के पारस्परिक संबंध हो सके एवं सत्यता का पता लगा सके।

संरचना

इस प्रतिमान की संरचना की निम्नलिखित 5 अवस्थाएं हैं

  • समस्या का प्रस्तुतीकरण – इसमें शिक्षक के निर्देशन में विद्यार्थी समस्या का चयन करते हैं।
  • समस्या संबंधी प्रयोग करना – समस्या से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी ऐसा प्रश्न पूछता है, जिनका उत्तर शिक्षक केवल हां या ना में देता है इसी प्रकार विद्यार्थियों की पूछताछ उस समय तक चलती रहती है, जब तक विद्यार्थी प्रस्तुत घटना से समस्या से स्पष्टीकरण पर नहीं पहुंच जाते।
  • छात्रों एवं शिक्षकों के समस्या समाधान के लिए प्रयास – इसमें विद्यार्थी किसी भी वस्तु या उससे संबंधित प्रत्यक्ष परीक्षण कर के नेतृत्व से परिचित होने के लिए उन तत्वों का संकलन करते हैं इसके बाद वे परिकल्पना ओं का निर्माण करते हैं तथा उनके आधार पर कारण प्रभाव संबंधों की परीक्षा करते हैं।
  • सूचनाओं का संगठन – इसमें सूचनाओं व आंकड़े एकत्रित करके संगठित किया जाता है शिक्षक छात्रों को एकत्रित कर आंकड़ों से परिणाम निकल जाता है और परिणामों की व्याख्या करता है।
  • पूछताछ प्रक्रिया का विश्लेषण – इसमें विद्यार्थियों को उसकी पूछताछ प्रक्रिया का विश्लेषण करने के लिए कहा जाता है शिक्षक इस प्रक्रिया का मूल्यांकन करता है और एक सही निर्णय लेता है जिससे वह निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करता है।

सामाजिक प्रणाली

शिक्षक इस प्रतिमान में छात्रों को पूछताछ के लिए प्रेरित करता है तथा उस उनको सही दिशा प्रदान करता है। इस प्रतिमान में शिक्षक तथा छात्र दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक छात्रों के मध्य सहयोग का उचित वातावरण होता है।

सहायक प्रणाली

इस प्रतिमान में छात्र समस्या समाधान के माध्यम से अपना कार्य कितने और किस सीमा तक प्रभावशाली ढंग से करता है।

उपयोग

इस प्रतिमान में शिक्षक भौतिक विज्ञान शिक्षण हेतु किया गया था परंतु इस प्रतिमान का प्रयोग अन्य विषयों के लिए भी किया जाने लगा है।

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