वैदिककालीन शिक्षा गुण व दोष

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वैदिककालीन शिक्षा – धर्म और धार्मिक मान्यताएं भारतीय शिक्षा के पीछे हजारों वर्षों की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक परंपरा का आधार हैं। प्राचीन काल में शिक्षा का आधार क्रियाएं थी। वैदिक क्रिया ही शिक्षा का प्रमुख आधार थी।समस्त जीवन धर्म से चलायमान था। भारतीय शिक्षा का प्रमुख ऐतिहासिक साक्ष्य वेद है। वैदिक युग में शिक्षा व्यक्ति के चहुंमुखी विकास के लिए थी।

वैदिककालीन शिक्षा गुण

वैदिक शिक्षा प्रणाली के प्रमुख गुण निम्नलिखित थे।

  1. वैदिककालीन शिक्षा निशुल्क थी, गुरुकुल में शिष्यों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था। उनके आवास, वस्त्र तथा भोजन की व्यवस्था भी निशुल्क होती थी। वैदिक काल की शिक्षा पर होने वाले व्यय की पूर्ति राज, धनाढ्य लोगों तथा भिक्षाटन एवं गुरु दक्षिणा से की जाती थी।
  2. वैदिककालीन शिक्षा द्वारा मनुष्यों का शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक, सांस्कृतिक, व्यवसायिक तथा आध्यात्मिक विकास किया जाता था।
  3. वैदिककालीन शिक्षा की पाठ्यचर्या व्यापक थी। वैदिक काल में मनुष्य के प्राकृतिक सामाजिक और आध्यात्मिक तीनों पक्ष के विकास पर बल दिया जाता था। और इसके लिए शिक्षा की पाठ्यचर्या में भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों प्रकार के विषयों को सम्मिलित किया जाता था।
  4. वैदिककालीन शिक्षा में उत्तम शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाता था। अनुकरण, व्याख्यान, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तर, तर्क, विचार-विमर्श, चिंतन, मनन, सिद्धिध्यासन, प्रयोग एवं अभ्यास, नाटक एवं कहानी इत्यादि वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक विधियों का विकास किया जा चुका था।
  5. वैदिक काल में गुरु तथा शिष्यों का जीवन अत्यंत संयमित और अनुशासित होता था। उनकी जीवनशैली सादा जीवन उच्च विचार पर आधारित थी।
  6. वैदिककालीन शिक्षा में गुरु तथा शिष्यों के मध्य मधुर संबंध थे। दोनों के मध्य स्नेह तथा श्रद्धा का संबंध था। दोनों एक दूसरे के प्रति त्याग की भावना रखते थे तथा शिक्षकों के बीच मानस पिता पुत्र के संबंध थे।
  7. वैदिककालीन शिक्षा में गुरुकुलों का पर्यावरण अति उत्तम था। गुरुकुल प्रकृति की स्वच्छ वातावरण से युक्त स्थलों में होते थे जहां जन कोलाहल नहीं था तथा जल तथा वायु शुद्ध प्राप्त होती थी।
  8. वैदिक कालीन जीवन पद्धति संस्कार प्रधान थी वैदिक कालीन शिक्षा उपनयन संस्कार से प्रारंभ होती थी तथा समावर्तन संस्कार से पूरी होती थी।
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वैदिककालीन शिक्षा

वैदिककालीन शिक्षा दोष

वैदिककालीन शिक्षा में अनेक गुण विद्यमान थे, इसके बावजूद इस शिक्षा प्रणाली में निम्नलिखित दोष भी पाए गए। जो कि निम्न प्रकार हैं

  1. वैदिककालीन शिक्षा में राज्य का नियंत्रण या उत्तरदायित्व नहीं था। तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पूर्णत: व्यक्तिगत नियंत्रण में थी। जो पूर्णत: गुरुकुलों तक सीमित थी अतः इससे जन शिक्षा की अवहेलना होती थी।
  2. वैदिककालीन शिक्षा में आय की सुनिश्चित एवं विधिवत् व्यवस्था नहीं थी। यद्यपि वैदिककालीन शिक्षा का व्यय राजा, धनी लोग, भीक्षाटन तथा गुरु दक्षिणा से पूरा किया जाता था। किंतु इन सब का कोई निश्चित समय, मात्रा के ना होने से असमंजस की स्थिति रहती थी।
  3. वैदिककालीन शिक्षा में रटने पर विशेष बल दिया जाता था। यद्यपि उस समय उत्तम शिक्षा विधियों का विकास हो चुका था, किंतु लिखने की समुचित व्यवस्था का अभाव होने के कारण रखने पर विशेष बल दिया जाता था।
  4. वैदिककालीन शिक्षा की अनुशासन व्यवस्था अत्यंत कठोर थी। उस समय अनुशासन से तात्पर्य शारीरिक, मानसिक और आत्मिक तीनों प्रकार के संयम से लिया जाता था। आहार-विहार तथा आचार-विचार की शुद्धता तथा ब्रह्मचर्य व्रत के पालन पर विशेष जोर दिया जाता था।
  5. उस समय स्त्री शिक्षा की समुचित शिक्षा का अभाव था। यूं तो वैदिक काल स्त्रियों की शिक्षा पर रोक नहीं थी पर कुछ विदुषी महिलाएं भी थी जिनकी संख्या अत्यंत निम्न थी।
  6. वैदिक कालीन शिक्षा में धार्मिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता था। वैदिक कालीन शिक्षा धर्म प्रधान एवं कर्मकांड पर आधारित थी। जिसे एक वर्ग विशेष के लोगों का एकाधिकार माना जाता था।

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