शिक्षा अर्थ परिभाषा प्रकृति विशेषताएं

शिक्षा अपने आप में एक विस्तृत शब्द है जिसके माध्यम से कोई भी मनुष्य विशेषकर शिशु अपनी आंतरिक भावनाओं को प्रकट कर सकता है। शिक्षा को अंग्रेजी भाषा में Education (एजुकेशन) कहते हैं।

शिक्षा एक विशेष प्रकार का वातावरण है, जिसका प्रभाव बालक के चिंतन, दृष्टिकोण व व्यवहार करने की आदतों पर स्थाई रूप से परिवर्तन के लिए डाला जाता है।

वर्तमान समय में शिक्षा के कारण ही मानव आज सभ्यता के उच्च शिखर पर पहुंच सका है। मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाने का श्रेय ही शिक्षा को प्राप्त है।

शिक्षा का अर्थ

शिक्षा के अर्थ को पूर्ण रूप से समझने के लिए निम्न बातों को समझना आवश्यक है-

  1. शिक्षा से मानव का विकास होता है– शिक्षा से मानव का विकास होता है बिना शिक्षा के मानव किसी जानवर के समान ही होता है। आज जिस मनुष्य को हम जानते हैं जिससे हम मिलते हैं जो हमारे चारों ओर बिचरता है, वह सब मनुष्य शिक्षा के द्वारा ही सभ्य बना है।
  2. शिक्षा प्रशिक्षण का कार्य है– जन्म से मानव पशु के समान होता है अत: उसे प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। शिक्षा के कारण ही वह अपने भावों को अभिलाषाओं को तथा अपने व्यवहारों को नियंत्रित करना सीखता है।
  3. मार्गदर्शक का कार्य– शिक्षा मनुष्य का मार्गदर्शक है। इसके द्वारा ही मनुष्य का तथा नई पीढ़ी का मार्गदर्शन किया जाता है। इसलिए बच्चों की शिक्षा देते समय इस बात का ध्यान सर्वाधिक रखा जाता है कि बच्चों की अविकसित भावनाएं, योग्यताएं, क्षमताएं तथा उनकी रूचि के क्षेत्र का अधिकतम विकास हो।
  4. शिक्षा अभिवृद्धि- शिक्षा मनुष्य की मानसिक अभिवृद्धि में भी सहायक होती है। अभिवृद्धि के दो मुख्य कारक होते हैं – प्रशिक्षण तथा वातावरण। अपने प्रशिक्षण व वातावरण के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति क्रिया व प्रतिक्रिया करता है तथा इसी प्रक्रिया में उसके व्यक्तित्व में परिवर्तन होते हैं। यह सही व संतुलित अभिवृद्धि तभी संभव है जब शरीर व व्यक्तित्व के सभी पक्षों शारीरिक मानसिक नैतिक आध्यात्मिक तथा सामाजिक पक्ष का संतुलित तथा समान विकास हो। इस क्रिया विधि में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

शिक्षा की अवधारणा

प्राया शिक्षा का अर्थ पाठशाला या विद्यालय में विधिवत अध्ययन करने से लिया जाता है। विद्वानों का विचार है कि विद्यालयों में ही बालक को शिक्षा दी जाती है। वहीं पर रहकर वे जीवन के भविष्य का निर्माण करते हैं। वहीं पर व्यक्ति के सामान्य व्यवहार की रचना होती है और उसी के अनुरूप उसके चरित्र एवं व्यक्तित्व का विकास होता है। शिक्षा के विषय में डॉक्टर वी डी भाटिया का कथन है कि उद्देश्य के ज्ञान के अभाव में शिक्षक उस नाविक के समान है जिसे अपने लक्ष्य या मंजिल का पता नहीं है।

विद्यार्थी उस पतवार विहीन नौका के समान है जो समुद्र में लहरों के थपेड़े खाती हुई तट की ओर बहती जा रही है। शिक्षा के अभाव में व्यक्ति पशु के समान व्यवहार करता है। वह अपने जीवन आदर्शों आशाओं आकांक्षाओं विश्वास परंपरा तथा सांस्कृतिक विरासत को विकसित नहीं कर सकता।

शिक्षा की परिभाषाएं

शिक्षा द्वारा मानव के अंतर में निहित उन सभी व्यक्तियों तथा गुणों का दिग्दर्शन होता है। इन गुणों को शिक्षा के माध्यम से ही विकसित किया जाता है।

एडिसन

शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक एवं मनुष्य के सर्वांगीण विकास का संबंध शरीर मस्तिष्क एवं आत्मा से है।

महात्मा गांधी जी के अनुसार

शिक्षा में आदतों स्मरण आदर्श, स्वरूप शारीरिक एवं मानसिक कौशल, बौद्धिकता एवं रुचि नैतिक विचार एवं ज्ञान ही नहीं विधियां भी सम्मिलित है।

इस्पेंसर के अनुसार

शिक्षा से मेरा तात्पर्य उस प्रशिक्षण से है जो अच्छी आदतों के द्वारा बालकों में नैतिकता का विकास करें।

प्लेटो के अनुसार

शिक्षा व्यक्ति की उम्र योग्यताओं के विकास का नाम है जो उसे उसके वातावरण पर नियंत्रण रखना सिखाती है और उसकी संभावनाओं को पूर्ण करती है।

जांन डी वी के अनुसार

ये सभी परिभाषाएं यह स्पष्ट करती हैं कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो बालक को समाज में रहने वाले विकास की क्षमता की वृद्धि करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। शिशु में अनेक महत्वपूर्ण गुण होते हैं। वे गुण शिक्षण के माध्यम से ही विकसित होते हैं। कुल मिलाकर व्यक्ति को एक संपूर्ण व्यक्ति बनाने में योगदान देते हैं।

शिक्षा की प्रकृति

उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है कि शिक्षा को ना तो पूर्णता विज्ञान की श्रेणी में रख सकते हैं और ना ही कला की श्रेणी में गौर पूर्वक देखें तो यह विज्ञान एवं कला दोनों ही है। इसके लिए उपयुक्त शब्दावली या नामकरण शिक्षा की कला तथा शिक्षा विज्ञान प्रयुक्त किया जा सकता है। शिक्षा विज्ञान ना तो पूर्णता सैद्धांतिक है और ना ही व्यवहारिक इसमें सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्ष दृष्टिगत होते हैं। वस्तुतः यह व्यावहारिक पहलू अधिक रहता है अतः विज्ञान की श्रेणी में इसका स्थान सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक विज्ञान दोनों के रूप में है।

शिक्षा विज्ञान में जीवशास्त्र जैसे मनोविज्ञान तथा समाजशास्त्र जैसे सामाजिक तथा मानविकी विज्ञानों को स्थान प्राप्त है। साथ ही नीति शास्त्र तथा तर्कशास्त्र जैसे विज्ञानों की विषय वस्तु को स्थान प्राप्त है। इसमें शिक्षण प्रक्रिया का अभ्यास भी सम्मिलित है। अभ्यास के माध्यम से शिक्षण रूपी कौशल को प्राप्त किया जा सकता है। अतः हम यह कह सकते हैं कि शिक्षा, विज्ञान एवं कला दोनों ही है।

शिक्षा की विशेषताएं

  1. सचेतन प्रक्रिया– किन्हीं अर्थों में शिक्षा को एक सचेतन प्रक्रिया भी कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो जानबूझ या आप प्रयास चलाई जाती है।
  2. यह विकास की एक प्रक्रिया है– शिक्षा के परिणाम स्वरूप व्यक्ति का विकास होता है विकास उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके द्वारा आंतरिक शक्तियों का प्रगति करण्या प्रस्फुटन होता है। शिक्षा में बाहर से कुछ नहीं कहा जाता बल्कि अंदर से ही विकास होता है।
  3. शिक्षा एक द्विमुखी प्रक्रिया है– शिक्षा की प्रक्रिया में दो दूरियां हैं अर्थात शिक्षक तथा विद्यार्थी। यह भी कहा जा सकता है कि प्रक्रिया में शिक्षक तथा विद्यार्थी दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। दोनों का एक दूसरे से व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है।
मानवतावादप्रयोजनवादप्रकृतिवाद
यथार्थवादआदर्शवादइस्लाम दर्शन
बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतबौद्ध दर्शनशिक्षा का सामाजिक उद्देश्य
वेदान्त दर्शनदर्शन शिक्षा संबंधशिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य
शिक्षा के उद्देश्य की आवश्यकताशिक्षा का विषय विस्तारजैन दर्शन
उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षाभारतीय शिक्षा की समस्याएंशिक्षा के प्रकार
शिक्षा अर्थ परिभाषा प्रकृति विशेषताएं

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top