शैक्षिक स्तर गिरने के कारण

शैक्षिक स्तर गिरने के कारण – स्वतंत्रता के बाद से यही कहा जा रहा है कि देश में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। इस बीच देश में शिक्षा के संबंध में जितने भी आयोग का गठन (विश्वविद्यालय आयोग, माध्यमिक शिक्षा आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग) किया गया। सभी ने शिक्षा के स्तर गिरने की बात कही, सभी ने इसके कारण खोजने का प्रयास किया और इसे ऊंचा उठाने के उपाय बताएं। शिक्षा के स्तर में गिरावट के वर्तमान समय में निम्नलिखित कारण है-

  1. शिक्षा के लिए बजट में कम धनराशि का प्रावधान
  2. पाठ्यक्रमों का निम्न स्तर
  3. शिक्षकों में उचित गुणों का अभाव
  4. शिक्षक संघों का निर्माण
  5. दोषारोपण की प्रवृत्ति
  6. उच्च शिक्षा स्तर पर सामान्य छात्रों का प्रवेश
  7. शिक्षा संस्थाओं में छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या
  8. छात्र संघों का निर्माण
  9. छात्रों का गंदी राजनीति में प्रवेश
  10. दोषयुक्त परीक्षा प्रणाली

1. शिक्षा के लिए बजट में कम धनराशि का प्रावधान

हमारे देश के बजट में शिक्षा के लिए अपेक्षाकृत कम धनराशि का प्रावधान किया जाता है, जिसका परिणाम यह है कि आज हमारे देश में अधिकतर प्राथमिक माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा संस्थाओं के पास ना तो उपर्युक्त भवन है ना पर्याप्त फर्नीचर हैं और ना आवश्यक प्रयोगशाला एवं कार्यशाला हैं। इस दृष्टि से शिक्षा की नीव, प्राथमिक शिक्षा की स्थिति सबसे अधिक बदहाल है। इन संस्थाओं से उच्च स्तर के उत्पाद की आशा नहीं की जा सकती है। इसी प्रकार माध्यमिक उच्च तथा व्यवसायिक एवं तकनीकी शिक्षा में भी आवश्यक संसाधनों का अभाव है।

2. पाठ्यक्रमों का निम्न स्तर

हमारे देश में किसी भी स्तर के पाठ्यक्रम समयानुकूल नहीं है। स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रमों में उपयोगी ज्ञान एवं कौशलों के स्थान पर निरर्थक सामग्री अधिक है। उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम विशेषकर कृषि विज्ञान तकनीकी और चिकित्सा के पाठ्यक्रम विकसित पाठ्यक्रम देशों के पाठ्यक्रमों से निम्न स्तर के हैं।

3. शिक्षकों में उचित गुणों का अभाव

शिक्षक शिक्षिकाओं में योग्यता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की कमी है। प्राथमिक विद्यालयों में तो अधिकतर शिक्षक विद्यालय ही नहीं जाते और जो जाते भी हैं तो पूरी ईमानदारी से शिक्षण कार्य नहीं करते। इसी प्रकार माध्यमिक व उच्च शिक्षा संस्थाओं के शिक्षक भी कर्तव्य निष्ठा से अपना कार्य नहीं करते हैं।

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शैक्षिक स्तर गिरने के कारण

4. शिक्षक संघों का निर्माण

वर्तमान भारत में प्राथमिक माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षकों के अपने संघ है। इनमें प्राथमिक शिक्षकों का अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ तो संस्था की दृष्टि से सबसे बड़ा संघ है। इन शिक्षक संघों के सामने शासन तंत्र लाचार हो जाता है, जब यह अपना आंदोलन जैसे काम रोको जेब भरो आदि चलाते हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ और विश्वविद्यालय शिक्षक संघ इतने शक्तिशाली तो नहीं है, किंतु इन्होंने सेवा शर्त अपने हित में कर ली हैं। जब शिक्षा की दूरी शिक्षक ही अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन नहीं करेंगे तो शिक्षा का स्तर कैसे उठेगा वह तो गिरेगा ही। आप शैक्षिक स्तर गिरने के कारण Sarkari Focus पर पढ़ रहे हैं।

5. दोषारोपण की प्रवृत्ति

प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों का कहना है कि हमारे विद्यालयों में पर्याप्त भवन फर्नीचर बाय स्टाफ नहीं है और ना ही शिक्षण के साधन है तो हम क्या कर सकते हैं।माध्यमिक शिक्षक कहते हैं कि बच्चे जब प्राथमिक स्तर से ही कमजोर आते हैं तो हम इन्हें कैसे योग्य बना सकते हैं। उच्च शिक्षा स्तर के शिक्षक कहते हैं कि माध्यमिक शिक्षा उत्तर जो युवक उच्च शिक्षा में आते हैं उनमें से अधिकतर उच्च शिक्षा प्राप्त करने योग्य नहीं होते हैं। इस प्रकार सब एक दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं।

6. उच्च शिक्षा स्तर पर सामान्य छात्रों का प्रवेश

माध्यमिक शिक्षा तक सब बच्चों को प्रवेश देना लोकतंत्र की मांग है परंतु उच्च शिक्षा स्तर पर तो केवल मेधावी वह परिश्रमी छात्रों को ही प्रवेश देना चाहिए। उच्च स्तर पर चयन प्रणाली लागू की जाए। शैक्षिक अवसरों की समानता और आरक्षण नीति के तहत सामान्य छात्रों का प्रवेश हो रहा है जिसमें शिक्षा का स्तर गिर रहा है। आप शैक्षिक स्तर गिरने के कारण Sarkari Focus पर पढ़ रहे हैं।

7. शिक्षा संस्थाओं में छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या

देश की बढ़ती हुई जनसंख्या के दबाव में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा संस्थाओं में अधिक छात्र छात्राओं को प्रवेश देने की विवशता है। उच्च शिक्षा में दबाव के कारण अयोग्य छात्र छात्राओं के साथ योगियों को भी प्रवेश दिया जा रहा है। अपराधी तत्वों को भी जिनके परिणाम स्वरूप शिक्षण संस्थाओं में शिक्षण अधिगम के लिए पर्याप्त वातावरण नहीं है।

शैक्षिक स्तर गिरने के कारण
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8. छात्र संघों का निर्माण

महाविद्यालयों के साथ-साथ माध्यमिक विद्यालयों में भी छात्र संघों का निर्माण हो रहा है। छात्रों का अधिकतर समय चुनाव लड़ने जीतने तथा हारने के बाद आपसी रंजिश में व्यतीत होता है जिसका परिणाम शिक्षा के स्तर में गिरावट होता है।

9. छात्रों का गंदी राजनीति में प्रवेश

वर्तमान में हमारे राजनीतिक दल अध्ययनरत युवा शक्ति को अपनी गंदी राजनीति सिखा रहे हैं। युवा छात्र उनके द्वारा आयोजित जुलूस और रैलियों और आंदोलनों में भाग ले रहे हैं। अध्ययन काल में यदि वे यह सब कार्य करेंगे तो शिक्षा के स्तर में गिरावट संभव है।

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10. दोषयुक्त परीक्षा प्रणाली

अधिकतर बच्चे परीक्षा उत्तीर्ण करने के उद्देश्य से ही किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते हैं और हमारे देश में शिक्षा के किसी भी स्तर की परीक्षा प्रणाली कुछ ऐसी है कि बच्चे बिना समझे कुछ रखकर ही परीक्षा पास कर लेते हैं तथा कुछ नकल करके उत्तीर्ण हो जाते हैं। ऐसे ही छात्र-छात्राएं अपेक्षित शैक्षिक उपलब्धि की प्राप्त नहीं कर पाते हैं जिससे शिक्षा का स्तर गिर रहा है। आप शैक्षिक स्तर गिरने के कारण Sarkari Focus पर पढ़ रहे हैं।

इस प्रकार स्पष्ट है कि शिक्षा का स्तर इन सभी कारणों से गिर रहा है। साथ साथ छात्र-छात्राओं में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता और नकारा प्रशासन तंत्र भी इसके लिए उत्तरदाई है।

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