समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य – शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए। पहले समावेशी शिक्षा की परिकल्पना सिर्फ विशेष छात्रों के लिए की गई थी लेकिन आधुनिक काल में हर शिक्षक को इस सिद्धांत को विस्तृत दृष्टिकोण में अपनी कक्षा में व्यवहार में लाना चाहिए। समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों को सामान्य बालकों से अलग शिक्षा देने की विरोधी है। समावेशी बालक

विशिष्ट बालकों के प्रकार

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

समावेशी शिक्षा तथा सामान्य शिक्षा के उद्देश्य लगभग समान होते हैं। जैसे देश का विकास, बालकों को उपयुक्त शिक्षा के द्वारा मानवीय संस्थाओं का विकास, नागरिक विकास, समाज का पुनर्गठन तथा व्यावसायिक कार्य कुशलता आदि प्रदान किया जाना। इन उद्देश्यों के अतिरिक्त समावेशी शिक्षा के अन्य उद्देश्य का वर्णन निम्नलिखित है-

  1. शारीरिक अक्षमता वाले बालकों के माता-पिता को निपुणता तथा कार्य कुशलता के बारे में समझाना तथा बालकों के समक्ष आने वाली समस्याओं एवं कमियों का समाधान करना।
  2. शारीरिक विकृत बालकों की विशेष आवश्यकताओं की सर्वप्रथम पहचान करना तथा उनका निर्धारण करना।
  3. शारीरिक दोष की स्थिति के बढ़ने से पूर्व ही उसे रोकने के उपाय तथा बालकों के सीखने की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की नवीन विधियों का प्रशिक्षण देना।
  4. शारीरिक रूप से अक्षमता वाले बालकों का पुनर्वासन किया जाना चाहिए।
  5. शारीरिक रूप से विकृत बालकों की शिक्षण समस्याओं की जानकारी एकत्रित करना तथा सुधार के लिए सामूहिक संगठन की तैयारी करना।
समावेशी शिक्षा के उद्देश्य
समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

विद्यालय शिक्षा में समावेशी शिक्षा का अधिक विकास करने के लिए विद्यालय में सुरक्षा, आवास, शौचालय तथा पीने के पानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। और साथ ही साथ बच्चों की व्यक्तिगत विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए उनकी रचनात्मक क्षमताओं का विकास करना चाहिए। शिक्षकों को छात्रों के माता-पिता से निरंतर संपर्क बनाए रखने चाहिए, ताकि वे उनको बच्चों की उन्नति व अवनत के बारे में बता सके।

जहां तक संभव हो प्राथमिक शिक्षा को सर्वत्र सुलभ करना होगा। जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान करना होगा। भाषागत् समस्याओं को ध्यान में रखकर कद जनित समस्याओं को त्वरित रूप से दूर करने का प्रयास करना होगा। अतः हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की तरफ अग्रसर होना होगा, जो प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध हो सके।

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