हिंदी कथा साहित्य

हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में कुल 3 खंड है। इस प्रश्न पत्र में दो उपन्यास तथा 7 कहानियां है। Hindi Literature, हिंदी कथा साहित्य BA द्वितीय वर्ष में पूछे जाने वाला प्रश्न पत्र है। जिनकी व्याख्याएं, सारांश तथा आलोचनात्मक अध्धयन करना पड़ता है। जो कि इस प्रश्न पत्र को और अधिक कठिन बनाता है।

साथ में जब हिंदी कथा साहित्य की बात हो तो प्रश्नों की संख्या बहुत ही सीमित हो जाती है। हिंदी कथा साहित्य के लिए इसके स्वरूप, विकास, स्थिति पर विचार करना चहिए।

हिंदी कथा साहित्य

कहानी वह गद्य रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंश का चित्रण होता है। इसमें उपन्यास की भांति जीवन को समग्रता में चित्रित नहीं किया जाता है, अपितु उसके किसी विशेष पहलू या किसी विशेष आंतरिक भाव को चित्रित किया जाता है। रोचकता एवं कलात्मक सा इसके आवश्यक तत्व हैं। कहानी का उद्देश्य मात्र मनोरंजन करना नहीं होता, वरन यह मनुष्य में छिपी आंतरिक व्यथा कामा अनुभूति आदि को उद्घाटित करके पाठक की चेतना पर मर्मस्पर्शी चोट करती है।

उत्कृष्ट कहानी वही है जो अपने सजीव चित्र एवं कथ्य से पाठक के मन मस्तिष्क को भाव विभोर कर दे। आधुनिक कहानी का स्वरूप और गठन पश्चिम की कहानी पर आधारित है। कहानी क्या होती है या उसे कैसा होना चाहिए? इन प्रश्नों पर पश्चिमी देशों के साहित्य जगत में पर्याप्त चर्चा हुई है।

हिंदी कथा साहित्य

हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में कुल 3 खंड है। प्रथम हिंदी कथा साहित्य जिसमें हिन्दी कहानी का स्वरूप, क्रमिक विकास आदि पर चर्चा की गई है। द्वितीय इस पाठ्यक्रम मे कुछ उपन्यास है, इसी प्रकार तृतीय क्रम मैं कुछ कहानियां है जिनसे सारांश तथा आलोचनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैंं।

1. हिंदी कथा साहित्य का विकासहिन्दी कथा साहित्य का विकास
2. उपन्यासचित्रलेखा उपन्यास
राग दरबारी उपन्यास
3. कहानीकफन कहानी
गुण्डा कहानी
यही सच है कहानी
चीफ की दावत समीक्षा
तीसरी कसम कहानी सारांश
राजा निरवंसिया समीक्षा
पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

हिंदी कथा साहित्य – उपन्यास

बी.ए. हिंदी कथा साहित्य के पाठ्यक्रम में दो उपन्यास निर्धारित हैं। जिनमें से एक चित्रलेखा जो की भगवती चरण वर्मा की रचना है। दूसरा उपन्यास राग दरबारी है जो श्रीलाल शुक्ल की रचना है। दोनों ही उपन्यास बहुत ही ज्यादा प्रचलित हैं। अब तक दोनों ही उपन्यासों की केवल हिंदी भाषा में लगभग दो लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं। जहां चित्रलेखा उपन्यास मैं पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है। वहीं दूसरी ओर, राग दरबारी उपन्यास में आजादी के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्य हीनता को दर्शाया गया है।

चित्रलेखा उपन्यास

पाप क्या है? पुण्य क्या है? उसका निवास कहां होता है? इन सभी प्रश्नों के उत्तर को खोजने के लिए,

महाप्रभु रत्नांबर और उनके शिष्यों द्वारा अर्जित ज्ञान से पता चलता है कि “संसार में पाप कुछ भी नहीं है यह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है।” हम ना पाप करते हैं ना पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है। हिंदी कथा साहित्य के प्रश्न पत्र में चित्रलेखा उपन्यास के किसी अंश की व्याख्या तथा उपन्यास से संबंधित आलोचनात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

राग दरबारी उपन्यास

राग दरबारी उपन्यास में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बा नुमा गांव शिवपालगंज की कहानी है उस गांव की जिंदगी का दस्तावेज जो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गांव विकास और गरीबी हटाओ के आकर्षण नारों के बावजूद भी घिसट रही है। इस उपन्यास में कई पात्र हैं जो अपनी भूमिका विशेष ढंग से निभा रहे हैं। हिंदी कथा साहित्य के प्रश्न पत्र में उपन्यास के आलोचनात्मक प्रश्न तथा किसी अंश की व्याख्या पूछी जा सकती है।

हिंदी कथा साहित्य

हिंदी कथा साहित्य – कहानी

हिंदी कथा साहित्य में कफन, गुंडा, यही सच है, चीफ की दावत, मारे गए गुलफाम उर्फ तीसरी कसम, राजा निरबंसिया, पच्चीस चौका डेढ़ सौ नामक कविताएं सम्मिलित हैं। जिनसे अति लघु उत्तरीय आलोचनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। कई विश्वविद्यालयों में तो पाठ्यक्रम में निर्धारित कहानियों से गद्यांश आते हैं, जिनकी संदर्भ सहित व्याख्या लिखनी होती है। कहानियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए जिससे कि संदर्भ सहित व्याख्या करने में समस्या ना हो।

कफन कहानी

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। जो कि एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसमें परिवार का मुखिया अपने पुत्र समेत कामचोर व मक्कारी करते हैं। एक दिन मुखिया के पुत्र की पत्नी तड़प तड़प के मर जाती है। उन दोनों ने किसी से ₹5 उधार लिए और कफन लेने गए। रास्ते में ठेका दिख गया वहां शराब पीने लग गए। हिंदी कथा साहित्य की कफन कहानी को और अधिक विस्तार से पढ़े —–

गुण्डा कहानी

हिंदी कहानी के विकास में जयशंकर प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। उनकी कहानियों में प्रेम का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है। गुण्डा कहानी में औदात्य प्रेम के ही दर्शन होते हैं। यह कहानी तीन खंडों में विभक्त है। कहानी की कालावधी लगभग 30 वर्ष में समाई हुई है। कहानी कभी वर्तमान की घटनाओं से आगे बढ़ती है तो कभी भूतकाल की घटनाओं से आगे बढ़ती है। हिंदी कथा साहित्य की इस कहानी से संबंधित प्रश्न पढ़ने के लिए क्लिक करें।

यही सच है कहानी

हिंदी कथा साहित्य की यही सच है कहानी मन्नू भंडारी की रचना है। जो पुरुष व स्त्री के संबंधों में प्रेम ग्रहण अनैतिक व अनैतिक सच झूठ, शुभ अशुभ, आज की जो परंपरागत धारणाएं रही हैं। उससे अलग हटकर या कहानी लिखी गई है। कहानी के इस प्रेम और उसके सच के बारे में राजेंद्र यादव का कहना है – “पुराने संबंधों की आज बात सच है मन्नू भंडारी की परिचय से लेकर परित्याग तक नारी पुरुष के आपसी संबंधों की नैतिक धारणा में एक मूलभूत अंतर जरूर आ गया है कहानी लेखिका का बड़ी कुशलता से मन की स्थितियां चित्रित कर जाती हैं।”



हिंदी कथा साहित्य
चित्रलेखा उपन्यासचित्रलेखा उपन्यास व्याख्या
रागदरबारी उपन्यासराग दरबारी उपन्यास व्याख्या
कफन कहानीकफन कहानी सारांश
कफन कहानी के उद्देश्य
कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण
प्रेमचंद कहानियां समीक्षा
गुण्डा कहानी सारांशगुण्डा कहानी समीक्षा
गुंडा कहानी में नन्हकु सिंह को गुंडा क्यों कहा गया है?
यही सच है कहानीचीफ की दावत समीक्षा
तीसरी कसम कहानी सारांशराजा निरबंसिया समीक्षा
पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

कथा कहानी की विशेषताएं

हिंदी कथा साहित्य की एक अच्छी कहानी की 7 विशेषताएं बताई गई है।

  1. एकमात्र प्रधान घटना
  2. एक चरित्र की प्रधानता
  3. कल्पना
  4. कथावस्तु
  5. कसाव
  6. गठन
  7. प्रभाव की अन्विति

इन्हीं उपयुक्त सातों तत्वों की प्रभावशाली अन्विति से अच्छी कहानी निर्मित होती है। कहानी में आदि से अंत तक एक ही प्रधान कहानी घटना होती है वह लेखक उसी घटना का विकास करता है। कहानी एक ही चरित्र के जीवन से संबंधित होती है वह उसी के सहारे विकसित होती है। कथावस्तु का गठन संक्षिप्त एवं कासावपूर्ण होना चाहिए। लेखक कल्पना के सहारे कथावस्तु को रोचकता प्रदान करता है। हिन्दी कथा साहित्य

कल्पना होते हुए भी जीवन के किसी यथार्थ का संकेत होना चाहिए। कहानी में किसी आवश्यक बात को नहीं रखना चाहिए और ना ही किसी महत्वपूर्ण बात को छोड़ना चाहिए। कोई भी वस्तु अपनी समग्रता में जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी उस स्थिति में नहीं जब हम उस के प्रत्येक अंग का अलग-अलग विश्लेषण करके देखते हैं। किसी वस्तु के कुल परिणाम की अपनी विशिष्टता होती है व उसमें अपना एक जीवित व्यक्तित्व होता है। कहानी के सभी अंगो का सम्यक समायोजन होना चाहिए।

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