हड़प्पा सभ्यता नगर योजना

1922 ईस्वी के पूर्व यही माना जाता रहा कि आर्य सभ्यता ही भारत की प्राचीनतम सभ्यता थी। मगर 1921 में हड़प्पा की खुदाई बाबू दयाराम साहनी और 1922-23 में डॉक्टर आर डी बनर्जी की देखरेख में मोहनजोदड़ो पाकिस्तान में खनन कार्य शुरू हुआ और तो एक आर्यपूर्व सभ्यता प्रकाश में आई। क्योंकि इस सभ्यता के आरंभिक अवशेष सिंधु घाटी नदी से प्राप्त हुई है अतः इसे सिंधु घाटी की सभ्यता का नाम दिया गया परंतु जब बाद में देश के अन्य भागों लोथल, कालीबंगा, रोपण, बनवाली, आलमगीरपुर आदि स्थानों से इस सभ्यता के अवशेष मिले तो विद्वानों ने इसे हड़प्पा सभ्यता का नाम दिया। हड़प्पा सभ्यता नगर योजना इस सभ्यता की महत्वपूर्ण विशेषता यहां की नगर योजना थी। मोहनजोदड़ो और …

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विज्ञान मेले

विज्ञान मेले ज्ञान प्राप्त का ऐसा मंच है जिसमें छात्र शिक्षक माता-पिता व समाज से अन्य व्यक्ति एक साथ मिलकर ज्ञानार्जन कर सकते हैं। इन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का शुभ अवसर प्राप्त होता है। इन मेलों में कई विद्यालयों के छात्र एक साथ मिलकर विभिन्न प्रतियोगिताओं कार्यक्रमों में भाग लेते हैं इससे आपस में परस्पर विचारों के आदान-प्रदान से ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इन मेलों का आयोजन एनसीईआरटी व राज्य सरकारों के अतिरिक्त कई अन्य संस्थाएं भी करती हैं। विज्ञान मेला छात्रों के प्रदर्शन हेतु वस्तुओं का संग्रह कहलाता है। शिक्षा शब्दकोश के अनुसार इसमें प्रत्येक वर्ष की जैविक राजधानी घोषित हुआ सपने सिद्धांत प्रयोगशाला विधि और विकास के लिए कुछ …

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मूल्यांकन तथा मापन में अंतर

क्रम संख्या मूल्यांकन मापन 1 मूल्यांकन एक विस्तृत प्रत्यय है। मापन मूल्यांकन के अंतर्गत आता है। 2 मूल्यांकन एक नवीन धारणा है। मापन एक प्राचीन धारणा है। 3 मूल्यांकन में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए शिक्षण उद्देश्यों की जांच की जाती है। मापन में पाठ्यवस्तु कौशल योग्यता की जांच किसी उद्देश्य के बिना की जाती है। 4 गुणों की माप एक पूर्ण इकाई के रूप में की जाती है। गुणों की माप परिणाम अंक औसत तथा प्रतिशत आदि अलग-अलग इकाइयों में की जाती है। 5 मूल्यांकन के अंतर्गत छात्रों में हुए व्यावहारिक परिवर्तनों की जांच निरीक्षण परीक्षण व प्रवृत्ति मापक आदि विधियों के द्वारा की जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्तित्व परीक्षण बुद्धि परीक्षण तथा निष्पत्ति परीक्षण की गणना की जाती …

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प्रयोगशाला विधि

विज्ञान के सभी विषय इस प्रकार के हैं कि उनके लिए प्रयोगशाला का होना आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, भू विज्ञान आदि। इन विषयों की वास्तविक शिक्षा के लिए प्रयोगशाला के द्वारा सही ज्ञान बालक को मिलता है। प्रयोगशाला में विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करता है। उसे निरीक्षण करने का सुअवसर मिलता है तथा अपने ही प्रयासों से परिणाम निकालने की कोशिश करता है। प्रयोगशाला में अध्यापक उसके कार्य का निरीक्षण करते हैं और विद्यार्थी लिखित कार्य भी करते हैं। इसीलिए आजकल की शिक्षा प्रणाली में विज्ञान अनिवार्य है और विज्ञान कक्षाओं के लिए हर विद्यालय में प्रयोगशाला का होना भी आवश्यक है। इन प्रयोगशालाओं में विज्ञान संबंधी सा सामान उपकरण तथा रासायनिक पदार्थ …

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इकाई योजना

इकाई योजना का सर्वप्रथम विकास एच सी मॉरीसन ने किया यह प्रविधि गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित मानी जाती है। इकाई योजना बीसवीं शताब्दी की देन है। सन 1920 से 1935 के मध्य इसके अनेक रूप सामने आए किंतु इसका व्यापक प्रयोग 1929 के बाद ही शुरू हुआ। इस योजना का विकास ऐसी मारी सन ने किया परंतु इकाई शब्द को लाने का श्रेय हरबर्ट महोदय का है। साधारण अर्थ में दैनिक पाठों के योग को ही इकाई के नाम से जाना जाता है। जिस प्रकार दैनिक योजना में एक शीर्षक पद्धति के लिए 35 मिनट के कलांश हेतु पाठ योजना निर्मित करते हैं उसी प्रकार पूरे अध्याय की एक योजना बनाई जाती है जिसमें यह इंगित किया जाता …

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अभिक्रमित शिक्षण

अभिक्रमित शिक्षण अंग्रेजी के Programmed Teaching का हिंदी रूपांतरण है यह दो शब्दों के योग से बना है Programmed + Teaching, इसमें Programmed का अर्थ है अभिक्रमित या योजनाबद्ध या क्रमबद्ध और टीचिंग का अर्थ है शिक्षण या शिक्षण द्वारा बताई गई जिससे इस प्रकार अभिक्रमित शिक्षण का अर्थ है क्रमबद्ध या योजनाबद्ध शिक्षण। इसमें पढ़ाई जाने वाली विषय वस्तु को अनेक छोटे छोटे एवं नियोजित खंडों में विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कि विद्यार्थी स्वयं प्रयास करके अपनी गति से ज्ञान अर्जन करता हुआ आगे बढ़ता है। इससे छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है अभिक्रमित शिक्षण की परिभाषाएं निम्न है – अभिक्रमित शिक्षण सीधी जाने वाली सामग्री को इस प्रकार से प्रस्तुत करने को व्यक्त करता है …

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टोली शिक्षण अर्थ विशेषताएं उद्देश्य लाभ

भारतीय परंपरागत शिक्षा प्रणाली की तुलना में यह एक नया प्रत्यय है। ऐसे प्रविधि में दो या दो से अधिक शिक्षक मिलकर समूह में पाठ योजना तथा शिक्षण उद्देश्यों को तय करते हैं। सामूहिक रूप से ही विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जाती है। सभी शिक्षक सामूहिक रूप से मिलकर किसी विशिष्ट प्रकरण की जिम्मेदारी लेते हैं। ऐसे में शिक्षण विधियों की योजना तथा उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया लचीली रखी जाती है ताकि छात्रों की योग्यता एवं रूचि के अनुसार योजना में परिवर्तन किया जा सके। ऐसे में सभी प्रकार के शिक्षक मिलकर कार्य करते हैं इसीलिए सभी शिक्षकों की अपनी-अपनी प्रमुख विशेषताओं का छात्रों को इकट्ठा लाभ प्राप्त होता है। इसके द्वारा शिक्षण कार्य को अधिक प्रभावी बनाया जा …

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पाठ्य पुस्तक विधि

पाठ्य पुस्तक विधि – यह विधि हमारे देश में शिक्षा के लिए प्राचीन काल से चली आ रही है। इस विधि में अध्यापक छात्रों को प्रार्थी क्रम से संबंधित पाठ्य वस्तु को पढ़ाता है तथा उसके आधार पर गृह कार्य करने को देता है जिसको छात्र पाठ्यपुस्तक के आधार पर तैयार करते हैं। इस विधि का प्रयोग जूनियर और माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए अधिक लाभकारी पाया जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि पाठ्य पुस्तक को शिक्षण विधि के स्थान पर शिक्षण की सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग करना चाहिए। पाठ्य पुस्तक विधि के गुण इस विधि के प्रमुख गुण निम्न हैं- यदि पाठ्य पुस्तकों को सीखे गए ज्ञान की पूर्ति के लिए उपयोग में लाया …

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परियोजना व ह्यूरिस्टिक विधि में अन्तर

शिक्षण के क्षेत्र में परियोजना विधि तथा ह्यूरिस्टिक विधि दोनों का ही महत्वपूर्ण स्थान है उनके उपयोग आज भी प्रासंगिक हैं उसके दोनों विधियों में प्रमुख अंतर निम्न है- क्रम संख्या परियोजना विधि ह्यूरिस्टिक विधि 1 परियोजना विधि का अविष्कार अमेरिकी शिक्षाशास्त्री सर विलियम किलपैट्रिक द्वारा किया गया। ह्यूरिस्टिक विधि का आविष्कार प्रोफेसर एच. ई. आर्मस्ट्रांग के द्वारा किया गया। 2 यह विधि पूर्णत: मनोवैज्ञानिक विधि है। यह विधि पूर्णता तथ्यों पर आधारित विधि है। 3 इस विधि में आंकड़ों का एकत्रीकरण किसी समस्या को केंद्रित करते हुए सामुदायिक रूप से किया जाता है। ह्यूरिस्टिक विधि में आंकड़ों का एकत्रीकरण किसी समस्या समाधान के लिए व्यक्तिगत रूप से किया जाता है। 4 यह विधि सहचर्य एवं सहयोग के सिद्धांत पर …

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प्रयोगशाला विधि

विज्ञान विषयों की वास्तविक शिक्षा के लिए प्रयोगशाला के द्वारा बालकों को सही सरल तथा बोधगम्य तरीके से ज्ञान की प्राप्ति होती है। प्रयोगशाला में विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करके सीखता है उसे निरीक्षण का अवसर प्राप्त होता है तथा अपने ही प्रयासों से परिणाम निकालने की कोशिश करता है इससे उसकी त्रुटियां भी तत्काल ही दूर हो जाती है। इस प्रकार प्रयोगशाला विधि अनुदेशन आत्मक प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा किसी घटना के कारण प्रभाव प्रकृति अथवा गुड चाहे सामाजिक मनोवैज्ञानिक अथवा भौतिक को वास्तविक अनुभव अथवा प्रयोग द्वारा नियंत्रित दशाओं में सुनिश्चित किए जाते हैं। उदाहरण– किसी पहाड़ की चोटी की ऊंचाई ज्ञात करना, छात्रों द्वारा छोड़े गए रास्तों की गति ज्ञात करना, नदी को बिना पार किए उसकी …

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विज्ञान शिक्षण की ह्यूरिस्टिक विधि

ह्यूरिस्टिक विधि के साथ-साथ इसे अन्वेषण विधि भी कहा जाता है। इस विधि की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द ह्यूरिस्को से हुई है जिसका अर्थ है मुझे खोजना है। अतः ह्यूरिस्टिक विधि में विद्यार्थी मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हुए ज्ञान की खोज करते हैं। शिक्षण की इस विधि में अध्यापक छात्रों के सम्मुख विषय से संबंधित समस्याएं उत्पन्न करते हैं तथा छात्र आपस में मिलकर समस्याओं का निरीक्षण एवं चिंतन करते हुए समाधान खोजते हैं। इस विधि में छात्रों को कम से कम बता कर उन्हें स्वयं अधिक से अधिक जानने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिक्षक सिर्फ छात्रों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करता है। ह्यूरिस्टिक विधि के चरण इस विधि के विभिन्न शिक्षण चरणों …

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परियोजना विधि

योजना विधि का आविष्कार सर्वप्रथम अमेरिकी शिक्षा शास्त्री सर विलियम किलपैट्रिक द्वारा किया गया था। यह विधि प्रयोजनवाद की विचारधारा पर आधारित है। ऐसे में आंकड़ों का एकत्रीकरण किसी समस्या को केंद्रित करते हुए सामुदायिक रूप से किया जाता है। इस विधि में सबसे पहले समस्या का चुनाव किया जाता है फिर चरणबद्ध तरीके से कई छात्र सामुदायिक रूप से तथ्यों की खोज करते हैं तथा उनके निष्कर्ष को एक प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह विधि साहचर्य और सहयोग के सिद्धांत पर कार्य करती है। इस प्रकार योजना सुरक्षा पर आधारित रचनात्मक कार्य करने की ओर प्रेरित होती है। यह विज्ञान के छात्रों के अतिरिक्त अन्य विषयों के छात्रों के लिए भी समान रूप से उपयोगी हैं। …

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मध्यकालीन भारत के वंश और उनके शासक

हर्यक वंश (544 से 412 ई पूर्व) बिंबिसार हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था इनकी राजधानी गिरिव्रज थी। बिंबिसार के पुत्र अजातशत्रु ने उसकी हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया। अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था एवं उसकी राजधानी राजगीर में प्रथम बौद्ध संगीति हुई। पाटलिपुत्र की स्थापना का श्रेय उदायिन को जाता है। नंद वंश (344 से 322 ई पूर्व) इस वंश का संस्थापक महापद्मनंद को माना जाता है। नंद वंश का अंतिम शासक धनानंद था इसी के शासनकाल में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया। सिकंदर मकदूनिया के शासक फिलिप का पुत्र था जिसने 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया। पंजाब के राजा पोरस ने सिकंदर के साथ झेलम नदी के किनारे हाइडेस्पीज का युद्ध लड़ा …

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विज्ञान शिक्षण

शिक्षण उद्देश्यों की सफलता को उच्चतम ऊंचाई तक पहुंचाने में शिक्षण विधियों का महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षण कार्य की आधी सफलता शिक्षण विधियों में निहित है। समुचित शिक्षण विधियों के बिना शिक्षण उद्देश्यों की सफलता प्राप्ति उसी प्रकार है जिस प्रकार बिना पंख का पक्षी। शिक्षण विधि की सफलता शिक्षक विद्यार्थी तथा पाठ्यवस्तु पर निर्भर करती है। छात्र को सीखने के लिए शिक्षक का ज्ञान उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितनी कि शिक्षक द्वारा प्रयुक्त शिक्षण विधि। यदि कोई शिक्षक पाठ्यवस्तु के ज्ञान के रूप में विद्वता हासिल किए हुए हैं तो यह आवश्यक नहीं है कि छात्र भी शिक्षक के ज्ञान से उतने ही लाभान्वित हो। क्योंकि यदि शिक्षक ने छात्रों के अनुरूप शिक्षण विधि का प्रयोग नहीं किया है …

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निगमनात्मक विधि

निगमनात्मक विधि भौतिक विज्ञान के शिक्षण की मुख्य विधि है। इसका उपयोग भौतिक विज्ञान के शिक्षण में विशेष रूप से होता है क्योंकि इनमें विविध प्रकार के नियमों, सूत्रों एवं नियमों पर प्रयोग करके विषय का ज्ञान प्राप्त कराया जाता है। इसे निम्न प्रकार परिभाषित किया जा सकता है निगमनात्मक विधि शिक्षण अध्ययन व तर्क की विधि कहलाती है। जिसमें छात्र सामान्य सिद्धांत के विशिष्ट अनुप्रयोग की ओर अग्रसर होते हैं और निष्कर्षों के लिए वैधता प्रदर्शित होती है। शिक्षा शब्दकोश के अनुसार निगमनात्मक शिक्षण में सर्वप्रथम परिभाषा या नियम का सीखना सुनिश्चित किया जाता है फिर सावधानीपूर्वक उसका अर्थ स्पष्ट किया जाता है और तथ्यों के प्रभाव से उसे पूर्ण रूप से स्पष्ट किया जाता है। निगमनात्मक विधि के …

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आगमनात्मक विधि

आगमन आत्मक विधि भौतिक विज्ञान ओके शिक्षण में प्रयोग होने वाली प्रमुख विधि है। इस विधि का प्रयोग भौतिकी एवं रसायन विज्ञान में विशेष रूप से होता है। आगमन आत्मक विधि एक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाले निश्चित नियम एवं तथ्य पर पहुंचने में उसे समर्थ बनाने हेतु विशेष उदाहरणों की पर्याप्त मात्रा में छात्र हेतु प्रस्तुतीकरण पर आधारित शिक्षण की एक विधि है। शिक्षा शब्दकोश के अनुसार जब कभी हम बालकों के समक्ष बहुत से तथ्य उदाहरण तथा वस्तुएं प्रस्तुत करते हैं और फिर उनसे अपने स्वयं के निष्कर्ष निकलवाने का प्रयत्न करते हैं तब हम शिक्षण की आगमन विधि का प्रयोग करते हैं। आगमनात्मक विधि के गुण आगमनात्मक विधि के गुण निम्न है- यह विधि भौगोलिक समस्याओं की …

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विज्ञान शिक्षण में प्रतिमान का महत्व

विज्ञान शिक्षण में प्रतिमान के निम्न महत्व होते हैं। शिक्षा के सभी उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु इनका अधिक महत्व है। शिक्षण प्रतिमानों द्वारा शिक्षक प्रशिक्षण को प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है। विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था एवं उसके उद्देश्यों की रूपरेखा तैयार करने में सहायक होते हैं। भारतीय परिस्थितियों में कक्षा शिक्षण की समस्याओं में सुधार लाने में सहायक है। शिक्षक प्रतिमान शिक्षण की मूल्यांकन प्रणाली को नवीनतम रूप देता है। विभिन्न विषयों के शिक्षण प्रतिमानों के प्रयोग का विशेष महत्व होता है। इसके प्रयोग से शिक्षण में विशिष्टीकरण संभव है। शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावशाली और सार्थक बनाने में गतिमान सहायक होता है। शिक्षक के बारे में गुणात्मक सुधार लाने में प्रतिमान सहायक होते हैं। शिक्षण प्रतिमान शिक्षक को मनोवैज्ञानिक एवं …

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वैज्ञानिक पूछताछ प्रतिमान

यह प्रतिमान वैज्ञानिक विधि पर आधारित है जो विद्यार्थियों को उसके विद्वता पूर्ण पूछताछ के लिए प्रशिक्षित करता है। इसमें विद्यार्थियों को पूछताछ की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जाती है, जिससे वे अनुशासित ढंग से प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित होते हैं। इस प्रकार की पूछताछ से विद्यार्थी विषय संबंधी नए आयामों की खोज करते हैं जिससे विद्यार्थियों को संतुष्टि होती है और इससे इनकी जिज्ञासा में आनंद का अनुभव करते हैं। प्रतिमान के प्रमुख तत्व इस प्रतिमान के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं – लक्ष्य संरचना सामाजिक प्रणाली सहायक प्रणाली उपयोग लक्ष्य इस प्रतिमान का लक्ष्य छात्रों में खोज एवं आंकड़े के विश्लेषण में दक्षता एवं कौशल विकसित होता है। जिससे वे स्वयं घटनाओं की व्याख्या कर सके तथा उनमें …

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विकासात्मक शिक्षण प्रतिमान

इस प्रतिमान का प्रतिपादन जीन पियाजे ने बालकों के संज्ञात्मक वृद्धि के लिए विकास क्रम के अध्ययन के आधार पर किया गया। इसमें छात्रों की मानसिक क्षमता तथा तार्किक चिंतन की क्षमताओं के विकास पर महत्व दिया जाता है। इस कारण छात्रों में इस प्रतिमान से सामाजिक योग्यताओं व ज्ञानात्मक वृद्धि का विकास होता है। इस विकास में शिक्षक इनकी सहायता करता है। विकासात्मक शिक्षण प्रतिमान के प्रमुख तत्व इस प्रतिमान के प्रमुख तत्व निम्न है। केंद्र बिंदु संरचना सामाजिक व्यवस्था सहायक व्यवस्था उपयोग केंद्र बिंदु इस प्रतिमान का मुख्य केंद्र बिंदु छात्रों की सामान्य मानसिक योग्यताओं का विकास करना होता है। संरचना इस प्रतिमान में दो अवस्थाएं निम्न है- इसमें अध्यापक कक्षा में ऐसा वातावरण प्रस्तुत करते हैं जिसमें …

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शिक्षण प्रतिमान के प्रकार

शिक्षण प्रतिमान परिवार को मुख्य चार परिवारों में वर्गीकृत किया गया है – सामाजिक परिवार सूचना प्रक्रिया परिवार व्यक्तिगत परिवार व्यावहारिक व्यवस्था परिवार उपरोक्त परिवारों के आधार पर ही जायज एवं वील ने शिक्षण प्रतिमान ओं को वर्गीकृत किया है, जिन्हें आधुनिक शिक्षण प्रतिमान कहा जाता है इनका विवरण निम्न है- सामाजिक अंत:क्रिया शिक्षण प्रतिमान सामाजिक अंत:क्रिया शिक्षण प्रतिमान में मनुष्य के सामाजिक पक्ष के दृष्टिगत सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव अपने सामाजिक संबंधों पर अधिक बल देता है। इसीलिए इसका अध्ययन उस शिक्षण प्रतिमान में किया जाता है। जिसमें संबंधित प्रजातांत्रिक व्यवहार को उत्पन्न करने सामाजिक जीवन दोनों में वृद्धि करने में नागरिकों को तैयार किया जा सके। सूचना प्रक्रिया शिक्षण प्रतिमान सूचना प्रक्रिया शिक्षण …

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शिक्षण प्रतिमान के मौलिक तत्व

शिक्षण प्रतिमान के मुख्य पांच तत्व होते हैं जो निम्न प्रकार हैं- उद्देश्य संरचना सामाजिक प्रणाली मूल्यांकन प्रणाली प्रयोग उद्देश्य प्रत्येक प्रतिमान का अपना उद्देश्य होता है जिसे उसका लक्ष्य बिंदु कहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतिमान को विकसित किया जाता है। संरचना शिक्षण प्रतिमान की संरचना का अर्थ उसकी संरचना तथा नियमों से है। अतः शिक्षण प्रतिमान की संरचना के अंतर्गत उसके उद्देश्यों के आधार पर शिक्षण पक्षों तथा उनकी क्रियाओं विधियों युक्तियों तथा शिक्षक व छात्रों की अंतः क्रियाओं को क्रमबद्ध रूप प्रदान किया जाता है। जिससे सीखने की उपयुक्त परिस्थितियां उत्पन्न की जा सके ताकि प्रतिमान के लक्ष्य को सरलता से प्राप्त किया जा सके। सामाजिक व्यवस्था शिक्षण एक सामाजिक कार्य है अतः सामाजिक …

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शिक्षण प्रतिमान

शिक्षण प्रतिमान आंगला भाषा की टीचिंग मॉडल का पर्यायवाची है। किसी रूप रेखा अथवा उद्देश्य के अनुसार व्यवहार को डालने की प्रक्रिया प्रतिमान कहलाती है। इस प्रकार प्रतिमान का अर्थ किसी अमुक उद्देश्य के अनुसार व्यवहार में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया है। शिक्षण के प्रत्येक प्रतिमान में शिक्षण की विशिष्ट रूप रेखा का विवरण होता है। जिसके सिद्धांतों की पुष्टि प्राप्त किए हुए निष्कर्षों पर आधारित होती है। इस प्रकार शिक्षण प्रतिमान शिक्षण सिद्धांत के लिए उपकल्पना का कार्य करते हैं। इन्ही उपकल्पनाओं की जांच के पश्चात सिद्धांतों को प्रतिपादित किया जाता है। शिक्षण प्रतिमान वह विस्तृत रूपरेखा है जिसमें उसके पाठ्यक्रम स्रोत शिक्षण तथा अधिगम को प्रभावशाली ढंग से वर्णित किया जाता है। अतः शिक्षण प्रतिमान में उसके पाठ्यक्रम …

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शिक्षण उद्देश्य

सामान्य उद्देश्य को संक्षेप में लक्ष्य कहा जाता है। लक्ष्य आदर्श होते हैं, जिनका क्षेत्र असीमित होता है तथा जिनको पूर्ण रूप से प्राप्त करना प्रायः असंभव होता है। इसकी प्राप्ति के लिए संपूर्ण स्कूल, समाज तथा राष्ट्र उत्तरदाई होता है। मानव जीवन संपूर्ण प्राणी जगत के मध्य ईश्वर की एक अनुपम कृति है। मनुष्य अपने बौद्धिक व्यवहार के कारण ही प्राणी समुदाय में सबसे उच्च सोपान पर पदासीन है। बौद्धिक उन्नति के कारण ही मनुष्य में सामाजिक व्यक्तित्व का भाव उत्पन्न हुआ है जो मानव में पशु जीवों के व्यवहार की नैसर्गिक प्रवृत्तियों से अलग पहचान प्रदान करता है। सामाजिक दृष्टिकोण से बालक के जन्म उपरांत मानसिक विकास की व्यावहारिक प्रवृत्तियों को विकसित करने का उत्तरदायित्व पहले माता-पिता और …

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विज्ञान की उपयोगिता

आज के उच्च तकनीकी युग में मनुष्य का जीवन सुबह उठने से लेकर शाम को सोने तक पूर्णता विज्ञान पर निर्भर है। मनुष्य की प्रकृति से संबंधित आज इतनी कम होती जा रही है उसी अनुपात में जीवन विज्ञान पर आधारित होता जा रहा है। प्राचीन काल में हमारा जीवन दीपक पर आधारित था तो आज बिजली के उस पार द्वारा प्रकाश में है। वर्तमान में मानव सभ्यता जितने उच्च शिखर पर पहुंची है, उसका श्रेय विज्ञान को ही जाता है। हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली छोटी छोटी चीजों से लेकर बड़े-बड़े जेट विमान राकेट आज में बुनियादी परिवर्तन हुआ है, जिससे हमारे कार्य करने की क्षमता में कई गुना वृद्धि हो गई है। विज्ञान की उपयोगिता विज्ञान …

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विज्ञान की प्रकृति

मनुष्य सदा से सृष्टि के पीछे छिपे सत्य की खोज में रहा है। उसे प्रकृति की बनावट, उसकी कार्यशैली तथा उसके मूल सिद्धांतों को जानने की तीव्र इच्छा रहती है। प्रकृति के कार्यों के नियमों को समझे बिना प्रकृत की शक्तियों को अपने सुख के लिए प्रयोग से लाना असंभव था। प्रकृति के नियमों के प्रतिकूल कार्य करने में कहीं संपूर्ण जीवन नष्ट ना हो जाए। विज्ञान प्रत्येक तत्व का विश्लेषण करके प्रकृति के प्रत्येक भाग को बारीकी से समझने का प्रयत्न करता है। सृष्टि में बहुत से तथ्य बहुत जटिल है, इसलिए यदि उनका विश्लेषण करके उन्हें छोटे-छोटे भागों में बांट दिया जाए और फिर समझा जाए तो समझना आसान हो जाता है। उदाहरण – चुंबकीय आकर्षण किस पर …

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विज्ञान अर्थ परिभाषा

विज्ञान शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा की क्रिया Seire (जानना) और संज्ञा Scientia (ज्ञान) से हुई है। विज्ञान की प्राप्ति सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध ज्ञान व अनुभव पर आधारित अन्वेषणों के फल स्वरुप होती है। अर्जित ज्ञान या अर्जित किए जाने वाले ज्ञान की एक विशिष्ट पहचान एवं विशेषता होती है। यह ज्ञान सामान्य विषयों के ज्ञान से कुछ अलग होता है। विज्ञान में किसी भी समस्या के समाधान के लिए एक विशिष्ट प्रक्रिया पर बल दिया जाता है। यह विशिष्ट प्रक्रिया ही ज्ञान प्राप्त करने की वैज्ञानिक विधि है तथा इस विशिष्ट प्रक्रिया के द्वारा अर्जित ज्ञान को विज्ञान कहते हैं। वैज्ञानिक विधि के अंतर्गत ज्ञानार्जन के लिए या समस्या समाधान के लिए किसी समस्या की आवश्यकता होती है, जब …

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Food Security

Food security means availability, accessibility and affordability of food to all people at all times. The poor households are more vulnerable to food insecurity whenever there is a problem of production or distribution of food crops. Food security depends on the Public Distribution System (PDS) and government vigilance and action at times, when this security is threatened. What is food security? Food is as essential for living as air is for breathing. But food security means something more than getting two square meals. Food security has following dimensions Availability of food production within the country, food imports and the previous years stock stored in government granaries. Accessibility means food is within reach of every person. Affordability implies that an individual …

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Food Security

Role of Media

Role of Media – Media came into existence in 1780 with the introduction of a newspaper namely “The Bengal Gazette” and since then it has matured leaps and bounds. It has been playing a very important role in shaping human minds. Media is the reflection of our society and it depicts what and how society works. Media, either it is printed, electronic or the web is the only medium, which helps in making people informed. It also helps in entertaining the public, educate and make people aware of the current happenings. Media has today become the voice of our society. There is a variety of media platform that has stimulated the thoughts of the young generation and other sections of …

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Role of Media

Climate

Climate is about the third among landforms and the drainage of our country. that is, the atmospheric conditions that prevail over our country. Why do we wear woolens in December or why it is hot and uncomfortable in the month of May, and why it rains in June – July? The answers to all these questions can be found out by studying the climate of India. Climate and Weather Climate refers to the sum total of weather conditions and variations over a large area for a long period of time (more than thirty years). Weather refers to the state of the atmosphere over an area at any point in time. The elements of weather and climate are the same, i.e. …

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Climate

Population

Can you imagine a world without human beings? Who would have utilized resources and created the social and cultural environment? The people are important to develop the economy and society. The people make and use resources and are themselves resources with varying quality. Coal is but a piece of rock until people were able to invent technology to obtain it and make it a ‘resource’. Natural events like a river flood or Tsunami become a ‘disaster’ only when they affect a crowded village or a town. Hence, the population is the pivotal element in social studies. It is the point of reference from which all other elements are observed and from which they derive significance and meaning.  ‘Resources’, ‘calamities’ and ‘disasters’ are …

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