गणित

12th Maths Formulae

12th Maths Formulae is a collection of the formulae of NCERT Class 12 Math. 12th Maths Formulae Chapter 1 Relations and Functions Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions Chapter 3 Matrices Chapter 4 Determinants Chapter 5 Continuity and Differentiability Chapter 6 Applications of Derivatives Chapter 7 Integrals Chapter 8 Applications of Integrals Chapter 9 Differential Equations Chapter 10 Vector Algebra Chapter 11 Three dimensional Geometry Chapter 12 Linear Programming Chapter 13 Probability Statics Equilibrium of Forces Centre of Gravity Common Catenary Dynamics Projectile Work Power and Energy Direct impact of Elastic Bodies Moment of Inertia D’Alembert Principle Sarkari Focus

12th Maths Formulae

10th Math Unsolved Question

कक्षा 10 की गणित में 4 अंक के प्रश्न किसी भी अध्याय से पूछे जा सकते हैं। कक्षा 10 के गणित के पेपर में कुल 8 प्रश्न चार नंबर के हल करने होते हैं, जो कि 70 नंबर के पेपर में 32 अंक के होते हैं। एक सामान्य विद्यार्थी 8 में से 6 प्रश्नों को हल कर लेता है। यहां इस आर्टिकल में 10th Math के 6 तथा 4 Mark के Question अनसोल्ड पेपर से लिए गए है। जिनका video solution भी दिया जा रहा है। 10th Math Unsolved Question परीक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। UP Board 10th Math Question कक्षा दसवीं में उत्तर प्रदेश board द्वारा जो मैथ का पेपर बनाया जाता है, उसमें कुल 4 प्रकार के …

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10th Math 4 Mark Question

पाठ योजना

पाठ योजना का तात्पर्य किसी पाठ को विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारी परिवर्तनों की प्राप्ति के संदर्भ में आकर्षक ढंग से नियोजित करने से है। यह कक्षा शिक्षण की पूर्व क्रियात्मक अवस्था कहलाती है। दैनिक पाठ योजना प्रभावी शिक्षण उपकरण के रूप में प्रयोग की जाती है। शिक्षण प्रक्रिया के दौरान पाठ योजना छात्रों की अपेक्षा अध्यापक के कार्यों पर अधिक बल देती है। संपूर्ण पाठ योजना में अध्यापक ही केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करता है। पाठ योजना एक ब्लूप्रिंट नहीं है। यह मात्र अध्यापक को निर्देश देने, शिक्षण संबंधी विभिन्न क्रियाओं में तारतम्य स्थापित कराने, महत्वपूर्ण शिक्षण बिंदुओं का ज्ञान कराने, प्रभावी शिक्षण विधि के चुनाव कराने आदि के सहायतार्थ साधन मात्र है। पाठ योजना वस्तुतः पाठ …

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पाठ योजना

गणित शिक्षण में पाठ्यपुस्तक का महत्व

पाठ्यपुस्तक का महत्व – पाठ्य पुस्तक का उपयोग करने में विशेष सावधानी आवश्यक है। गणित में पाठ्य पुस्तक का महत्व विशेष ही है। पाठ्य पुस्तक का प्रयोग इस प्रकार से किया जाए कि बालक शिक्षक द्वारा मौखिक विधि से सीखने के पश्चात पाठ को और अधिक दृढ़ता से हृदय गम कर ले। अतः गणित की पाठ्यपुस्तक का स्थान अध्यापक व छात्रों के लिए एक साधन के रूप में होना चाहिए। वर्तमान शिक्षा पद्धति की कमियों तथा अध्यापकों की अध्यापन कार्य में अरुचि के कारण पाठ्यपुस्तक आज साधन ना होकर साध्य बन गई है। वर्तमान समय में शिक्षक पाठ्यपुस्तक का उपयोग ना करें पाठ्यपुस्तक विधि का प्रयोग शिक्षण हेतु करता है। अतः पाठ्यपुस्तक शिक्षक की सेविका ना होकर आज स्वामिनी के …

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गणित शिक्षण में पाठ्यपुस्तक का महत्व

गणित प्रयोगशाला

वैसे तो गणित प्रयोगशाला विद्यालय से विद्यालय में अलग-अलग रूप से व्यवस्थित की जाती है। विद्यालय में गणित प्रयोगशाला होने से विद्यार्थियों को प्रयोगशाला विधि से और अधिक से अधिक सीखने का अवसर मिल जाता है। एक गणित की प्रयोगशाला में निम्न सुविधाएं होना चाहिए। गणित प्रयोगशाला एक गणित की प्रयोगशाला में निम्न सुविधाएं होना चाहिए। 1. विभागीय सदस्य गणित अध्यापक या विभागाध्यक्ष और उसके विभाग सदस्य विद्यालय कार्यक्रम में गणित प्रयोगशाला के प्रत्यय में सहायता करने हेतु उचित एवं तैयार हो। प्रारंभ में प्रयोगशाला स्थापना के समय विभाग के केवल एक या दो सदस्यों की आवश्यकता होती है, परंतु प्रयोगशाला को गणित अधिगम केंद्र के रूप में परिवर्तित करना संपूर्ण विभाग सदस्यों के सहयोग के ऊपर निर्भर करता है। …

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विद्यालय प्रबंधन

आदर्श गणित अध्यापक के गुण

आदर्श गणित अध्यापक के गुण – वैसे तो अध्यापक कई प्रकार के होते हैं, लेकिन आदर्श अध्यापक कुछ विशेष ही होते हैं। भारत की अनेक संस्थाएं अध्यापकों का भी मूल्यांकन करती हैं। मूल्यांकन के अनुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता है। आदर्श शिक्षक विद्यार्थियों और समाज के लिए वरदान साबित होते हैं। सभी विषयों में गणित विषय कुछ अलग सा ही है। इसीलिए आदर्श गणित अध्यापक के गुण कुछ विशेष ही है। जिनका अध्ययन हम लोग इस लेख में करने वाले हैं। आदर्श गणित अध्यापक के गुण जिसने थोड़ा सा भी गणित का ज्ञान अर्जित कर लिया है वह एक आदर्श अध्यापक बनने के लायक है यह कहना उचित नहीं है। एक गणित के अध्यापक और एक आदर्श गणित के …

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आदर्श गणित अध्यापक के गुण

गणित शिक्षण के उद्देश्य

गणित शिक्षण के उद्देश्य – विद्यालय में भिन्न-भिन्न विषयों का पाठन होता है, प्रत्येक विषय का अपना अपना अस्तित्व तथा महत्व होता है। इसके साथ ही प्रत्येक विषय को पाठ्यक्रम में रखने का एक ध्येय होता है, विषय का महत्व उसके द्वारा प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों से जाना जा सकता है। प्रत्येक विषय के अपने उद्देश्य होते हैं। गणित शिक्षण के उद्देश्य अन्य विषयों के उद्देश्यों से बिल्कुल ही अलग है। यदि उनकी पूर्ति हो जाती है तो यह कहा जा सकता है कि अमुक विषय का क्या महत्व है? प्रत्येक उद्देश्य के अंतर्गत कुछ प्राप्त उद्देश्य आते हैं। विषय पढ़ाने का एक लक्ष्य होता है, जिसकी परीक्षा बालकों के विद्यालय को छोड़ने के पश्चात होती है, जिसको हम …

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गणित शिक्षण के उद्देश्य

गणित शिक्षण के मूल्य

वास्तविक रूप से गणित विषय को इतना अधिक महत्व देने, अनिवार्य विषय बनाने तथा इसके अध्ययन से बच्चों को विभिन्न लाभ होते हैं, जिनको हम गणित शिक्षण के मूल्य भी कहते हैं। अर्थात बच्चों को गणित पढ़ाए जाने से होने वाले लाभ का अध्ययन गणित शिक्षण के मूल्यों में किया जाता है। गणित शिक्षण के मूल्य गणित शिक्षण द्वारा मुख्य रूप से निम्नलिखित मूल्य या लाभों की प्राप्ति हो सकती है। बौद्धिक मूल्य प्रयोगात्मक मूल्य अनुशासन संबंधी मूल्य नैतिक मूल्य सामाजिक मूल्य सांस्कृतिक मूल्य कलात्मक मूल्य जीविकोपार्जन संबंधी मूल्य मनोवैज्ञानिक मूल्य अंतरराष्ट्रीय मूल्य 1. बौद्धिक मूल्य बौद्धिक विकास के लिए गणितीय शिक्षण का अत्यधिक महत्व है। पाठ्यक्रम का अन्य कोई विषय ऐसा नहीं है जो की गणित की तरह बच्चों …

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गणित शिक्षण के मूल्य

पाइथागोरस और उनके योगदान

गणित के क्षेत्र में अनेक विद्वान हुए हैं जिनमें से पाइथागोरस भी उच्च कोटि के गणितज्ञ रहे हैं। इनका जन्म ग्रीस के निकट एलियन सागर के मध्य, समोस नामक द्वीप में ईसा से लगभग 580 वर्ष पूर्व हुआ था। उनके पिताजी का देहांत बचपन में ही हो गया था। उनके निर्देश पर पाइथागोरस ने मिस्र देश में जीवन का प्रारंभ कॉल व्यतीत किया। वहां पर 22 वर्षों तक रहकर उन्होंने विभिन्न विज्ञान विशेष रूप से गणित का गहन अध्ययन किया। गुरु की आज्ञा से यह 12 वर्षों तक देश विदेश की यात्रा करते रहे। जिसमें उन्होंने भारत, इराक और ईरान की यात्राएं भी की थी। उस समय तक इनकी उम्र 50 की हो चुकी थी। वहीं पर उन्होंने लगभग 60 …

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PGT Mathematics

रैनी देकार्ते के योगदान

रैनी देकार्ते एक फ्रेंच दार्शनिक था। उसने मात्र 8 वर्ष की आयु में कॉलेज में प्रवेश लिया तथा परंपरागत विषयों जैसे गणित, भौतिक तर्क तथा प्राचीन भाषाओं में शिक्षा ग्रहण की। स्कूल जीवन में उनका स्वास्थ्य बहुत खराब रहता था जिसकी वजह से उन्हें सुबह 11:00 बजे तक बिस्तर पर रहने की अनुमति थी तथा इस परंपरा को उन्होंने मृत्यु पर्यंत तक जारी रखा। स्कूल में एकमात्र विषय जिसमें उनकी रूचि थी वह गणित ही था। उनका जीवन अस्त-व्यस्त रहा तथा उन्होंने लगभग पूरे द्वीप का भ्रमण किया। बाद में सन 1628 में वह अपनी इस अनवरत यात्रा से थक गए और हालैंड में बसने का मन बना लिया। उन्होंने इस जगह का चयन बहुत सोच विचार करने के बाद …

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Sarkari Focus

यूक्लिड और उनके ग्रंथ

यूक्लिड का जन्म ईसा से लगभग 300 वर्ष पूर्व सिकंदरिया में हुआ। मिस्र के निवासी बनकर भी इन्होंने ग्रीक व्यक्तित्व नहीं छोड़ा। अपने पूर्वज ग्रीक गणितज्ञों की तरह के गणित को विशुद्ध गणितीय दृष्टि से देखते थे। उन्होंने अपने देश में एक संग्रहालय स्थापित किया था जो समय के साथ-साथ एक ग्रंथालय में बदल गया था। यहां पर भोजपत्र पर लिखित 7,00,000 पुस्तके थी। यूक्लिड के विषय में ऐसा सुना जाता है उन्होंने गणित की शिक्षा प्लेटो की प्रसिद्ध अकादमी से प्राप्त की थी। यहीं पर उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की और जयंती पर एक प्रसिद्ध ग्रंथ स्टोइकेईया रचा। ईसा से लगभग 300 वर्ष पूर्व ज्यामिति से संबंधित जो भी सामग्री उपलब्ध थी, उसे एकत्र करके यूक्लिड ने व्यवस्थित …

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यूक्लिड और उनके ग्रंथ

गणित का इतिहास

गणित का इतिहास – गणित अत्यंत प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विषय है। भारतवर्ष में वैदिक काल में गणित का स्थान सर्वोपरि रहा है। वेदांग ज्योतिष में गणित की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है की जिस प्रकार मयूर ओं की शाखाएं और सड़कों की मडिया उनके शरीर पर मस्तक पर विराजमान हैं। उसी प्रकार वेदों के सब अंगों तथा शास्त्रों में गणित सर्वोपरि है। 12 वीं शताब्दी तक भारत का गणित के क्षेत्र में प्रथम स्थान रहा है। गणित का इतिहास कई हज़ार साल पहले से मन जाता है। गणित का इतिहास प्राचीन गणित का इतिहास काफी पुराना है। प्रसिद्ध गणितज्ञ के बारे में कहा है कि बहुत अधिक करने से क्या लाभ है। इस सदाचार जगत में जो …

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गणित का इतिहास

गणित की प्रकृति

होम वन ने कहा कि गणित सभ्यता का प्रतिबिंब है मानव जाति की उन्नति तथा सभ्यता के विकास में गणित का विशेष योगदान रहा है। इसमें गणित की प्रकृति अत्यधिक महत्वपूर्ण है। The study of mathematics is so easy that it is for snow real mental discipline. Hamilt गणित की प्रकृति गणित की प्रकृति कैसी है वो हम लोग निम्न बिंदुओ से समझ सकते हैं। गणित की अपनी भाषा होती है। भाषा का तात्पर्य उसके पद प्रत्यय सूत्र संकेत सिद्धांत विशेष प्रकार के होते हैं जो कि उनकी भाषा को जन्म देते हैं। इसके उदाहरण लंबाई चौड़ाई त्रिभुज लाभ हानि कोष्टक संख्याएं किलोग्राम आदि हैं। गणित में संख्या स्थान मापन आदि को अध्ययन किया जाता है। इनका अध्ययन अन्य विषयों …

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गणित की प्रकृति

आधुनिक गणित का विकास

आधुनिक गणित का विकास मंद गति से हुआ है तथा इसका वर्तमान स्वरूप एक लंबी अवधि से सतत प्रयासों का फल है। मनुष्य ने सर्वप्रथम अंको का प्रयोग करना कब सीखा या निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता परंतु या अवश्य निश्चित है कि गिनने का ज्ञान मनुष्य को अति प्राचीन काल से ही था। वह हाथ की उंगलियों से धीरे धीरे मनुष्य को करना करने का ज्ञान हुआ। इसके महत्व को समझने तक में न जाने कितनी शताब्दी या बीत गई होंगी। तत्पश्चात गणित का विस्तार विश्व की समस्त जातियों में फैलने लगा। भारत चीन मेसोपोटामिया और मिश्र आदि देशों की प्राचीन सभ्यता के उदय के पूर्व काल में ही इसका विस्तार हो चुका था। यूनानी तथा अरबों …

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आधुनिक गणित का विकास

गणित की भाषा और व्याकरण

गणित की भाषा गणितज्ञों के द्वारा आपस में गणितीय विचारों के संवाद करने की प्रणाली है गणित की भाषा गणितीय सूत्रों के लिए अत्यंत विशिष्ट इक्रित प्रतीकात्मक संकेतन गणितीय वार्तालाप हेतु उचित तकनीकी पदों व व्याकरण परंपराओं का उपयोग करने वाली किसी प्राकृतिक भाषा के सार को समाहित करती है सामान्य रूप में प्राकृतिक भाषाओं की तरह गणित भाषा रजिस्टरों की एक इस कला में वार्तालाप तक कार्य करती है। गणित की भाषा प्रत्येक विषय की अपनी भाषा होती है जो कि विषय को एक विशिष्ट अस्तित्व देती है विषय की जिस प्रकार की भाषा होगी उसी तरह से विषय स्थाई या अस्थाई होगा गणित की भाषा अन्य सभी भाषाओं से अधिक बलशाली है जिसके कारण गणित अन्य विषयों के …

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गणित की भाषा और व्याकरण

गणित की विशेषताएं

गणित की विशेषताएं – गणित विषय की अपनी एक अलग प्रकृति है। जिसके आधार पर हम उसकी तुलना किसी अन्य विषय से कर सकते हैं। किन्ही दो या दो से अधिक विषयों की तुलना का आधार उन विषयों की प्रकृति ही है जिसके आधार पर हम विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। गणित की विशेषताएं को निम्नलिखित बिंदुओं द्वारा भली-भांति समझा जा सकता है- गणित की विशेषताएं गणित की विशेषताएं निम्न है- गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेंद्रियां हैं। इसके इसके ज्ञान का आधार निश्चित होता है जिससे उस पर विश्वास किया जा सकता है। गणित में संख्याएं स्थान दिशा तथा मापन या माहौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। इसमें इसमें मात्रात्मक तथ्यों एवं संबंधों का …

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गणित की विशेषताएं

गणित का महत्व

वर्तमान समय में सिर्फ भारत ही नहीं विश्व स्तर पर शैक्षिक आर्थिक तकनीकी तथा वैज्ञानिक प्रगति का आधार गणित ही है। अन्य विषयों में गणित का महत्व खास है। शिक्षा के तो प्रत्येक क्षेत्र में गणित के किसी ना किसी रूप का प्रयोग अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। आज दुनिया कंप्यूटर पर निर्भर होती जा रही है क्योंकि कंप्यूटर आज हमारी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। कंप्यूटर के बिना हम असहाय सा महसूस करते हैं। यह कंप्यूटर भी गणित के ज्ञान पर आधारित एक यंत्र है जो गणितीय घटनाओं को अति शीघ्रता के साथ संपादित करता है। आज जीवन तथा समाज के प्रत्येक क्षेत्र में गणित के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। कोठारी आयोग ने गणित के महत्व …

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गणित का अर्थ

गणित शब्द बहुत प्राचीन है तथा वैदिक साहित्य में इसका बहुतायत से उपयोग किया गया है। गणित शब्द का शाब्दिक अर्थ है “वह शास्त्र जिसमें गणना की प्रधानता हो”। गणित का अर्थ – गणित अंक, आधार, चिन्ह, आदि संक्षिप्त संकेतों का वह विधान है जिसकी सहायता से परिमाण दिशा तथा स्थान का बोध होता है। गणित का अर्थ गणित विषय का प्रारंभ गिनती से ही हुआ है। और संख्या पद्धति इसका एक विशेष क्षेत्र है। जिसकी सहायता से गणित की अन्य शाखाओं का विकास किया गया है। वेदांग शास्त्रों में गणित को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। प्राचीन भारत मैं गणित में संख्या गणना ज्योतिष एवं क्षेत्र गणित सम्मिलित है। कुछ विद्वानों का मत है कि हिंदू गणित के …

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