गणित

पाइथागोरस और उनके योगदान

गणित के क्षेत्र में अनेक विद्वान हुए हैं जिनमें से पाइथागोरस भी उच्च कोटि के गणितज्ञ रहे हैं। इनका जन्म ग्रीस के निकट एलियन सागर के मध्य, समोस नामक द्वीप में ईसा से लगभग 580 वर्ष पूर्व हुआ था। उनके पिताजी का देहांत बचपन में ही हो गया था। उनके निर्देश पर पाइथागोरस ने मिस्र देश में जीवन का प्रारंभ कॉल व्यतीत किया। वहां पर 22 वर्षों तक रहकर उन्होंने विभिन्न विज्ञान विशेष रूप से गणित का गहन अध्ययन किया। गुरु की आज्ञा से यह 12 वर्षों तक देश विदेश की यात्रा करते रहे। जिसमें उन्होंने भारत, इराक और ईरान की यात्राएं भी की थी। उस समय तक इनकी उम्र 50 की हो चुकी थी। वहीं पर उन्होंने लगभग 60 …

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रैनी देकार्ते के योगदान

रैनी देकार्ते एक फ्रेंच दार्शनिक था। उसने मात्र 8 वर्ष की आयु में कॉलेज में प्रवेश लिया तथा परंपरागत विषयों जैसे गणित, भौतिक तर्क तथा प्राचीन भाषाओं में शिक्षा ग्रहण की। स्कूल जीवन में उनका स्वास्थ्य बहुत खराब रहता था जिसकी वजह से उन्हें सुबह 11:00 बजे तक बिस्तर पर रहने की अनुमति थी तथा इस परंपरा को उन्होंने मृत्यु पर्यंत तक जारी रखा। स्कूल में एकमात्र विषय जिसमें उनकी रूचि थी वह गणित ही था। उनका जीवन अस्त-व्यस्त रहा तथा उन्होंने लगभग पूरे द्वीप का भ्रमण किया। बाद में सन 1628 में वह अपनी इस अनवरत यात्रा से थक गए और हालैंड में बसने का मन बना लिया। उन्होंने इस जगह का चयन बहुत सोच विचार करने के बाद …

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यूक्लिड और उनके ग्रंथ

यूक्लिड का जन्म ईसा से लगभग 300 वर्ष पूर्व सिकंदरिया में हुआ। मिस्र के निवासी बनकर भी इन्होंने ग्रीक व्यक्तित्व नहीं छोड़ा। अपने पूर्वज ग्रीक गणितज्ञों की तरह के गणित को विशुद्ध गणितीय दृष्टि से देखते थे। उन्होंने अपने देश में एक संग्रहालय स्थापित किया था जो समय के साथ-साथ एक ग्रंथालय में बदल गया था। यहां पर भोजपत्र पर लिखित 7,00,000 पुस्तके थी। यूक्लिड के विषय में ऐसा सुना जाता है उन्होंने गणित की शिक्षा प्लेटो की प्रसिद्ध अकादमी से प्राप्त की थी। यहीं पर उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की और जयंती पर एक प्रसिद्ध ग्रंथ स्टोइकेईया रचा। ईसा से लगभग 300 वर्ष पूर्व ज्यामिति से संबंधित जो भी सामग्री उपलब्ध थी, उसे एकत्र करके यूक्लिड ने व्यवस्थित …

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गणित का इतिहास

गणित अत्यंत प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विषय है। भारतवर्ष में वैदिक काल में गणित का स्थान सर्वोपरि रहा है। वेदांग ज्योतिष में गणित की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है की जिस प्रकार मयूर ओं की शाखाएं और सड़कों की मडिया उनके शरीर पर मस्तक पर विराजमान हैं। उसी प्रकार वेदों के सब अंगों तथा शास्त्रों में गणित सर्वोपरि है। 12 वीं शताब्दी तक भारत का गणित के क्षेत्र में प्रथम स्थान रहा है। गणित का इतिहास कई हज़ार साल पहले से मन जाता है। गणित की प्रकृति गणित की भाषा और व्याकरण गणित की विशेषताएं गणित का महत्व आधुनिक गणित का विकास गणित का इतिहास प्राचीन गणित का इतिहास काफी पुराना है। प्रसिद्ध गणितज्ञ के बारे में कहा …

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गणित की प्रकृति

होम वन ने कहा कि गणित सभ्यता का प्रतिबिंब है मानव जाति की उन्नति तथा सभ्यता के विकास में गणित का विशेष योगदान रहा है। इसमें गणित की प्रकृति अत्यधिक महत्वपूर्ण है। The study of mathematics is so easy that it is for snow real mental discipline. Hamilt गणित की प्रकृति गणित की प्रकृति कैसी है वो हम लोग निम्न बिंदुओ से समझ सकते हैं। गणित की अपनी भाषा होती है। भाषा का तात्पर्य उसके पद प्रत्यय सूत्र संकेत सिद्धांत विशेष प्रकार के होते हैं जो कि उनकी भाषा को जन्म देते हैं। इसके उदाहरण लंबाई चौड़ाई त्रिभुज लाभ हानि कोष्टक संख्याएं किलोग्राम आदि हैं। गणित में संख्या स्थान मापन आदि को अध्ययन किया जाता है। इनका अध्ययन अन्य विषयों …

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गणित की प्रकृति

आधुनिक गणित का विकास

आधुनिक गणित का विकास मंद गति से हुआ है तथा इसका वर्तमान स्वरूप एक लंबी अवधि से सतत प्रयासों का फल है मनुष्य ने सर्वप्रथम अंको का प्रयोग करना कब सीखा या निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता परंतु या अवश्य निश्चित है कि गिनने का ज्ञान मनुष्य को अति प्राचीन काल से ही था वह हाथ की उंगलियों से धीरे धीरे मनुष्य को करना करने का ज्ञान हुआ। इसके महत्व को समझने तक में न जाने कितनी शताब्दी या बीत गई होंगी तत्पश्चात गणित का विस्तार विश्व की समस्त जातियों में फैलने लगा भारत चीन मेसोपोटामिया और मिश्र आदि देशों की प्राचीन सभ्यता के उदय के पूर्व काल में ही इसका विस्तार हो चुका था यूनानी तथा अरबों …

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गणित की भाषा और व्याकरण

गणित की भाषा प्रत्येक विषय की अपनी भाषा होती है जो कि विषय को एक विशिष्ट अस्तित्व देती है विषय की जिस प्रकार की भाषा होगी उसी तरह से विषय स्थाई या अस्थाई होगा गणित की भाषा अन्य सभी भाषाओं से अधिक बलशाली है जिसके कारण गणित अन्य विषयों के अपेक्षा अधिक स्थाई हैं इसके बाद बहुत ही विज्ञान रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों का स्थान आता है विषय की भाषा के आधार पर उसकी सत्यता तथा भविष्यवाणी अन्य विषयों की अपेक्षा अधिक स्थाई है अगर विषय की भाषा कमजोर है तो विषय की सत्यता तथा भविष्यवाणी कम हो जाती है अतः गणित विषय की भाषा पर ही इसकी प्रकृति निर्भर करती है। गणित की भाषा गणितज्ञों के द्वारा …

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गणित की विशेषताएं

गणित विषय की अपनी एक अलग प्रकृति है। जिसके आधार पर हम उसकी तुलना किसी अन्य विषय से कर सकते हैं।किन्ही दो या दो से अधिक विषयों की तुलना का आधार उन विषयों की प्रकृति ही है जिसके आधार पर हम विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। गणित की विशेषताएं को निम्नलिखित बिंदुओं द्वारा भली-भांति समझा जा सकता है- गणित की विशेषताएं गणित की विशेषतायें निम्न है- गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेंद्रियां हैं। इसके इसके ज्ञान का आधार निश्चित होता है जिससे उस पर विश्वास किया जा सकता है। गणित में संख्याएं स्थान दिशा तथा मापन या माहौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। इसमें इसमें मात्रात्मक तथ्यों एवं संबंधों का अध्ययन किया जाता है। यह …

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