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भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास एवं इसकी चुनौतियां – इस प्रश्न पत्र में यह जानना होता है कि भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास कैसे हुआ और कौन-कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शिक्षा प्रणाली के विकास में समाजशास्त्रियों के योगदानो के साथ-साथ सरकार के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को भी पढ़ना है। सर्वप्रथम हम लोग जानेंगे कि कैसे वैदिक काल और मध्यकालीन भारत में शिक्षा व्यवस्था थी और कैसे अंग्रेज शासन काल में शिक्षा व्यवस्था में सुधार किए गए।

यह भी देखना है कि भारत में आजादी के बाद शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए कौन-कौन सी नीतियां अपनाई गई और वर्तमान में शिक्षा व्यवस्था कैसी है और इसमें सुधार किस तरीके से किया जा सकता है?

यह प्रश्नपत्र परीक्षा में 80 अंक का आता है। उसमें 8 प्रश्न चार चार अंक (32 अंक) के तथा 4 प्रश्न बारह – बारह अंक (48 अंक) के लिखने होते हैं। यदि आपको अधिक से अधिक अंक लाना है तो इन चार प्रश्नों पर ध्यान दीजिए जो 12-12 अंक के हैं।

वैदिककालीन शिक्षाबौद्धकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षातक्षशिला विश्वविद्यालय
मैकाले का विवरण पत्र 1835लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
एडम रिपोर्टवुड का घोषणा पत्र
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीतिहण्टर आयोग
सैडलर आयोग 1917बुनियादी शिक्षा – वर्धा शिक्षा योजना
वर्धा योजना की असफलता के कारणसार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
विश्वविद्यालय शिक्षा आयोगमुदालियर आयोग 1952
त्रिभाषा सूत्रकोठारी आयोग 1964
शिक्षा का राष्ट्रीयकरणप्रौढ़ शिक्षा अर्थ आवश्यकता उद्देश्य क्षेत्र
राष्ट्रीय साक्षरता मिशनविश्वविद्यालय के कार्य
उच्च शिक्षा के उद्देश्यउच्च शिक्षा समस्याएं
शैक्षिक स्तर गिरने के कारणदूरस्थ शिक्षा अर्थ परिभाषा
मुक्त विश्वविद्यालयसंतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता
परीक्षा सुधार आवश्यकताप्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम