शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

संप्रेषण अर्थ आवश्यकता महत्व संप्रेषण की समस्याएं
नेतृत्व अर्थ प्रकार आवश्यकता नेतृत्व के सिद्धांत
प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध प्रधानाचार्य के कर्तव्य
प्रयोगशाला लाभ सिद्धांत महत्त्व विद्यालय पुस्तकालय
नेता के सामान्य गुण पर्यवेक्षण
शैक्षिक पर्यवेक्षण प्रबन्धन अर्थ परिभाषा विशेषताएं
शैक्षिक प्रबन्धन कार्य शैक्षिक प्रबन्धन आवश्यकता
शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं विद्यालय प्रबंधन
राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन आदर्श शैक्षिक प्रशासक
प्राथमिक शिक्षा प्रशासन केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड
शैक्षिक नेतृत्व डायट
विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन विद्यालय प्रबंधन

प्रधानाचार्य के कर्तव्य

प्रधानाचार्य के कर्तव्य का तात्पर्य एक विद्यालय को आदर्श विद्यालय कैसे बनाया जाए, उसका प्रबंधन विख्यात कैसे किया जाए। प्रधानाचार्य के कुछ मुख्य कर्तव्य होते हैं जिनके द्वारा वह प्रबंधन प्रक्रिया को निखारने का प्रयास करता है। प्रधानाचार्य के कर्तव्य प्रधानाचार्य के कर्तव्य निम्नलिखित हैं- प्रधानाचार्य के प्रशासन संबंधी कर्तव्य विद्यालय के कार्यालय सम्बन्धी कर्तव्य प्रधानाचार्य के शिक्षा संबंधी कर्तव्य प्रधानाचार्य के निरीक्षण संबंधी कर्तव्य अभिभावकों और समाज के प्रति कर्तव्य सहगामी क्रियाएं तथा खेलकूद के प्रति कर्तव्य प्रधानाचार्य के मूल्यांकन संबंधी कर्तव्य नियोजन संबंधी कर्तव्य संगठन और प्रशासन अनुशासन 1. प्रधानाचार्य के प्रशासन संबंधी कर्तव्य प्रधानाचार्य को अपने व्यवसाय से संबंधित नियम तथा कानून का ठोस ज्ञान होना चाहिए। उसे विद्यालय का प्रबंध सही ढंग से करने के लिए …

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प्रधानाचार्य के कर्तव्य, परामर्शदाता

विद्यालय प्रबंधन

विद्यालय प्रबंधन एक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसका कार्य विद्यालय के मानवीय एवं भौतिक संसाधनों को ऐसी गतिशील संगठन इकाइयों में परिवर्तित करना है। जिसके द्वारा उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस प्रकार से कार्य किया जा सके कि शिक्षार्थियों के लिए उन्हें संतुष्टि प्राप्त हो सके और जो कार्य कर रहे हैं, उनमें उच्च नैतिक स्तर बनाए रखते हुए उत्तरदायित्व निभाने की भावना भी बनी रहे। विद्यालय प्रबंधन प्रतीक संस्था के अपने आदर्श लक्ष्य और उद्देश्य होते हैं और उनकी सफलता पूर्वक प्राप्ति के लिए ही उचित प्रबंधन की आवश्यकता होती है। विद्यालय एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था है।अतः इसकी एक संगठित प्रबंधात्मक व्यवस्था होती है। किसी प्रभावशाली प्रबंधन के अभाव में विद्यालय जीवन में दूर व्यवस्था एवं संभ्रांत फैल जाने की …

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प्रौढ़ शिक्षा, विद्यालय प्रबंधन

प्रयोगशाला लाभ सिद्धांत महत्त्व

विद्यालयों में प्रयोगशालाओं का अपना स्थान होता है। आधुनिक युग में शिक्षा को आधिकारिक व्यावहारिक तथा जीवन से संबंधित किया जा सकता है। इसके लिए शिक्षा तथा शिक्षण के जगत में एक नारा चला है- करके सीखना। करके सीखने के लिए भी प्रयोगशालाओं तथा उन में विभिन्न प्रकार के उपकरणों तथा साज-सज्जाओं का होना अनिवार्य है। इन प्रयोगशालाओं में विभिन्न प्रकार के प्रयोग करके बालक न केवल करके ही सीखते हैं अपितु वे तथ्यों का व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी ज्ञान भी प्राप्त करते हैं। आधुनिक युग में तो इसका इतना व्यापक एवं प्रचुर प्रयोग होने लगा है कि प्रगतिशील विद्यालय तो न केवल भौतिक विज्ञानो का ही अपितु सामाजिक एवं भाषा विज्ञानों का शिक्षण भी प्रयोगशालाओं के माध्यम से करते हैं। …

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प्रयोगशाला

शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं

शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं निम्न हैं- कागजी प्रक्रिया वित्तीय प्रबंधन मूलभूत सुविधाओं का अभाव पाठ्यक्रम निर्माण की समस्या शैक्षिक नीति निर्माण की समस्या नियोजन की समस्या 1. कागजी प्रक्रिया शैक्षणिक संस्थानों पर बोझिल कागजी प्रक्रिया और मानवीय प्रक्रियाओं का भार होता है और उन्हें उपस्थिति, शुल्क, प्रवेश, परिवहन आदि पर रिकॉर्ड बनाए रखना मुश्किल होता है। पूर्ण सूचनाओं को ट्रैक करना पड़ता हैै, जिनकी उन्हें आवश्यकता होती है। स्कूल प्रबंधन प्रणाली का उपयोग करना, समय बचाने के लिए और कर्मचारी के कार्य भार को कम करने के लिए शैक्षणिक प्रक्रिया को निरंतर क्रियाशील रखना पड़ता है। 2. वित्तीय प्रबन्धन शैक्षिक प्रबंधन में संसाधनों की उपलब्धता होना आवश्यक होता है और संसाधनों को उपलब्ध करने के लिए वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

शैक्षिक प्रबन्धन कार्य

शैक्षिक प्रबन्धन कार्य – विद्यालय का मुख्य उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। बालक सजग गतिशील तथा विशिष्ट जीव है। प्रत्येक बालक दूसरे बालक से क्षमताओं तथा विशेषताओं में भिन्न है। अतः आवश्यक है कि विद्यालय का वातावरण ऐसा हो कि सभी बालकों को विकास के पूर्ण अवसर प्राप्त हो सके। विद्यालय का प्रबंधन जितना अधिक अच्छा होगा उतना ही अधिक विद्यालय अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होगा। शैक्षिक प्रबन्धन कार्य विद्यालय की सफलता बालकों के विकास पर निर्भर करती है। शैक्षिक प्रबन्धन प्रक्रिया द्वारा विद्यालय नियोजित रूप में शैक्षिक कार्यक्रमों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है। शैक्षिक प्रबंधन प्रक्रिया गतिशील प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यों को किया जाता है। इन कार्यों को …

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प्रबन्धन,

प्रबन्धन अर्थ परिभाषा विशेषताएं

शिक्षा, उद्योग तथा व्यापार जैसे क्षेत्रों में प्रबंधन का अपना महत्त्व है। प्रबन्धन के द्वारा समस्त मानवीय एवं भौतिक संसाधनों की व्यवस्था तथा उनका अधिकतम उपयोग किया जाता है। इससे कार्यप्रणाली में गति आती है, संसाधनों का मितव्ययतापूर्ण उपयोग होता है तथा उद्देश्यों की पूर्ति सहजता के साथ हो जाती है। प्रबन्धन प्रबन्धन वह तत्व है जिसके द्वारा हम पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को कम से कम समय तथा परिश्रम के साथ प्राप्त कर सकते हैं। इसके द्वारा ही हम विभिन्न अधिकारियों तथा व्यक्तियों के उत्तरदायित्व तथा उनके स्थिति क्रम का निर्धारण भी करते हैं। प्रबंधन किसी भी संगठन चाहे वह औद्योगिक जगत से संबंधित हो या फिर शिक्षा जगत से का मस्तिष्क कहलाता है। यही नीति निर्धारण का कार्य करता …

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प्रबन्धन,

शैक्षिक पर्यवेक्षण

शैक्षिक पर्यवेक्षण शैक्षिक प्रशासन का महत्वपूर्ण अंग है जिसके द्वारा व्यक्तियों को किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रियाशील रखा जाता है। शैक्षिक पर्यवेक्षण का कार्य उस समय प्रारंभ होता है जब शिक्षक कक्षा में होता है। शैक्षिक पर्यवेक्षण का संबंध मुख्यतः मानवीय तत्व से होता है। यह विद्यालय में मुख्यता विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा संपन्न किया जाता है। इसका विकास संगोष्ठी, सेमिनार और कार्यशाला पर आधारित है। शैक्षिक पर्यवेक्षण के कार्य शैक्षिक पर्यवेक्षक को अपने व्यवसाय से संबंधित निम्न कार्य करने पड़ते हैं – कक्षा निरीक्षण करना जिससे शिक्षक के शिक्षण स्तर का पता चल सके। शिक्षक गोष्ठियां आयोजित करना। सभा समितियों में भाग लेना। अभिभावकों से संपर्क स्थापित करना। कार्यालय कार्य का संचालन। प्रधानाध्यापकों के साथ कार्य करना। …

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प्रधानाचार्य के कर्तव्य, परामर्शदाता

शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। यह माध्यमिक शिक्षा से संबंधित मामलों में राज्य सरकारों को परामर्श एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है तथा उनका पथ प्रदर्शन एवं नेतृत्व भी करती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा में सुधार करने के लिए बहुत से कार्यक्रम प्रस्तावित करती है, जैसे शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन के लिए राज्य ब्यूरो की स्थापना, राज्य मूल्यांकन एकक, विज्ञान के राज्य संस्थान आदि। शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य कर रही है, उनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है – शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन पर्यावरण शिक्षा केंद्रीय विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नवोदय विद्यालय राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं …

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पर्यवेक्षण

आधुनिक युग में निरीक्षण संबंधी नवीन धारणा को प्रयोग करने के लिए पर्यवेक्षण नामक शब्द का प्रयोग किया गया। पर्यवेक्षण अंग्रेजी शब्द Supervision का हिंदी रूपांतरण है। यह दो शब्द Super और Vision का सन्धि है, जिसका अर्थ होता है क्रमश: ‘उच्च और दृष्टि’। किस प्रकार व उच्च बुद्धि है जो विद्यालय को गति प्रदान करती है पर्यवेक्षण कहलाता है। पर्यवेक्षण पर्यवेक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पर्यवेक्षक अपनी दिव्य दृष्टि द्वारा संपूर्ण विद्यालय व्यवस्था के सूक्ष्म तत्व तत्व तत्व संबंधी समस्याओं का अध्ययन करता है उनका समाधान प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन प्रक्रिया में पर्यवेक्षक की महत्ता तथा उसके असाधारण गुणों का विशेष महत्व होता है। इसका लक्ष्य समस्याओं का समाधान तथा समाधान के लिए उपयुक्त सुझाव एवं सुझावों …

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पर्यवेक्षण

राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन

राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन – भारत में कुल 29 राज्य हैं। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक अध्यक्ष होता है। उसको शासन कार्यों में परामर्श देने के लिए प्रत्येक राज्य में एक मंत्रिपरिषद होता है। मंत्री परिषद का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। मंत्रिपरिषद के मंत्रियों में एक शिक्षा मंत्री होता है। शिक्षा मंत्री शिक्षा से संबंधित नीतियों एवं मामलों के लिए उत्तरदाई होता है। शिक्षा मंत्री राज्य में सभी प्रकार की शिक्षा के लिए उत्तरदाई नहीं होता है। राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन राज्य में अन्य मंत्री भी अपने मंत्रालयों से संबंधित शैक्षिक मामलों के लिए उत्तरदाई होते हैं। उदाहरण के रूप में कृषि मंत्री कृषि शिक्षा से संबंधित होता है, बहुत से राज्यों में शिक्षा की सहायता के लिए एक …

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मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध, प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक, नेतृत्व, राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन

आदर्श शैक्षिक प्रशासक

एक आदर्श शैक्षिक प्रशासक के लिए विद्यालय प्रबंधन एवं विद्यालय के कर्मचारियों में उचित समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय हो या अन्य कोई संस्थान बिना उचित समन्वय एवं सहयोग के विकास नहीं कर सकता है। आदर्श शैक्षिक प्रशासक के गुण विद्यालय में तो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्र तथा शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी वर्ग आते हैं। ऐसी स्थिति में सभी के मध्य उचित समन्वय एवं सहयोग अत्यंत आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त आदर्श शैक्षिक प्रशासक के लिए कुछ अन्य गुणों का होना भी आवश्यक है यह गुण निम्नलिखित है – निश्चित उद्देश्य प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करने वाला संप्रेषण दूसरों की सलाह को सुनने वाला एक योजनाकार प्रतिभा की पहचान करने वाला 1. निश्चित उद्देश्य वह प्रशासक अच्छा माना जाता है …

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केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व

प्राथमिक शिक्षा प्रशासन

भारत में प्राथमिक शिक्षा प्रशासन के दो महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 के अनुसार सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति और सार्वभौमिक शिक्षा के स्तर पर बेसिक शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा के आदर्श या नमूने के रूप में लागू करना। सन 1976 से पूर्व शिक्षा पूर्ण रूप से राज्यों का उत्तरदायित्व था। संविधान में 1976 में किए गए संशोधन से शिक्षा को समवर्ती सूची में डाला गया। उसके दूरगामी परिणाम हुए। आधारभूत वित्तीय तथा प्रशासनिक उपायों को राज्य तथा केंद्र सरकार के बीच नई जिम्मेदारियों को बांटने की आवश्यकता हुई। जहां एक और शिक्षा के क्षेत्र में राज्यों की भूमिका एवं उनके उत्तर दायित्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, वहीं केंद्र सरकार ने शिक्षा …

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प्राथमिक शिक्षा प्रशासन

केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड

यह मंडल सबसे प्राचीन संस्था है। शिक्षा संबंधी मामलों में प्रांतीय सरकारों की ओर सलाह देने के लिए इसकी स्थापना 1921 ईस्वी में की गई थी। यह बोर्ड मंत्रालय की समस्त क्रियाओं की महत्वपूर्ण धुरी है, जिसके चारों ओर संपूर्ण कार्यक्रम फैला हुआ है। संगठन केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के संगठन इस प्रकार है केंद्रीय शिक्षामंत्री भारत सरकार का शिक्षा परामर्शदाता भारत सरकार द्वारा मनोनीत 15 सदस्य जिनमें चार स्त्रियां होती हैं संसद के 5 सदस्य जिनमें दो राज्यसभा के तथा तीन लोक सभा के सदस्य भारत सरकार के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों में अंतर विश्वविद्यालय मंडल द्वारा चुने हुए 2 सदस्य अखिल भारतीय प्राविधिक शिक्षा परिषद के 2 सदस्य जिनको स्वयं परिषद मनोनीत करती है। प्रत्येक राज्य सरकार का एक …

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वैदिककालीन शिक्षा, उच्च शिक्षा के उद्देश्य

शैक्षिक नेतृत्व

शैक्षिक नेतृत्व के प्रत्यय को अब तक हम उद्योग तथा व्यापार, राजनीति तथा समाजशास्त्र में ही देखते आए हैं किंतु वर्तमान में यह पाया गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की अन्य क्षेत्रों में। शैक्षिक नेतृत्व की उपयोगिता शिक्षा प्रशासन तथा शिक्षण अधिगम के क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से पाते हैं। शैक्षिक नेतृत्व आधुनिक युग में शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक एवं जटिल होता जा रहा है जिसमें शिक्षा से संबंधित सभी व्यक्तियों को कार्य करना पड़ता है। इनमें से कुछ व्यक्ति प्रशासक के रूप में कार्य करते हैं तथा अन्य व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे प्रशासक के आदेश एवं निर्देशानुसार कार्य करें। आज शैक्षिक नेतृत्व शिक्षा जगत के …

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शैक्षिक नेतृत्व

डायट

डायट के माध्यम से प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों, औपचारिकेत्तर तथा प्रौढ़ शिक्षा के कार्यकर्ताओं को उनके शैक्षिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक किया जाता है। नई शिक्षा नीति 1986 में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के विकास तथा अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु सन 1988 में जिला स्तरीय या मंडलीय शिक्षा तथा प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई। डायट डायट के माध्यम से प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों, औपचारिकेत्तर तथा प्रौढ़ शिक्षा के कार्यकर्ताओं को उनके शैक्षिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक किया जाता है। ग्राम तथा नगर में शिक्षा से संबंधित व्यक्तियों को शैक्षिक पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति से परिचित कराना है। प्राथमिक शिक्षा को सार्वजनिक बनाने तथा शिक्षकों में आत्मविश्वास स्वाभिमान एवं व्यवसाय के …

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उच्च शिक्षा के उद्देश्य, विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन, नेता के सामान्य गुण

नेता के सामान्य गुण

एक प्रभावी नेता में कौन-कौन से गुण होने चाहिए, किस संबंध में भी विद्वानों ने गुणों की अलग-अलग संख्या बताई है। जैसे ऑलपोर्ट ने 18 तथा बर्नार्ड ने 28 गुणों की सूची दी है। इसी प्रकार और भी अनेक विद्वानों ने इनकी संख्या प्रथक प्रथक बताई है। नेता के सामान्य गुण इन सभी का यदि विश्लेषण करें तो नेता के सामान्य गुण निम्नलिखित उभर कर आते हैं- शारीरिक गुण बुद्धि उद्दीपकता दूरदर्शिता आत्मविश्वास संकल्प शक्ति सामाजिकता लोचशीलता 1. शारीरिक गुण एक प्रभावी नेता के सामान्य गुण में कुछ शारीरिक गुणों का होना वांछनीय है। वह देखने में भद्दा न लगे, शरीर की ऊंचाई, समूह के सदस्यों से बहुत अधिक कम या ज्यादा न हो, उसका वजन संतुलित हो, वह न …

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Social Problems Approaches

नेतृत्व अर्थ प्रकार आवश्यकता

नेतृत्व शब्द अंग्रेजी के लीडरशिप का हिंदी रूपांतरण है जिसका अर्थ है आगे आगे चलना। इस प्रकार जो व्यक्ति कार्य को पूरा करने के लिए तथा दूसरों के मार्गदर्शन के लिए आगे चले वही नेता है। नेतृत्व से एक प्रकार की अनुकरणीयता का बोध होता है जितने अधिक अनुगामी होंगे उतना ही अधिक प्रभावशाली नेतृत्व माना जाएगा। नेतृत्व नेतृत्व वह व्यवहारागत गुण है जिससे वह अन्य व्यक्तियों या उनकी क्रियाओं को निर्देशित करता है। नेतृत्व व्यक्ति के समूह को निश्चित दिशा में ले जाने का साधन है। विभागीय संगठन का अध्यक्ष नेता नहीं होता बल्कि नेता वह है जो अपने समूह को शक्ति प्रदान कर सकता है जो जानता है कैसे प्रोत्साहित करें तथा कैसे सभी से जो दे सकते …

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दूरस्थ शिक्षा, नेतृत्व

संप्रेषण अर्थ आवश्यकता महत्व

संप्रेषण प्रबंध प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है, यह वह माध्यम है जिसके द्वारा व्यक्ति से व्यक्ति, व्यक्तियों और समूहों को संभोग संप्रेषित किया जाते हैं। विचारों की अभिव्यक्ति या व्यक्तियों के प्रश्नों के उत्तर भी संप्रेषण या संचार माध्यम से दिए जाते हैं। संप्रेषण व्यवस्था का आशय सूचना या संदेश भेजने की व्यवस्था मात्र नहीं है। शैक्षिक प्रशासन के संबंध में इसका अर्थ अधिक व्यापक है तथा प्रशासन के विभिन्न स्तरों के बीच विचार-विमर्श एवं मिलजुल कर कार्य करना परिधि के अंतर्गत आता है। संप्रेषण संप्रेषण के मूल में यह विचार निहित है कि व्यक्ति समस्याओं पर परस्पर मिलजुलकर विचार करें और एक दूसरे के दृष्टिकोण को समझकर सामंजस्य पूर्ण ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए लक्ष्य …

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संप्रेषण अर्थ आवश्यकता महत्व

विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन

विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन – विश्वविद्यालय शिक्षा से हमारा अभिप्राय केवल उच्च शिक्षा से नहीं है, जो विश्वविद्यालयों के द्वारा ही प्रदान की जाती है। वरन् उसका अर्थ उच्च शिक्षा से है। जो विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों में भी प्रदान की जाती है। विश्वविद्यालय एक स्वायत्त प्राप्त संस्था है, जिसका प्रबंध स्वयं उसी के द्वारा किया जाता है। भारत में विश्वविद्यालय के प्रकार भारत में तीन प्रकार के विश्वविद्यालय हैं – केंद्रीय विश्वविद्यालय – ये विश्वविद्यालय केंद्र शासित हैं और इनके व एवं प्रबंध का संपूर्ण भार केंद्रीय सरकार पर है। इस प्रकार के 30 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। राज्य विश्वविद्यालय – यह विश्वविद्यालय राज्य शासित हैं और इनके व्यय एवं प्रबंध का भार राज्य सरकार पर है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के …

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विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन

नेतृत्व के सिद्धांत

नेतृत्व के सिद्धांत – नेतृत्व का विकास कैसे होता है इस संबंध में अलग-अलग विद्वानों ने अलग अलग सिद्धांत रखे हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान नेतृत्व के सिद्धांत वर्तमान में नेतृत्व के सिद्धांत से संबंधित निम्न नियम देखने को मिलते हैं- अयोग्यता में योग्यता का सिद्धांत संयोग का सिद्धांत विलक्षणता का सिद्धांत संतुलन का सिद्धांत समूह प्रक्रिया सिद्धांत 1. अयोग्यता में योग्यता का सिद्धांत इस सिद्धांत की व्याख्या हम मनोविज्ञान के क्षेत्र पूर्ण के सिद्धांत के आधार पर करते हैं कि मनुष्य जब किसी एक क्षेत्र में आ योग्यता रखता है तो वह अपनी इस अयोग्यता की क्षतिपूर्ति स्वरूप अन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करता है। इस सिद्धांत के अनुसार कुछ व्यक्तियों में कुछ कमियां होती हैं तो वह अपनी …

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शिक्षा का व्यवसायीकरण, शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं

संप्रेषण की समस्याएं

संप्रेषण की समस्याएं – संप्रेषण के मार्ग में अनेक बाधाएं और अवरोध हैं। वास्तव में जो तत्व संप्रेषण के प्रभाव में वृद्धि करते हैं, यदि उनका प्रयोग न किया जाए तो संप्रेषण का प्रभाव घटने लगता है। संप्रेषण की समस्याएं संप्रेषण की समस्याएं को घटाने वाले तत्व मुख्यत: निम्न है- सैद्धांतिक बाधा पद सोपान की बाधा भाषा संबंधी कठिनाई धन का अभाव संगठन के आकार की बाधा वैचारिक पृष्ठभूमि की कठिनाई रुचि का अभाव प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी विद्युत आपूर्ति की समस्या संप्रेषण माध्यमों का प्रयोग न करना 1. सैद्धांतिक बाधा पृष्ठभूमि, शिक्षा और प्रत्याशी में अंतर होने के कारण सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों में अंतर आ जाता है। संभवत: प्रभावशाली संप्रेषण में यह सबसे बड़ी बाधाएं हैं जिन्हे पार …

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Mobile phone and youth

प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध

प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध द्विपक्षीय हैं। दोनों ही एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। शिक्षक जहां प्रशासन से शिक्षण की समुचित परिस्थितियों को जुटाने की अपेक्षा करते हैं, वहीं प्रशासन भी शिक्षक से उसकी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार काम करने की अपेक्षा रखता है। यदि प्रधानाचार्य शिक्षकों से अच्छे कार्य की अपेक्षा रखता है तो उसे शिक्षकों के कार्यों की प्रशंसा करनी चाहिए। शिक्षकों के अच्छे कार्यों की प्रशंसा करने से शिक्षकों के कार्य में वृद्धि होती है। प्रधानाचार्य को समूह में शिक्षक विशेष की बुराई नहीं करनी चाहिए। ठीक रहेगा कि पहले अलग से शिक्षक को समझाना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध अध्यापक तथा प्रधानाचार्य के आपसी संबंधों के विकास के संबंध में क्रिस्टोफर ने प्राचार्य के …

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शैक्षिक नेतृत्व

विद्यालय पुस्तकालय

विद्यालय में पुस्तकालय का बड़ा महत्व है। वास्तव में प्रधानाचार्य विद्यालय का मस्तिष्क है, अध्यापक नाड़ी- संस्थान हैं और पुस्तकालय उनका हृदय है।पुस्तकालय बौद्धिक एवं साहित्यिक अभिवृद्धि का स्थान होता है। पुस्तकालय में ही बालक मानवीय ज्ञान तथा अनुभवों की निधि प्राप्त करता है या नवीन ज्ञान की खोज का केंद्र होता है। पुस्तक अनेक महान चिंतकों के अनुभवों द्वारा विद्वानों पर स्थित संग्रह होती है या संग्रह भौतिक तथा आध्यात्मिक विकास में उल्लेखनीय सहयोग प्रदान करता है। विद्यालय पुस्तकालय वास्तव में पुस्तकालय एक बौद्धिक प्रयोगशाला है। जहां हम अपनी बुद्धि के विकास हेतु सतत प्रयास करते हैं। पुस्तकालय हमारे मस्तिष्क को स्वच्छ एवं पोषक भोजन प्रदान करने वाला व्यवस्थित भोजनालय है यह हमारी सोच क्षमता में वृद्धि करने का …

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लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति, मुदालियर आयोग