शिक्षा शास्त्र

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य – सामाजिक उद्देश्य के अनुसार समाज या राज्य का स्थान व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है। बैगेल और डीवी ने सामाजिक उद्देश्य का तात्पर्य सामाजिक दक्षता से लगाया है लेकिन अपने अतिवादी स्वरूप में या उद्देश्य व्यक्ति को समाज की तुलना में निचली श्रेणी का मानता है तथा व्यक्ति के सारे अधिकारों एवं उत्तरदायित्व को राज्य के हाथों में सौंप देता है। इस अतिवादी स्वरूप के अंतर्गत समाज को साध्य और व्यक्ति को साधन माना जाता है अर्थात व्यक्ति का अपना अलग कोई अस्तित्व नहीं है। लेकिन यदि हम किस उद्देश्य के अतिवादी रूप को ध्यान में ना रखें तो सरल रूप से इस उद्देश्य का अर्थ होगा व्यक्तियों में सहयोग एवं सामाजिक भावना का विकास करना। …

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वेदान्त दर्शन

वेदान्त दर्शन- वेदान्त शब्द का तात्पर्य है – वेद का अंत। इन्हें वेदों का अंतिम भाग अथवा वेदों का सार भी का जाता है। वेद के मुख्यतः तीन भाग हैं – वैदिक मंत्र ब्राह्मण उपनिषद उपनिषद वेद का अंतिम भाग तथा वैदिक काल का अंतिम साहित्य है। वेदांत के तीन रूप बताए गए हैं – द्वैत विशिष्टाद्वैत अद्वैत अधिकांश दार्शनिक अद्वैत समर्थक हैं और विशिष्ट आ गए और अद्वैत में कोई अंतर नहीं मानते हैं। उनके अनुसार यह तीनों रूप वेदान्त दर्शन के तीन चरण है और अंतिम लक्ष्य अद्वैत की अनुभूति है। इस प्रकार जो ज्ञान वास्तविकता की ओर ले जाता है वही वेदांत है। वेदान्त दर्शनका प्रारंभ परम निराश आवाज से होता है तथा इसका अंत होता है …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

दर्शन शिक्षा संबंध

दर्शन शब्द का अंग्रेजी रूपांतरण Philosophy शब्द दो यूनानी शब्दों Philos और Sofia से मिलकर बना है। जिसमें Philos का अर्थ है Love तथा Sofia का अर्थ है of Wisdom। इसप्रकार Philosophy का शाब्दिक अर्थ है ‘Love of Wisdom‘ (ज्ञान से प्रेम) दर्शन की प्रमुख परिभाषाएं इस प्रकार हैं – दर्शन की परिभाषाएं दर्शनशास्त्र को एक ऐसे प्रयास के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसके द्वारा मानव अनुभूतियों के संबंध में समग्र रूप में सत्यता से विचार किया जाता है अथवा जो संपूर्ण अनुभूतियों को बोधगम्य बनाता है। दर्शन एक व्यवस्थित विचार द्वारा विश्व और मनुष्य की प्रकृति के विषय में ज्ञान प्राप्त करने का निरंतर प्रयास है। आर डब्ल्यू सेलर्स अन्य क्रियाओं के समान दर्शन का मुख्य …

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शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य

प्राचीन समय में शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य को उस समय के विद्वानों का काफी समर्थन प्राप्त रहा है। आधुनिक युग में भी शिक्षा मनोविज्ञान की प्रगति के कारण इस उद्देश्य पर विशेष बल दिया जाने लगा है। आधुनिक समय में इस उद्देश्य के प्रमुख समर्थकों के नाम है रूसो, रावल, पेस्टोलॉजी, नन आदि। शिक्षा की ऐसी दशाएं उत्पन्न होनी चाहिए जिसमें व्यक्तित्व का पूर्ण विकास हो सके और व्यक्ति मानव जीवन का अपना मौलिक योगदान दे सकें। नन् के अनुसार शिक्षा अपने उद्देश्य को तभी प्राप्त कर सकती है जब राज्य समाज तथा शिक्षा संस्थाएं सभी इस दिशा में प्रयत्न करें। यूकेन ने व्यक्तिकता का अर्थ आध्यात्मिकता व्यक्तिक्ता से लगाया है। उसके मतानुसार आध्यात्मिकता व्यक्तित्व एवं व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होते …

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शिक्षा के उद्देश्य की आवश्यकता

किसी भी कार्य को करने से पहले यह आवश्यक है कि उसके उद्देश्य व परिणाम के बारे में पहले से ही सोचा जाए व सावधानी रखी जाए। इसीलिए उद्देश्य को निर्धारित करना आवश्यक है इसी तथ्य को दृष्टिकोण रखते हुए हम यह कह सकते हैं कि शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षा के कुछ निश्चित उद्देश्य हो तथा शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षक को इन उद्देश्यों का भली-भांति ज्ञान हो जिससे कि वह अपने छात्रों को उन मापदंडों पर खरा बना सके जो उन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक है। बिना उद्देश्य के किसी कार्य को करने से उसे पूर्ण वर्ग विधि सम्मत ढंग से नहीं किया जा सकता है जिससे समाज का राष्ट्र …

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शिक्षा का विषय विस्तार

किसी विषय वस्तु का अर्थ सीमा से होता है किस सीमा तक अध्ययन किया जा चुका होता है। जहां भी शिक्षा शास्त्र के अध्ययन क्षेत्र की बात है वह बड़ा व्यापक है। परंतु इस व्यापक क्षेत्र में हमने अब तक जो कुछ विचारा है वह उसकी इस विषय वस्तु है शिक्षा शास्त्र के अध्ययन क्षेत्र एवं विषय वस्तु को सामान्यतया विभिन्न भागों में बांटा गया है- शिक्षा दर्शन शिक्षा शास्त्र के अंतर्गत जीवन के प्रति जो विभिन्न दृष्टिकोण हैं उनका और उनके आधार पर शिक्षा के स्वरूप शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षा की पाठ्यचर्या आदि का अध्ययन किया जाता है। शिक्षाशास्त्र के इस भाग को शिक्षा दर्शन कहते हैं। शैक्षिक समाजशास्त्र – शिक्षा शास्त्र के अंतर्गत समाज के स्वरूप समाज …

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जैन दर्शन

जैन दर्शन एकमात्र ऐसा भारतीय दर्शन है जो वेदों के प्रमाण को स्वीकार नहीं करता है। जैन शब्द की उत्पत्ति जिन शब्द से हुई है जिसका तात्पर्य है जितना अर्थात जिसने सांसारिक रागद्वेषों मोह माया पर विजय प्राप्त कर ली हो। जैन दर्शन का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को संसार के कष्टों से मुक्ति दिलाकर आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति हेतु मार्गदर्शन करना है। जैन दर्शन में ईश्वर की सत्ता का खंडन किया गया है तथा अहिंसा, त्याग, तपस्या आदि पर प्रमुख बल दिया गया है। जैन दर्शन को मुख्य रूप से दो भागों में विभक्त किया गया है – तत्व चिन्तन – तत्व चिंतन के अंतर्गत जगत प्राणी ईश्वर कर्म आदि विविध दार्शनिक विषयों को लेकर जैन दर्शन में बहुत सूक्ष्म …

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जैन दर्शन

उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

शिक्षा शब्दकोश के अनुसार Liberal Education का अर्थ है Non Vocational Education अर्थात उदार शिक्षा, सामान्य शिक्षा अथवा अव्यवसायिक शिक्षा। उदार शिक्षा प्रायः सामान्य शिक्षा होती है जिसमें साहित्य कला, संगीत, इतिहास, नीति शास्त्र, राजनीति आदि की शिक्षा की प्रधानता होती हैं। उदार शिक्षा की प्रकृति अत्यंत प्राचीन है। विदेश में शिक्षा का अधिकार केवल स्वतंत्र व्यक्तियों को प्राप्त था। ग्रीक समाज में दास व्यवस्था थी। राजा या जमीदार को दी जाने वाली शिक्षा उदारवादी शिक्षा के नाम से जानी जाती थी। इसमें तक व्याकरण गणित संगीत और खगोल शास्त्र पढ़ाया जाता था। उस काल में इसे सामान्य शिक्षा कहा जाता था समाज का वह वर्ग आर्थिक चिंताओं से मुक्त था। भारत में भी राजाओं को राजनीति, नीति, धर्म शास्त्र …

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भारतीय शिक्षा की समस्याएं

वैदिक काल से आज तक भारतीय शिक्षा में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। चाहे वह वैदिक कालीन शिक्षा का समय रहा हो, उत्तर वैदिक कालीन शिक्षा हो, बौद्ध कालीन शिक्षा का समय रहा हो, मुस्लिम काल की शिक्षा का समय रहा हो या फिर ब्रिटेन कालीन या आधुनिक शिक्षा का समय रहा हो। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ तथा 26 जन 1950 को जो हमारा संविधान लागू हुआ तब से हमारे राष्ट्रीय नेताओं ने राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया। हमारे संविधान की 45 वीं धारा में प्राथमिक शिक्षा संदर्भ में स्पष्ट निर्देश लिखे हैं कि “राज्य संविधान के लागू होने के समय से 10 वर्ष के अंदर 14 वर्ष …

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शिक्षा के प्रकार

शिक्षा के प्रकार (रूप) अनेक हैं – औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष शिक्षा वैयक्तिक व सामूहिक शिक्षा सामान्य व विशिष्ट शिक्षा सकारात्मक व नकारात्मक शिक्षा 1. औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा से अर्थ है कि इस प्रकार की शिक्षा विद्यार्थियों को विद्यालय में शिक्षकों के द्वारा एक निश्चित योजना व पाठ्यक्रम के अंतर्गत दी जाती है। इस प्रकार के शिक्षण की योजना पहले से ही बना दी जाती है तथा इसका उद्देश्य भी निश्चित कर दिया जाता है। इस प्रकार की शिक्षा को विद्यार्थी भी जानते बुझते प्राप्त करता है। इस प्रकार की शिक्षा में विद्यार्थी को निश्चित समय पर नियमित रूप से ज्ञान प्रदान किया जाता है। इस प्रकार की शिक्षा का प्रमुख साधन व केंद्र …

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शिक्षा अर्थ परिभाषा प्रकृति विशेषताएं

शिक्षा अपने आप में एक विस्तृत शब्द है जिसके माध्यम से कोई भी मनुष्य विशेषकर शिशु अपनी आंतरिक भावनाओं को प्रकट कर सकता है। शिक्षा को अंग्रेजी भाषा में Education (एजुकेशन) कहते हैं। शिक्षा एक विशेष प्रकार का वातावरण है, जिसका प्रभाव बालक के चिंतन, दृष्टिकोण व व्यवहार करने की आदतों पर स्थाई रूप से परिवर्तन के लिए डाला जाता है। वर्तमान समय में शिक्षा के कारण ही मानव आज सभ्यता के उच्च शिखर पर पहुंच सका है। मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाने का श्रेय ही शिक्षा को प्राप्त है। शिक्षा का अर्थ शिक्षा के अर्थ को पूर्ण रूप से समझने के लिए निम्न बातों को समझना आवश्यक है- शिक्षा से मानव का विकास होता है– शिक्षा से मानव का …

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गृहकार्य की विशेषताएं

गृहकार्य वह साधन है जो छात्रों को स्वयं अभ्यास करके सीखने के लिए अवसर प्रदान करता है। इसके द्वारा छात्रों को कक्षा से बाहर सीखने के अनुभव प्राप्त होते हैं जो शिक्षण के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस प्रकार गृहकार्य प्रभावशाली शिक्षण का एक महत्वपूर्ण भाग है। गृहकार्य को निम्न ढंग से परिभाषित किया जा सकता है- गृहकार्य गृहकार्य शिक्षक द्वारा उत्पन्न सुनियोजित अधिगम परिस्थिति है। प्रत्येक ग्रह कार्य का मूल उद्देश्य छात्र को विशुद्ध, प्रत्यक्ष एवं प्रेरणात्मक अधिगम अनुभव प्रदान करना होता है। यह अग्रगामी अधिगम प्रक्रिया का एक अंग होता है। इस प्रकार गृहकार्य का प्रयोग अधिगम को प्रभावशाली एवं दृढ़ बनाने अर्थात शिक्षण के उद्देश्यों की अधिगम प्राप्ति के लिए किया जाता है। अतः …

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गृहकार्य की विशेषताएं

अच्छे शिक्षण की विशेषताएं

अच्छे शिक्षण की विशेषताएं – एक प्रभावशाली शिक्षक ही अच्छा शिक्षण प्रस्तुत कर सकता है। अतः अच्छा शिक्षण प्रभावशाली शिक्षक के गुणों से संबंधित होता है। प्रभावशाली शिक्षक के तीन प्रमुख गुण इस प्रकार के होते हैं- शिक्षक की योग्यता शिक्षक की कुशलता शिक्षक की उपलब्धियां समाज एवं शासन के संदर्भ में अच्छे शिक्षण को भिन्न-भिन्न तरह से परिभाषित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए एक तंत्र शासन में अच्छा शिक्षण उसे कहा जाता है, जिसमें शिक्षक अपने व्यक्तिगत गुणों से अंतःक्रिया द्वारा छात्र को प्रभावित कर उसमें ऐसे गुणों एवं मूल्यों का विकास करें, जो राज्य एवं शासन के हित में हो। अच्छे शिक्षण की विशेषताएं इसी प्रकार प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था में अच्छे शिक्षण का तात्पर्य ऐसे शिक्षण …

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प्रभावशाली शिक्षण, सतत शिक्षा

प्रभावशाली शिक्षण

प्रभावशाली शिक्षण वह है जिससे अधिकांश शिक्षण उद्देश्यों की प्राप्ति की जा सके अर्थात अधिक से अधिक अधिगम हो सके। इस प्रकार प्रभावशाली शिक्षण वह होता है जिससे शिक्षण प्रक्रिया की अधिगम से अधिकतम निकटता होती है। बी• ओ• स्मिथ महोदय का कहना है कि शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए उसके विभिन्न चरों एवं उनके कार्यों का सही ज्ञान होना आवश्यक है। शिक्षण की प्रकृति सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक दोनों ही है तथा यह कला एवं विज्ञान दोनों है। अतः प्रभावशाली शिक्षण के लिए शिक्षण के स्वरूप तथा शिक्षण क्रियाओं को भी जानना आवश्यक है। प्रभावशाली शिक्षण की संरचना सामान्यतः जब शिक्षक और छात्र में पाठ्यवस्तु के माध्यम से अंतः प्रक्रिया होती है तो उसे शिक्षण की संज्ञा प्रदान कर …

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प्रभावशाली शिक्षण

पाठ्यक्रम के उद्देश्य

पाठ्यक्रम के उद्देश्य- पाठ्यक्रम देशकाल एवं परिस्थितियों के अनुरूप बदलता रहता है। किसी भी पाठ्यक्रम का निर्माण तत्कालीन शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु किया जाता है। परंतु सामान्य तौर पर पाठ्यक्रम निर्माण के कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्न है- पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करना– पाठ्यक्रम का प्रथम व सर्वप्रमुख उद्देश्य बालक के व्यक्तित्व के समस्त पहलुओं यथा शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, व्यावसायिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास करना है। सभ्यता व संस्कृति का हस्तांतरण तथा विकास करना– पाठ्यक्रम मनुष्य की सभ्यता व अनमोल संस्कृति को सुरक्षित रखकर उसे आगामी पीढ़ी को हस्तांतरित करता है। इस प्रकार मानव सभ्यता व संस्कृति की रक्षा तथा उसके हस्तांतरण का विकास करना भी पाठ्यक्रम का उद्देश्य है। बालक का नैतिक व …

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पाठ्यक्रम के उद्देश्य

मूल्यांकन की विशेषताएं

मूल्यांकन की विशेषताएं- मूल्यांकन कार्य में मापन एवं परीक्षण सम्मिलित होता है। अतः एक अच्छे मूल्यांकन की विशेषताओं में मापन एवं परीक्षण की विशेषताएं अंतर्निहित होनी चाहिए। मूल्यांकन की विशेषताएं इस प्रकार मूल्यांकन की विशेषताएं निम्न है- क्रमबद्धता वस्तुनिष्ठता विश्वसनीयता वैधता   व्यवहारिकता व्यापकता शिक्षार्थी की सहभागिता 1. क्रमबद्धता मूल्यांकन कार्यक्रम में क्रमिकता या क्रमबद्धता का विशेष महत्व है। मूल्यांकन में क्रमिकता न होने पर शिक्षार्थी या कार्यकर्ता को अपनी प्रगति के बारे में अन्त तक कोई सूचना नहीं मिल पाती है। अत: इसके अभाव में शिक्षार्थी में कार्य के प्रति त्रुटिपूर्ण अभिव्यक्ति विकसित हो सकती है, वह त्रुटिपूर्ण कार्यविधि अपना सकता है तथा गलत निष्कर्ष निकाल सकता है। मूल्यांकन कार्य के क्रम में निश्चितता का होना भी आवश्यक है। …

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मूल्यांकन की विशेषताएं

शैक्षिक उद्देश्य स्रोत आवश्यकता

शैक्षिक उद्देश्यों के निर्धारण हेतु इनके प्रमुख स्रोतों का ज्ञान अति महत्वपूर्ण होता है। यद्यपि इन स्रोतों का पता लगाना आसान नहीं होता है क्योंकि एक तो इनकी संख्या अनंत होती है तथा दूसरे उद्देश्यों का निर्धारण इन से विधिवत रूप में नहीं किया जा सकता। शैक्षिक उद्देश्यों का विभाजन स्रोतों की प्रकृति एवं विस्तार क्षेत्र का ज्ञान प्राप्त करने की दृष्टि से शैक्षिक उद्देश्य को निम्न वर्गों में नियोजित किया जा सकता है- समाज व्यक्ति ज्ञान 1. समाज सामान्यत: शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण समाज द्वारा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। समाज का आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक और क्या है तथा इसकी आवश्यकताएं किस प्रकार की है, यह बातें शैक्षिक उद्देश्यों के …

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लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

पाठ्य सहगामी क्रियाएं

पाठ्य सहगामी क्रियाएं – शिक्षण को रोचक, सुग्राह्य बनाने में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का भी महत्वपूर्ण स्थान है। पाठ्यचर्या शिक्षा का अभिन्न अंग है। यह शिक्षक को यह बताती है कि कौन सी कक्षा विशेष में कितना पढ़ाना है। इसे दौड़ का मैदान भी कहा जाता है। पाठ्यचर्या से शिक्षक विद्यार्थी को उद्देश्य प्राप्ति की ओर ले जाता है। पाठ्य सहगामी क्रियाएं प्राचीन काल में पाठ्यचर्या बौद्धिक विषयों तक ही सीमित रहती थी, किंतु वर्तमान में इसकी सीमा बहुत विस्तृत हो गई है। आज पाठ्यचर्या में वे सब अनुभव सम्मिलित किए जाते हैं जो किसी बालक को किसी शैक्षिक संस्था में कक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल के मैदान और साहित्य तथा सांस्कृतिक क्रियाओं से प्राप्त होते हैं। आधुनिक काल में शिक्षाशास्त्री …

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लोकतंत्र और शिक्षा के उद्देश्य

पाठ्यक्रम के लाभ

पाठ्यक्रम के लाभ – पाठ्यक्रम शिक्षा का एक अभिन्न अंग है, जिसके द्वारा शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति होती है। शिक्षा के संपूर्ण क्षेत्र में इसका एक विशेष स्थान है, जो उद्देश्यों एवं आदर्शों के निर्धारण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा साधन है जो छात्र एवं अध्यापक को जोड़ता है। अध्यापक पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों के मानसिक, शारीरिक, नैतिक, सांस्कृतिक, संवेगात्मक, आध्यात्मिक तथा सामाजिक विकास के लिए प्रयास करता है। पाठ्यक्रम द्वारा छात्रों को प्रशिक्षण एवं अध्यापकों को दिशा-निर्देश के अवसर प्राप्त होते हैं। पाठ्यक्रम एक प्रकार से अध्यापक के पश्चात छात्रों के लिए दूसरा पथ प्रदर्शक है। पाठ्यक्रम में विषयों के साथ-साथ स्कूल के सारे कार्यक्रम आते हैं। शिक्षालय में होने वाले समस्त कार्यक्रम …

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पाठ्यक्रम के लाभ

पाठ्यक्रम का आधार

पाठ्यक्रम का आधार – मानव जीवन में शिक्षा का अद्वितीय महत्व है। शिक्षा के अभाव में मानव को मानव कह पाना असंभव होगा। शिक्षा के अभाव में मनुष्य केवल प्राणी मात्र रह सकता है, मानव या इंसान नहीं। शिक्षा प्राप्त करके ही व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी बनता है। शिक्षा एक जटिल एवं व्यापक प्रक्रिया है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है। शिक्षा द्वारा ही व्यक्ति अपनी अपरिपक्वता को परिपक्वता, बर्बरता को सभ्यता तथा पाश्विकता को मानवता में परिवर्तित करता है। पाठ्यक्रम का आधार शिक्षा प्रक्रिया में पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण स्थान है और यह पाठ्यक्रम समय-समय पर अपने तत्कालीन समाज की दशाओं एवं परिवर्तनों से प्रभावित होता रहता है। पाठ्यक्रम निर्माण एवं विकास की प्रक्रिया अनेकों तथ्यों व सिद्धांतों पर …

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पाठ्यक्रम का आधार

पाठ्यक्रम अर्थ परिभाषा आवश्यकता महत्व

पाठ्यक्रम – शिक्षा एक व्यापक एवं गतिशील प्रक्रिया है। यह मानव विकास की आधारशिला है। यह एक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में लगातार परिवर्तन होता रहता है। शिक्षा प्रकाश का वह स्रोत है जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्शन होता रहता है। इसे मनुष्य का तीसरा नेत्र भी कहा गया है जो मनुष्य को समस्त तत्वों के मूल को समझने की क्षमता प्रदान करता है तथा उसे उचित व्यवहार करने के लिए तैयार करता है। शिक्षा मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत की तरह विश्व की अन्य संस्थाओं में भी प्रारंभ से ही शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान मिला है। अरस्तू ने इस विषय …

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पाठ्यक्रम अर्थ परिभाषा आवश्यकता महत्व

पाठ्यक्रम का क्षेत्र

पाठ्यक्रम का क्षेत्र – यदि हम पाठ्यक्रम के इतिहास पर सरसरी नजर डालें तो स्पष्ट रूप से ज्ञात होता है कि प्रत्येक प्रकार का पाठ्यक्रम अपने समाज द्वारा निर्धारित शैक्षिक उद्देश्यों पर आधारित होता है। इसीलिए देश और काल की भिन्नता के अनुसार, वहां के पाठ्यक्रमों में भी भिन्नता पाई जाती है। उदाहरण स्वरूप वैदिक कालीन शिक्षा व्यवस्था शिक्षा के उद्देश्य बालकों का नैतिक विकास करना, पवित्रता और धार्मिकता का विकास करना, व्यक्तित्व का विकास करना, सामाजिक कुशलता में वृद्धि करना, संस्कृति का संरक्षण व विकास करना तथा चित्त वृत्तियों का निरोध करना आदि था। इस उद्देश्य के अनुसार ही तत्कालीन पाठ्यक्रम में वैदिक मंत्रों का उच्चारण व स्मरण, भाषा साहित्य व व्याकरण, परविद्या एवं अपरा विद्या को प्रमुख स्थान …

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आधुनिक भारतीय समाज

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व को व्यक्ति के संपूर्ण व्यवहार का दर्पण कहा जाता है। यह व्यक्ति के समूचे व्यवहार को प्रभावित करता है। व्यक्तित्व व्यक्ति के सामाजिक, शारीरिक, मानसिक तथा संवेगात्मक संरचना का योग है जो इच्छाओं, रुचियों, आदर्शों व्यवहारों, तौर-तरीकों, ढंगो, आदतों, स्वभावों तथा लक्षणों के रूप में प्रकट किया जाता है। वर्तमान शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्तित्व का स्वस्थ संतुलित तथा सर्वांगीण विकास करना है। व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए यह आवश्यक है कि बालकों की शिक्षा उनकी व्यक्तिगत विभिन्न नेताओं के आधार पर प्रदान की जाए तथा बालक के व्यक्तित्व के मूलभूत गुणों का पता लगाया जाए। व्यक्तित्व के गुणों का पता लगाना ही व्यक्तित्व के गुणों का माप कहा जाता है। व्यक्तित्व शब्द का अर्थ ऐतिहासिक दृष्टि से …

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भारतीय समाज में धर्म की भूमिका, व्यक्तित्व

रुचि

प्रत्येक व्यक्ति वातावरण की किसी न किसी वस्तु में रुचि रखता है। रुचि से तात्पर्य व्यक्ति के किसी वस्तु या विशेष के प्रति चाहत या लगाव से हैं। जैसे किसी व्यक्ति की क्रिकेट खेलने में, किसी की कविता लिखने में, तो किसी की चित्रकारी में रुचि होती है। रुचि किसी व्यवसाय या पाठ्यक्रम या पाठ्य विषयों की पसंद का नाम है। रुचि रुचि किसी भी कार्य के लिए चालक शक्ति तथा प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण कारक का काम देती है। रुचि के कारण व्यक्ति में पूर्ण एकाग्रता और ध्यान केंद्रिता पैदा होती है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में खुशियों का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि एक व्यक्ति क्या और कैसा करेगा, यह बहुत कुछ उसकी रुचियों के द्वारा ही निर्धारित होता …

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रुचि

बुद्धि

बुद्धि एक अत्यंत जटिल मानसिक प्रक्रिया है यद्यपि बुद्धि वास्तव में क्या है? इस पर विद्वानों एवं मनोवैज्ञानिकों में वाद विवाद चलता आ रहा है। पुराने समय में जो छात्र अधिक किताबों को रट लिया करता था, उनको बुद्धिमान समझा जाता था। लेकिन वर्तमान समय में मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि की व्याख्या करने की कोशिश की है।वास्तविक रूप में यदि देखा जाए तो बुद्धि के स्वरूप की व्याख्या कर सकना असंभव है। बुद्धि की परिभाषा आधुनिक मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि के रूप स्वरूप को निश्चित करने के लिए अलग-अलग परिभाषाएं दी हैं। कुछ महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिकों के द्वारा बुद्धि के संबंध में दी गई परिभाषाएं इस प्रकार हैं- अमूर्त चिंतन की योग्यता ही बुद्धि है। बुद्धि पहचानने तथा सुनने की शक्ति है। अवधान …

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बुद्धि

सूचना सेवा

सूचना सेवा – निर्देशन कार्यक्रम में सूचनाओं का बहुत अधिक महत्व है। सूचनाओं की जानकारी छात्र एवं निर्देशन प्रदाताओं दोनों के लिए आवश्यक है। व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सूचनाओं की आवश्यकता होती है। निर्देशन के क्षेत्र में सूचनाओं का महत्व निम्न रूप से देखा जा सकता है- सूचना सेवा छात्र को विश्वसनीय तरीके से सूचनाएं प्रदान करती है। इन सेवाओं के माध्यम से आवश्यक, उपयोगी तथा संगत एवं समुचित जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलती है। सूचना संप्रेषण की क्रिया अल्पव्ययी बनाई जा सकती है। सूचनाओं के द्वारा छात्र में वांछनीय स्तर की संवेदनशीलता का विकास किया जा सकता है, जिससे छात्र स्वयं को जाने समझे और उनकी भावनाओं के लिए आवश्यक कदम उठा सके। सूचना सेवा …

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वुड का घोषणा पत्र, संप्रेषण,

समूह गतिशीलता

समूह गतिशीलता डायनॉमिक्स भौतिक शास्त्र से लिया गया है। डायनॉमिक्स ग्रीक भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है शक्ति। इस प्रकार समूह गत्यात्मकता समूह में छिपी हुई शक्ति के अध्ययन से संबंधित विषय है। समूह गति विज्ञान उन विषयों का ज्ञान देता है जो एक समूह में सक्रिय होती हैं। उन व्यक्तियों का अध्ययन समूह गति विज्ञान का अन्वेषण का विषय होता है। यह अन्वेषण उस दिशा में होते हैं जिससे पता चल जाए कि शक्तियां किस प्रकार उभरती हैं, किन देशों में यह शक्तियां सक्रिय होती हैं, इनके क्या परिणाम होते हैं और किस प्रकार से उनका रूपांतरण किया जा सकता है अर्थात समूह गति विज्ञान वह विज्ञान है जो समूह को गतिशील करने वाली शक्तियों का अध्ययन …

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Career After 12th, समूह गतिशीलता

समूह परामर्श

समूह परामर्श – आधुनिक जीवन में समूह का अधिक महत्व है। व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी ना किसी प्रकार के समूह के संपर्क में रहता है। मनोवैज्ञानिक कैंप ने “सामूहिक परामर्श के आधार” नामक पुस्तक में लिखा है – व्यक्तियों को जीवन के सभी क्षेत्रों में अर्थ पूर्ण संबंधों की आवश्यकता होती है। इन्हीं संबंधों के आधार पर बहुतों को जीवन में उद्देश्य व महत्व से संबंधित ज्ञान प्राप्त होता है। अतः सामूहिक परामर्श में रुचि व संबंधों का प्रयोग अधिक होने लगा है। समूह परामर्श समूह परामर्श में समूह को सार्थक अनुभव प्रदान किए जाते हैं जिससे बालक सामूहिक व्यवहार में दक्ष हो सके। समूह परामर्श एक प्रक्रिया है जिसमें एक परामर्श अब एक ही समय में कई …

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समूह परामर्श

समूह निर्देशन

निर्देशन कार्यक्रम के आधारभूत तत्वों को मितव्ययता, कुशलता एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने का एक साधन समूह निर्देशन है।यह निर्देशन की एक पद्धति है जिसके द्वारा छात्रों को उनके विकास में सहायता प्रदान की जाती है। सामूहिक निर्देशन क्रियाएं अन्य क्रियाओं में सहयोग प्रदान करती हैं। उनका विकल्प नहीं है। निसंदेह पहले निर्देशन पर व्यक्तिगत प्रक्रिया के रूप में विशेष बल दिया गया किंतु वर्तमान में शैक्षिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन के फल स्वरुप सामूहिक निर्देशन की ओर विद्वानों का ध्यान आकृष्ट हुआ। विद्यार्थियों की बहुत सी आवश्यकताओं की पूर्ति सर्वोत्तम ढंग से समूह में कार्य करने पर होती है। निर्देशन सेवाओं में संतुलित कार्यक्रम में व्यक्तिगत व सामूहिक कार्य एक दूसरे के पूरक होते हैं। समूह …

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व्यावसायिक निर्देशन, शैक्षिक पर्यवेक्षण, समूह निर्देशन

एक अच्छे परामर्शदाता के गुण व कार्य

एक अच्छे परामर्शदाता में किसी एक विशेषता का समावेश न होकर अनेक गुणों एवं विशेषताओं का समावेश होता है। एक परामर्शदाता के गुणों एवं विशेषताओं के बारे में हार्डी महोदय का कहना है- यदि कोई व्यक्ति उन विशेषताओं की सूची तैयार करें जिनका परामर्शदाता में होना आवश्यक है तो सूची सर्वोत्तम गुणों के संग्रह में समान हो सकती है। केलर के अनुसार एक परामर्शदाता में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है- गहरा विशिष्ट ज्ञान साक्षात्कार, परीक्षण तथा नियोजन की तकनीक में कुशलता। अच्छी आधार शक्ति। विवेकशीलता, उत्साह एवं संवेदनशीलता, सहानुभूति। एक अच्छे परामर्शदाता के गुण कुछ मुख्य विद्वानों के अनुसार एक अच्छे परामर्शदाता में निम्नलिखित गुणों एवं विशेषताओं का होना आवश्यक है- परामर्शदाता को छात्रों की सभी प्रकार की सूचियों …

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समूह निर्देशन