शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

मानवतावाद

मानवतावाद को अंग्रेजी में Humanism शब्द से संबोधित किया जाता है जिसका अर्थ है मानव। मानवतावाद के चिंतन का केंद्र बिंदु मानव है। यह दर्शन मानव के सम्मान मानव की गरिमा और मानव की मात्रा में आस्था रखता है। मानव कल्याण मैं इसका विश्वास है। मानव कल्याण के लिए जो भी तत्व उपयोगी हैं उन सब का संबंध मानवतावाद से है। मानवतावाद के अनुसार मानव से परे कुछ भी नहीं है। इसीलिए परलोक या स्वर्ग जैसी बातों में इसका कोई विश्वास नहीं है। यदि कोई पढ़ लो क्या फर्क है तो उसे बस इसी पृथ्वी पर स्थापित करना चाहता है। मानवतावाद के अनुसार मानव कल्याण का अर्थ मानव कल्याण से है। इसीलिए परलोक या स्वर्ग जैसी बातों में इसका कोई …

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विद्यार्थी, विद्यार्थी जीवन

प्रयोजनवाद

प्रयोजनवाद शब्द का अंग्रेजी रूपांतरण Pragmatism है। कुछ विद्वान Pragmatism शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द Pragma से मानते हैं, जिसका अर्थ है-‘A thing done, Business, Effective action’ किया गया कार्य, व्यवसाय, प्रभावपूर्ण कार्य। लेकिन अन्य कुछ विद्वान इस शब्द की उत्पत्ति एक-दूसरे यूनानी शब्द Promitikos से मानते हैं जिसका अर्थ है Practicable अर्थात व्यावहारिक। इस प्रकार विशाल रूप में प्रयोजनवाद से आया है कि सभी विचारों मूल्य एवं निर्णय ओका सत्य उसके व्यवहारिक परिणामों में पाया जाता है यदि उनके परिणाम संतोषजनक हैं तो वह सत्य हैं अन्यथा नहीं। प्रयोजनवाद ई वस्तुतः वास्तव में मानव जीवन के वास्तविक पक्ष पर अपना ध्यान केंद्रित रखते हैं। ब्रह्मांड को बेबस अनेक वस्तुओं और अनेक क्रियाओं का परिणाम मानते हैं, लेकिन यह वस्तुओं …

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प्रयोजनवाद

प्रकृतिवाद

प्रकृतिवाद के दर्शन के अनुसार प्रकृति अपने आपमें पूर्ण तत्व है। इस दर्शन के अनुसार, प्रत्येक वस्तु प्रकृति से उत्पन्न होती है और फिर उसी में विलीन हो जाती है। प्रकृतिवादी इंद्रियों के अनुभव से प्राप्त ज्ञान को ही सच्चा ज्ञान मानते हैं तथा उसके अनुसार सच्चे ज्ञान की प्राप्ति के लिए मनुष्य को स्वयं निरीक्षण परीक्षण करना चाहिए। प्राकृतिकवादियों के मतानुसार, मनुष्य की अपनी एक प्रकृति होती है जो पूर्ण रूप से निर्मल है, उसके अनुकूल आचरण करने में उसे सुख और संतोष होता है तथा प्रतिकूल आचरण करने पर उसे दुख और असंतोष का अनुभव होता है। इसलिए प्राकृतिक वादियों के अनुसार मनुष्य को अपनी प्रकृति के अनुकूल ही आचरण करना चाहिए। दूसरे शब्दों में प्रकृति वादी मनुष्य …

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प्रकृतिवाद

यथार्थवाद अर्थ परिभाषा सिद्धांत

यथार्थवाद का अंग्रेजी रूपांतरण Realism है। Real शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के realis से हुई है। जिसका अर्थ है वस्तु। इस प्रकार Realism का शाब्दिक अर्थ हुआ वस्तु वाद या वस्तु संबंधी विचारधारा। वस्तुतः यथार्थवाद वस्तु संबंधी विचारों के प्रति एक दृष्टिकोण है जिसके अनुसार संसार की वस्तुएं यथार्थ है। इस वाद के अनुसार केवल इंद्रीयज ज्ञान ही सत्य है। Realism का मानना है कि ब्रह्म जगत मिथ्या नहीं वरन सत्य है। आदर्शवाद इस सृष्टि का अस्तित्व विचारों के आधार पर मानता है किंतु इसके अनुसार जगत विचारों पर आश्रित नहीं है। इसके अनुसार हमारा अनुभव स्वतंत्र इतना होकर बाय पदार्थों के प्रति प्रतिक्रिया का निर्धारण करता है। अनुभव बाहय जगत से प्रभावित हैं और बाहय जगत की वास्तविक …

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यथार्थवाद अर्थ परिभाषा सिद्धांत

आदर्शवाद अर्थ परिभाषा सिद्धांत

आदर्शवाद का आधार आध्यात्म है। आदर्शवाद मूलभूत रूप से शाश्वत मूल्यों एवं आदर्शों को स्वीकार करता है। इस विचारधारा के अनुसार भौतिक जगत की कोई भी वस्तु शाश्वत नहीं है अतः इनका विशेष महत्व नहीं है। इस विचारधारा के अनुसार आत्मा परमात्मा और विचार ही शाश्वत है। आदर्शवाद के आदि प्रवर्तक प्लेटो के अनुसार यह प्रत्यक्ष या विचारों का एक वास्तविक विचारों के प्रकृति से ही यह भौतिक जगत बना है। इसी मत को प्रत्ययवाद या विचारवाद कहा जाता है। परंतु बाद में विभिन्न अध्यात्मवादी सिद्धांतों के आधार पर विभिन्न रूपों में आदर्शवाद को प्रस्तुत किया गया। आदर्शवाद आदर्शवादी एक जटिल विचारधारा है। अतः इसे विभिन्न रूपों में परिभाषित किया गया है। प्रकृति को वास्तव में स्वीकार करता है वही …

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आदर्शवाद अर्थ परिभाषा सिद्धांत

इस्लाम दर्शन

इस्लाम दर्शन – इस्लाम शब्द का शाब्दिक अर्थ है शांति, शांति प्राप्त का मार्ग व विनम्रता। धार्मिक अर्थ में इस्लाम शब्द का अर्थ ईश्वर की इच्छा को पूर्णता मानना होता है। इस्लाम धर्म एवं दर्शन कुरान पुस्तक में वर्णित है। कुछ अन्य ग्रंथ भी इस्लाम धर्म बौद्ध दर्शन के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हैं जैसे तौरत, इंजील, जिब्रील, सहीफे जिनकी चर्चा कुरान में ही हुई। इस्लाम दर्शन का अर्थ भारत के मध्य युग में इस्लाम का आगमन हुआ जिसने भारतीय समाज संस्कृत एवं विचारधारा के चिंतन के नए तत्व देकर शिक्षा दर्शन का सूत्रपात किया। यह पहला विदेशी धर्म था जिसने भारतीय समाज एवं जीवन के प्रत्येक पक्ष के सिद्धांतों के अनुकूल शिक्षा का संगठन किया गया और इसके अर्थ …

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मुस्लिमकालीन शिक्षा

बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांत

बौद्ध दर्शन की शिक्षाओं के अनुसार, बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांत निम्न है- चार आर्य सत्य अस्टांग मार्ग प्रतीत्य समुत्पाद यह तीन विचार ही बौद्ध दर्शन का आधार है और इन्हें ही बौद्ध दर्शन के सिद्धांत के रूप में स्वीकार किया जाता है। बौद्ध दर्शन के चार आर्य सत्य महात्मा बुद्ध के अनुसार चार आर्य सत्य इस प्रकार हैं दुख– जीवन दुखों से भरा है जिसे हम सुख समझते हैं उनका अंत भी दुख ही है। सुखों की प्राप्ति की इच्छा भी दुख लिए हुए है और सुखों को भोगने का परिणाम भी दुख रूप में प्रकट होता है क्योंकि सुख स्थाई नहीं है। दुख समुदाय– प्रत्येक दुख का कारण होता है। संसार में प्रत्येक घटना का कोई ना कोई …

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बौद्ध दर्शन

बौद्ध दर्शन

बौद्ध दर्शन में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना गया है। शिक्षा ही मनुष्य को अलौकिक रूप एवं परमार्थिक जीवन के योग्य बनाती है। बौद्ध मत के अनुसार वास्तविक शिक्षा वह है जो मनुष्य के दुखों से मुक्ति दिलाकर निर्वाण की प्राप्ति कराए। व्यक्ति के समस्त दुखों का कारण अज्ञान है और इस अज्ञान को शिक्षा द्वारा ही दूर किया जा सकता है। बिना शिक्षा के निर्वाण की प्राप्ति संभव नहीं है। बौद्ध कालीन शिक्षा के उद्देश्य महात्मा बुद्ध द्वारा सद्जीवन के लिए प्रतिपादित अष्टांग मार्ग ही शिक्षा के उद्देश्यों का प्रमुख आधार है। इनके अतिरिक्त कालांतर में कुछ शैक्षिक उद्देश्यों को इसमें सम्मिलित किया गया जिनका विवरण निम्नलिखित है- संस्कृति का संरक्षण – बौद्ध दर्शन में धर्म को संस्कृति …

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बौद्ध दर्शन

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य – सामाजिक उद्देश्य के अनुसार समाज या राज्य का स्थान व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है। बैगेल और डीवी ने सामाजिक उद्देश्य का तात्पर्य सामाजिक दक्षता से लगाया है लेकिन अपने अतिवादी स्वरूप में या उद्देश्य व्यक्ति को समाज की तुलना में निचली श्रेणी का मानता है तथा व्यक्ति के सारे अधिकारों एवं उत्तरदायित्व को राज्य के हाथों में सौंप देता है। इस अतिवादी स्वरूप के अंतर्गत समाज को साध्य और व्यक्ति को साधन माना जाता है अर्थात व्यक्ति का अपना अलग कोई अस्तित्व नहीं है। लेकिन यदि हम किस उद्देश्य के अतिवादी रूप को ध्यान में ना रखें तो सरल रूप से इस उद्देश्य का अर्थ होगा व्यक्तियों में सहयोग एवं सामाजिक भावना का विकास करना। …

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शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य, उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

वेदान्त दर्शन

वेदान्त दर्शन- वेदान्त शब्द का तात्पर्य है – वेद का अंत। इन्हें वेदों का अंतिम भाग अथवा वेदों का सार भी का जाता है। वेद के मुख्यतः तीन भाग हैं – वैदिक मंत्र ब्राह्मण उपनिषद उपनिषद वेद का अंतिम भाग तथा वैदिक काल का अंतिम साहित्य है। वेदांत के तीन रूप बताए गए हैं – द्वैत विशिष्टाद्वैत अद्वैत अधिकांश दार्शनिक अद्वैत समर्थक हैं और विशिष्ट आ गए और अद्वैत में कोई अंतर नहीं मानते हैं। उनके अनुसार यह तीनों रूप वेदान्त दर्शन के तीन चरण है और अंतिम लक्ष्य अद्वैत की अनुभूति है। इस प्रकार जो ज्ञान वास्तविकता की ओर ले जाता है वही वेदांत है। वेदान्त दर्शनका प्रारंभ परम निराश आवाज से होता है तथा इसका अंत होता है …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

दर्शन शिक्षा संबंध

दर्शन शिक्षा संबंध – दर्शन शब्द का अंग्रेजी रूपांतरण Philosophy शब्द दो यूनानी शब्दों Philos और Sofia से मिलकर बना है। जिसमें Philos का अर्थ है Love तथा Sofia का अर्थ है of Wisdom। इसप्रकार Philosophy का शाब्दिक अर्थ है ‘Love of Wisdom‘ (ज्ञान से प्रेम) दर्शन की प्रमुख परिभाषाएं इस प्रकार हैं – दर्शन की परिभाषाएं दर्शनशास्त्र को एक ऐसे प्रयास के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसके द्वारा मानव अनुभूतियों के संबंध में समग्र रूप में सत्यता से विचार किया जाता है अथवा जो संपूर्ण अनुभूतियों को बोधगम्य बनाता है। दर्शन एक व्यवस्थित विचार द्वारा विश्व और मनुष्य की प्रकृति के विषय में ज्ञान प्राप्त करने का निरंतर प्रयास है। आर डब्ल्यू सेलर्स अन्य क्रियाओं के …

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मूल्यांकन, मूल्यांकन के प्रकार, अभिक्रमित शिक्षण

शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य

प्राचीन समय में शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य को उस समय के विद्वानों का काफी समर्थन प्राप्त रहा है। आधुनिक युग में भी शिक्षा मनोविज्ञान की प्रगति के कारण इस उद्देश्य पर विशेष बल दिया जाने लगा है। आधुनिक समय में इस उद्देश्य के प्रमुख समर्थकों के नाम है रूसो, रावल, पेस्टोलॉजी, नन आदि। शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य शिक्षा अपने उद्देश्य को तभी प्राप्त कर सकती है जब राज्य समाज तथा शिक्षा संस्थाएं सभी इस दिशा में प्रयत्न करें। यूकेन ने व्यक्तिकता का अर्थ आध्यात्मिकता व्यक्तिक्ता से लगाया है। उसके मतानुसार आध्यात्मिकता व्यक्तित्व एवं व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होते वरन उन्हें प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार व्यक्तिक उद्देश्य का अर्थ श्रेष्ठ व्यक्तित्व और आध्यात्मिक व्यक्तित्व का विकास है। शिक्षा की ऐसी …

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शैक्षिक व व्यावसायिक निर्देशन में अंतर

जैन दर्शन

जैन दर्शन एकमात्र ऐसा भारतीय दर्शन है जो वेदों के प्रमाण को स्वीकार नहीं करता है। जैन शब्द की उत्पत्ति जिन शब्द से हुई है जिसका तात्पर्य है जितना अर्थात जिसने सांसारिक रागद्वेषों मोह माया पर विजय प्राप्त कर ली हो। जैन दर्शन का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को संसार के कष्टों से मुक्ति दिलाकर आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति हेतु मार्गदर्शन करना है। जैन दर्शन में ईश्वर की सत्ता का खंडन किया गया है तथा अहिंसा, त्याग, तपस्या आदि पर प्रमुख बल दिया गया है। जैन दर्शन को मुख्य रूप से दो भागों में विभक्त किया गया है – तत्व चिन्तन – तत्व चिंतन के अंतर्गत जगत प्राणी ईश्वर कर्म आदि विविध दार्शनिक विषयों को लेकर जैन दर्शन में बहुत सूक्ष्म …

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जैन दर्शन

उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा – शिक्षा शब्दकोश के अनुसार Liberal Education का अर्थ है Non Vocational Education अर्थात उदार शिक्षा, सामान्य शिक्षा अथवा अव्यवसायिक शिक्षा। उदार शिक्षा प्रायः सामान्य शिक्षा होती है जिसमें साहित्य कला, संगीत, इतिहास, नीति शास्त्र, राजनीति आदि की शिक्षा की प्रधानता होती हैं। उदार शिक्षा की प्रकृति अत्यंत प्राचीन है। विदेश में शिक्षा का अधिकार केवल स्वतंत्र व्यक्तियों को प्राप्त था। ग्रीक समाज में दास व्यवस्था थी। राजा या जमीदार को दी जाने वाली शिक्षा उदारवादी शिक्षा के नाम से जानी जाती थी। इसमें तक व्याकरण, गणित, संगीत और खगोल शास्त्र पढ़ाया जाता था। उस काल में इसे सामान्य शिक्षा कहा जाता था। समाज का वह वर्ग आर्थिक चिंताओं से मुक्त था। भारत में भी राजाओं …

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शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य

भारतीय शिक्षा की समस्याएं

भारतीय शिक्षा की समस्याएं – वैदिक काल से आज तक भारतीय शिक्षा में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। चाहे वह वैदिक कालीन शिक्षा का समय रहा हो, उत्तर वैदिक कालीन शिक्षा हो, बौद्ध कालीन शिक्षा का समय रहा हो, मुस्लिम काल की शिक्षा का समय रहा हो या फिर ब्रिटेन कालीन या आधुनिक शिक्षा का समय रहा हो। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ तथा 26 जन 1950 को जो हमारा संविधान लागू हुआ तब से हमारे राष्ट्रीय नेताओं ने राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया। हमारे संविधान की 45 वीं धारा में प्राथमिक शिक्षा संदर्भ में स्पष्ट निर्देश लिखे हैं कि “राज्य संविधान के लागू होने के समय से 10 …

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भारतीय शिक्षा की समस्याएं, उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

शिक्षा के प्रकार

शिक्षा के प्रकार (रूप) अनेक हैं। शिक्षा, समाज एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है। शिक्षा के प्रकार शिक्षा अनेक प्रकार की होती है- औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष शिक्षा वैयक्तिक व सामूहिक शिक्षा सामान्य व विशिष्ट शिक्षा सकारात्मक व नकारात्मक शिक्षा …

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शिक्षा के प्रकार, राष्ट्र गौरव, आदर्श शैक्षिक पाठ्यक्रम

शिक्षा अर्थ परिभाषा प्रकृति विशेषताएं

शिक्षा अपने आप में एक विस्तृत शब्द है जिसके माध्यम से कोई भी मनुष्य विशेषकर शिशु अपनी आंतरिक भावनाओं को प्रकट कर सकता है। शिक्षा को अंग्रेजी भाषा में Education (एजुकेशन) कहते हैं। शिक्षा एक विशेष प्रकार का वातावरण है, जिसका प्रभाव बालक के चिंतन, दृष्टिकोण व व्यवहार करने की आदतों पर स्थाई रूप से परिवर्तन के लिए डाला जाता है। वर्तमान समय में Education के कारण ही मानव आज सभ्यता के उच्च शिखर पर पहुंच सका है। मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाने का श्रेय ही Education को प्राप्त है। शिक्षा का अर्थ यह शब्द हिंदी भाषा से प्रकट हुआ है। हिंदी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। शिक्षा के अर्थ को पूर्ण रूप से समझने के लिए …

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शिक्षा