इतिहास

धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन

19वी शताब्दी को विश्व के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शताब्दी बस भारत के लिए धार्मिक तथा सामाजिक पुनर्जागरण का संदेश लेकर आई थी। इस शताब्दी में भारत पराधीन था और उसका सामाजिक तथा धार्मिक जीवन तीव्र गति से नीचे गिरा रहा था। भारत में धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन की आवश्यकता थी। उसी समय राजा राममोहन राय दयानंद सरस्वती तथा विवेकानंद आदि ने भारतीय समाज सता हिंदू धर्म की करीतियो तथा अंधविश्वासों के विरोध में आंदोलन किए। भारत में धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन निम्न प्रकार हैं- ब्रह्म समाज ब्रह्म समाज की स्थापना 1828 ईस्वी में राजा राम मोहन राय ने की थी इनका जन्म 1772 ईस्वी में बंगाल के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। …

धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन Read More »

भारत की नदियां

भारत की नदियां भारत को आर्थिक रूप से विशेष बनाती है। नहरें नदियो के जल को सिंचाई हेतु विभिन्न क्षेत्रो तक पहुंचाती हैं। भारत नदियों का देश है। भारत की प्रमुख नदियां निम्नवत वर्गीकृत की जा सकती है- उत्तर भारत की नदियां ब्रह्मपुत्र क्रम की नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां अरब सागर में गिरने वाली दक्षिण भारत की नदियां डेल्टा उत्तर भारत की नदियां उत्तरी भारत में नदियों के निम्न तीन तंत्र पाए जाते हैं- सिंधु क्रम की नदियां सिंधु नदी लद्दाख श्रेणी के उत्तर से निकलती है। अनेक श्रेणियों व शिखरों से हिम नदियों का जल प्राप्त करके यह नदी लद्दाख श्रेणी को काटकर बहती है तथा पश्चिमी पंजाब के मैदान में उतरती है। भारत में …

भारत की नदियां Read More »

गोलमेज सम्मेलन

साइमन कमीशन के सुझाव के अनुसार बढ़ती समस्याओं को सुलझाने के लिए लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन 12 नवंबर 1930 ईस्वी को लंदन में किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की। इस सम्मेलन में कुल 86 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिसमें 3 प्रतिनिधि ग्रेट ब्रिटेन से, 16 भारतीय देसी रियासतों से तथा शेष ब्रिटिश भारत के थे। ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधि के रूप में सर तेज बहादुर सप्रू, श्रीनिवास शास्त्री, डाक्टर जयकर, चिंतामणि तथा डॉ आंबेडकर आदि थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस सम्मेलन में अपना कोई भी प्रतिनिधि नहीं भेजा था। प्रथम गोलमेज सम्मेलन के सुझाव प्रथम गोलमेज सम्मेलन के निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत किए- संघ शासन- भारत के …

गोलमेज सम्मेलन Read More »

मौर्य साम्राज्य

सम्राट अशोक के कारण ही मौर्य साम्राज्य सबसे महान एवं शक्तिशाली बनकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ। चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईसा पूर्व में हुआ था।चंद्रगुप्त मौर्य ने कुटिल राजनीतिग्य के तक्षशिला के आचार्य चाणक्य की सहायता प्राप्त करके मात्र 23 वर्ष की आयु में चाणक्य की सहायता से मगध साम्राज्य पर अपना राज्य करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। ब्राह्मण साहित्य में इसे शूद्र कुल का बताया गया। बौद्ध जैन ने इसे छत्रिय बताया। विशाखदत्त ने अपनी पुस्तक मुद्राराक्षस में इसे निम्न कुल वृष्ल बताया। जैन मुनि भद्रबाहु से जैन धर्म की शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर ली। चंद्रगुप्त मौर्य ने सेनापति सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। चंद्रगुप्त ने प्रथम अखिल भारतीय राज्य …

मौर्य साम्राज्य Read More »

भारत के वंश

भारत पर कई वंशों ने शासन किया। जिनमे से गुप्त वंश, हर्यक वंश, शिशुंनाग वंश, नंद वंश के बारे में संक्षेप में जानेंगे। गुप्त वंश गुप्त वंश (319ई॰ -550ई॰) के प्रमुख शासकों में- चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय, कुमार गुप्त, गुप्त जैसे प्रतापी शासक हुए। उनका शासन लगभग 200 वर्षो चला। कुषाण वंश के अंतिम शासक वासुदेव को पद से हटाकर श्री गुप्त ने गुप्त वंश की स्थापना की थी। श्री गुप्त के बाद उसका पुत्र घटोत्कच इस वंश का शासक बना। घटोत्कच के बाद उसका पुत्र चंद्रगुप्त प्रथम जो गुप्त साम्राज्य का सबसे प्रतापी शासक हुआ। इसी समय गुप्त वंश विस्तार की चरम सीमा पर पहुंचा। चंद्रगुप्त प्रथम (319 से 335 ई॰) गुप्त अभिलेखों से हमें ज्ञात होता है …

भारत के वंश Read More »

धर्म

धर्म का शाब्दिक अर्थ होता है, ‘धारण करने योग्य’सबसे उचित धारणा, अर्थात जिसे सबको धारण करना चाहिये’। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं। शैव धर्म यह भगवान शिव से संबंधित है और इनकी पूजा करने वाले शैव कहलाते हैं। शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातत्व छात्र हमें हड़प्पा संस्कृति से प्राप्त होता है। शिवलिंग की उपासना का स्पष्ट वर्णन हमें मत्स्य पुराण में होता है। ऋग्वेद में पहली बार भगवान शिव का उल्लेख मिलता है जबकि अथर्व वेद भव, शिव, पशुपति कहा गया है। पशुपति संप्रदाय का सर्वप्रथम वर्णन हमें वामन पुराण में देखने को मिलता है। जो इसका सबसे प्राचीन संप्रदाय है। पशुपति के संस्थापक लकुलिश थे जो भगवान शिव के 18 अवतार में …

धर्म Read More »

बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे। जिनका जन्म 563 ईसा पूर्व कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी नामक ग्राम में शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। इनकी माता का नाम महामाया था। महात्मा बुद्ध के जन्म के सातवें दिन इनकी माता की मृत्यु हो गई। उनका पालन पोषण इन्हीं की मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था। इसलिए इन्हें गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं। महात्मा बुध का विवाह 547 ईसा पूर्व में 16 वर्ष की आयु में यशोधरा नामक राजकुमारी से हुआ था। इन्हीं से इन्हें राहुल नामक पुत्र की उत्पत्ति है। 530 ईसा पूर्व सांसारिक दुखों से पीड़ित होकर इन्होंने ग्रह तक त्याग कर दिया था। गृह त्याग की घटना इतिहास में महाभिनिष्क्रमण के …

बौद्ध धर्म Read More »

जैन धर्म

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी जी थे, इन्हें जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।महावीर स्वामी जी का जन्म 540 ईसा पूर्व वैशाली के निकट कुंड ग्राम में हुआ था।महावीर स्वामी जातिरिक कुल के थे।इनके बचपन का नाम वर्धमान था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ तथा इनकी माता का नाम त्रिशला था। इनका विवाह यसोदा नाम की राजकुमारी से हुआ था। इनकी पुत्री का नाम प्रियदर्शनी था। जैन धर्म में 24 तीर्थंकर थे। इसके पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे जिन्हें इस धर्म का संस्थापक भी माना जाता है। इस धर्म के 23वें तीर्थंकर बनारस के राजा अश्विन के पुत्र पार्श्वनाथ थे जिन्हें 83 दिन की तपस्या के बाद ज्ञान की प्राप्त हुई। 30 वर्ष की आयु में बड़े …

जैन धर्म Read More »