राजव्यवस्था

त्याग की मूर्ति श्रीमती सोनिया गांधी

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी की धर्मपत्नी है । 21 मई 1991 को राजीव गांधी की अचानक मौत के बाद सभी की निगाहें सोनिया गाँधी पर टिक गई थीं । वे राजनीति में नहीं आई । अपने बच्चों का लालन – पालन किया किंतु कुछ सालों के बाद पूरे भारत की जनता सोनिया जी की ओर इस आशा से देख रही थी कि आगे बढ़ें और काँग्रेस का नेतृत्व करें । देश की खातिर सोनिया जी ने साहस बटोरा और गमगीन वातावरण को छोड़कर बाहर आईं । कांग्रेस का अध्यक्ष पद स्वीकार किया । वे जन्म से विदेशी थी किंतु भारतीय संस्कारों को उन्होंने इस प्रकार रचा – बसा लिया …

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प्रजातंत्र के गुण व दोष

प्रजातंत्र के गुण व दोष – प्रजातंत्र की सफलता का मूल आधार शिक्षा होती है, इसलिए लोकतंत्र जन शिक्षा पर सबसे अधिक बल देता है। इसके लिए वह सर्वथा में निश्चित आयु तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करता है। वह पुरुष और महिलाओं में भेद नहीं करता इसलिए दोनों के समान शिक्षा की व्यवस्था करता है। परंतु दिखाया गया है कि लाख प्रयत्न करने पर भी कुछ बच्चे इस शनिवार एवं निशुल्क शिक्षा को प्राप्त नहीं करते और बड़े होकर वे निरीक्षण प्रौण कहलाते हैं। । प्रजातंत्र के गुण व दोष प्रजातंत्र के गुण व दोष निम्न हैं – प्रजातंत्र के गुण सभी के हितों की रक्षा– प्रजातंत्र सरकार जनता की जनता द्वारा तथा …

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Human Rights in India

भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्य

भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्य – 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत का नया संविधान लागू किया गया जिसके अंतर्गत भारत को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित किया गया। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के द्वारा लोगों को मौलिक अधिकार जैसे समानता, स्वतंत्रता शोषण के विरुद्ध, धर्म स्वतंत्रता संस्कृति और शिक्षा संबंधी और संविधानिक उपचारों के अधिकार दिए गए हैं। अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भारतीय संविधान के 44 वे संशोधन द्वारा नागरिकों के कुछ मौलिक कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं, जो निम्न प्रकार से हैं- भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्य भारत का प्रत्येक नागरिक संविधान का सम्मान करें और उसमें दिए गए नियमों का पालन करें राष्ट्रीय ध्वज द्वारा सिवान का आदर करने …

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भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्य

भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार

सामाजिक जीवन पद्धति में व्यक्ति और राज्य के पारस्परिक संबंधों में अधिकारों का एवं कर्तव्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति को राज्य के बनाए गए कानूनों और नियमों के अनुसार व्यवहार करना चाहिए। किंतु साथ ही राज्य की शक्तियों और अधिकारों को सीमित करना भी आवश्यक है। मौलिक अधिकार व्यक्ति के पूर्ण मौलिक और मानसिक विकास के लिए अपरिहार्य हैं। इनके अभाव में व्यक्ति का यथोचित विकास नहीं हो सकता है। यह वह न्यूनतम अधिकार है जो किसी भी लोकतांत्रिक शासन पद्धति में व्यक्ति को प्राप्त होने चाहिए। भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार भारत देश प्रभुसत्ता संपन्न लोकतांत्रिक राज्य हैं। जिसमें चतुर्मुखी विकास के लिए भारतीय नागरिकों को 6 मूल …

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विधि निर्माण शासन

भारतीय संविधान ने विधि निर्माण का कार्य विधायिका को सौंपा है जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए यथा समय यथा आवश्यक विधि का निर्माण करती है जिसे लागू करने का कार्य कार्यपालिका को सौंपा गया है। न्यायपालिका को संविधान का संरक्षण दिया गया है अतः न्यायपालिका विधायिका द्वारा बनाए गए किसी भी विधि का पुनरावलोकन कर सकती है कि निर्मित विधि संविधान के अनुरूप है या नहीं। यदि विधि संविधान का उल्लंघन करती है तो न्यायपालिका उसे आविधिमान्य घोषित कर सकती है। भारत में विधि के शासन का इतिहास भारत में विधि का इतिहास अति प्राचीन है जिसका उल्लेख विविध प्राचीन ग्रंथों में विस्तृत मिलता है। डॉ पी• के• सेन प्रख्यात दंड …

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Human Rights in India

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

भारत में संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था। संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। 26 November 1949 को भारतीय संविधान सभा ने अपना कार्य समाप्त किया था। या संविधान भारत में 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है- सर्वाधिक विशाल एवं लिखित संविधान संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न राज्य लोकतंत्रात्मक राज्य पंथ निरपेक्ष राज्य समाजवादी राज्य गणराज्य संसदीय शासन प्रणाली संघात्मक शासन व्यवस्था मौलिक अधिकारों का समावेश राज्य के नीति निदेशक तत्व स्वतंत्र न्यायपालिका 1. सर्वाधिक विशाल एवं लिखित संविधान आईवर जेनिंग्स का यह कहना बिल्कुल सही है कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा एवं विस्तृत संविधान है मूल भारतीय संविधान …

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राज्य का मुख्यमंत्री

जो स्थित केंद्र में प्रधानमंत्री की होती है, ठीक वही स्थित राज्य में मुख्यमंत्री की होती है। वह राज्य मंत्री परिषद का प्रधान होता है। उसकी नियुक्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 (1) के अंतर्गत राज्य का राज्यपाल करता है। विधानसभा में जिस राजनीतिक दल का बहुमत होता है,उसके नेता को राज्यपाल द्वारा यह नियुक्त किया जाता है। इस प्रकार बहुमत प्राप्त दल का नेता ही मुख्यमंत्री बनता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि विधानसभा में किसी भी राजनीतिक दल का स्पष्ट बहुमत नहीं होता तब ऐसी स्थिति में राज्यपाल किसी भी ऐसे दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकता है, जो विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने में सक्षम हो। तत्पश्चात वह मुख्यमंत्री के परामर्श से अन्य …

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राज्य का मुख्यमंत्री

भारत के प्रधानमंत्री

ब्रिटिश संविधान में प्रधानमंत्री का पद परंपरा पर आधारित है, परंतु भारत के प्रधानमंत्री के पद को संविधान द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। भारतीय प्रशासन में प्रधानमंत्री को बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।भारतीय संविधान में कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करते हुए कहा गया है कि राष्ट्रपति अपनी समस्त शक्तियों का प्रयोग मंत्रिपरिषद के परामर्श से करता है। इस प्रकार व्यवहार में सभी कार्यपालिका शक्तियों का उपभोग मंत्रिपरिषद के माध्यम से प्रधानमंत्री ही करता है। वह सत्ताधारी दल का नेता होता है तथा सरकार का प्रमुख होता है। भारत के प्रधानमंत्री प्रथम प्रधानमंत्री- जवाहरलाल नेहरू प्रथम महिला प्रधानमंत्री- श्रीमती इंदिरा गांधी प्रथम गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री- श्री मोरारजी देसाई लोकसभा का सामना न करने वाले प्रधानमंत्री- चौधरी चरण सिंह अविश्वास …

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राज्यसभा की रचना (संगठन)

राज्यसभा संसद का द्वितीय और उच्च सदन है। राज्यसभा की रचना संघीय शासन व्यवस्था के सिद्धांत के अनुसार किया गया है। इस सदन को लोकसभा की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त है, परंतु फिर भी इसे सदन का अपना महत्व है। राज्यसभा की रचना (संगठन) राज्यसभा के संगठन से संबंधित विवरण निम्न वत है- सदस्य संख्या- संविधान के अनुच्छेद 80 द्वारा राज्य सभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निश्चित की गई है जिनमें से 238 सदस्यों को भारतीय संघ के इकाई राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्र से निर्वाचित होने और शेष 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने की व्यवस्था की है। सदस्यों की योग्यताएं- राज्यसभा की सदस्यता के उम्मीदवार के लिए संविधान के अनुच्छेद 102 के द्वारा …

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राज्यसभा की रचना (संगठन)

लोकसभा रचना संगठन कार्य

लोकसभा रचना संगठन कार्य – लोकसभा संसद का प्रथम और लोकप्रिय तथा जनता प्रतिनिधित्व करने वाला सदन है। इसे निम्न सदन भी कहा जाता है। यह सदन संसद के दूसरे सदन राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है। लोकसभा रचना लोकसभा रचना संगठन में निम्न अंग है- लोकसभा सदस्य संख्या लोकसभा सदस्यों का निर्वाचन लोकसभा सदस्यों की योग्यताएं लोकसभा सदस्यों का कार्यकाल लोकसभा पदाधिकारी लोकसभा रचना में सदस्य संख्या मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 500 निश्चित की गई थी। परंतु समय-समय पर संविधान संशोधनों द्वारा इस संख्या में वृद्धि की जाती रही है। 31 वें संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा की सदस्य संख्या 552 कर दी गई है। इसमें 530 सदस्य भारतीय संघ के राज्य तथा 20 सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों …

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Sarkari Focus

भारत का राष्ट्रपति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। भारत द्वारा अपनाई गई संसदीय शासन प्रणाली में एक सरकार के समाप्त होने पर दूसरी सरकार बनने में कुछ समय लगता है। इस अंतराल के लिए कार्यपालिका के संवैधानिक प्रधान के रूप में राष्ट्रपति का पद अनिवार्य है। इस प्रकार राष्ट्रपति हमारे देश की शासन व्यवस्था का एक अनिवार्य अंग है। संघीय सरकार के समस्त कार्य राष्ट्रपति के नाम से ही संपादित होते हैं। वास्तव में वह देश के शासन का संचालन नहीं करता, उसे जो शक्तियां प्राप्त है, व्यवहार में उनका प्रयोग संघीय मंत्रिपरिषद ही करती है। संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी तथा वास का संविधान के अनुसार …

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भारत का राष्ट्रपति

भारतीय संविधान

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। संविधान सरकार से लाने का एक लिखित दस्तावेज होता है जिसके आधार पर देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है। संविधान मिशन की संस्तुतियों के आधार पर भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा के अंतर्गत किया गया था। इस संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 ईस्वी में हुआ था। इस कैबिनेट मिशन में कुल 3 सदस्य शामिल थे। संविधान संविधान सभा में कुल 389 शामिल हुए थे। जिनमें से दो प्रांतीय विधानसभा से, 93 देसी रियासतों से, चार चीफ मशीनरी सदस्य शामिल थे। 1946 में जब संविधान सभा के सदस्यों का पहला चुनाव हुआ उस समय संविधान सभा में कुल 296 सदस्य थे। जिनमें कांग्रेस को 208 मुस्लिम, लीग को …

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