सामान्य ज्ञान

भारत का राष्ट्रपति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। भारत द्वारा अपनाई गई संसदीय शासन प्रणाली में एक सरकार के समाप्त होने पर दूसरी सरकार बनने में कुछ समय लगता है। इस अंतराल के लिए कार्यपालिका के संवैधानिक प्रधान के रूप में राष्ट्रपति का पद अनिवार्य है। इस प्रकार राष्ट्रपति हमारे देश की शासन व्यवस्था का एक अनिवार्य अंग है। संघीय सरकार के समस्त कार्य राष्ट्रपति के नाम से ही संपादित होते हैं। वास्तव में वह देश के शासन का संचालन नहीं करता, उसे जो शक्तियां प्राप्त है, व्यवहार में उनका प्रयोग संघीय मंत्रिपरिषद ही करती है। संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी तथा वास का संविधान के अनुसार …

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भारत का राष्ट्रपति

धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन

19वी शताब्दी को विश्व के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शताब्दी बस भारत के लिए धार्मिक तथा सामाजिक पुनर्जागरण का संदेश लेकर आई थी। इस शताब्दी में भारत पराधीन था और उसका सामाजिक तथा धार्मिक जीवन तीव्र गति से नीचे गिरा रहा था। भारत में धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन की आवश्यकता थी। उसी समय राजा राममोहन राय दयानंद सरस्वती तथा विवेकानंद आदि ने भारतीय समाज सता हिंदू धर्म की करीतियो तथा अंधविश्वासों के विरोध में आंदोलन किए। भारत में धर्म तथा समाज सुधार आंदोलन निम्न प्रकार हैं- ब्रह्म समाज ब्रह्म समाज की स्थापना 1828 ईस्वी में राजा राम मोहन राय ने की थी इनका जन्म 1772 ईस्वी में बंगाल के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। …

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भारत की नदियां

भारत की नदियां भारत को आर्थिक रूप से विशेष बनाती है। नहरें नदियो के जल को सिंचाई हेतु विभिन्न क्षेत्रो तक पहुंचाती हैं। भारत नदियों का देश है। भारत की प्रमुख नदियां निम्नवत वर्गीकृत की जा सकती है- उत्तर भारत की नदियां ब्रह्मपुत्र क्रम की नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां अरब सागर में गिरने वाली दक्षिण भारत की नदियां डेल्टा उत्तर भारत की नदियां उत्तरी भारत में नदियों के निम्न तीन तंत्र पाए जाते हैं- सिंधु क्रम की नदियां सिंधु नदी लद्दाख श्रेणी के उत्तर से निकलती है। अनेक श्रेणियों व शिखरों से हिम नदियों का जल प्राप्त करके यह नदी लद्दाख श्रेणी को काटकर बहती है तथा पश्चिमी पंजाब के मैदान में उतरती है। भारत में …

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गोलमेज सम्मेलन

साइमन कमीशन के सुझाव के अनुसार बढ़ती समस्याओं को सुलझाने के लिए लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन 12 नवंबर 1930 ईस्वी को लंदन में किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की। इस सम्मेलन में कुल 86 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिसमें 3 प्रतिनिधि ग्रेट ब्रिटेन से, 16 भारतीय देसी रियासतों से तथा शेष ब्रिटिश भारत के थे। ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधि के रूप में सर तेज बहादुर सप्रू, श्रीनिवास शास्त्री, डाक्टर जयकर, चिंतामणि तथा डॉ आंबेडकर आदि थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस सम्मेलन में अपना कोई भी प्रतिनिधि नहीं भेजा था। प्रथम गोलमेज सम्मेलन के सुझाव प्रथम गोलमेज सम्मेलन के निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत किए- संघ शासन- भारत के …

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नारी सशक्तिकरण

परिवार में अगर किसी का सबसे ऊंचा स्थान होता है मां होती है, अपने जीवन से जुड़े सारे निर्णय जिसे स्वयं लेना होता है। उसकी क्षमता का अंदाजा लगाना हमारी बस में नहीं होता महिलाएं परिवार और समाज से बंधन मुक्त होती हैं। नारी के बिना एक अच्छे समाज का निर्माण करना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन जिस तरह से समाज में भेदभाव दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, भ्रूण हत्या महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा बलात्कार, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषयों पर भेदभाव होता रहेगा, तब तक समाज का विकास होना बा मुश्किल है। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में शुरू से ही बना रहा है। महिलाओं और पुरुषों में शैक्षणिक और आर्थिक अंतर लगातार देश को पीछे की …

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female in stress

मौर्य साम्राज्य

सम्राट अशोक के कारण ही मौर्य साम्राज्य सबसे महान एवं शक्तिशाली बनकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ। चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईसा पूर्व में हुआ था।चंद्रगुप्त मौर्य ने कुटिल राजनीतिग्य के तक्षशिला के आचार्य चाणक्य की सहायता प्राप्त करके मात्र 23 वर्ष की आयु में चाणक्य की सहायता से मगध साम्राज्य पर अपना राज्य करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। ब्राह्मण साहित्य में इसे शूद्र कुल का बताया गया। बौद्ध जैन ने इसे छत्रिय बताया। विशाखदत्त ने अपनी पुस्तक मुद्राराक्षस में इसे निम्न कुल वृष्ल बताया। जैन मुनि भद्रबाहु से जैन धर्म की शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर ली। चंद्रगुप्त मौर्य ने सेनापति सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। चंद्रगुप्त ने प्रथम अखिल भारतीय राज्य …

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भारत के वंश

भारत पर कई वंशों ने शासन किया। जिनमे से गुप्त वंश, हर्यक वंश, शिशुंनाग वंश, नंद वंश के बारे में संक्षेप में जानेंगे। गुप्त वंश गुप्त वंश (319ई॰ -550ई॰) के प्रमुख शासकों में- चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय, कुमार गुप्त, गुप्त जैसे प्रतापी शासक हुए। उनका शासन लगभग 200 वर्षो चला। कुषाण वंश के अंतिम शासक वासुदेव को पद से हटाकर श्री गुप्त ने गुप्त वंश की स्थापना की थी। श्री गुप्त के बाद उसका पुत्र घटोत्कच इस वंश का शासक बना। घटोत्कच के बाद उसका पुत्र चंद्रगुप्त प्रथम जो गुप्त साम्राज्य का सबसे प्रतापी शासक हुआ। इसी समय गुप्त वंश विस्तार की चरम सीमा पर पहुंचा। चंद्रगुप्त प्रथम (319 से 335 ई॰) गुप्त अभिलेखों से हमें ज्ञात होता है …

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भारतीय संविधान

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। संविधान सरकार से लाने का एक लिखित दस्तावेज होता है जिसके आधार पर देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है। संविधान मिशन की संस्तुतियों के आधार पर भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा के अंतर्गत किया गया था। इस संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 ईस्वी में हुआ था। इस कैबिनेट मिशन में कुल 3 सदस्य शामिल थे। संविधान संविधान सभा में कुल 389 शामिल हुए थे। जिनमें से दो प्रांतीय विधानसभा से, 93 देसी रियासतों से, चार चीफ मशीनरी सदस्य शामिल थे। 1946 में जब संविधान सभा के सदस्यों का पहला चुनाव हुआ उस समय संविधान सभा में कुल 296 सदस्य थे। जिनमें कांग्रेस को 208 मुस्लिम, लीग को …

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