आधुनिक हिंदी काव्य

साकेत अष्टम सर्ग कामायनी श्रद्धा सर्ग
सरोज स्मृति सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या
महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या

आधुनिक हिंदी काव्य पाठ्यक्रम में महादेवी वर्मा की निम्न कवितायें निर्धारित है- नीर भरी दुख की बदली मधुर-मधुर मेरे दीपक जल शलभ मैं शापमय वर हूँ कौन तुम मेरे हृदय में तुम यह क्षितिज अब प्रत्येक कविता के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी है। आधुनिक हिंदी काव्य के अंतर्गत महादेवी वर्मा कविताए और उनकी व्याख्या से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है। अतः आप अपने पाठ्यक्रम के अनुसार दी गयी कविताओं से तैय्यारी कर सकते है। महादेवी वर्मा कविताए और उनकी व्याख्या महादेवी वर्मा जीवन परिचय महादेवी वर्मा कविताए

महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या

आधुनिक हिंदी काव्य

आधुनिक हिंदी काव्य, कई विश्वविद्यालय के बी॰ ए॰ पाठ्यक्रम के हिंदी साहित्य विषय का एक प्रश्न पत्र है। हिंदी काव्य का आधुनिक काल 1850 से आरम्भ होता है। इसी युग मे हिंदी पद्य के साथ साथ गद्य का भी विकास हुआ। जन संचार के विभिन्न साधनों जैसे रेडिओ व समाचार पत्र का विकास इसी समय हुआ था। जिसका प्रभाव आधुनिक हिंदी काव्य पर भी पड़ा। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर समकालीन कविता तक की विकास यात्रा विभिन्न चरणों से गुज़री है। नवजागरण, छायावदी, छायावादोत्तर, प्रगतिशील, नयी कविता के दौर से गुज़रते हुए हिन्दी कविता ने परिपक्वता की कई मंज़िलें तय की है। हर युग, हिंदी कविता के बदलते मिजाज़, सम्प्रेषण की नयी-नयी विधियां, भाव-भाषा-संरचना के नये-नये प्रयोग के साथ, अपनी विशिष्ट पहचान और लक्षणों को लिए थे। नवजागरण काव्य आधुनिक हिंदी काव्य …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या

सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या से सम्बंधित प्रश्न BA में पूछे जाते है। पंत की काव्य कृति चिदंबरा पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। पंत ने अपनी कविता नौका विहार में जिस चांदनी रात का वर्णन किया है। वह शुक्ल पक्ष की दशमी की तिथि की उदित चांदनी का वर्णन है। कभी चांदनी रात के प्रथम प्रहर में कालाकांकर के राजभवन से लगी हुई नदी में अपने मित्रों के साथ नौका विहार कर रहा है।चंद्रमा की ज्योत्सना के प्रभाव से नदी के धवलता मैं रजत के कांति का आभास सर्वत्र होता है। उसी का अलंकारता भाषा में प्रस्तुत कविता में वर्णन किया गया है। आधुनिक हिन्दी काव्य सुमित्रानंदन पंत कविताए जगत के जीवन पत्र कविता में कवि ने पतझड़ …

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सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या

कामायनी श्रद्धा सर्ग

कामायनी का अर्थ है- “काम गोत्रजा”। कामायनी में कुल 15 सर्ग है। कामायनी श्रद्धा सर्ग में मनु व श्रद्धा को चित्रित किया गया है। काम की पुत्री होने के कारण श्रद्धा का दूसरा नाम कामायनी है। कामायनी महाकाव्य में शांत, श्रृंगार और वीर रस का प्रयोग हुआ है। कामायनी आधुनिक युग का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। जयशंकर प्रसाद को कामायनी रचना पर मंगला प्रसाद पारितोषिक दिया गया। जयशंकर प्रसाद की जीवनी कामायनी श्रद्धा सर्ग कामायनी श्रद्धा सर्ग में श्रद्धा एवं मनु का संवाद है। एक दिन जब मनु विचारों में लीन थे। तभी अचानक एक सुंदर संपन्न स्त्री ने उनके सम्मुख आकर पूछा कि इन जनहिन प्रदेशों में अपनी रूप बिखेरने वाले तुम कौन हो। नीग्रो वाली चिकने चर्म खंडों से …

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One Word Substitution

सरोज स्मृति

सरोज स्मृति सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एक शोक गीत है। जिसमें कवि ने अपनी युवा कन्या सरोज की अकाल मृत्युपर अपने शोक संतप्त हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं। इस प्रसिद्ध लोकगीत में जीवन की पीड़ा और संघर्षों के हलाहल का पान करने वाले कविवर निराला के निजी जीवन के कुछ अंशों का उद्घाटन भी है। छायावादी कवि होने के कारण निराला ने अपनी बात को प्रतीकात्मक शैली में अभिव्यक्त किया है। किंतु अपवाद रूप में लिखी गई सरोज स्मृति जैसे कतिपय रचनाओं में उनकी आत्मचरित्र आत्मक शैली परिलक्षित होती है। आधुनिक हिन्दी काव्य सरोज स्मृति कवि का विद्रोह और क्रांति दर्शी समभाव पुत्री सरोज के प्रति उसका जीवन की ठोकर दर्शाई गई हैं। सरोज स्मृति कविता सरोज की मृत्यु …

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सरोज स्मृति

साकेत अष्टम सर्ग

साकेत महाकाव्य मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों ही दृष्टि से साकेत की कथावस्तु गरिमा संपन्न है। साकेत अष्टम सर्ग की कथावस्तु का निर्माण मानवता की श्रेष्ठता का प्रतिस्थापन करने के लिए किया गया है। गुप्तजी ने इसमें संपूर्ण कथा को ना पकड़कर कुछ मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी प्रसंगों को ही पकड़ा है। साकेत अष्टम सर्ग साकेत महाकाव्य में कुल 12 सर्ग हैं। जिनमे अष्टम एवं नवम सर्ग का विशेष महत्व है। अष्टम सर्ग में चित्रकूट में घटी घटनाओं का वर्णन किया है। अष्टम सर्ग में वर्णित घटना केवल इतिवृत्त नहीं है, अपितु घटनाओं का संयोजन युग की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति करने के उद्देश्य से इस प्रकार किया है कि वह अपनी आधुनिक चेतना के कारण प्रासंगिक हो उठा है। कवि अष्टम सर्ग का आरंभ बड़े …

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साकेत अष्टम सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग – ‘कुरुक्षेत्र’ एक प्रबंध काव्य है। इसका प्रणयन अहिंसा और हिंसा के बीच अंतर्द्वंद के फल स्वरुप हुआ। कुरुक्षेत्र की ‘कथावस्तु’ का आधार महाभारत के युद्ध की घटना है, जिसमें वर्तमान युग की ज्वलंत युद्ध समस्या का उल्लंघन है। ‘दिनकर’ के कुरुक्षेत्र प्रबंध काव्य की कथावस्तु सात सर्गो में विभक्त है। कुरुक्षेत्र छठा सर्ग के अंतर्गत आधुनिक युग की समस्याओं, मानवीय रचनात्मक प्रवृत्तियों तथा कोरे मानसिक उत्थान की निंदा की गई है। कवि भगवान से धर्म, दया, शांति आदि की स्थापना से संबंधित प्रश्न करता है। आधुनिक वैज्ञानिक विकास की काफी चर्चा की गई है। कुरुक्षेत्र छठा सर्ग मानव वंशज की वायु, अग्नि ,आकाश, पृथ्वी सब कुछ है ।कवि खेद करता है कि मनुष्य के मानसिक विकास …

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