संस्कृत

हिमालय: संस्कृत निबंध

पर्वतराज हिमालय पर संस्कृत में निबंध कभी-कभी प्रश्नपत्र में पूछ लिया जाता है। हिमालय पर संस्कृत में निबंध लिखने के लिए निम्न बिंदुओं पर निबंध लिखना है। स्थिति महिमा: देवा नाम निवास स्थली लाभा: स्थिति पर्वतराज: हिमालय: भारतस्य उत्तरस्यां दिशि: विराजते। हिमालय: प्रहरी इव भारतम् रक्षति। पूर्ववश्या पश्चिमश्याम् च दिशि हिमालयस्य शाखा: प्रशाखा दूरं प्रसृता: सन्ति। स: भारत भ्रातु शिरसि मुकुट इव शोभते अस्य गौरी शंकर इति नाम शिखरं संसारस्य इसमस्तेषु पर्वत शिखरेषु उच्चतम अस्ति। महिमा: अयं परमौषधीनाम् रत्नां च महान आकार: आस्ति। गंगा यमुना प्रभृतय: नद्य: अत्र एव प्रभवन्ति। एता: सरिता: भारत भूमिम् शस्यश्यामलां कृषि समृद्धां च कुर्वन्ति। देवानाम् निवास स्थली अत्र देवानां निवास: अस्ति। महादेव सपरिवार: अत्र एवं निवसति। पार्वती अत्रैव तपम् अकरोत सा तपत्वा शिव लब्धवती। भारतास्ये …

हिमालय: संस्कृत निबंध Read More »

संस्कृत गद्य साहित्य का विकास

संस्कृत वाडमय में गद्य का अतिशय महत्वपूर्ण स्थान है। जब हम गद्य के उद्भव के विषय में विचार करते हैं तो इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मानव ने प्रारंभ में गद्य में ही परस्पर वार्तालाप प्रारंभ किया होगा। जब उसने अपने मनोभावों को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करना चाहा होगा तो उसकी प्रारंभिक अभिव्यक्त गद्य में हुई होगी, क्योंकि प्राथमिक अभिव्यक्ति छंद बद्ध या पद्य में होना संभव नहीं। अतः इस दृष्टि से विचार करने पर यह सिद्ध होता है कि पद की अपने गद्य प्राचीनतर है। परंतु छंदों बद्ध रचना सहज में कंठाग्र की जा सकती है, इस प्रकार उसे उसी रूप में बहुत समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, परंतु गद्य के साथ ऐसा नहीं है …

संस्कृत गद्य साहित्य का विकास Read More »

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण

राजा शूद्रक महाकवि वार्ड द्वारा रचित कादंबरी का प्रमुख पात्र है। कादंबरी में एक कल्पना पर आधारित 3 जन्मों की कथा को वर्णित किया गया है। शूद्रक पूर्व जन्म में राजा चंद्रापीड तथा चंद्रपीड पूर्व जन्म में स्वयं चंद्रमा थे। राजा शूद्रक के चरित्र में अनेक विशेषताएं हैं – महा विद्वान महा प्रतापी राजा कुशल शासक श्रेष्ठ व्यक्तित्व युवावस्था समय पालक जीतेंद्रीय एवं धैर्यवान महा विद्वान राजा शूद्रक महा पराक्रमी होते हुए अनेक शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनका मंत्री भी विद्वान था। महाकवि बाण ने शूद्रक के विषय में लिखा है कि राजा शूद्रक वाणी में सरस्वती के समान तथा बुद्धि में बृहस्पति के समान थे। महा प्रतापी राजा राजा शूद्रक अत्यधिक प्रतापी राजा थे। सभी राजा उनका आदर करते …

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण Read More »

शुकनास का चरित्रचित्रण

राजा तारापीड के अमात्य शुकनास एक कुशल एवं बुद्धिमान मंत्री हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर राज्य का संचालन अच्छी तरह से किया था। अपने कार्यकाल में राजा के प्रति स्वामी भक्ति राज्य की देखभाल अनुशासन प्रशासन आदि का कार्य बड़ी ही निपुणता से किया है। परंतु जब युवराज चंद्रापीड का राज्याभिषेक होता है तब उन्होंने अपनी निपुणता कार्य कुशलता का परिचय देते हुए मंत्री पद की गंभीरता को और अधिक बढ़ा दिया। कुशल प्रशासक के रूप में सुखनाथ में राजकुमार चंद्रापीड का राज्याभिषेक को शुभ अवसर पर राज्य गृह में शुकनास उसे उपदेश देते हैं। यद्यपि तुम सभी विद्याओं में निपुण होकर लौटे हो परंतु उनके द्वारा उत्पन्न अहंकार अत्यधिक गहन है। जो कि सूर्य, प्रदीप एवं रत्नों …

शुकनास का चरित्रचित्रण Read More »

बाणभट्ट जीवनी

महाकवि बाणभट्ट संस्कृत गद्य के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार हैं। उनके गद्य काव्य में हमें गद्य का चरमोत्कर्ष देखने को मिलता है। उन्होंने अपने हर्षचरित के प्रारंभ में अपने वंश आदि के संबंध में जानकारी दी है। कादंबरी के प्रारंभिक श्लोकों में भी वंश क्रम के विषय में प्रकाश डाला है। महाकवि बाणभट्ट प्रतिष्ठित वात्सायन वंश में उत्पन्न हुए थे। इस कुल में कुबेर नामक प्रकांड पंडित का जन्म हुआ। कुबेर के यहां रहने वाले तोता मैना भी इतने पंडित थे कि अशुद्ध पाठ करने वाले विद्यार्थियों का वे बीच में ठोक दिया करते थे। इन कुबेर पंडित के 4 पुत्र हुए उनके नाम थे अछूत ईशान हर और पक्षपात इन में पक्षपात के अर्थ पति नाम का एक ही पुत्र हुआ। …

बाणभट्ट जीवनी Read More »

हर्षचरित कथावस्तु

महाकवि बाणभट्ट की कीर्ति कौमुदी की विस्तारक दो रचनाएं हर्षचरित और कादंबरी हैं हर्षचरित महाकवि बाणभट्ट की प्रथम रचना है यह गद्य विद्या में आख्यायिका है। इसमें कुल 8 उच्छवास हैं प्रथम तीन उच्छवासो में महाकवि बाणभट्ट ने आत्मकथा को प्रस्तुत किया है और शेष उच्छवासों में सम्राट हर्ष के संबंध में निरूपण किया। इसकी संक्षिप्त कथावस्तु इस प्रकार है- हर्षचरित कथावस्तु प्रथम उच्छवास में कभी अपने वंश का परिचय देता है। इसके लिए वह एक विस्तृत काल्पनिक कथा प्रस्तुत करता है। इसी में उन्होंने अपने जन्म और बाल्यावस्था का उल्लेख किया है। द्वितीय उच्छवास में ग्रीष्म की प्रखरता और राजद्वार का वर्णन किया गया है। तृतीय उच्छवास में बाण राजा से भेंट कर और उनके विश्वसनीय बनकर घर लौटते …

हर्षचरित कथावस्तु Read More »

कादम्बरी कथावस्तु

कादम्बरी ना केवल बाणभट्ट की अपितु संस्कृत गद्य साहित्य की उत्कृष्टतम कृति है। इसमें महाकवि बाणभट्ट की मौलिक प्रतिभा झलक रही है। इसकी संक्षिप्त कथावस्तु इस प्रकार है। कादम्बरी कथावस्तु विदिशा में शूद्रक नाम का प्रख्यात राजा राज्य करता था। एक दिन उसके पास एक चांडाल कन्या अत्यंत मेधावी शुक को लेकर पहुंचती है। सुखराज आसोतरा को वृंदावन में अपने जन्म से लेकर महर्षि जाबालि के आश्रम में पहुंचने तक के वृतांत को सुनाता है। वह वृतांत इस प्रकार है – अत्यंत समृद्ध उज्जैनी के राजा तारापीड और रानी विलासवती अपनी तपस्या के द्वारा चन्द्रापीड नामक पुत्र रत्न को प्राप्त करते हैं। विद्या अध्ययन के पश्चात राजकुमार चन्द्रापीड अपने पिता के अमात्य सुक नास के पुत्र वैशम्पायन के साथ दिग्विजय …

कादम्बरी कथावस्तु Read More »

अनुशासनम् संस्कृत निबंध

अनुशासनम् संस्कृत निबंध परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। अनुशासन से दुनिया की हर एक चीज प्राप्त की जा सकती है। अनुशासन से ही इंसान भगवान बन जाता है। अनुशासन संस्कृत निबंध को मुख्य बिंदुओं में पढ़ेंगे- अनुशासनस्य स्वरूपं विनयस्य महिमा राष्ट्र जीवने अनुशासनम् छात्रस्य जीवने अनुशासनम् आवश्यकम् 1. अनुशासनस्य स्वरूपं किम् इदम् अनुशासनं इति? ‘शासन’ पदस्य अर्थ आज्ञा इति। अनुशासनं इति पदस्य अर्थ आज्ञापालनं इति। आज्ञापालनं स्वयं स्वीकृतम् नियम पालनम् च इत्यादय: गुणा: अनुशासने समायान्ति। 2. विनयस्य महिमा प्राचीन संस्कृत साहित्य विनय इत्यस्य महिमा बहुश: वर्णित: दृश्यते। विनय मधुर: स्वाभाव सर्वप्रिय: वर्तते। विनयात् जन: पात्रतां याति। अयं विनय: एवं अधुना अनुशासन पदेन कथ्यते। 3. राष्ट्र जीवने अनुशासनम् वय भारतीय: स्वतंत्र-राष्ट्रस्य नागरिका: स्म। अस्माकं एकम संविधान अस्ति। तत्र …

अनुशासनम् संस्कृत निबंध Read More »

सत्यस्य महिमा संस्कृत निबंध

सदस्य महिमा का शाब्दिक अर्थ है सत्य की महिमा। सत्य की हमेशा विजय होती है। यहां सत्य के विशेष तम गुणों के आधार पर संस्कृत निबंध लिखा जा रहा है। जो कि निम्न बिंदुओं पर आधारित है। सत्यस्य महिमा संस्कृत निबंध सत्यस्य स्वरूपं अप्रिय सत्यं न उचितं सत्यं प्रियं कृत्वा वदेत् 1. सत्यस्य स्वरूपं अयं संसार: सत्ये प्रतिष्ठत:। सत्यम् किम्? यद यथा वर्तते। तस्य तथैव चिन्तनं, कथनं, आचरण व सत्यम इति भवति। यन्मनसा चिन्तयति तदैव वाचा वदति। यत् च वाचा वदति तद् एव कार्यम् करोति नान्यथा – इति सत्यवादिन: व्यवहार: भवति इत: विपरीतम् अस्त्यम् अनृतं वा भवति। सत्यम् मानवस्य सामान्या प्रवृत्ति अस्ति। अस्त्यम् तु तस्वा असामान्या निन्दनीया प्रवृत्ति च प्रवृत्ति:। 2. अप्रिय सत्यं न उचितम् यद्यपि सत्यम् लोक विरूद्धं न …

सत्यस्य महिमा संस्कृत निबंध Read More »

गणतंत्र दिवस: संस्करण निबंध

महत्वम् पूर्ण स्वतंत्रस्य घोषणा राजधान्यां समारोहा: महत्वम् प्रतिवर्षम 26 जनवरी दिनांके भारतीयै: गणतन्त्र दिवस मान्यते। 1950 ख्रीष्टाब्दे अस्मिन् दिने स्वतंत्र भारतस्य संविधानं आरब्धं जातं। डॉ राजेंद्र प्रसाद: स्वतंत्र भारतस्य प्रथमो राष्ट्रपति: निर्वाचित: अभवत। पूर्ण स्वतंत्रस्य घोषणा स्वतंत्रताया: आंदोलन काले १९२९ तमें ख्रीष्टाब्दे लवपुरे रावी तटे जवाहरलाल नेहरू महोदयानां सभापतित्वे कांग्रेस दलस्य अधिवेशनम् अभवत। अत: स एव दिवस: संविधान अपि आरंभ दिवस: विशेष महोत्सव रूपेण मान्यते। भारतस्य राजधान्याम् अयमुत्सव: इंडिया गेट इत्याख्ये स्थाने भवति। राष्ट्रपति महोदयराजकीयं रथभारूहा विशालजनसमूहस्य मध्ये आयाति। राष्ट्रध्वज च उत्तोलयति। स्थल नभ जल सैनिका: सैनिक रीत्यातम् अभिनंदनंति। तत: सभायात्रा भवति तत्र सशस्त्र सैनिका:, प्रदेशानाम विशेष्टा: स्वरूप रचना लोक नर्तका: गायकाश्च सम्मिलिन्ति। इमं महोत्सवं दृष्टुं दूरतो जना: समागच्छन्ति उल्लासम च अनुभवंति।

स्वतंत्रता दिवस: संस्कृत निबंध

महत्वम् कार्यक्रमा: स्वतन्त्रय रक्षणस्य व्रतम् महत्वम् प्रतिवर्षम् अगस्त मासस्य पंचदश तिथौ संपूर्ण भारतवर्षे स्वातन्त्रय दिवश: सोत्साहं मान्यते। 1947 तमे वर्षे अस्मिन् दिने भारतम् ब्रिटिश शासनात् बंधन विरहितम् भवति। भारत माता पारितंत्र्य श्रंखला परित्याज्य मुक्ता वभूव। लाल किला इति दुर्गे प्रथम प्रधान मंत्रिणा रूहरूमहोदयेन् त्री रंग से राष्ट्रीय ध्वज स्वकर कमलभ्याम् आरोहणं सज्जातम्। कार्यक्रमा: अधुना प्रतिवर्ष अस्मिन दिने नगरे-नगरे ग्रामे-ग्रामे राष्ट्रीय ध्वज आरोहणं क्रियते। नेत्रणां भाषणानि भवन्ति। राष्टोन्नत्यै शपथं गृह्यते‌। राष्ट्र भक्त वीराणां स्मरणम् क्रियते। प्रधानमंत्रिण: संदेशोंऽपि श्रुति गोचरो भवति स्वतन्त्रय रक्षणस्य व्रतम् अस्माकं पूर्वजा राष्ट्र रक्षायें स्वरक्तस्य प्रवाह कर्तू सदा तत्परा आस्म। तेषां प्रयासेन् स्वतन्त्रता सुलभा जाता। अधुना अस्माकं कर्तव्यं अस्ति यत् वयं स्वातंत्रयस्य प्राभाणिकतया पालन कुर्वक्त: वयं राष्ट्र रक्षा कर्तम सक्षमा भविष्याम: अत्र कोऽपि सन्देह: नास्ति।

विजयादशमी संस्कृत निबंध

विजयादशमी पर संस्कृत निबंध लिखो। विजयादशमी संस्करण निबंध कैसे लिखा जाए। विजयदशमी त्योहार पर निबंध क्या है? विजयादशमी निबंध निम्न बिंदुओं से समझे। विजयस्य अकांक्षा रामलीला दुर्गा पूजा 1. विजयस्य अकांक्षा विजेय से आकांक्षा मनुसस्य सर्वप्रिया सर्वसामान्या आकांक्षा अस्ति। भारतीया: प्रति वर्ष उम्र एक वारं सीमोल्लंघनम् कृत्वा स्व आकांक्षा प्रदर्शयन्ति। रामस्य रावणोपरी विजयस्य भारतस्य इतिहासे अतीव महत्वं वर्तते। एतत् विजयं आनयितुं वयम् कार मासस्य शुक्ल पक्षे दश दिनानि यावत् रामलीला महोत्सव कुर्म। अन्तिम दिने दशभ्यां तिथौ विजयदशमी सोल्लासं मान्यते। 2. रामलीला भारतवर्षे प्रतिनगरं रामलीलाया: समायोजनं भवति। अस्मिन समायोजने रंगमंचे रामस्य जीवनं प्रदश्यरते। विजयादशमी दि?ने रावणस्य कुंभकरणस्य व मेघनादस्य च महाकाराणि प्रतिरूपाड़ि अग्नि तीरै: दहान्ते। तत: पूर्वम् श्रीराम पक्षस्य शोभायात्रा समायोजय्ते। प्रतिरूपेषु विस्फोटकानां स्फोटनं भवति। संपूर्ण; समाज: एकस्मिन् स्थले एकत्री भूपह …

विजयादशमी संस्कृत निबंध Read More »

दीपोत्सव संस्कृत निबन्ध

दीपोत्सव संस्कृत निबन्ध हिंदी में दीपों का उत्सव नामक संस्कृत निबन्ध कभी कभी संस्कृत निबंधों में पूछ लिया जाता है। यह निबन्ध परीक्षा की दृष्टि से काफी अधिक महत्वपूर्ण है। जिन्हें हम निम्न बिंदुओं में पढ़ सकते हैं- दीपोत्सवस्य महत्वम् लक्ष्मी पूजनम् दीप प्रकाशस्स शोभा 1. दीपोत्सवस्य महत्वम् दीपोत्सव: सर्वे: भारतीयै: सर्वातिशयेन् उत्साहेन् मान्यते। अयम् उत्सव: कार्तिक मासस्य अमावस्या दिने भवति। श्रूयते यत् अस्मिन दिने भगवान श्री रामचंद्र: रावणं हत्वा अयोध्यां निवृत्त: आसीत्। तदाच लोकै: रात्रौ दीपमालां कृत्वा तस्य स्वागतम् कृतम् आसीत्। तत: प्रभृति: जना: तस्मिन एव दिने प्रतिवर्षम् स्वगृहेषु दीपमालां कुर्वंति। 2. लक्ष्मी पूजनम् अस्मिन् अवसरे रात्रौ लक्ष्मी पूजनं क्रियते। केषुचित् ग्रहेषु होमादि: अपि सम्पाद्यते। वणिज: प्रायेण अस्मात् दिनात् एव बहीखाता इत्यस्य आरम्भं कुर्वंति। अत: ते बहीखाता पूजनं कुर्वंति। …

दीपोत्सव संस्कृत निबन्ध Read More »

होलिका महोत्सव: संस्कृत निबंध

होलिका महोत्सव: संस्कृत निबंध संस्कृत की परीक्षा में निबंध के रूप में पूछा जाता है। होली एक महान उत्सव है। आइए इस निबंध को निम्न बिंदुओं में पढ़ते हैं। होलिका महत्वम् होलिका दहनम् फाग इति रंगोत्सव: होलिका महत्वम् होलिका महोत्सव: फाल्गुन मासस्य पूर्णिमायां समायोज्यते। इदं पर्व: होली इत्यभिधानेन् प्रसिद्धम् अस्ति। परम्परया अयमुत्सव: अपि वसंतोत्सव: कथ्यते यत: इदं पर्व अपि वसंततौ समायोज्यते। होलिका दहनम् अनेन् महोत्सवेन् सम्बद्धम् एकम् पौराणिकम् आख्यानम् सर्वे: स्वीक्रियते। अस्मिन दिने होलिका नाम्ना प्रसिद्धा काचित राक्षसी प्रभुभक्तं प्रहलादं अंके निधाय दग्धा जाता। सा प्रहलादम् दुग्धम् कामयते स्म। अगिं प्रविश्य अपि अग्नि: तस्या दहनम् न करिष्यति इति तस्यै वरदानम् आसीत्। परम् विपरीतम् एव जातम्। सा स्वयमेव दग्धा, प्रहलाद अदग्ध: आतिष्ठत्। तस्या: दहनम् अभिनयन्त: जना: अग्निम् परित: तिष्ठन्ति नृत्यंति च। …

होलिका महोत्सव: संस्कृत निबंध Read More »

स्त्री शिक्षया: संस्कृत निबंध

वैदिक युगे स्त्री शिक्षया: महत्वं सर्वे जानन्ति स्म। वेदेषु यथा पुरुषा: मंत्रदृष्टार: आसन् तथैव काश्चन् नार्य: अपि ब्रह्मवादिन्य: गैत्रेयी गार्गी समा: स्त्रिय: भारते अभवन्। मण्डन् मिश्रस्य पत्नी स्वयं परम विदुषी आसीत्। कालिदासस्य पत्नी विधोत्मा अति विदुषी आसीत्। अतएव वैदिक परंपरां अनुरूध्य स्त्री शिक्षा पुरुष शिक्षा इव अनिवायी आसीत्। मनुस्मृतौ वर्णितं यत् यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:। नारी पूजाया: किम तात्पर्य अस्त? नारी शिक्षा एव नारी पूजा। शिक्षिता नारी शिक्षिता माता भगिनी, शिक्षिता, च शिक्षिता पत्नी भूत्वा सपरिवारस्य महते कल्याणाय कल्पते। शिक्षितया नार्या समाज: स्वस्थ: पुष्ट: विकासोन्मुखश्च जायते। समाज जीवनस्य सर्वेषु क्षेत्रेषु शिक्षित नारीणा महत्त्वं स्थानम् च अधुना सर्वत्र स्वीकि्यते। तस्मात् स्त्रीधनं रक्षणतत्परा: वय तत्र शिक्षा विषये कपि कपि अप्रमंता: तिष्ठेम्।

Sarkari Focus

नौका विहार: संस्कृत निबंध

अहं ग्रीष्मावकाशे चंडीगढं गत:। तत्र वयं प्रसिद्ध सुक्षणं सरोवर प्राप्ता। सर्वेषां अभिलाष: अभगवत् यत् नौका विहार: करणीय:। वयं शीघ्र एवं नौका अस्थानं प्राप्ता:। तत्र नौकाविहारस्य प्रतिजनं पजरूपक्म शुल्कं आसीत्। वयं तदनुसारम् शुल्क दत्वा नौकायां स्थिता:। अस्माकं नौका अतीव सुपुपटा: रम्या च आसीत् नौका चालक: अरित्रद्वयस्य ग्रहणं कृत्व नौकाभ् अचालयत्। वयम् सर्व नौका चालकस्य कार्यं कुत हलेन आपश्याम क्रमशः आरित्र ग्रहर् मामपि रुचि: आशीत्। एकस्मिन् अरित्रे कुशलोयुवा चालक: अन्यस्मिन् च अहम् स्थितौ। नौका चालकस्य नेतृत्वे तस्य संकेतानुसारं भयापि चालनं आरब्ध:। सरोवरस्य परिसर: रम्य: आसीत्। सरोवर यत्र तत्र बहब: नौका चलंति स्म। तद दृष्टता अस्माभि: अपि सहगानं आरब्धम्। मधुरंणयानेन् मध्ये मध्ये करतल ध्वनेन् अस्माकं श्रमो विनष्ट:। अस्माकं यन: सुशरीरेषु च नवस्फूर्तिम् पद न्यधात्। इत्यं असमाक नौकाविहार: संपूर्ण:।

Sarkari Focus

विज्ञानस्य चमत्कारा: संस्कृत निबंध

विज्ञानस्य चमत्कारा: – विज्ञान के चमत्कार, विज्ञान का महत्व, विज्ञान लाभ तथा हानि पर संस्कृत में निबंध परीक्षा में पूछे जाते हैं। जिसको संस्कृत में निम्न हेडिंग्स में लिखना है। विज्ञानस्य चमत्कारा: विज्ञानस्य चमत्कारं कृषि गृह क्षेत्रेषु सौविध्यम् यातायात संचार साधनानि चिकित्सा क्षेत्रे चमत्कारा: उपसंहार: विज्ञानस्य चमत्कारं विज्ञानस्य प्रतिदिनं नूतना: चमत्कारा: पठ्यन्ते श्रून्यन्ते च। अत: तेषां वर्णनम् सर्वथा असक्यम्। यत् किंचित वर्णनम् कुर्त्तु शभ्यते तदेव लिख्यते अंत्र। कृषि गृह क्षेत्रेषु सौविध्यम् अद्द कृषि क्षेत्रे सर्वकार्य विद्युतचालितं यन्त्रै भवति वीजानां वपनम्, कण-वुसयो: प्रथक करणम् क्षेत्र सिच्चनम् भू-कर्षणम् अपि सर्वम् यंत्रे: साहयते। गृहे पाकशालामं स्टोव-पाचक गैस साहाय्येन् अनायासामेव सर्वविध: पाक: सिद्धतां याति। वस्त्र क्षालनम् यन्त्रेण वस्त्राणि स्वत: सत्वरं क्षालितानि सन्ति। गृहमार्जन यन्त्राणि, कूलर- हीटर फ्रीजादीनि च कस्य न सूखावधनि? यातायात संचार साधनानि …

विज्ञानस्य चमत्कारा: संस्कृत निबंध Read More »

Sarkari Focus

मम जीवनस्य लक्ष्यं संस्कृत निबंध

संस्कृतस्य प्रचार: प्रसार: एव मम जीवनस्य लक्ष्यम् अस्ति। अद्द संस्कृतस्य दयनीया दशा वर्तते। अहं जीवनस्य सम्पूर्णा शक्ति दत्वा अस्य गौरवश्य पुनः प्रतिष्ठित प्रयत्नम् करिष्यामि इति एवं मम् जीवनस्य लक्ष्यम् अस्ति। लक्ष्यस्य पूर्ति: योजनां बिना न संभवति। भारतस्य एक्यार्थम् संस्कृतस्य राष्ट्र भाषात्वे स्वीकरण अनिवार्यम् अस्ति। न अन्या कापि भाषातत्कार्य कर्च शक्नोति। सर्वप्रथमं संस्कृतम् परस्पर संभाषणस्य भाषा भवेत् इतिलक्ष्यं करणीयम्। तदर्थ संगटन रचना करणीया। कोणे कोणे संस्कृत हिताय संलग्नानां पुरुषाणां संधा: स्थापनीया:। तेषां सधानाम् माध्ययेन् शिविराणाम् आयोजनं भावेत् योषु संस्कृत भाषाया: व्यवहारिक प्रयोग: शीक्षणीय:। अधुनायथा कर्नाटक प्रदेशस्य भट्दूर ग्रामस्य स्थिति: वर्तते। यत्र सामान्यजने संस्कृत भाषायां एवं सर्व व्यवहारं करोति तादृशी स्थिति सम्पूर्ण ग्रा भवेत्। एतदर्थम् अही प्रयत्नम् करिश्यामि। मम् प्रयास: भविष्यति यत अस्मिन् एवं जन्मानि लक्ष्यपूर्ति भवेत्। यदि किमपि न्यूनं तिष्ठेति तथा …

मम जीवनस्य लक्ष्यं संस्कृत निबंध Read More »

Sarkari Focus

मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध

मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध – मेरा प्रिय शिक्षक संस्कृत निबंध परीक्षा में पूछा जाता है। जिसे कैसे लिखना है वो हम लोग यहां देखने वाले है। मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध परिचयः अध्यापन नैपुण्यं व्यवहार कुशलता सर्वजन प्रियत: 1. परिचयः डॉक्टरोपा धिविभूषित: श्री मान् प्रियव्रत: मम प्रिय: आचार्य: अस्ति। स: गतन्दशन्मासेभ्य: अस्माकं विद्यालयेन् सम्वद्ध: अस्ति। स: मूलतः उत्तरप्रदेशीय अस्ति। स: भारतीय वेशभूषां धारयति। स: रावतभाषाया: च संस्कृत भाषाया: च सामान्य व्यवहारेषु प्रयोगं करोति। छात्राणाम् अन्तकरणेषु तस्य छवि: स्वयमेव स्थानं ग्रहणन्ति। 2. अध्यापन नैपुण्यं योग्यतम् शिक्षके ये गुणा: संति ते सर्वे गुणा: डॉ प्रियव्रत् महोदये द्रृश्यन्ते। आचार्यस्य व्यवहारं दृष्ट्वा सर्वो छात्रा: तम् गुरुजी इति शब्देन् संबोधयंति। कठिनतम् अपि विषयम् स: उदाहरणै: सह सरलीकृत्य उपस्थापयति। छात्राणाम् प्रश्नानाम् उत्तर दानेन सः तेषाम् …

मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध Read More »

मम प्रिय शिक्षक: संस्कृत निबंध, प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक, नेतृत्व, राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध परीक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण निबंध है। विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध वार्षिकोत्सवस्य महिमा उत्सवस्य प्रारंभ: शारीरिक प्रदर्शनम् सांस्कृतिक-कार्यक्रम: पुरस्कार वितरणाम् प्रतिवेदनम् च वार्षिकोत्सवस्य महिमा प्रायः सर्व विद्यालयेषु वार्षिकोत्सव: प्रतिवर्ष मान्यते। वार्षिकोत्सवे विद्यालयस्य गौरवं सर्वजनेभ्य: सम्मुख प्रतिवेदनं माध्यमेन प्रकटं भवति। कार्यक्रम द्वारा अपि विद्यालयस्य प्रभाव: वर्धते। पुरस्कारेण छात्रोंत्साहे वृद्धि: भवति। उत्सवस्य प्रारंभ: अकस्माकं विद्यालये गतवर्षे सितंबर मासस्य नव तारिकायाम् वार्षिकोत्सव: मानित:। उपायुक्त महोदयेन अस्यं अध्यक्षता कृतां। मयचम् आगत: स: माल्यै: विभूषित:। प्रथमम् तेन हस्ताभ्याम् विद्यालय पताकाया: उत्तोलनम् कृतम्। तदा सरस्वती वंदनाद्वारा सभारंभ: समारब्ध:। शारीरिक प्रदर्शनम् छात्रे: शारीरिकम् प्रदर्शनं कृतम्। तत्र ते योग चाप प्रदर्शने अपूर्व नैपुष्यम् अदर्शयन् तै: आसन् योग व्यायाम-दंड, नियुद्धादिषु अपि सिद्धता दर्शिता। सघोषं सच्चलनम् तु अपूर्व आसीत्। सांस्कृतिक-कार्यक्रम: सांस्कृतिक कार्यक्रम में संस्कृत रूपकं …

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध Read More »

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध

विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध

संस्कृत में यदि विद्या ददाति विनयं नाम के अतिरिक्त इन नामों से कोई निबन्ध पूछा जाए। (विद्या ददाति विनयं, विद्यायाः महत्वम्, विद्या धनम् सर्व धनं प्रधानम्, विद्या राजसु पूजिता न तुधनम् विद्याविहीनः पशुः।।) तो नीचे दिए गए निबंध को लिखना है। विद्या ददाति विनियम का शाब्दिक अर्थ “विद्या विनय प्रदान करती है”। विद्या का महत्व क्या है। विद्याधन सभी धनु में प्रधान धन है। विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध विद्याया: महिमा विद्यया विनय प्राप्ति: विद्ययासम्मान प्राप्ति: सर्वजनहितकारिणी विद्या विद्याया: महिमा विद्याया: विचित्रो महिमा वर्तते। विद्याधनं सर्वधन प्रधानम् अस्ति। अन्यानि सर्वाणि धनानि तु व्ययं कृतानि क्षीणानि जायन्ते। विद्याधन तु व्यये कृते अपि वर्तते। कथम् एतत् ? वयम् अनुभवामः यत् यदा वयम् अन्येभ्यः विद्या क्षीणा भविति। (विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध) विद्यया …

विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध Read More »

विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध

संस्कृत निबंध संग्रह

संस्कृत निबंध संग्रह: संस्कृत प्रश्न पत्र में संस्कृत भाषा में अनेक निबंध पूछे जाते हैं। जो निबंध सबसे अधिक महत्वपूर्ण है वह यहां दिए गए हैं। हमने पूरी कोशिश की है अधिक से अधिक संस्कृत निबंध प्रकाशित किए जाएं। आप जिस टॉपिक पर निबंध खोज रहे हैं वह अगर यहां ना हो तो नीचे कमेंट में लिख दे। Sarkari Focus उसे अति शीघ्र प्रकाशित करने की कोशिश करेंगे। संस्कृत निबंध संग्रह अन्य भाषाओं की तरह संस्कृत में भी निबंध लिखना अति सरल है, यदि आप संस्कृत बोल सकते हैं, तो लिख भी सकते हैं। संस्कृत निबंध संग्रह संस्कृत के निबंधो का एक अनूठा अद्वितीय संगम है। इसमें आप संस्कृत के अनेक महत्वपूर्ण निबंध पाएंगे।

संस्कृत निबंध संग्रह

अकस्माकं विश्वविद्यालय: संस्कृत निबंध

अकस्माकं विश्वविद्यालय: संस्कृत निबंध – परीक्षा में अनेक महत्त्वपूर्ण टॉपिक पर निबंध पूछे जाते हैं। जिनमे अकस्माकं विश्वविद्यालय: संस्कृत निबंध भी कभी कभी पूछ लिया जाता है। इसका हिंदी में अर्थ है हमारा विश्वविद्यालय। संबंधित निबंध नीचे दिया गया है। अकस्माकं विश्वविद्यालय: संस्कृत निबंध अस्मिन् संसारे विद्याधनमेव सर्वधनम् प्रधानमस्ति विद्यायां एव जना: महत्वं भजन्त। ते महत्पदं लभंते। कथितमप्यस्ति – विद्ययाऽमृतमश्नुते। इत्थं तावत विद्यया: प्रशंसा सर्वत्र श्रूयते। एतां विद्या को न नाम भुवि कामयेते? पुरा तु विद्याध्ययन पुरुषाणां कर्तव्यं मेवासीत तदा नरा: नार्यश्च सर्वे एव विद्याध्ययनं चक्रु:। संप्रति तु शिक्षण व्यवस्था विद्यालयेषु च वर्तते। उच्चशिक्षाया: व्यवस्था महाविद्यालयेषु विश्वविद्यालयेषु च विद्यते। अकस्माकं विश्वविद्यालये शिक्षाया: समुचित व्यवस्था वर्तते। अत्रसर्वेषामेव, शास्त्राणां, विज्ञानां, कलानां च शिक्षणस्य व्यवस्था वर्तते। अकस्माकं विश्वविद्यालये श्रेष्ठा: ज्येष्ठा गुणगरिष विश्वविद्यालय विरदा: …

अकस्माकं विश्वविद्यालय: संस्कृत निबंध Read More »

भारत में कंपनी राज, दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता