हिंदी कथा साहित्य

चित्रलेखा उपन्यास चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या
रागदरबारी उपन्यास राग दरबारी उपन्यास व्याख्या
कफन कहानी कफन कहानी सारांश
कफन कहानी के उद्देश्य
कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण
प्रेमचंद कहानियां समीक्षा
गुण्डा कहानी सारांश गुण्डा कहानी समीक्षा
गुंडा कहानी में नन्हकु सिंह को गुंडा क्यों कहा गया है?
यही सच है कहानी चीफ की दावत समीक्षा
तीसरी कसम कहानी सारांश राजा निरबंसिया समीक्षा
पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

सचेतन कहानी आंदोलन पर प्रकाश डालिए।

सचेतन कहानी के प्रवक्ता महीप सिंह है। नई कहानी की आत्मा रखता वह व्यक्तिवादिता के विरुद्ध सचेतन कहानी आंदोलन को महीप सिंह ने परिवर्तित किया। सचेतन कहानी के सिद्धांत कार महीप सिंह के अनुसार हमारी समस्या आस्था की जड़ता है। हिंदी कथा साहित्य आस्था की जड़ता को वे दो रूपों में देखते हैं। इनके अनुसार आस्था की जड़ता एक और मनुष्य को अतीत के सुनहरे सपनों में डूब होती है। तो दूसरी ओर कुंठा, निराशा और अवसाद भी उत्पन्न करती है। यह दोनों स्थितियां मनुष्य को निष्क्रिय बनाती हैं। सचेतन कहानी इसी निष्क्रियता का विरोध करती है। सचेतन कहानी के प्रवक्ताओं में महीप सिंह के अतिरिक्त लक्ष्मी सागर वाष्र्णेय, राजीव सक्सेना, उपेंद्र नाथ अश्क, श्याम परमार आदि हैं।

पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

ओम प्रकाश वाल्मीकि का हिंदी कहानी के दलित रचनाकारों में महत्वपूर्ण स्थान है। B.A. के हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र के अंतर्गत पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा पूछी जाती है। इन्होंने अपनी कहानियों में कच्चे दलित जीवन का भोगा हुआ यथार्थ पीड़ा, समाज द्वारा तोहफा स्वरूप कदम कदम पर दिया जाने वाला अपमान इत्यादि को अभिव्यक्त किया है। प्रथक प्रथक अपनी विशेष दृष्टि समझदारी एवं सहजता के कारण दलित रचनाकार अपनी अलग पहचान रखते हैं। पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा शीर्षक प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सामान्य, सहज एवं विस्तृत करने वाला है। जिसके मूल में एक उत्कंठा अवश्य बार-बार उत्पन्न होती है कि कैसे पच्चीस चौका डेढ़ सौ होता है। कथावस्तु सुदीप के पिताजी उसका दाखिला स्कूल में करवाने …

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पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

राजा निरबंसिया समीक्षा

राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वर द्वारा रचित है। राजा निरबंसिया समीक्षा नीचे दी गई है। इन्होंने अपनी कहानियों में मध्यम वर्गीय जीवन को चित्रित किया है। कमलेश्वर की कहानी राजा निरबंसिया का कथानक जगपति है। यह कहानी उस दौर के श्रेष्ठ कहानी कारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है। राजा निरबंसिया आकार की दृष्टि से लंबी कहानी है। जगपति और चंदा के दांपत्य जीवन में निसंतान होने की व्यवस्था किस प्रकार एक स्त्री को लक्षित करती है और आर्थिक अभावों के कारण इस दंपति के प्रेम संबंध में कैसे-कैसे नाटकीय मोड़ आते हैं। यह कहानी इसे अत्यंत मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त करती है। जगपति और चंदा, राजा और रानी दोनों निसंतान हैं। कतिपय घटना प्रसंगों से पुत्रवान होते हैं। …

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राजा निरबंसिया कहानी समीक्षा

तीसरी कसम कहानी सारांश

फणीश्वरनाथ रेणु तीसरी कसम कहानी के लेखक हैं। इसमें उन्होंने बिहार प्रांत के ग्रामीण जीवन को उभारने का सफल प्रयास किया है। तीसरी कसम कहानी सारांश इस प्रकार है। यह कहानी हिंदी कथा साहित्य पाठ्यक्रम में पढ़ी जाती है। कहानी गांव के हीरामन गाड़ी वाले के जीवन को लक्ष्य करके लिखी गई है। हीरामन एक बार एक नौटंकी में काम करने वाली नृत्यांगना हीराबाई को अपनी गाड़ी में अत्यधिक दूर ले जाता है। मीराबाई गाड़ी में अकेली ही यात्रा करती है। उसका स्वरूप उसकी भाषा सब कुछ हीरामन को अच्छे लगते हैं। वहां हीराबाई की ओर आकर्षित और आसक्त हो जाता है। हीराबाई भी हीरामन को पसंद करने लगती है। किसी अन्य कंपनी में हीराबाई नौकरी लग जाने के कारण …

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तीसरी कसम कहानी सारांश

चीफ की दावत समीक्षा

भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी चीफ की दावत कहानी कला की दृष्टि से प्रसिद्ध कहानी है। चीफ की दावत समीक्षा चीफ की दावत समीक्षा इस प्रकार हैं- कथानक- कहानी के नायक सामनाथ अपने मध्यवर्गीय परिवार को आधुनिक बोध से जकड़े हुए है। नए पन का ढोंग उन्हें मां और पत्नी के मध्य चमकीले पर्दे की भांति लटकाए हुए हैं या आधुनिकता की गंध सामान्य माध्यम परिवारों में देखी जा सकती है। पुरानी मान्यताओं और परंपराओं के ढांचे से निकले माता-पिता जब अपनी संतानों को नए रंग में पाते हैं तो उन्हें आशय मिश्रित असंतोष के कारण भीतर ही भीतर गोटन का अनुभव होता है। शामनाथ नौकरी पेशा व्यक्ति है-इनकी पदोन्नति की संभावनाएं संबंधित चीफ साहब पर निर्भर करती है चीफ …

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चीफ की दावत समीक्षा

हिंदी में प्रथम

आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ प्रश्न इस प्रकार से भी पूछे जाते हैं। जैसे हिंदी में प्रथम कवि, उपन्यास, रचना, कहानी व नाटक। हिंदी में क्या प्रथम है? उसको याद करना ही पड़ेगा। साथ मैं आजकल कुछ प्रश्न हिंदी की प्रमुख संस्थाओं से भी पूछे जाने लगे हैं। जिनकी जानकारी भी नीचे दी गई है। हिंदी में प्रथम हिंदी का प्रथम कवि – सरहपा हिन्दी की प्रथम रचना – श्रावकाचार (देवसेन) हिन्दी का प्रथम उपन्यास – परीक्षा गुरु (श्रीनिवास दास) हिंदी का प्रथम मौलिक नाटक – नहुष (गोपालचंद्र) हिंदी की प्रथम आत्मकथा – अर्द्धकथानक (बनारसी दास जैन) हिंदी की प्रथम जीवनी – दयानंद दिग्विजय (गोपाल शर्मा) हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज – लक्ष्मीपुरा (शिवदान सिंह चौहान) हिंदी का प्रथम यात्रा …

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हिंदी में प्रथम

यही सच है कहानी

यही सच है कहानी मन्नू भंडारी की रचना है। जो पुरुष व स्त्री के संबंधों में प्रेम ग्रहण अनैतिक व अनैतिक सच झूठ, शुभ अशुभ, आज की जो परंपरागत धारणाएं रही हैं। उससे अलग हटकर या कहानी लिखी गई है। यही सच है कहानी जो 2 या 3 वर्ष पहले निशीथ की अभिन्न थी, एक झटके से अलग हो जाती है। अब तो उससे घृणा भी करने लगी है। संजय ने यदि कभी चुहल बाजी में भी निश्चित का नाम लेता है, तो वह जल भूल जाती है। वह आप मिले क्षण करती हुई कहती है, मैं जानती हूं संजय का नाम निश्चित को लेकर जब तक संघ की तो हो उठता है, पर मैं उसे कैसे विश्वास दिलाओ कि …

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Sarkari Focus

गुण्डा कहानी समीक्षा

गुण्डा कहानी समीक्षा – गुण्डा कहानी भाव प्रधान आदर्शवादी कहानी है। इस कहानी में प्रेम करुणा और आनंद के पूर्व संयोजन पर सामाजिक मर्यादाओं तथा मान्यताओं के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया है। गुण्डा कहानी समीक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार है। गुण्डा कहानी समीक्षा जयशंकर प्रसाद जी एक समूचे योग तथा समस्त भाव धारा में तारतम्यता लाने के प्रयास में अपनी संवेदनाओं को विस्तृत कर कथा में चारुता उपस्थित कर देते हैं। प्रेम की उदारता और कर्तव्य की महानता व्यक्तित्व और राष्ट्रीयता में अद्भुत सामंजस्य कर कल्पना के रंगों में सजाकर आदर्श और यथार्थ के समन्वय से इस कहानी का निर्माण किया गया है। विद्वानों ने प्रसाद की गुंडा कहानी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है कहानी कला …

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गुण्डा कहानी

गुण्डा कहानी

हिंदी कहानी के विकास में जयशंकर प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। उनकी कहानियों में प्रेम का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है। गुण्डा कहानी में औदात्य प्रेम के ही दर्शन होते हैं। यह कहानी तीन खंडों में विभक्त है। कहानी की कालावधी लगभग 30 वर्ष में समाई हुई है। कहानी कभी वर्तमान की घटनाओं से आगे बढ़ती है तो कभी भूतकाल की घटनाओं से आगे बढ़ती है। गुण्डा कहानी गुण्डा कहानी का नायक नन्हकू सिंह एक प्रतिष्ठित जमीदार का बेटा है। जो एक बार किसी सवर्ण युवती पन्ना को नवाब के बिगड़े हुए हाथी से बचाता है और शीघ्र ही उस प्रेम करने लग जाता है। परंतु काशी का राजा बलवंत सिंह उस पन्ना को अपने राजमहल ले गया और एक …

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गुण्डा कहानी

कफन कहानी के उद्देश्य

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। अन्य कहानियों की तरह कफन कहानी के उद्देश्य कुछ अलग ही हैं। वे उद्देश्य क्या है आइए जानते हैं। सर्वप्रथम हम लोग कहानी के सारांश को कुछ पंक्तियों में जानेंगे। फिर इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क्या था वह जानेंगे। इस कहानी के तीन पात्र घीसू (पिता), माधव (पुत्र) तथा बुधिया इनकी पत्नी थीं। बुधिया का चरित्र मूक है। पूरी कहानी घीसू व माधव के इर्द गिर्द घूमती है। यह दोनों बहुत ही आलसी, कामचोर, शराबी, गैर जिम्मेदार पात्र थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही नाजुक थी। पिछले वर्ष ही माधव का विवाह बुधिया से हुआ था। बुधिया गर्भवती थी वह दर्द से कराह रही थी और इधर बाप बेटे …

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कफन कहानी के उद्देश्य

प्रेमचंद कहानियां

उपन्यास सम्राट एवं महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद मूलतः सामाजिक कहानीकार थे। कहानी विधा के क्षेत्र में प्रेमचंद ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की। प्रेमचंद्र से पूर्व जो कहानी लिखी जाती थी उनमें मनोरंजन के तत्व होते थे किंतु मुंशी प्रेमचंद ने सामाजिक समस्याओं को लेकर कहानियां लिखी। मुंशी प्रेमचंद कहानियां का सरोकार तत्कालीन समाज विशेष रूप से ग्रामीण समाज को यथार्थ एवं तत्कालीन समाज विशेष रूप से ग्रामीण समाज को यथार्थ एवं आदर्श का मिश्रण कर प्रस्तुत किया है। वे उस वातावरण से भली-भांति परिचित है उन्होंने उस वातावरण को स्वयं भोगा, समझा और परखा था। अपने युग की संपूर्ण संभावनाएं और उपलब्धियां उनकी कहानियों में व्याप्त हैं। कहानी के बारे में वे कहते हैं , “कहानी जीवन के …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में यथार्थवादिता पाई जाती है। उनकी कफन कहानी भी यथार्थवाद पर आधारित है। इस कहानी में घीसू एक प्रमुख पात्र है जो कि पारिवारिक मुखिया है। उसके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं। उनका पुत्र माधव तथा बहु बुधियाा, घीसू के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं। घीसू का चरित्र चित्रण कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण निम्न मुख्य बिन्दुओं में कर सकते हैं- 1. अत्यंत दरिद्र- दरिद्रता से ग्रस्त पात्र है या दरिद्रता पीढ़ी पर घीसू जैसे पात्रों को कछु पति आ रही है। परिस्थितियों और स्वयं यीशु के एक नेता ने उसको घोर दरिद्रता में रहने के लिए विवश कर दिया था। अब गरीबी सेवा दस्तक नहीं था। बल्कि उसकी सोच …

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Poverty in India, घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू हैं। मुंशी जी की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी का एक विशेष उद्देश्य है। इस कहानी के विभिन्न अंगों को हम लोग इस प्रकार पढ़ेंगे। कफन कहानी सारांश कफन कहानी के उद्देश्य कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा कफन कहानी सारांश कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू है। वह परिवारिक मुखिया है। उनके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं, उनका पुत्र माधव और बहू बुधिया। कहानी के दोनो प्रमुख घीसू और माधव आलसी और कमचोर है। घीसू एक दिन काम करता है और तीन दिन विश्राम। माधव भी आधा घंटा काम करता है और घंटा भर चिलम पीता …

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कफन कहानी

रागदरबारी उपन्यास

रागदरबारी उपन्यास श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। जिसके लिए उन्हें सन 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  यह ऐसा उपन्यास है, जो गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्य हीनता को सहजता और निर्मलता से अनावृत करता है। 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे लाखों दर्शकों की सराहना प्राप्त हुई। इसमें श्रीलाल शुक्ल जी ने स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है। रागदरबारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी है; उस गाँव की जिन्दगी का दस्तावेज, जो स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद ग्राम विकास और ‘गरीबी हटाओ’ के आकर्षक नारों के बावजूद घिसट रही है। …

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रागदरबारी उपन्यास

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या

राग दरबारी उपन्यास के रचइता श्रीलाल शुक्ल जी है। विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षाओं में इस उपन्यास से 2 तरीके के प्रश्न पूछे जा सकते हैं एक तो व्याख्या और दूसरा उपन्यास से संबंधित आलोचनात्मक प्रशन। यह लेख राग दरबारी उपन्यास व्याख्या से संबंधित है। हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में इस उपन्यास से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस उपन्यास में लेखक ने आजादी के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन के मल्यों का बखान किया है। राग दरबारी उपन्यास व्याख्या उपन्यास के कुछ अंश और उनकी व्याख्याएं दी जा रही है। राग दरबारी उपन्यास व्याख्या परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। 1. दरोगा जी और उसके सिपाहियों को वहां पर मनुष्य नहीं, बल्कि अलादीन के चिराग से निकलने …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। इस उपन्यास के गद्यांशो की व्याख्याएँ परीक्षा में पूछी जाती है। चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या इस प्रकार हैं- चित्रलेखा उपन्यास व्याख्याएँ 1. पर एक बात याद रखना। जो बात अध्ययन से नहीं जानी जा सकती है, उसको अनुभव से जानने के लिए ही मैं तुम दोनों को संसार में भेज रहा हूं। पर इस अनुभव से तुम स्वयं ही ना वह जाओ। इसका ध्यान रखना पड़ेगा। संसार की लहरों की वास्तविक गति में तुम दोनों बहोगे। उसी समय या ध्यान रखना पड़ेगा कि कहीं डूब ना जाओ।। 2. भेद जानना चाहोगे तो सुनो जिसे सब समुदाय का उल्लास कहते हैं वह समुदाय के व्यक्तियों के रुदन का संग्रह है। निर्बल व्यक्तियों …

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चित्रलेखा उपन्यास व्याख्याएँ

चित्रलेखा उपन्यास

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। यह ना केवल भगवती चरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला उपन्यास है बल्कि हिंदी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है जिनकी लोकप्रियता काल की सीमा को लांगती रही है। 1934 में प्रकाशित चित्रलेखा उपन्यास ने लोकप्रियता के कई पुराने कीर्तिमान बनाए थे। कहा जाता है अनेक भारतीय भाषाओं में अनुदित होने के अतिरिक्त केवल हिंदी में नवे दशक तक ढाई लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। सन 1940 में केदार शर्मा के निर्देशन में चित्रलेखा पर एक फिल्म भी बनी। चित्रलेखा उपन्यास का सारांश चित्रलेखा की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है। पाप क्या है? उसका निवास कहां है? …

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चित्रलेखा उपन्यास

हिंदी कथा साहित्य

हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में कुल 3 खंड है। इस प्रश्न पत्र में दो उपन्यास तथा 7 कहानियां है। Hindi Literature, हिंदी कथा साहित्य BA द्वितीय वर्ष में पूछे जाने वाला प्रश्न पत्र है। जिनकी व्याख्याएं, सारांश तथा आलोचनात्मक अध्धयन करना पड़ता है। जो कि इस प्रश्न पत्र को और अधिक कठिन बनाता है। साथ में जब हिंदी कथा साहित्य की बात हो तो प्रश्नों की संख्या बहुत ही सीमित हो जाती है। हिंदी कथा साहित्य के लिए इसके स्वरूप, विकास, स्थिति पर विचार करना चहिए। कहानी वह गद्य रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंश का चित्रण होता है। इसमें उपन्यास की भांति जीवन को समग्रता में चित्रित नहीं किया जाता है, अपितु उसके किसी विशेष पहलू …

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Sarkari Focus