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हिंदी में प्रथम

आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ प्रश्न इस प्रकार से भी पूछे जाते हैं। जैसे हिंदी में प्रथम कवि, उपन्यास, रचना, कहानी व नाटक। हिंदी में क्या प्रथम है? उसको याद करना ही पड़ेगा। साथ मैं आजकल कुछ प्रश्न हिंदी की प्रमुख संस्थाओं से भी पूछे जाने लगे हैं। जिनकी जानकारी भी नीचे दी गई है। हिंदी में प्रथम हिंदी का प्रथम कवि – सरहपा हिन्दी की प्रथम रचना – श्रावकाचार (देवसेन) हिन्दी का प्रथम उपन्यास – परीक्षा गुरु (श्रीनिवास दास) हिंदी का प्रथम मौलिक नाटक – नहुष (गोपालचंद्र) हिंदी की प्रथम आत्मकथा – अर्द्धकथानक (बनारसी दास जैन) हिंदी की प्रथम जीवनी – दयानंद दिग्विजय (गोपाल शर्मा) हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज – लक्ष्मीपुरा (शिवदान सिंह चौहान) हिंदी का प्रथम यात्रा …

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हिंदी में प्रथम

यही सच है कहानी

यही सच है कहानी मन्नू भंडारी की रचना है। जो पुरुष व स्त्री के संबंधों में प्रेम ग्रहण अनैतिक व अनैतिक सच झूठ, शुभ अशुभ, आज की जो परंपरागत धारणाएं रही हैं। उससे अलग हटकर या कहानी लिखी गई है। यही सच है कहानी जो 2 या 3 वर्ष पहले निशीथ की अभिन्न थी, एक झटके से अलग हो जाती है। अब तो उससे घृणा भी करने लगी है। संजय ने यदि कभी चुहल बाजी में भी निश्चित का नाम लेता है, तो वह जल भूल जाती है। वह आप मिले क्षण करती हुई कहती है, मैं जानती हूं संजय का नाम निश्चित को लेकर जब तक संघ की तो हो उठता है, पर मैं उसे कैसे विश्वास दिलाओ कि …

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गुण्डा कहानी समीक्षा

गुण्डा कहानी समीक्षा – गुण्डा कहानी भाव प्रधान आदर्शवादी कहानी है। इस कहानी में प्रेम करुणा और आनंद के पूर्व संयोजन पर सामाजिक मर्यादाओं तथा मान्यताओं के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया है। गुण्डा कहानी समीक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार है। गुण्डा कहानी समीक्षा जयशंकर प्रसाद जी एक समूचे योग तथा समस्त भाव धारा में तारतम्यता लाने के प्रयास में अपनी संवेदनाओं को विस्तृत कर कथा में चारुता उपस्थित कर देते हैं। प्रेम की उदारता और कर्तव्य की महानता व्यक्तित्व और राष्ट्रीयता में अद्भुत सामंजस्य कर कल्पना के रंगों में सजाकर आदर्श और यथार्थ के समन्वय से इस कहानी का निर्माण किया गया है। विद्वानों ने प्रसाद की गुंडा कहानी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है कहानी कला …

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गुण्डा कहानी

गुण्डा कहानी

हिंदी कहानी के विकास में जयशंकर प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। उनकी कहानियों में प्रेम का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है। गुण्डा कहानी में औदात्य प्रेम के ही दर्शन होते हैं। यह कहानी तीन खंडों में विभक्त है। कहानी की कालावधी लगभग 30 वर्ष में समाई हुई है। कहानी कभी वर्तमान की घटनाओं से आगे बढ़ती है तो कभी भूतकाल की घटनाओं से आगे बढ़ती है। गुण्डा कहानी गुण्डा कहानी का नायक नन्हकू सिंह एक प्रतिष्ठित जमीदार का बेटा है। जो एक बार किसी सवर्ण युवती पन्ना को नवाब के बिगड़े हुए हाथी से बचाता है और शीघ्र ही उस प्रेम करने लग जाता है। परंतु काशी का राजा बलवंत सिंह उस पन्ना को अपने राजमहल ले गया और एक …

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गुण्डा कहानी

कफन कहानी के उद्देश्य

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। अन्य कहानियों की तरह कफन कहानी के उद्देश्य कुछ अलग ही हैं। वे उद्देश्य क्या है आइए जानते हैं। सर्वप्रथम हम लोग कहानी के सारांश को कुछ पंक्तियों में जानेंगे। फिर इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क्या था वह जानेंगे। इस कहानी के तीन पात्र घीसू (पिता), माधव (पुत्र) तथा बुधिया इनकी पत्नी थीं। बुधिया का चरित्र मूक है। पूरी कहानी घीसू व माधव के इर्द गिर्द घूमती है। यह दोनों बहुत ही आलसी, कामचोर, शराबी, गैर जिम्मेदार पात्र थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही नाजुक थी। पिछले वर्ष ही माधव का विवाह बुधिया से हुआ था। बुधिया गर्भवती थी वह दर्द से कराह रही थी और इधर बाप बेटे …

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कफन कहानी के उद्देश्य

प्रेमचंद कहानियां

उपन्यास सम्राट एवं महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद मूलतः सामाजिक कहानीकार थे। कहानी विधा के क्षेत्र में प्रेमचंद ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की। प्रेमचंद्र से पूर्व जो कहानी लिखी जाती थी उनमें मनोरंजन के तत्व होते थे किंतु मुंशी प्रेमचंद ने सामाजिक समस्याओं को लेकर कहानियां लिखी। मुंशी प्रेमचंद कहानियां का सरोकार तत्कालीन समाज विशेष रूप से ग्रामीण समाज को यथार्थ एवं तत्कालीन समाज विशेष रूप से ग्रामीण समाज को यथार्थ एवं आदर्श का मिश्रण कर प्रस्तुत किया है। वे उस वातावरण से भली-भांति परिचित है उन्होंने उस वातावरण को स्वयं भोगा, समझा और परखा था। अपने युग की संपूर्ण संभावनाएं और उपलब्धियां उनकी कहानियों में व्याप्त हैं। कहानी के बारे में वे कहते हैं , “कहानी जीवन के …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में यथार्थवादिता पाई जाती है। उनकी कफन कहानी भी यथार्थवाद पर आधारित है। इस कहानी में घीसू एक प्रमुख पात्र है जो कि पारिवारिक मुखिया है। उसके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं। उनका पुत्र माधव तथा बहु बुधियाा, घीसू के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं। घीसू का चरित्र चित्रण कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण निम्न मुख्य बिन्दुओं में कर सकते हैं- 1. अत्यंत दरिद्र- दरिद्रता से ग्रस्त पात्र है या दरिद्रता पीढ़ी पर घीसू जैसे पात्रों को कछु पति आ रही है। परिस्थितियों और स्वयं यीशु के एक नेता ने उसको घोर दरिद्रता में रहने के लिए विवश कर दिया था। अब गरीबी सेवा दस्तक नहीं था। बल्कि उसकी सोच …

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Poverty in India, घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू हैं। मुंशी जी की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी का एक विशेष उद्देश्य है। इस कहानी के विभिन्न अंगों को हम लोग इस प्रकार पढ़ेंगे। कफन कहानी सारांश कफन कहानी के उद्देश्य कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा कफन कहानी सारांश कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू है। वह परिवारिक मुखिया है। उनके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं, उनका पुत्र माधव और बहू बुधिया। कहानी के दोनो प्रमुख घीसू और माधव आलसी और कमचोर है। घीसू एक दिन काम करता है और तीन दिन विश्राम। माधव भी आधा घंटा काम करता है और घंटा भर चिलम पीता …

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कफन कहानी

रागदरबारी उपन्यास

रागदरबारी उपन्यास श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। जिसके लिए उन्हें सन 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  यह ऐसा उपन्यास है, जो गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्य हीनता को सहजता और निर्मलता से अनावृत करता है। 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे लाखों दर्शकों की सराहना प्राप्त हुई। इसमें श्रीलाल शुक्ल जी ने स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है। रागदरबारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी है; उस गाँव की जिन्दगी का दस्तावेज, जो स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद ग्राम विकास और ‘गरीबी हटाओ’ के आकर्षक नारों के बावजूद घिसट रही है। …

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रागदरबारी उपन्यास

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या

राग दरबारी उपन्यास के रचइता श्रीलाल शुक्ल जी है। विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षाओं में इस उपन्यास से 2 तरीके के प्रश्न पूछे जा सकते हैं एक तो व्याख्या और दूसरा उपन्यास से संबंधित आलोचनात्मक प्रशन। यह लेख राग दरबारी उपन्यास व्याख्या से संबंधित है। हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में इस उपन्यास से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस उपन्यास में लेखक ने आजादी के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन के मल्यों का बखान किया है। राग दरबारी उपन्यास व्याख्या उपन्यास के कुछ अंश और उनकी व्याख्याएं दी जा रही है। राग दरबारी उपन्यास व्याख्या परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। 1. दरोगा जी और उसके सिपाहियों को वहां पर मनुष्य नहीं, बल्कि अलादीन के चिराग से निकलने …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। इस उपन्यास के गद्यांशो की व्याख्याएँ परीक्षा में पूछी जाती है। चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या इस प्रकार हैं- चित्रलेखा उपन्यास व्याख्याएँ 1. पर एक बात याद रखना। जो बात अध्ययन से नहीं जानी जा सकती है, उसको अनुभव से जानने के लिए ही मैं तुम दोनों को संसार में भेज रहा हूं। पर इस अनुभव से तुम स्वयं ही ना वह जाओ। इसका ध्यान रखना पड़ेगा। संसार की लहरों की वास्तविक गति में तुम दोनों बहोगे। उसी समय या ध्यान रखना पड़ेगा कि कहीं डूब ना जाओ।। 2. भेद जानना चाहोगे तो सुनो जिसे सब समुदाय का उल्लास कहते हैं वह समुदाय के व्यक्तियों के रुदन का संग्रह है। निर्बल व्यक्तियों …

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चित्रलेखा उपन्यास व्याख्याएँ

चित्रलेखा उपन्यास

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। यह ना केवल भगवती चरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला उपन्यास है बल्कि हिंदी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है जिनकी लोकप्रियता काल की सीमा को लांगती रही है। 1934 में प्रकाशित चित्रलेखा उपन्यास ने लोकप्रियता के कई पुराने कीर्तिमान बनाए थे। कहा जाता है अनेक भारतीय भाषाओं में अनुदित होने के अतिरिक्त केवल हिंदी में नवे दशक तक ढाई लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। सन 1940 में केदार शर्मा के निर्देशन में चित्रलेखा पर एक फिल्म भी बनी। चित्रलेखा उपन्यास का सारांश चित्रलेखा की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है। पाप क्या है? उसका निवास कहां है? …

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चित्रलेखा उपन्यास

हिंदी कथा साहित्य

हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में कुल 3 खंड है। इस प्रश्न पत्र में दो उपन्यास तथा 7 कहानियां है। Hindi Literature, हिंदी कथा साहित्य BA द्वितीय वर्ष में पूछे जाने वाला प्रश्न पत्र है। जिनकी व्याख्याएं, सारांश तथा आलोचनात्मक अध्धयन करना पड़ता है। जो कि इस प्रश्न पत्र को और अधिक कठिन बनाता है। साथ में जब हिंदी कथा साहित्य की बात हो तो प्रश्नों की संख्या बहुत ही सीमित हो जाती है। हिंदी कथा साहित्य के लिए इसके स्वरूप, विकास, स्थिति पर विचार करना चहिए। कहानी वह गद्य रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंश का चित्रण होता है। इसमें उपन्यास की भांति जीवन को समग्रता में चित्रित नहीं किया जाता है, अपितु उसके किसी विशेष पहलू …

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हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र

हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र (बी. ए.), Hindi literature question paper for B.A.। इस प्रश्न पत्र को हल करने के लिए पाठ्यक्रम के उपन्यास तथा कहानी के सारांश पता होने चहिए। हिंदी कथा साहित्य का विकास, स्वरूप तथा स्थिति का विशेष अध्ययन होना चाहिए। पाठ्यक्रम में निर्धारित उपन्यास चित्रलेखा, राग दरबारी तथा निर्धारित कहानियां कफन, गुंडा, यही सच है, चीफ की दावत, मारे गए गुलफाम उर्फ़ तीसरी कसम, राजा निरबंसिया, पच्चीस चौका डेढ़ सौ है। B.A. द्वितीय पाठ्यक्रम में आधुनिक हिंदी काव्य हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र नोट- सभी खंडो से निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। अभ्यार्थी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखें। यदि किसी प्रश्न के कई भाग हो तो उनके उत्तर एक ही तारतम्य में लिखें। खण्ड अ (लघुत्तरीय प्रश्न) 1. …

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हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र

कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय

UP Board के कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में गद्य तथा पद्य में कुल 20 लेखको की जीवनी दी गयी है। जिनमे से गद्य से तथा पद्य से अलग अलग 1-1 जीवनी परीक्षा में पूछी जाती है। कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय कुल 6 अंक का पूछा जाता है। लेखकों तथा कवियों के जीवन परिचय से क्रमशाः 3 और 3 अंक के प्रश्न पूछे जाते है। यहाँ सभी रचनाकारों की रचनाएँ सहित उनका जीवन परिचय सरल भाषा में दिया जा रहा है। कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग, हिंदी रचनाएं रचनाकार

कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय

UP Board के कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में गद्य तथा पद्य में कुल 21 लेखको की जीवनी दी गयी है। जिनमे से गद्य से तथा पद्य से अलग अलग 1-1 जीवनी परीक्षा में पूछी जाती है। कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय कुल 6 अंक का पूछा जाता है। लेखकों तथा कवियों के जीवन परिचय से क्रमशाः 3 और 3 अंक के प्रश्न पूछे जाते है। यहाँ सभी रचनाकारों की रचनाएँ सहित उनका जीवन परिचय सरल भाषा में दिया जा रहा है। कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय

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महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या

आधुनिक हिंदी काव्य पाठ्यक्रम में महादेवी वर्मा की निम्न कवितायें निर्धारित है- नीर भरी दुख की बदली मधुर-मधुर मेरे दीपक जल शलभ मैं शापमय वर हूँ कौन तुम मेरे हृदय में तुम यह क्षितिज अब प्रत्येक कविता के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी है। आधुनिक हिंदी काव्य के अंतर्गत महादेवी वर्मा कविताए और उनकी व्याख्या से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है। अतः आप अपने पाठ्यक्रम के अनुसार दी गयी कविताओं से तैय्यारी कर सकते है। महादेवी वर्मा कविताए और उनकी व्याख्या महादेवी वर्मा जीवन परिचय महादेवी वर्मा कविताए

महादेवी वर्मा कविताए और व्याख्या

आधुनिक हिंदी काव्य

आधुनिक हिंदी काव्य, कई विश्वविद्यालय के बी॰ ए॰ पाठ्यक्रम के हिंदी साहित्य विषय का एक प्रश्न पत्र है। हिंदी काव्य का आधुनिक काल 1850 से आरम्भ होता है। इसी युग मे हिंदी पद्य के साथ साथ गद्य का भी विकास हुआ। जन संचार के विभिन्न साधनों जैसे रेडिओ व समाचार पत्र का विकास इसी समय हुआ था। जिसका प्रभाव आधुनिक हिंदी काव्य पर भी पड़ा। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर समकालीन कविता तक की विकास यात्रा विभिन्न चरणों से गुज़री है। नवजागरण, छायावदी, छायावादोत्तर, प्रगतिशील, नयी कविता के दौर से गुज़रते हुए हिन्दी कविता ने परिपक्वता की कई मंज़िलें तय की है। हर युग, हिंदी कविता के बदलते मिजाज़, सम्प्रेषण की नयी-नयी विधियां, भाव-भाषा-संरचना के नये-नये प्रयोग के साथ, अपनी विशिष्ट पहचान और लक्षणों को लिए थे। नवजागरण काव्य आधुनिक हिंदी काव्य …

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प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा

सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या

सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या से सम्बंधित प्रश्न BA में पूछे जाते है। पंत की काव्य कृति चिदंबरा पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। पंत ने अपनी कविता नौका विहार में जिस चांदनी रात का वर्णन किया है। वह शुक्ल पक्ष की दशमी की तिथि की उदित चांदनी का वर्णन है। कभी चांदनी रात के प्रथम प्रहर में कालाकांकर के राजभवन से लगी हुई नदी में अपने मित्रों के साथ नौका विहार कर रहा है।चंद्रमा की ज्योत्सना के प्रभाव से नदी के धवलता मैं रजत के कांति का आभास सर्वत्र होता है। उसी का अलंकारता भाषा में प्रस्तुत कविता में वर्णन किया गया है। आधुनिक हिन्दी काव्य सुमित्रानंदन पंत कविताए जगत के जीवन पत्र कविता में कवि ने पतझड़ …

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सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या

कामायनी श्रद्धा सर्ग

कामायनी का अर्थ है- “काम गोत्रजा”। कामायनी में कुल 15 सर्ग है। कामायनी श्रद्धा सर्ग में मनु व श्रद्धा को चित्रित किया गया है। काम की पुत्री होने के कारण श्रद्धा का दूसरा नाम कामायनी है। कामायनी महाकाव्य में शांत, श्रृंगार और वीर रस का प्रयोग हुआ है। कामायनी आधुनिक युग का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। जयशंकर प्रसाद को कामायनी रचना पर मंगला प्रसाद पारितोषिक दिया गया। जयशंकर प्रसाद की जीवनी कामायनी श्रद्धा सर्ग कामायनी श्रद्धा सर्ग में श्रद्धा एवं मनु का संवाद है। एक दिन जब मनु विचारों में लीन थे। तभी अचानक एक सुंदर संपन्न स्त्री ने उनके सम्मुख आकर पूछा कि इन जनहिन प्रदेशों में अपनी रूप बिखेरने वाले तुम कौन हो। नीग्रो वाली चिकने चर्म खंडों से …

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One Word Substitution

सरोज स्मृति

सरोज स्मृति सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एक शोक गीत है। जिसमें कवि ने अपनी युवा कन्या सरोज की अकाल मृत्युपर अपने शोक संतप्त हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं। इस प्रसिद्ध लोकगीत में जीवन की पीड़ा और संघर्षों के हलाहल का पान करने वाले कविवर निराला के निजी जीवन के कुछ अंशों का उद्घाटन भी है। छायावादी कवि होने के कारण निराला ने अपनी बात को प्रतीकात्मक शैली में अभिव्यक्त किया है। किंतु अपवाद रूप में लिखी गई सरोज स्मृति जैसे कतिपय रचनाओं में उनकी आत्मचरित्र आत्मक शैली परिलक्षित होती है। आधुनिक हिन्दी काव्य सरोज स्मृति कवि का विद्रोह और क्रांति दर्शी समभाव पुत्री सरोज के प्रति उसका जीवन की ठोकर दर्शाई गई हैं। सरोज स्मृति कविता सरोज की मृत्यु …

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सरोज स्मृति

साकेत अष्टम सर्ग

साकेत महाकाव्य मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों ही दृष्टि से साकेत की कथावस्तु गरिमा संपन्न है। साकेत अष्टम सर्ग की कथावस्तु का निर्माण मानवता की श्रेष्ठता का प्रतिस्थापन करने के लिए किया गया है। गुप्तजी ने इसमें संपूर्ण कथा को ना पकड़कर कुछ मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी प्रसंगों को ही पकड़ा है। साकेत अष्टम सर्ग साकेत महाकाव्य में कुल 12 सर्ग हैं। जिनमे अष्टम एवं नवम सर्ग का विशेष महत्व है। अष्टम सर्ग में चित्रकूट में घटी घटनाओं का वर्णन किया है। अष्टम सर्ग में वर्णित घटना केवल इतिवृत्त नहीं है, अपितु घटनाओं का संयोजन युग की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति करने के उद्देश्य से इस प्रकार किया है कि वह अपनी आधुनिक चेतना के कारण प्रासंगिक हो उठा है। कवि अष्टम सर्ग का आरंभ बड़े …

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साकेत अष्टम सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग

कुरुक्षेत्र छठा सर्ग – ‘कुरुक्षेत्र’ एक प्रबंध काव्य है। इसका प्रणयन अहिंसा और हिंसा के बीच अंतर्द्वंद के फल स्वरुप हुआ। कुरुक्षेत्र की ‘कथावस्तु’ का आधार महाभारत के युद्ध की घटना है, जिसमें वर्तमान युग की ज्वलंत युद्ध समस्या का उल्लंघन है। ‘दिनकर’ के कुरुक्षेत्र प्रबंध काव्य की कथावस्तु सात सर्गो में विभक्त है। कुरुक्षेत्र छठा सर्ग के अंतर्गत आधुनिक युग की समस्याओं, मानवीय रचनात्मक प्रवृत्तियों तथा कोरे मानसिक उत्थान की निंदा की गई है। कवि भगवान से धर्म, दया, शांति आदि की स्थापना से संबंधित प्रश्न करता है। आधुनिक वैज्ञानिक विकास की काफी चर्चा की गई है। कुरुक्षेत्र छठा सर्ग मानव वंशज की वायु, अग्नि ,आकाश, पृथ्वी सब कुछ है ।कवि खेद करता है कि मनुष्य के मानसिक विकास …

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सन्धि एवं सन्धि विच्छेद

दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को व्याकरण में सन्धि कहते हैं। दिए गए शब्द को सन्धि विच्छेद के नियमों की सहायता से अलग अलग करना सन्धि विच्छेद कहलाता है। सन्धि दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को व्याकरण में सन्धि कहते हैं। दूसरे शब्दों में दो निर्दिष्ट अक्षरों के पास- पास आने के कारण उनके सहयोग से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे सन्धि कहते हैं । जैसे – विद्या+ आलय= विद्यालय विद्यालय में धा में आ मिल जाने से एक दीर्घ आ हो गया है। सन्धि विच्छेद जो शब्द संधि से बने हैं , उनके खंडों को अपने पूर्व रूप में रखना अथवा संधि को तोड़ना संधि विच्छेद कहलाता है; जैसे- कवीन्द्र= कवि + इंद्र (इ+इ) …

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सन्धि एवं सन्धि विच्छेद

हिंदी विराम चिन्ह

हिंदी विराम चिन्ह – विराम का अर्थ है, ठहराव या रुकना। जिस तरह हम काम करते समय बीच-बीच में रुकते और फिर आगे बढ़ते हैं वैसे ही लेखन में भी विराम की आवश्यकता होती है, अतः पाठक के मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए भाषा में विरामों का उपयोग आवश्यक है। उदाहरण : मोहन पढ़ रहा है । (सामान्य सूचना)उदाहरण : ताजमहल किसने बनवाया ? (प्रश्नवाचक)उदाहरण : श्याम आया है ! (आश्चर्य का भाव) हिंदी विराम चिन्ह श्री कामता प्रसाद गुरु जी ने विराम चिन्हों को अंग्रेजी से लिया हुआ मानते हैं। वह पूर्ण विराम को छोड़ शेष सभी विराम चिन्हों को अंग्रेजी से संबंध करते हैं। श्री कामता प्रसाद गुरु ने हिंदी विराम चिन्ह 20 बताए हैं, यह है- अल्पविराम ( , …

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हिंदी वर्णमाला

प्रत्येक भाषा की तरह हिंदी भाषा में भी वर्णो की एक लिस्ट है। वैसे तो भारत में अनेक भाषाए बोली जाती है लेकिन हिंदी भाषा को सबसे अधिक बोला जाता है। हिंदी वर्णमाला के बारे में स्वर व व्यंजन के बारे में और अधिक जानेंगे। हिंदी वर्णमाला वर्णों के समुदाय को ही वर्णमाला कहते हैं। हिंदी वर्णमाला में 52 वर्ण होते है। उच्चारण और प्रयोग के आधार पर हिंदी वर्णमाला के दो भाग किये गए है- स्वर (vowel) व्यंजन (consonant) स्वर (vowel) जिन वर्णो का उच्चारण बिना किसी अवरोध के तथा बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता से होता है, उन्हें स्वर कहते है।। स्वर की संख्या 11 होती है- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, …

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